# हरिद्वार की ढाई सौ साल पुरानी सेठ सूरजमल धर्मशाला, जहां आज भी मामूली शुल्क पर मिलती है शरण

> हरिद्वार में हर की पौड़ी के नजदीक स्थित सेठ सूरजमल धर्मशाला करीब ढाई सौ साल पुरानी है। ब्रिटिश काल में बनी इस ऐतिहासिक इमारत में आज भी यात्रियों से कोई व्यावसायिक किराया नहीं लिया जाता है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haridvara-ki-dhai-sau-sala-purani-setha-surajamala-dharmashala-jahan-aja-bhi-mamuli-shulka-para-milati-hai-sharana-27371 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिद्वार, धर्मशाला, हर की पौड़ी, उत्तराखंड, धार्मिक यात्रा

उत्तराखंड के प्रमुख शहर हरिद्वार में प्राचीन काल की कई निशानियां आज भी अपनी खास पहचान के साथ मौजूद हैं। हर की पौड़ी के करीब अपर रोड पर स्थित सेठ सूरजमल धर्मशाला इन्हीं पुरानी और महत्वपूर्ण विरासतों में गिनी जाती है। करीब ढाई सौ साल पुरानी इस इमारत को उस समय की संस्कृति और वास्तुकला का एक बेहतरीन नमूना माना जाता है।

यह पुरानी धर्मशाला प्रसिद्ध हर की पौड़ी से सिर्फ 300 मीटर की दूरी पर मुख्य रास्ते पर ही बनी हुई है और हरिद्वार नगर कोतवाली से लगभग 100 मीटर आगे स्थित है। ब्रिटिश शासनकाल के दौरान एक परोपकारी सेठ ने इस बड़े भवन को बनवाया था ताकि दूर-दराज के इलाकों से पैदल या बैलगाड़ियों के जरिए गंगा स्नान और धार्मिक कार्यों के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित रहने की जगह मिल सके।

पुराने समय में तीर्थयात्रा को भौतिक सुख-सुविधाओं से दूर मानसिक शांति और साधना का साधन माना जाता था। उस दौर की वास्तुकला को दर्शाती यह इमारत आज भी अपनी सादगी और पुरानी मर्यादाओं को पूरी तरह से बचाकर रखती है। यहां आने वाले लोग आधुनिक सुविधाओं की परवाह किए बिना जमीन पर आराम करते थे और अपनी धार्मिक यात्रा पूरी करते थे।

इस ढाई सौ साल पुरानी इमारत में कुल 53 कमरे बने हुए हैं जिनकी बनावट पुराने समय की याद ताजा कराती है। इस जगह ठहरने के नियम काफी सख्त और अनुशासित हैं क्योंकि यहां केवल परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को ही कमरे दिए जाते हैं। किसी भी अकेले या बिना परिवार के पहुंचे यात्री को यहां रहने की अनुमति नहीं दी जाती है।

धर्मशाला के मैनेजर **श्रीनिवास पांडे** बताते हैं कि व्यवस्था को ठीक रखने के लिए परिसर के खुलने और बंद होने का समय तय किया गया है। इस जगह की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यह आज भी पूरी तरह से सेवा की भावना से चलाई जाती है। यहां आने वाले लोगों से कोई भी व्यावसायिक किराया नहीं वसूला जाता है, बल्कि केवल बिजली और पानी के खर्च के तौर पर प्रति व्यक्ति 100 या 120 रुपए ही लिए जाते हैं।

**श्रीनिवास पांडे** ने आगे बताया कि इस ऐतिहासिक भवन की स्थिति और इसके आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत है। शिवालिक पहाड़ियों के करीब होने की वजह से इसकी छत से आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य साफ दिखाई देता है। यहां की छत से ऊंची पहाड़ियों पर स्थित मां मनसा देवी और दूसरी तरफ सिद्धपीठ मां चंडी देवी के दर्शन बहुत ही स्पष्ट रूप से होते हैं।

आज के समय में आधुनिक होटलों की चकाचौंध के बीच सेठ सूरजमल धर्मशाला तीर्थयात्रा के असली रूप को जीवित रखे हुए है। यह ब्रिटिश कालीन इमारत हरिद्वार के गौरवशाली इतिहास को दिखाने के साथ-साथ उस पुरानी भारतीय परंपरा की भी याद दिलाती है जहां निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करना ही सबसे बड़ा धर्म माना जाता था।

## इसका आप पर असर
हरिद्वार आने वाले पारंपरिक तीर्थयात्रियों और परिवारों के लिए यह ऐतिहासिक धर्मशाला बेहद किफायती और सुरक्षित ठहरने का विकल्प प्रदान करती है।

- **भारत में:** देश के विभिन्न हिस्सों से हरिद्वार आने वाले आम परिवारों को बहुत कम खर्च में रहने की सुविधा मिलती है। इससे बजट यात्रियों को महंगे होटलों पर पैसे खर्च नहीं करने पड़ते हैं।
- **उत्तराखंड में:** हरिद्वार क्षेत्र में आने वाले श्रद्धालु इस पुरानी व्यवस्था के जरिए केवल बिजली-पानी के मामूली खर्च पर सुरक्षित आश्रय पा सकते हैं। यह जगह केवल परिवारों के लिए होने के कारण यहां पारिवारिक माहौल बना रहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. सेठ सूरजमल धर्मशाला कहां स्थित है?
यह धर्मशाला हरिद्वार में हर की पौड़ी से लगभग 300 मीटर पहले अपर रोड पर मुख्य मार्ग पर स्थित है।

### 2. यह धर्मशाला कितनी पुरानी है?
यह ऐतिहासिक इमारत लगभग ढाई सौ साल पुरानी है जिसका निर्माण ब्रिटिश काल में हुआ था।

### 3. यहां ठहरने के लिए कितना शुल्क लिया जाता है?
यहां कोई व्यावसायिक किराया नहीं लिया जाता है, बल्कि बिजली और पानी के खर्च के रूप में प्रति व्यक्ति केवल 100 या 120 रुपए लिए जाते हैं।

### 4. इस धर्मशाला में किसे ठहरने की अनुमति मिलती है?
इस धर्मशाला में केवल परिवार के साथ आने वाले श्रद्धालुओं को ही कमरे दिए जाते हैं और अकेले यात्रियों को प्रवेश नहीं मिलता है।

### 5. धर्मशाला के मैनेजर कौन हैं?
इस ऐतिहासिक धर्मशाला के मैनेजर श्रीनिवास पांडे हैं।

### 6. धर्मशाला की छत से कौन से मंदिर दिखाई देते हैं?
इसकी छत से मां मनसा देवी और सिद्धपीठ मां चंडी देवी के दर्शन साफ रूप से होते हैं।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._