# हरिद्वार के चंडी घाट पर पीलीभीत के परिवार ने सनातन धर्म में की घर वापसी, गंगा पूजन संग संपन्न हुआ नामकरण संस्कार

> उत्तर प्रदेश के पीलीभीत से आए माहिद ने पत्नी और तीन बच्चों के साथ हरिद्वार पहुंचकर हिंदू धर्म अपनाया। चंडी घाट पर गंगा स्नान, हवन और नामकरण संस्कार के साथ यह धार्मिक अनुष्ठान पूरा हुआ।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haridwar-ke-chandi-ghat-para-pilibhit-ke-parivara-ne-sanatana-dharma-men-ki-ghara-vapasi-ganga-pujana-snga-snpanna-hua-namakarana--41215 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिद्वार, पीलीभीत, चंडी घाट, सनातन धर्म, गंगा पूजन, घर वापसी, रामविशाल दास

उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार स्थित चंडी घाट पर उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले से आए एक परिवार ने सनातन धर्म के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए घर वापसी की। पीलीभीत निवासी माहिद अपनी पत्नी सबीना और अपने तीन बच्चों को लेकर हरिद्वार पहुंचे, जहां पवित्र गंगा तट पर वैदिक विधि-विधान, गंगा पूजन और हवन यज्ञ के जरिए उन्होंने पूरे परिवार सहित हिंदू धर्म स्वीकार कर लिया। तीर्थ सेवा न्यास के संत रामविशाल दास के सान्निध्य और प्रेरणा से इस धार्मिक अनुष्ठान का आयोजन किया गया।

## चंडी घाट पर वैदिक रीति-रिवाजों से हुआ अनुष्ठान
गुरुवार के दिन आयोजित इस अनुष्ठान में परिवार के सभी सदस्यों ने भाग लिया। कार्यक्रम की शुरुआत पवित्र गंगा नदी में स्नान के साथ हुई, जिसके बाद तट पर विशेष हवन और पूजा-अर्चना संपन्न कराई गई। धार्मिक रीति-रिवाजों को पूरा कराने के साथ-साथ परिवार का नामकरण संस्कार भी विधिपूर्वक किया गया। इस प्रक्रिया के तहत माहिद का नया नाम मोहित रखा गया, जबकि उनकी पत्नी सबीना का नाम बदलकर खुशी तय हुआ।

## स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाने का दिया बयान
धार्मिक विधि पूरी होने के उपरांत बात करते हुए मोहित ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह निर्णय पूरी तरह अपनी अंतरात्मा और स्वेच्छा से लिया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उन पर किसी भी प्रकार का कोई दबाव या प्रभाव नहीं डाला गया था। उन्होंने बताया कि सनातन धर्म के भीतर मौजूद गहरा सम्मान, उदारता और दयाभाव उन्हें हमेशा से प्रभावित करते रहे हैं, जिसकी वजह से उन्होंने परिवार संग इस परंपरा को अंगीकार किया।

## लंबे समय से घर में मना रहे थे त्योहार
उनकी पत्नी सबीना उर्फ खुशी ने इस बदलाव की पृष्ठभूमि साझा करते हुए बताया कि उनका परिवार काफी समय से हिंदू रीति-रिवाजों और त्योहारों को अपने दैनिक जीवन में अपनाता आ रहा था। उन्होंने कहा कि सनातन परंपरा के बीच उन्हें आत्मिक शांति का अनुभव होता है, इसी भाव से प्रेरित होकर उन्होंने अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए हरिद्वार आकर घर वापसी करने का मार्ग चुना।

## संत रामविशाल दास ने दी जानकारी
तीर्थ सेवा न्यास के संत रामविशाल दास ने पूरे घटनाक्रम पर जानकारी देते हुए कहा कि परिवार ने स्वेच्छा से सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझा और सोच-विचार कर वापसी का कदम उठाया। उन्होंने बताया कि गंगा स्नान और वैदिक हवन यज्ञ के उपरांत परिवार के सभी सदस्यों का विधिवत नामकरण संस्कार संपन्न कराया गया, जिससे वे औपचारिक रूप से इस धार्मिक धारा से जुड़ गए।

## इसका आप पर असर
इस धार्मिक अनुष्ठान से सामाजिक और व्यक्तिगत स्तर पर कई व्यावहारिक पहलू जुड़े हैं।

- **नागरिक अधिकारों पर प्रभाव:** धर्म परिवर्तन के बाद कानूनी और प्रशासनिक दस्तावेजों में नाम व धर्म के औपचारिक संशोधन की आवश्यकता होती है। इससे आधार कार्ड, वोटर आईडी और स्कूल के शैक्षणिक प्रमाण पत्रों में समय पर सुधार कराना अनिवार्य हो जाता है।
- **पारिवारिक व सामाजिक जीवन:** नए रीति-रिवाजों और सामाजिक परिवेश के साथ तालमेल बिठाने में समय लग सकता है। बच्चों की शिक्षा और सामाजिक पहचान को नए परिवेश के अनुसार औपचारिक रूप देना परिवार की प्राथमिकता होगी।
- **हरिद्वार में धार्मिक व्यवस्था:** तीर्थ पुरोहितों और स्थानीय आश्रमों द्वारा ऐसे अनुष्ठानों के लिए तय विधि-विधान के नियम लागू रहते हैं। इससे धार्मिक नगरी में आयोजित होने वाले व्यक्तिगत संस्कारों की प्रक्रिया सुगम बनी रहती है।
- **कानूनी प्रक्रिया की आवश्यकता:** किसी भी स्वैच्छिक धर्म परिवर्तन के बाद राजपत्र में नाम परिवर्तन की अधिसूचना जारी करानी होती है। ऐसा करने से भविष्य में किसी भी प्रशासनिक या वैधानिक जटिलता से पूरी तरह बचा जा सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह घटनाक्रम परिवार के व्यक्तिगत विश्वास और धार्मिक प्रेरणा के मेल से घटित हुआ।

- **व्यक्तिगत आकर्षण व शांति:** परिवार पहले से ही हिंदू त्योहारों और रीति-रिवाजों का पालन कर रहा था। उनका कहना था कि इन परंपराओं में उन्हें आत्मिक शांति और गहरा आदरभाव मिला।
- **तीर्थ सेवा न्यास की प्रेरणा:** संत रामविशाल दास के सान्निध्य में परिवार ने सनातन धर्म के सिद्धांतों को समझा। इस मार्गदर्शन ने उन्हें औपचारिक निर्णय लेने की दिशा दी।
- **धार्मिक केंद्र का चयन:** हरिद्वार का चंडी घाट और पवित्र गंगा तट वैदिक अनुष्ठानों के लिए प्रमुख स्थान माने जाते हैं। इसी कारण परिवार ने विधिपूर्वक संस्कार संपन्न करने के लिए धर्मनगरी का रुख किया।

## सवाल-जवाब

### 1. यह धार्मिक अनुष्ठान किस स्थान पर आयोजित किया गया?
यह अनुष्ठान उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित चंडी घाट पर गंगा नदी के तट पर संपन्न हुआ।

### 2. यह परिवार मूल रूप से कहां का रहने वाला है?
यह परिवार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले का निवासी है।

### 3. परिवार में कुल कितने सदस्य शामिल थे?
परिवार में माहिद, उनकी पत्नी सबीना और उनके तीन बच्चे मिलाकर कुल पांच सदस्य शामिल थे।

### 4. अनुष्ठान के बाद परिवार के सदस्यों के नए नाम क्या रखे गए?
नामकरण संस्कार के बाद माहिद का नाम मोहित और उनकी पत्नी सबीना का नाम खुशी रखा गया।

### 5. इस प्रक्रिया में किस संस्था या संत का मार्गदर्शन रहा?
तीर्थ सेवा न्यास के संत रामविशाल दास की प्रेरणा और सान्निध्य में यह अनुष्ठान पूरा कराया गया।

### 6. परिवार ने धर्म परिवर्तन का क्या कारण बताया?
परिवार ने बताया कि वे लंबे समय से हिंदू त्योहार मना रहे थे और उन्होंने बिना किसी दबाव के स्वेच्छा से शांति और सम्मान की भावना से यह धर्म अपनाया।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._