# हरिद्वार में अर्धकुंभ के दौरान हर की पौड़ी पर भगदड़ रोकने के लिए डैम किनारे बनेगा ग्रीन कॉरिडोर

> हरिद्वार में 2027 के अर्धकुंभ के मद्देनजर हर की पौड़ी पर अत्यधिक भीड़ के दबाव को कम करने और किसी भी आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए हरिद्वार डैम के किनारे विशेष ग्रीन कॉरिडोर तैयार किया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-11-04 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haridwar-men-ardhakunbha-ke-daurana-har-ki-pauri-para-bhagadara-rokane-ke-lie-daima-kinare-banega-grina-koridora-56308 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिद्वार, अर्धकुंभ 2027, हर की पौड़ी, ग्रीन कॉरिडोर, भीड़ प्रबंधन, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग

धार्मिक नगरी हरिद्वार में साल 2027 में आयोजित होने वाले विशाल अर्धकुंभ मेले की प्रशासनिक तैयारियां धरातल पर शुरू हो चुकी हैं। इस महाआयोजन में देश के कोने-कोने के साथ-साथ विदेशों से भी करोड़ों श्रद्धालुओं के पवित्र गंगा स्नान के लिए जुटने की उम्मीद है। इतनी बड़ी तादाद में लोगों के आगमन से सुरक्षा व्यवस्था और व्यापक भीड़ प्रबंधन प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरते हैं। विशेषकर हर की पौड़ी जैसे अत्यंत संवेदनशील और धार्मिक दृष्टि से मुख्य क्षेत्र में यदि अचानक दबाव बढ़ता है या किसी कारणवश भगदड़ जैसी अनहोनी घटती है, तो जनहानि को रोकना सर्वोच्च प्राथमिकता होती है। इसी गंभीर पहलू को हल करने के लिए हर की पौड़ी के ठीक सामने स्थित हरिद्वार डैम के किनारे एक समर्पित ग्रीन कॉरिडोर के निर्माण की रूपरेखा पर काम तेज कर दिया गया है।

## उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभागों का साझा कदम
इस महत्वपूर्ण निकासी मार्ग का निर्माण उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के सिंचाई विभाग आपसी समन्वय के साथ कर रहे हैं। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने इस परियोजना के बारे में जानकारी साझा करते हुए बताया कि यह केंद्र सरकार की योजना का एक अभिन्न अंग है, जिस पर दोनों पड़ोसी राज्य मिलकर काम कर रहे हैं। हरिद्वार क्षेत्र में बहने वाली प्रमुख गंगा कैनाल तथा उससे जुड़े कई मुख्य ढांचे ऐतिहासिक और प्रशासनिक रूप से उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के अधिकार क्षेत्र में स्थित हैं। वहीं दूसरी ओर, समूचे मेले के संचालन, सुरक्षा निगरानी और श्रद्धालुओं के संपूर्ण प्रबंधन की वैधानिक जिम्मेदारी उत्तराखंड शासन और स्थानीय प्रशासन के पास रहती है। इसी दोहरे प्रशासनिक स्वरूप के कारण दोनों राज्य आपसी तालमेल बनाकर इस परियोजना को तेजी से धरातल पर उतार रहे हैं ताकि कार्य समयबद्ध तरीके से पूरा हो सके।

## जल क्षेत्रों के बीच भगदड़ के खतरे को कम करने की कवायद
हर की पौड़ी पर विशेष स्नान पर्वों के दिन श्रद्धालुओं का जमघट अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाता है। ऐसे में सीमित स्थान पर अत्यधिक भीड़ एकत्र हो जाने से स्थिति को संभालना किसी भी सुरक्षा दल के लिए बेहद पेचीदा काम बन जाता है। यदि ऐसे हालात में जरा सी भी अफवाह या हलचल से भगदड़ की स्थिति बनती है, तो लोग बदहवासी में सुरक्षित रास्तों की तलाश में इधर-उधर भागने लगते हैं। चूंकि हर की पौड़ी के आसपास गहरा जल प्रवाह और कई जल क्षेत्र मौजूद हैं, इसलिए किसी भी अनियंत्रित भगदड़ की स्थिति में श्रद्धालुओं के जीवन पर सीधा खतरा उत्पन्न हो जाता है। इस जानलेवा जोखिम को खत्म करने के उद्देश्य से ही हरिद्वार डैम की परिधि में यह वैकल्पिक सुरक्षित मार्ग विकसित किया जा रहा है। इसका प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी आपात परिस्थिति में भीड़ को एक ही स्थान पर घुटने देने के बजाय तुरंत बाहर निकाल दिया जाए।

## आस्था पथ से चंडी पुल होते हुए बैरागी कैंप तक कनेक्टिविटी
परियोजना के मार्ग प्रारूप के बारे में विवरण देते हुए अधिशासी अभियंता विकास त्यागी ने स्पष्ट किया कि डैम किनारे बनने वाला यह ग्रीन कॉरिडोर सीधे आस्था पथ से जुड़ेगा। वहां से यह मार्ग चंडी पुल तक पहुंचेगा और आगे बढ़ते हुए बैरागी कैंप के विशाल खुले मैदानी क्षेत्र में जाकर समाप्त होगा। हर की पौड़ी के मुख्य घाटों से निकाले गए लोगों को इस कॉरिडोर के जरिए सीधे चंडी पुल पार कराकर बैरागी कैंप भेजा जा सकेगा। बैरागी कैंप एक विस्तृत खुला इलाका होने के कारण वहां पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को बिखरने और सामान्य गति से आगे बढ़ने के लिए पर्याप्त जगह मिल सकेगी, जिससे मुख्य घाटों पर दबाव तुरंत घट जाएगा।

## सालाना स्नान पर्वों और कांवड़ मेले में भी मिलेगा स्थायी लाभ
अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह बुनियादी ढांचा केवल साल 2027 के अर्धकुंभ तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इसे एक दीर्घकालिक स्थायी समाधान के तौर पर देखा जा रहा है। हरिद्वार में हर साल आयोजित होने वाले विशाल कांवड़ मेले के अलावा सोमवती अमावस्या और मौनी अमावस्या जैसे प्रमुख स्नान तिथियों पर भी लाखों श्रद्धालुओं का तांता लगता है। ऐसे सभी बड़े धार्मिक अवसरों पर यह नया ग्रीन कॉरिडोर भीड़ के आवागमन को सुगम बनाए रखने और किसी भी संभावित दुर्घटना को रोकने में सुरक्षा बलों का मुख्य सहारा साबित होगा।

## इसका आप पर असर
हरिद्वार में बनने वाला यह नया ग्रीन कॉरिडोर अर्धकुंभ और अन्य प्रमुख स्नान पर्वों पर आने वाले करोड़ों तीर्थयात्रियों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित बनाएगा।

- **भारत में:** देश भर से गंगा स्नान के लिए हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ के दौरान सुरक्षित और व्यवस्थित निकास मार्ग उपलब्ध होगा। इससे हर की पौड़ी जैसे संकरे घाटों पर भगदड़ या अव्यवस्था की आशंका काफी हद तक घट जाएगी।
- **हरिद्वार में:** स्थानीय शहर में मुख्य स्नान पर्वों के दौरान हर की पौड़ी क्षेत्र पर पड़ने वाला अत्यधिक दबाव सीधे बैरागी कैंप की तरफ मोड़ दिया जाएगा। इससे शहर की आंतरिक गलियों और मुख्य मार्गों पर लगने वाले गंभीर जाम से स्थानीय निवासियों और सुरक्षा बलों को राहत मिलेगी।
- **आपातकालीन सुरक्षा:** किसी भी अप्रिय स्थिति या भगदड़ की आशंका होने पर बचाव दल लोगों को तुरंत आस्था पथ और चंडी पुल के रास्ते बाहर निकाल सकेंगे। इस त्वरित निकासी सुविधा से आसपास के जल क्षेत्रों में लोगों के गिरने का खतरा शून्य के करीब पहुंचेगा।
- **वार्षिक पर्वों पर राहत:** यह मार्ग कांवड़ यात्रा, सोमवती अमावस्या और मौनी अमावस्या के दौरान भी निरंतर उपयोग में लाया जाएगा। इसके चलते नियमित तीर्थयात्रियों को साल भर यात्रा प्रबंधन और घाटों तक पहुंचने में सुगमता मिलेगी।

## ऐसा क्यों हुआ
हर की पौड़ी पर अत्यधिक सीमित स्थान और चारों तरफ बहते गहरे जल स्रोतों के चलते अत्यधिक भीड़ जमा होने पर सुरक्षा और त्वरित निकासी की गंभीर चुनौती खड़ी हो जाती है।

- **सीमित जगह और विशाल जनसमूह:** 2027 के अर्धकुंभ में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने का अनुमान है, जिससे हर की पौड़ी पर भारी दबाव बनना तय है। इस संकरे धार्मिक केंद्र में भीड़ अनियंत्रित होने पर लोगों को तुरंत बाहर निकालने के लिए अतिरिक्त मार्गों की कमी थी।
- **जल क्षेत्रों के कारण जान का जोखिम:** मुख्य घाटों के इर्द-गिर्द गंगा की तेज धाराएं और कैनाल मौजूद हैं। भगदड़ जैसी किसी भी स्थिति में लोगों के पानी में गिरने या डूबने का बहुत बड़ा खतरा बना रहता है, जिसके समाधान के लिए वैकल्पिक रास्ता अनिवार्य था।
- **दो राज्यों का अधिकार क्षेत्र:** गंगा कैनाल और उससे जुड़े ढांचे उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के तहत आते हैं जबकि सुरक्षा व्यवस्था उत्तराखंड के हाथ में है। इस अंतर-राज्यीय तालमेल की आवश्यकता ने दोनों विभागों को केंद्र सरकार की योजना के तहत मिलकर ग्रीन कॉरिडोर विकसित करने के लिए प्रेरित किया।
- **दीर्घकालिक भीड़ प्रबंधन का अभाव:** कांवड़ मेला, मौनी अमावस्या और सोमवती अमावस्या जैसे विशाल वार्षिक आयोजनों में पहले भी भीड़ को संभालना कठिन साबित हुआ है। एक स्थायी वैकल्पिक मार्ग बनाकर प्रशासन भविष्य के सभी बड़े धार्मिक सम्मेलनों के लिए पुख्ता सुरक्षा ढांचा तैयार करना चाहता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरिद्वार में ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण क्यों किया जा रहा है?
2027 के अर्धकुंभ और अन्य बड़े मेलों में हर की पौड़ी पर अत्यधिक भीड़ का दबाव कम करने और आपात स्थिति में सुरक्षित निकासी के लिए यह कॉरिडोर बनाया जा रहा है।

### 2. यह ग्रीन कॉरिडोर किस रास्ते से होकर गुजरेगा?
यह मार्ग हरिद्वार डैम के किनारे से शुरू होकर आस्था पथ और चंडी पुल होते हुए सीधे बैरागी कैंप के खुले मैदान तक पहुंचेगा।

### 3. इस कॉरिडोर के निर्माण में कौन से विभाग शामिल हैं?
भारत सरकार की योजना के तहत उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग मिलकर इस पर काम कर रहे हैं।

### 4. क्या इस मार्ग का उपयोग केवल 2027 के अर्धकुंभ में ही होगा?
नहीं, इसका इस्तेमाल कांवड़ मेला, सोमवती अमावस्या और मौनी अमावस्या जैसे अन्य बड़े आयोजनों में भी भीड़ प्रबंधन के लिए स्थायी रूप से किया जाएगा।

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