# हरिद्वार में गंगनहर की सालाना बंदी शुरू, दिल्ली-NCR से कानपुर तक जल संकट का खतरा

> दशहरे से दीपावली तक चलने वाली सालाना मरम्मत के कारण हरिद्वार की उत्तरी खंड गंगनहर बंद कर दी गई है। इससे कई इलाकों में पेयजल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है और हर की पौड़ी पर भी जल स्तर घटेगा।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-22 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haridwar-men-ganga-canal-ki-annual-closure-shuru-delhi-ncr-se-kanpur-taka-water-crisis-ka-threat-50577 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिद्वार, गंगनहर, जल संकट, दिल्ली एनसीआर, हर की पौड़ी, यूपी सिंचाई विभाग

उत्तरी भारत में त्योहारी सीजन की शुरुआत के साथ ही जल प्रबंधन से जुड़ा एक बड़ा वार्षिक कदम उठाया गया है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने हरिद्वार में स्थित उत्तरी खंड गंगनहर को दशहरे की रात से लेकर दीपावली तक के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है। यह ऐतिहासिक नहर ब्रिटिश काल के दौरान इंजीनियर प्रोफेसर जॉर्ज कोटले के मार्गदर्शन में तैयार की गई थी, जिसका मुख्य उद्गम स्थल हरिद्वार का भीमगोड़ा बैराज है। जब उत्तराखंड का गठन हुआ और वह उत्तर प्रदेश से अलग हुआ, तब भी इस नहर समेत सिंचाई विभाग की कई संपत्तियों का नियंत्रण उत्तर प्रदेश सरकार के पास ही रहा। इसी व्यवस्था के तहत आज भी उत्तर प्रदेश के अधिकारियों के निर्देशानुसार ही इस पूरी जल प्रणाली की देखरेख और मरम्मत का कार्य संचालित किया जाता है।

## मरम्मत कार्यों का वार्षिक चक्र और किसानों की स्थिति
उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के एसडीओ भारत भूषण ने इस वार्षिक प्रक्रिया के पीछे के कारणों पर प्रकाश डालते हुए स्पष्ट किया है कि वर्ष भर में यह सबसे अनुकूल समय होता है। इस अवधि में कृषि क्षेत्रों में सिंचाई के लिए पानी की मांग न्यूनतम स्तर पर पहुंच जाती है, जिससे मरम्मत कार्यों को बिना किसी बाधा के पूरा करना संभव हो जाता है। मानसून का दौर समाप्त होते ही देश के इस हिस्से में बांधों, बैराजों और विभिन्न घाटों के रखरखाव का यह अभियान शुरू कर दिया जाता है, ताकि भविष्य में किसी बड़ी तकनीकी असुविधा से बचा जा सके।

## हर की पौड़ी पर जल स्तर में कमी और धार्मिक गतिविधियां
भीमगोड़ा से प्रवाहित होने वाली इस गंगनहर का एक बहुत बड़ा हिस्सा विश्व प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हर की पौड़ी तक पहुंचता है। नहर बंद किए जाने की वजह से हर की पौड़ी में गंगा का जल स्तर काफी नीचे चला जाता है, जिसका सीधा असर वहां होने वाले विभिन्न धार्मिक आयोजनों पर पड़ता है। जल की कमी के कारण तीर्थ यात्रियों और स्थानीय तीर्थ पुरोहितों में गहरी नाराजगी देखने को मिलती है। इस स्थिति से निपटने के लिए गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ ने जानकारी दी है कि उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के साथ बातचीत का सिलसिला जारी है ताकि हर की पौड़ी पर आचमन के योग्य जल का निरंतर प्रवाह सुनिश्चित किया जा सके।

## राजधानी दिल्ली और एनसीआर में पेयजल संकट की आशंका
इस सालाना बंदी का दायरा केवल हरिद्वार तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसका असर दूरदराज के शहरी इलाकों तक महसूस किया जाता है। राजधानी दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई हिस्सों में पीने के पानी की सप्लाई इसी गंगनहर के जल पर निर्भर करती है, जिसके चलते त्योहारी दिनों में जलापूर्ति बाधित होने की पूरी संभावना है। उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग का दावा है कि इस नियोजित बंदी से पहले ही संबंधित क्षेत्रों के स्थानीय प्रशासन को आधिकारिक तौर पर सतर्क कर दिया गया था। विशेष रूप से गाजियाबाद के प्रताप विहार स्थित वाटर ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े रिहायशी इलाकों में पानी की किल्लत का सामना करना पड़ सकता है।

## सूखी नहर में सिक्कों और आभूषणों की तलाश
दिलचस्प पहलू यह है कि जब गंगनहर का पानी रोक दिया जाता है और उसका तल सूखने लगता है, तब कई स्थानीय परिवारों के लिए यह रोजगार और आय का जरिया बन जाता है। लोगों को पूरे साल इस बंदी का इंतजार रहता है क्योंकि सूखी हुई नहर में श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए कीमती धातु के सिक्के और अन्य वस्तुएं मिल जाती हैं। इस दौरान कई लोगों के लिए सूखी हुई गंगा का तल किस्मत बदलने का माध्यम बनता है, जहां खोजबीन के दौरान सोने और चांदी के आभूषण तक हाथ लग जाते हैं।

## इसका आप पर असर
गंगनहर की इस सालाना बंदी का असर आम जनजीवन पर पानी की सप्लाई और धार्मिक आयोजनों के रूप में पड़ता है।

- **भारत में:** दिल्ली-NCR और उत्तर प्रदेश के कई शहरों में पेयजल की किल्लत बढ़ सकती है। स्थानीय प्रशासन को इस दौरान वैकल्पिक जल स्रोतों का उपयोग करना पड़ सकता है।
- **हरिद्वार में:** हर की पौड़ी पर गंगा जल का स्तर काफी कम हो जाएगा। इससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय पुरोहितों को धार्मिक अनुष्ठान करने में कठिनाई का सामना करना पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
उत्तरी खंड गंगनहर को हर साल मानसून सीजन के तुरंत बाद बंद किए जाने के पीछे तकनीकी और कृषि संबंधी कारण हैं। यह समय खेती के लिए पानी की सबसे कम मांग वाला होता है।

- **सालाना मरम्मत:** इस अवधि का उपयोग बांधों, बैराजों और घाटों की सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के रख-रखाव के लिए किया जाता है।
- **प्रशासनिक नियंत्रण:** उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के विभाजन के बाद भी नहर प्रणालियों का अधिकार उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग के पास है, जो नियमों के तहत यह बंदी तय करता है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरिद्वार में उत्तरी खंड गंगनहर को हर साल क्यों बंद किया जाता है?
मानसून सीजन के बाद सालाना मरम्मत और रखरखाव के कार्यों को पूरा करने के लिए गंगनहर को बंद किया जाता है।

### 2. यह गंगनहर किस अवधि के लिए बंद रहती है?
यह नहर हर साल दशहरे की रात से लेकर दीपावली तक बंद रहती है।

### 3. गंगनहर बंदी का किन बड़े शहरों पर असर पड़ता है?
इस बंदी का असर दिल्ली, एनसीआर, गाजियाबाद, मेरठ और कानपुर तक के इलाकों पर पड़ता है।

### 4. हर की पौड़ी पर जल स्तर क्यों कम हो जाता है?
भीमगोड़ा से निकलने वाली गंगनहर का एक बड़ा हिस्सा हर की पौड़ी को पानी सप्लाई करता है, जिसके बंद होने से वहां जल स्तर घट जाता है।

### 5. सूखी गंगनहर में लोग क्या तलाशते हैं?
नहर के सूखने पर स्थानीय लोग श्रद्धालुओं द्वारा फेंके गए कीमती सामान, सिक्के और सोने-चांदी के आभूषण तलाशते हैं।

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