# हरिद्वार में गरजे बाबा रामदेव: देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियों का दिया करारा जवाब, 104वें अधिवेशन में तथ्यात्मक पोल खोलने का ऐलान

> हरिद्वार में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी रामदेव ने सनातन धर्म के आराध्य देवी-देवताओं और धर्मग्रंथों पर की जा रही विवादित टिप्पणियों पर कड़ा विरोध जताया। उन्होंने पतंजलि द्वारा आयोजित होने वाले 104वें अधिवेशन में इन भ्रमों का तथ्यात्मक जवाब देने की बात कही।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-28 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/haridwar-men-garaje-baba-ramdev-devi-devataon-para-abhadra-tippaniyon-ka-diya-karara-javaba-104ven-adhiveshana-men-tathyatmaka-pol-52703 · **Language:** Hindi
**Tags:** बाबा रामदेव, सनातन धर्म, पतंजलि, हरिद्वार, भारतीय प्राच्य विद्या परिषद, धार्मिक विवाद

उत्तराखंड के हरिद्वार शहर स्थित कनखल के दिव्य योग मंदिर में 28 अक्टूबर को आयोजित एक विशेष प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए योग गुरु बाबा रामदेव ने सनातन धर्म, हिंदू देवी-देवताओं और प्राचीन मान्यताओं पर उठ रहे विवादित बयानों के खिलाफ कठोर रुख अपनाया। उन्होंने धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं को लेकर समाज में फैलाए जा रहे भ्रम पर गहरा आक्रोश जताया और स्पष्ट किया कि धर्मशास्त्रों की आड़ में आराध्य देवी-देवताओं की छवि धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सहन नहीं किया जाएगा। स्वामी रामदेव ने बताया कि इस प्रकार के मिथ्या प्रचार और मनगढ़ंत दावों की असलियत उजागर करने के लिए पतंजलि की ओर से एक विशेष मंच तैयार किया जा रहा है, जहां विद्वानों की मौजूदगी में प्रमाणिक एवं तथ्यात्मक साक्ष्य देश के सामने प्रस्तुत किए जाएंगे।

## देवी-देवताओं पर अनुचित बयानों और ग्रंथों में छेड़छाड़ पर बड़ा प्रहार
प्रेस वार्ता के दौरान बाबा रामदेव ने सनातन परंपरा के प्रमुख आराध्यों को लेकर हाल के दिनों में दिए गए बयानों पर बिंदुवार आपत्ति उठाई। उन्होंने कहा कि मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, माता सीता, योगेश्वर भगवान श्रीकृष्ण और महायोगी भगवान शिव को लेकर ऐसी बातें कही जा रही हैं जो पूरी तरह निराधार हैं। भगवान राम और माता सीता को शराब तथा मांसाहार से जोड़ने, भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य महारास को गलत संदर्भों में पेश करने और आदियोगी भगवान शिव को गांजा, भांग या नशे से जोड़ने जैसे प्रयासों पर उन्होंने कड़ा ऐतराज जताया। इसके अलावा, भगवान ब्रह्मा और अन्य देवताओं को लेकर फैलाए जा रहे भ्रामक दावों को सनातन धर्म की मर्यादा पर सीधा प्रहार बताया।

स्वामी रामदेव ने इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले 1,000 वर्षों के दौरान, विशेषकर मुगल काल और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान, सनातन धर्म के विरोधियों और धर्मद्रोही तत्वों ने हमारे मूल ग्रंथों में कई मनगढ़ंत बातें जोड़ीं। इसी प्रक्षिप्त या मिलावटी सामग्री का सहारा लेकर आज के समय में कुछ लोग सनातन धर्म की जड़ों पर हमला करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आस्था के विषयों पर मनमाने तरीके से व्याख्या करने के बजाय इतिहास, परंपरा और मूल साक्ष्यों के आधार पर ही कोई निष्कर्ष निकाला जाना चाहिए।

## आर्यों के आगमन का नैरेटिव और प्रवासन के सिद्धांतों पर तथ्य
इतिहास से जुड़े विवादित मुद्दों पर बात करते हुए बाबा रामदेव ने आर्य आक्रमण सिद्धांत (आर्यन इनवेजन थ्योरी) को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि देश में यह झूठी धारणा फैलाई गई कि आर्य बाहर से आए थे, जबकि वास्तविकता इसके ठीक विपरीत है। अपने दुनिया भर के भ्रमण के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि जब भी उन्होंने वैश्विक मंचों पर विदेशी नागरिकों से पूछा कि क्या उनके पूर्वज भारत गए थे, तो सभी ने स्पष्ट किया कि भारत से लोग ज्ञान और योग का संदेश लेकर दुनिया भर में फैले थे।

प्रवासन के कारणों को समझाते हुए उन्होंने तीन मुख्य स्थितियां बताईं। पहली स्थिति तब बनती है जब कोई विद्वान या योग गुरु पूरी दुनिया में ज्ञान, संस्कृति और स्वास्थ्य का प्रचार-प्रसार करने के लिए यात्रा करता है। दूसरी स्थिति तब आती है जब रोजगार या आजीविका की तलाश में लोग मिडिल ईस्ट, अमेरिका, यूरोप या ऑस्ट्रेलिया जैसे क्षेत्रों का रुख करते हैं। तीसरी स्थिति व्यापार और बड़े कारोबारी उपक्रमों से जुड़ी होती है। स्वामी रामदेव ने कहा कि 'मूल निवासी' का झूठा नैरेटिव गढ़कर और 'ब्राह्मणों भारत छोड़ो' जैसे नारों के जरिए समाज को बांटने की साजिश रची जा रही है, जिसका मुंहतोड़ जवाब देना बेहद जरूरी है।

## 150 करोड़ सनातनियों की जनसांख्यिकी और 104वां अधिवेशन
जनसंख्या और ऐतिहासिक पृष्ठभूमि पर प्रकाश डालते हुए बाबा रामदेव ने कहा कि जन्म, डीएनए और पारिवारिक वंश परंपरा के दृष्टिकोण से आज पूरे विश्व में 150 करोड़ से अधिक सनातन धर्म के अनुयायी मौजूद हैं। यदि अखंड भारत के भौगोलिक दायरे को देखा जाए तो यह आंकड़ा 200 करोड़ के पार पहुंच जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में रहने वाले 99 प्रतिशत मुसलमानों के पूर्वजों का इतिहास देखा जाए तो वे स्वयं स्वीकार करेंगे कि उनके पूर्वज ऋषि-मुनि, महर्षि, देवी-देवता और वैदिक सनातनी परंपरा का पालन करने वाले थे, जिन्होंने कालांतर में धर्म परिवर्तन किया था।

इन सभी मुद्दों का तार्किक एवं प्रामाणिक समाधान प्रस्तुत करने के लिए स्वामी रामदेव ने पतंजलि द्वारा आयोजित किए जाने वाले तीन दिवसीय कार्यक्रम का खाका पेश किया। उन्होंने बताया कि पतंजलि की ओर से भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है। इस तीन दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में देश-विदेश के प्रख्यात इतिहासकार, विद्वान और धर्मशास्त्रों के विशेषज्ञ जुटेंगे। अधिवेशन के माध्यम से प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा, धर्मशास्त्रों और ऐतिहासिक साक्ष्यों की गहन पड़ताल की जाएगी तथा भ्रम फैलाने वाले सभी दावों का प्रमाण सहित सटीक जवाब दिया जाएगा।

## इसका आप पर असर
यह समाचार भारत भर के नागरिकों और विशेषकर हरिद्वार क्षेत्र के निवासियों के लिए सामाजिक तथा सांस्कृतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण है।

- **भारत में:** देश भर के नागरिकों को धार्मिक इतिहास, प्राचीन ग्रंथों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी बहसों पर आधिकारिक शोध और साक्ष्य देखने को मिलेंगे। इससे सनातन धर्म पर चल रहे सामाजिक विवादों के बीच प्रामाणि‍क जानकारी प्राप्त करने का अवसर मिलेगा।
- **उत्तराखंड/हरिद्वार में:** हरिद्वार स्थित पतंजलि योगपीठ और कनखल क्षेत्र में 104वें राष्ट्रीय अधिवेशन के आयोजन से स्थानीय स्तर पर विद्वानों का जमावड़ा होगा। इससे क्षेत्र में धार्मिक पर्यटन, विद्वत सम्मेलनों और स्थानीय व्यवस्थाओं पर प्रत्यक्ष प्रभाव पड़ेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
बाबा रामदेव द्वारा प्रेस वार्ता आयोजित करने का मुख्य कारण हाल के दिनों में सनातन धर्म, देवी-देवताओं और प्राचीन इतिहास को लेकर दिए गए विवादित बयान हैं।

- **विवादित टिप्पणियों की पृष्ठभूमि:** हाल ही में कुछ सार्वजनिक मंचों पर हिंदू देवी-देवताओं के आचरण और खान-पान को लेकर आपत्तिजनक दावे किए गए थे, जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंची।
- **ऐतिहासिक ग्रंथों में मिलावट का दावा:** स्वामी रामदेव के अनुसार मुगल और ब्रिटिश काल के दौरान प्राचीन धर्मग्रंथों में प्रक्षिप्त (मिलावटी) अंश जोड़े गए थे, जिनका वर्तमान में गलत संदर्भ में प्रयोग किया जा रहा है।
- **नैरेटिव का खंडन:** आर्य आक्रमण सिद्धांत और 'मूल निवासी' जैसे विभाजनकारी सिद्धांतों का तथ्यात्मक रूप से मुकाबला करने के लिए पतंजलि ने 104वें अधिवेशन के आयोजन की घोषणा की है।

## सवाल-जवाब

### 1. बाबा रामदेव ने प्रेस वार्ता कहां और कब आयोजित की?
बाबा रामदेव ने 28 अक्टूबर को उत्तराखंड के हरिद्वार स्थित कनखल के दिव्य योग मंदिर में प्रेस वार्ता का आयोजन किया।

### 2. पतंजलि द्वारा कौन से अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है?
पतंजलि की ओर से तीन दिवसीय भारतीय प्राच्य विद्या परिषद के 104वें अधिवेशन का आयोजन किया जा रहा है।

### 3. बाबा रामदेव ने विश्व में सनातन धर्म के कितने अनुयायी बताए हैं?
बाबा रामदेव ने जन्म, डीएनए और वंश के हिसाब से दुनिया में 150 करोड़ से ज्यादा तथा अखंड भारत के संदर्भ में 200 करोड़ से ज्यादा सनातन अनुयायी बताए हैं।

### 4. बाबा रामदेव ने आर्य आक्रमण सिद्धांत के बारे में क्या कहा?
बाबा रामदेव ने स्पष्ट किया कि आर्य बाहर से नहीं आए थे और भारत से ही लोग दुनिया भर में ज्ञान और योग के प्रसार के लिए गए थे।

### 5. ग्रंथों में विवादित बातों के पीछे बाबा रामदेव ने क्या कारण बताया?
बाबा रामदेव के अनुसार, पिछले 1,000 वर्षों में मुगल और ब्रिटिश शासनकाल के दौरान विरोधियों ने धर्मग्रंथों में कई प्रक्षिप्त और मनगढ़ंत बातें जोड़ दी थीं।

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