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  "type": "article",
  "title": "हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की मौत के बाद फिर ताजा हुए निठारी कांड के जख्म, मोनिंदर सिंह पंढेर की जुबानी डी-5 कोठी के अनसुलझे रहस्य",
  "summary": "निठारी कांड के मुख्य आरोपी सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में मौत के बाद इस डरावने मामले के कई अनसुलझे पहलू एक बार फिर देश के सामने आ गए हैं।",
  "content": "हरिद्वार में सुरेंद्र कोली की अचानक हुई मौत ने भारत के सबसे भीषण और चर्चित आपराधिक मामलों में से एक, यानी निठारी कांड से जुड़े कई अनसुलझे सवालों को एक बार फिर देश के सामने ला खड़ा किया है। लगभग दो दशकों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद, कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर दोनों को कई मामलों में राहत मिल चुकी थी। नवंबर 2025 में देश की सर्वोच्च अदालत, यानी सुप्रीम कोर्ट ने कोली के खिलाफ लंबित आखिरी दोषसिद्धि को भी रद्द कर दिया था, जिसके बाद वह कानूनी रूप से बरी हो चुका था। लेकिन अब कोली की मौत ने उन पुराने घावों को फिर से हरा कर दिया है और उस बदनाम डी-5 कोठी की कहानी एक बार फिर लोगों की जुबान पर है।\n\nडी-5 कोठी का खौफनाक इतिहास और कंकालों का मिलना\nनिठारी कांड की शुरुआत साल 2005 और 2006 के दौरान हुई थी, जब नोएडा के निठारी इलाके से अचानक कई बच्चे और महिलाएं रहस्यमयी तरीके से लापता होने लगे थे। स्थानीय लोगों के बीच डर का माहौल था, लेकिन इस भयानक साजिश का पर्दाफाश 29 दिसंबर 2006 को हुआ। उस दिन नोएडा के सेक्टर-31 में स्थित डी-5 कोठी के पीछे बने एक खुले नाले से भारी मात्रा में इंसानी हड्डियां, खोपड़ियां और कपड़ों के टुकड़े बरामद हुए। यह आलीशान कोठी रसूखदार कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर की थी, और सुरेंद्र कोली वहां उसका घरेलू नौकर या सहायक के रूप में काम करता था। इस भयानक खुलासे के बाद पुलिस ने तुरंत पंढेर और कोली दोनों को अपनी हिरासत में ले लिया। बाद में मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए इसकी जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी CBI को सौंप दी गई। CBI ने इस पूरे मामले में गहन तफ्तीश के बाद 16 अलग-अलग मुकदमों में चार्जशीट दाखिल की, जिसमें हत्या, बलात्कार, अपहरण और आपराधिक साजिश जैसी बेहद गंभीर धाराएं लगाई गई थीं। शुरुआती अदालती सुनवाई के दौरान कोली को मुख्य आरोपी मानते हुए कई मामलों में फांसी की सजा सुनाई गई थी।\n\nमोनिंदर सिंह पंढेर का वह इंटरव्यू: कोली को गांव से बुलाने की दास्तान\nकोली की मौत के बाद, उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर द्वारा एक टेलीविजन चैनल को दिया गया पुराना इंटरव्यू फिर से चर्चा में आ गया है। इस बातचीत में पंढेर ने कई ऐसी बातें साझा की थीं, जो इस मामले के अनसुलझे पहलुओं पर रोशनी डालती हैं। पंढेर ने बताया था कि सुरेंद्र कोली वास्तव में उनके पैतृक गांव का रहने वाला था। उसे नोएडा स्थित अपने घर पर काम के लिए बुलाने के लिए पंढेर ने खुद एक टैक्सी भेजी थी, जिसके जरिए कोली पहली बार उनके घर पहुंचा था। इसके अलावा, जांच में सामने आए एक संदिग्ध SIM कार्ड को लेकर भी पंढेर से कड़े सवाल पूछे गए थे। पंढेर ने खुलासा किया था कि उनके एक करीबी दोस्त का बेटा उनके नोएडा वाले घर पर रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहा था। उसी लड़के के नाम और पहचान दस्तावेजों का इस्तेमाल करके कोली ने वह SIM कार्ड हासिल किया था। हालांकि, पंढेर ने इंटरव्यू में यह साफ नहीं किया कि कोली उस SIM कार्ड का इस्तेमाल किस काम के लिए करता था, लेकिन उन्होंने यह स्वीकार किया कि जांच एजेंसियों की पूछताछ में इस SIM कार्ड का जिक्र प्रमुखता से आया था।\n\nअलग कस्टडी और देर रात की गतिविधियों का रहस्य\nइस बातचीत के दौरान जब पंढेर से पूछा गया कि क्या गिरफ्तारी के बाद कोली ने पुलिस के सामने उनके खिलाफ कोई गवाही या बयान दिया था, तो पंढेर ने इस पर सीधा जवाब टाल दिया था। उन्होंने कहा था कि इस सवाल का असली जवाब तो सिर्फ कोली ही दे सकता है। पंढेर का दावा था कि पुलिस और CBI की कस्टडी में रहने के दौरान उन दोनों को पूरी तरह से अलग-अलग सेल में रखा गया था। दोनों को आपस में मिलने या किसी भी तरह की बातचीत करने की सख्त मनाही थी। वहीं, डी-5 कोठी के भीतर होने वाली गतिविधियों पर पंढेर ने खुद को पूरी तरह अनजान बताया था। उन्होंने दावा किया था कि कोठी के अंदर उन्हें कभी भी कोई असामान्य या संदिग्ध हरकत देखने को नहीं मिली। जब उनसे कोली के देर रात को बाहर जाने के बारे में पूछा गया, तो पंढेर ने माना कि कोली अक्सर असमय या देर रात को बाहर जाया करता था। लेकिन उन्होंने कभी भी उससे इसका कारण नहीं पूछा और न ही उसके निजी जीवन में दखल देने की कोशिश की। पंढेर ने जांच के तरीकों और मीडिया ट्रायल पर भी गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि पूरी जांच प्रक्रिया का ध्यान केवल उन्हें फंसाने और उनके खिलाफ एक झूठी कहानी गढ़ने पर केंद्रित था।\n\nमौत की सजा से पूरी तरह बरी होने तक की अदालती लड़ाई\nनिठारी कांड की न्यायिक प्रक्रिया बेहद लंबी और पेचीदा रही है, जो करीब बीस वर्षों तक देश की विभिन्न अदालतों में चलती रही। साल 2011 में सुप्रीम कोर्ट ने एक मामले में सुरेंद्र कोली की मौत की सजा को बरकरार रखा था। लेकिन इसके बाद साल 2015 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए उस फांसी की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया था। इसके बाद भी अन्य मामलों में कानूनी जंग जारी रही। 16 अक्टूबर 2023 को इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कोली को बड़ी राहत देते हुए 12 अलग-अलग मामलों में सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। इस फैसले के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन 30 जुलाई 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार की अपीलों को खारिज करते हुए हाई कोर्ट के बरी करने के फैसले को बरकरार रखा। इसके बाद कोली के खिलाफ केवल एक आखिरी मामला बचा था, जो रिम्पा हलदर केस के नाम से जाना जाता है। इस मामले में पहले उसकी मौत की सजा की पुष्टि हो चुकी थी, लेकिन नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने कोली की क्यूरेटिव पिटीशन यानी उपचारात्मक याचिका को स्वीकार कर लिया और उसे इस मामले में भी बरी कर दिया। देश की सर्वोच्च अदालत ने अपने फैसले में टिप्पणी की थी कि एक ही तरह के साक्ष्यों के आधार पर अलग-अलग मुकदमों में विरोधाभासी निष्कर्ष नहीं निकाले जा सकते और इस मामले में न्याय के बुनियादी सिद्धांतों को लेकर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।\n\nकोली की मौत और दफन हुए कई गहरे राज\nसुरेंद्र कोली की हरिद्वार में हुई अचानक मौत ने अब इस पूरे विवाद पर एक तरह से विराम लगा दिया है, लेकिन उसके पीछे कई अनसुलझे रहस्य हमेशा के लिए दफन हो गए हैं। अदालतों से पूरी तरह बरी होने के बाद कोली जेल से बाहर था, और हरिद्वार की एक चाय की दुकान पर उसकी लाश मिलने की खबर ने सभी को चौंका दिया है। पीड़ित परिवारों ने कोली की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं और इसे एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा बताया है। फिलहाल, स्थानीय पुलिस इस मामले की गहनता से जांच कर रही है और कोली की मौत की वास्तविक वजह जानने के लिए उसकी पोस्टमार्टम रिपोर्ट का बेसब्री से इंतजार किया रहा है। इस मौत के साथ ही डी-5 कोठी की खौफनाक यादें और निठारी कांड का दर्द एक बार फिर देशवासियों के दिलों में ताजा हो गया है।\n\nइसका आप पर असर\nसुरेंद्र कोली की मृत्यु और निठारी कांड की अदालती यात्रा न्याय प्रणाली की कार्यप्रणाली को दर्शाती है।\n\n• न्यायिक प्रणाली की समझ: यह मामला देश में अदालती मुकदमों की लंबी प्रक्रिया को उजागर करता है। इससे स्पष्ट होता है कि अंतिम राहत के लिए सुप्रीम कोर्ट की उपचारात्मक याचिकाएं कितनी महत्वपूर्ण हैं।\n• बच्चों की सुरक्षा के प्रति जागरूकता: निठारी कांड बच्चों के गायब होने से शुरू हुआ था, जो माता-पिता को बेहद सतर्क रहने का संदेश देता है। परिवारों को अपने आसपास की गतिविधियों और बच्चों की सुरक्षा पर हमेशा कड़ी नजर रखनी चाहिए।\n• पुलिस जांच की विश्वसनीयता: सबूतों के अभाव में अदालतों द्वारा आरोपियों का बरी होना कमजोर जांच प्रक्रियाओं को दर्शाता है। नागरिकों को यह समझना चाहिए कि मजबूत कानूनी कार्रवाई के लिए वैज्ञानिक साक्ष्य और पुख्ता सबूत कितने जरूरी हैं।\n• घरेलू सहायकों का सत्यापन: किसी भी बाहरी व्यक्ति या घरेलू सहायक को काम पर रखने से पहले पुलिस वेरिफिकेशन कराना अत्यंत आवश्यक है। इससे भविष्य में होने वाली अप्रिय घटनाओं और किसी भी आपराधिक गतिविधि के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसुरेंद्र कोली की मौत और मोनिंदर सिंह पंढेर के बयानों ने इस ऐतिहासिक मामले को दोबारा चर्चा में ला दिया है।\n\n• संदिग्ध परिस्थितियों में मौत: हरिद्वार में एक चाय की दुकान के पास सुरेंद्र कोली का शव मिलने से इस ठंडे पड़ चुके मामले में नई हलचल पैदा हुई। इस अचानक हुई मौत के कारण निठारी कांड से जुड़े अनसुलझे रहस्य फिर से जीवित हो गए।\n• पंढेर का पुराना इंटरव्यू: कोली की मौत के बाद पंढेर का पुराना बयान सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर वायरल होने लगा। इसमें कोली को लाने की कहानी और SIM कार्ड के रहस्य ने लोगों की जिज्ञासा दोबारा बढ़ा दी।\n• साक्ष्यों की कानूनी समीक्षा: सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोली को अंतिम रिम्पा हलदर केस में बरी करने का फैसला इस बात पर आधारित था कि समान साक्ष्यों पर विरोधाभासी निर्णय नहीं दिए जा सकते। इस ऐतिहासिक न्यायिक टिप्पणी ने कानूनी गलियारों में एक नई बहस छेड़ दी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुरेंद्र कोली कौन था और उसकी मौत कहाँ हुई?\nसुरेंद्र कोली नोएडा के निठारी कांड का मुख्य आरोपी था, जिसकी मौत हरिद्वार में एक चाय की दुकान के पास हुई।\n\n2. निठारी कांड की शुरुआत कब और कैसे हुई थी?\nइस कांड की शुरुआत 2005-2006 में नोएडा के निठारी से बच्चों और महिलाओं के लापता होने से हुई थी, जिसके बाद दिसंबर 2006 में डी-5 कोठी के पीछे से मानव कंकाल मिले थे।\n\n3. मोनिंदर सिंह पंढेर ने कोली को नोएडा लाने के बारे में क्या बताया था?\nपंढेर ने बताया था कि कोली उनके पैतृक गांव का था और उसे नोएडा बुलाने के लिए उन्होंने खुद एक टैक्सी भेजी थी।\n\n4. कोली ने जिस SIM कार्ड का इस्तेमाल किया था, वह किसके नाम पर था?\nवह SIM कार्ड पंढेर के एक दोस्त के बेटे के नाम पर था, जो उनके घर रहकर परीक्षा की तैयारी कर रहा था।\n\n5. सुप्रीम कोर्ट ने कोली को सभी मामलों में क्यों बरी कर दिया?\nकोर्ट ने पाया कि समान साक्ष्यों के आधार पर विरोधाभासी फैसले नहीं दिए जा सकते और जांच में न्याय के गंभीर सवाल पैदा हुए थे।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-09-18",
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