# अनियमित खानपान से आंतों में हो सकता है गट जेट लैग, ऋषिकेश के डॉक्टर ने बताए इसके नुकसान

> खानपान और सोने का समय बार-बार बदलने से शरीर की आंतरिक घड़ी और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ता है। इसे गट जेट लैग कहा जाता है, जिससे पेट से जुड़ी कई परेशानियां हो सकती हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/irregular-khanapana-se-anton-men-ho-sakata-hai-gut-jet-lag-rishikesh-ke-doktara-ne-batae-isake-nukasana-27240 · **Language:** Hindi
**Tags:** गट जेट लैग, पाचन तंत्र, स्वास्थ्य, खानपान, ऋषिकेश, आयुर्वेद

अक्सर भागदौड़ भरी जिंदगी में लोग सुबह का नाश्ता छोड़ देते हैं, दोपहर का भोजन तय समय से काफी देर से करते हैं और रात में सोने के ठीक पहले भोजन कर लेते हैं। यदि आपकी भी दिनचर्या कुछ ऐसी ही है, तो यह अनियमितता केवल आपकी भूख या पाचन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि आपके शरीर की अंदरूनी कार्यप्रणाली को भी गहरा झटका देती है। जिस तरह हमारे सोने और जागने का एक निर्धारित चक्र होता है, ठीक उसी तरह हमारे पेट और आंतों की भी अपनी एक जैविक घड़ी होती है। इसी अंदरूनी संतुलन के बिगड़ने को गट जेट लैग के रूप में समझा जाता है। आसान शब्दों में कहें तो जब खाने और सोने का समय लगातार बदलता रहता है, तो शरीर का आंतरिक रूटीन पूरी तरह लड़खड़ा जाता है।

## जैविक घड़ी और पाचन तंत्र का कनेक्शन
ऋषिकेश के आयुष चिकित्सक डॉ. राजकुमार ने लोकल 18 से बातचीत के दौरान बताया कि हमारे पूरे शरीर में सर्केडियन रिदम यानी एक प्राकृतिक जैविक घड़ी सक्रिय रूप से काम करती है। यह जैविक घड़ी शरीर को यह निर्देश देती है कि कब जागना है, किस समय सोना है और कौन सी जरूरी शारीरिक प्रक्रियाएं किस वक्त सबसे बेहतर तरीके से संचालित होनी चाहिए। हमारा पाचन तंत्र भी सीधे इसी प्राकृतिक लय से जुड़ा हुआ होता है।

डॉ. राजकुमार ने आगे स्पष्ट किया कि आंतों की कार्यप्रणाली, पाचन से जुड़े विभिन्न हार्मोन और आंतों में पलने वाले सूक्ष्मजीव यानी अच्छे बैक्टीरिया भी इसी दिन और रात के चक्र से गहराई से प्रभावित होते हैं। यही कारण है कि भोजन करने का समय हमारे स्वास्थ्य के लिए बेहद मायने रखता है। यदि कोई व्यक्ति रोजाना लगभग एक ही समय पर भोजन ग्रहण करता है, तो हमारा शरीर उस निश्चित रूटीन के अनुसार खुद को आसानी से ढाल लेता है। इसके विपरीत, यदि कभी सुबह जल्दी खा लिया, कभी दोपहर तक भूखे रहे और कभी देर रात भारी भोजन किया, तो पाचन तंत्र के लिए इस उतार-चढ़ाव को संभालना काफी कठिन हो जाता है, खासकर जब यह देर रात खाने की आदत रोजाना की बन जाए।

## गट जेट लैग को समझना क्यों है जरूरी
डॉ. राजकुमार के अनुसार, गट जेट लैग को पूरी तरह समझने के लिए आप इसकी तुलना असली जेट लैग से कर सकते हैं। जब हम एक टाइम जोन से यात्रा करके दूसरे टाइम जोन में पहुंचते हैं, तो समय में आए अचानक बदलाव के कारण हमारे शरीर की घड़ी कुछ समय के लिए भ्रमित हो जाती है। ठीक इसी प्रकार, रोजमर्रा की भागदौड़ भरी जिंदगी में खानपान और विश्राम का समय लगातार बदलने पर आंतों की अपनी आंतरिक लय भी बुरी तरह प्रभावित हो जाती है। हालांकि, यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि गट जेट लैग अपने आप में कोई अलग चिकित्सीय बीमारी या रोग का नाम नहीं है, बल्कि इस प्रकार की शारीरिक गड़बड़ी को आसान भाषा में समझाने के लिए उपयोग किया जाने वाला एक शब्द है। इसका प्रभाव हर इंसान के शरीर पर अलग-अलग तरीके से पड़ सकता है।

खानपान की इस असंगति के कारण कई लोगों को पेट फूलने या अत्यधिक गैस बनने की समस्या का सामना करना पड़ सकता है। कुछ व्यक्तियों को कब्ज की शिकायत परेशान करती है, तो कुछ लोगों को अपच, पेट में भारीपन या असहजता महसूस होने लगती है। इसके अलावा, कई बार देर रात में भारी भोजन करने के बाद चैन की नींद भी नहीं आती है। ऐसी स्थिति में परेशानी केवल खाए गए भोजन की मात्रा में नहीं होती, बल्कि भोजन करने के गलत समय में छिपी होती है। इसके पीछे आंतों के माइक्रोबायोम का संबंध भी बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। हमारे पेट और आंतों के भीतर बड़ी संख्या में सूक्ष्म जीव निवास करते हैं, जिन्हें सामूहिक रूप से गट माइक्रोबायोम कहा जाता है। ये सूक्ष्मजीव पाचन क्रिया समेत शरीर के कई अहम कार्यों को सुचारू रूप से चलाने में मदद करते हैं। ऐसे में खाने का समय और दिनचर्या बार-बार बदलने से इस नाज़ुक तंत्र पर भी विपरीत प्रभाव पड़ता है।

## बचाव के आसान उपाय और नियमित दिनचर्या
इस समस्या से बचने का सबसे सरल और प्रभावी तरीका यह है कि अपने खाने-पीने का एक सामान्य और स्थिर रूटीन तैयार किया जाए। यह बिल्कुल आवश्यक नहीं है कि आप हर दिन घड़ी के बिल्कुल एक ही मिनट पर भोजन करें, लेकिन यह जरूर प्रयास करना चाहिए कि आपके खाने के समय में बहुत ज्यादा और लगातार उतार-चढ़ाव न हो। रात के समय भोजन सोने से ठीक पहले करने के बजाय थोड़ा सा पहले कर लेना स्वास्थ्य के लिए ज्यादा फायदेमंद साबित हो सकता है। इसके साथ ही, रात में पर्याप्त और अच्छी नींद लेना भी उतना ही जरूरी है, क्योंकि नींद और पाचन दोनों ही हमारे शरीर की आंतरिक घड़ी से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं।

यदि आपका कार्यक्षेत्र शिफ्ट में है या आपकी दैनिक जीवनशैली ऐसी है जिसमें खाने का समय बार-заर बदलता रहता है, तो एक निश्चित रूटीन बनाना थोड़ा चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसी कठिन परिस्थितियों में भी यह कोशिश की जानी चाहिए कि खानपान और विश्राम के बीच किसी तरह एक नियमित पैटर्न बना रहे। बहुत लंबी अवधि तक भूखे रहने के बाद अचानक एक साथ बहुत ज्यादा खाना खा लेना भी पेट पर अनावश्यक दबाव डाल सकता है और पाचन प्रक्रिया को बिगाड़ सकता है।

## इसका आप पर असर
अनियमित खानपान और सोने के समय में बार-बार बदलाव करने से आम आदमी के पाचन तंत्र और दैनिक स्वास्थ्य पर सीधा और नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

- **भारत में:** अनियमित खानपान और देर रात तक जागने की आदत देश भर में आम होती जा रही है, जिससे गैस, अपच और पुरानी थकान जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं। सही समय पर भोजन करने की आदत अपनाकर इन परेशानियों से बचा जा सकता है।
- **ऋषिकेश में:** स्थानीय निवासियों और काम के सिलसिले में अनियमित शिफ्ट निभाने वाले लोगों को अपने खानपान के पैटर्न को सुधारने की जरूरत है, ताकि आंतों की आंतरिक घड़ी संतुलित बनी रहे।

## सवाल-जवाब

### 1. गट जेट लैग क्या होता है?
खाने और सोने का समय बार-बार बदलने से शरीर की आंतरिक घड़ी और आंतों की लय के बिगड़ने को गट जेट लैग कहा जाता है।

### 2. यह कोई गंभीर बीमारी है क्या?
नहीं, गट जेट लैग कोई चिकित्सीय बीमारी नहीं है, बल्कि खानपान की गड़बड़ी से होने वाले बदलाव को समझाने का एक शब्द है।

### 3. इससे पेट पर क्या असर पड़ता है?
इस समस्या के कारण पेट फूलना, गैस, कब्ज, अपच और भारीपन जैसी शिकायतें हो सकती हैं।

### 4. इससे बचने के लिए क्या करना चाहिए?
अपने खानपान का एक सामान्य रूटीन बनाएं और रात का खाना सोने से काफी पहले खाएं।

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