# खनन नियमों की धज्जियां उड़ाने से बागेश्वर में खतरे में पड़ा मकान, 15 मीटर की दूरी पर खुदाई के खिलाफ परिवार धरने पर बैठा

> उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के भैरूचौबट्टा में आवासीय नियम ताक पर रखकर महज 15 मीटर दूर खनन किया जा रहा है, जिससे नौ लोगों के परिवार का आशियाना भारी खतरे में है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-02 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/khanana-niyamon-ki-dhajjiyan-urane-se-bageshwar-men-khatare-men-para-makana-15-mitara-ki-duri-para-khudai-ke-khilapha-parivara-dha-26437 · **Language:** Hindi
**Tags:** बागेश्वर, उत्तराखंड, भैरूचौबट्टा, खनन विवाद, नाजिया हसन, जिला प्रशासन, आवास सुरक्षा

उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के अंतर्गत आने वाले भैरूचौबट्टा क्षेत्र में एक आवासीय मकान के बिल्कुल निकट हो रहे खनन कार्य को लेकर गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। खनन गतिविधियों के कारण अपने आशियाने पर मंडराते खतरे से आक्रोशित होकर एक ही परिवार के कई सदस्य धरने पर बैठ गए हैं। प्रभावित पक्ष का आरोप है कि पट्टाधारक ने पूर्व में किए गए लिखित वादों को हवा में उड़ा दिया है और प्रशासनिक नियमों को नजरअंदाज करते हुए महज 15 मीटर की दूरी पर भारी खुदाई कर डाली है।

## लिखित समझौते और 30 लाख के प्रस्ताव पर गहराया विवाद
धरने पर बैठे मंगल कुमार, दया प्रकाश (दोनों वीरेंद्र प्रसाद के पुत्र), हेमा देवी और रेणुका देवी ने पूर्व पट्टाधारक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पीड़िता हेमा देवी का कहना है कि जून महीने में पट्टाधारक के साथ एक बाकायदा लिखित एग्रीमेंट तैयार किया गया था। इस समझौते में यह स्पष्ट तौर पर तय हुआ था कि खनन से प्रभावित हो रहे परिवार को एक नया मकान बनाकर दिया जाएगा। हालांकि कई महीने गुजर जाने के बावजूद अब तक निर्माण कार्य का एक पत्थर भी नहीं रखा गया है।

हेमा देवी ने यह भी साफ कर दिया कि पट्टाधारक की ओर से दिया गया 30 लाख रुपये का नकद विकल्प उन्हें किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं है। परिवार का जोर इस बात पर है कि समझौते की शर्तों के मुताबिक उन्हें रहने योग्य सुरक्षित घर ही बनाकर दिया जाए।

## 15 मीटर की दूरी पर खुदाई से 9 जिंदगियों का भविष्य अधर में
मामले की गंभीरता को बयां करते हुए दया प्रकाश ने बताया कि उनका वर्तमान पक्का मकान खनन स्थल से महज 15 मीटर की दूरी पर स्थित है। इस घर में बच्चों समेत कुल नौ सदस्य निवास करते हैं। उत्तराखंड में जारी लगातार बारिश के मौसम में इस खतरनाक मोड़ पर रहना पूरे परिवार के लिए हर पल खौफनाक साबित हो रहा है। भारी बारिश के दौरान चट्टानों और जमीन के दरकने की आशंका से परिवार का डर कई गुना बढ़ जाता है।

दोनों भाइयों के पास क्षेत्र में लगभग पांच नाली जमीन उपलब्ध है, परंतु पहाड़ी इलाके की भौगोलिक बनावट के कारण ऐसी कोई उपयुक्त या समतल भूमि नहीं बची है जहाँ वे खुद सुरक्षा के साथ नया मकान तैयार कर सकें। इसी लाचारी के कारण परिवार ने दूसरी पार्टी के सामने सुरक्षित आवास बनाकर देने की मांग रखी थी। परिवार के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि उन्हें सुरक्षित मकान उपलब्ध नहीं कराया जाता है, तो वे अपने छोटे बच्चों और बुजुर्गों को लेकर आखिर कहाँ शरण लें।

## लीज़धारक ने अनुबंध को बताया झूठा, प्रशासन से निष्पक्ष जाँच की गुहार
एक तरफ जहाँ पीड़ित परिवार जून में हुए समझौते को लागू कराने की मांग कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ पूर्व पट्टाधारक ने इन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। पट्टाधारक का कहना है कि जिस लिखित अनुबंध का हवाला देकर परिवार नए घर की मांग कर रहा है, वह पूरी तरह से असत्य और झूठा है। दोनों पक्षों के बीच इस तीखी बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप के कारण भैरूचौबट्टा में तनाव और गहरा गया है।

न्याय की आस में पीड़ित परिवार ने जिला प्रशासन के समक्ष गुहार लगाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मामला केवल जमीन या संपत्ति के टुकड़े तक सीमित नहीं है, बल्कि नौ इंसानी जिंदगियों की सुरक्षा और उनके भविष्य से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से इस लिखित समझौते की निष्पक्ष जाँच कराने और परिवार के लिए अविलंब सुरक्षित रहने की व्यवस्था कराने की मांग की है।

## खनन नियमों की अनदेखी पर जिला खनन अधिकारी का सख्त रुख
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए जिला खनन अधिकारी नाजिया हसन ने पट्टाधारक की लापरवाही को उजागर किया है। अधिकारी ने पुष्टि की कि पट्टाधारक ने पूर्व में परिवार के मकान को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट कराने का भरोसा दिया था, परंतु अपने इस आश्वासन को पूरा करने में वह पूरी तरह विफल रहा।

खनन विभाग के नियमानुसार किसी भी रिहायशी मकान के 50 मीटर के दायरे में किसी भी तरह की खनन या उत्खनन गतिविधि संचालित नहीं की जा सकती। नाजिया हसन के अनुसार, विभागीय नियमों और उत्तराखंड उच्च न्यायालय के स्पष्ट आदेशों का उल्लंघन करने पर उक्त पट्टाधारक के खिलाफ पूर्व में भी कानूनी कार्रवाई की जा चुकी है। इसके बावजूद पट्टाधारक ने बिना किसी वैध प्रशासनिक अनुमति के दोबारा खनन कार्य शुरू कर दिया, जिसकी वजह से प्रभावित परिवार का मकान सीधे खतरे की जद में आ गया है।

## इसका आप पर असर
बागेश्वर जिले के इस मामले से उत्तराखंड में खनन प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों और स्थानीय प्रशासन दोनों के लिए प्रत्यक्ष प्रभाव देखने को मिल रहे हैं।

- **भारत में:** खनन गतिविधियों के संबंध में 50 मीटर के वैधानिक सुरक्षा मानदंड लागू होने से आवासीय क्षेत्रों के निकट व्यावसायिक उत्खनन पर रोक मजबूत होगी। इससे पर्यावरण और जनसुरक्षा नियमों का पालन सुनिश्चित कराने के प्रशासनिक तंत्र पर दबाव बढ़ेगा।
- **बागेश्वर में:** भैरूचौबट्टा क्षेत्र के ग्रामीणों को अवैध खनन गतिविधियों के खिलाफ प्रशासनिक हस्तक्षेप मिलने का रास्ता साफ होगा। पीड़ित परिवार को सुरक्षित विस्थापन और नियमानुसार आवास निर्माण की सुविधा मिलने की संभावना जगी है।

## सवाल-जवाब

### 1. बागेश्वर के भैरूचौबट्टा में परिवार किस बात का विरोध कर रहा है?
परिवार अपने पक्के मकान से महज 15 मीटर दूर अवैध खनन किए जाने और जून में हुए लिखित समझौते के तहत नया मकान न बनाकर दिए जाने का विरोध कर रहा है।

### 2. खनन नियमों के अनुसार आवासीय मकान से कितनी दूरी पर खुदाई की अनुमति है?
खनन नियमों और अदालती दिशा-निर्देशों के अनुसार किसी भी आवासीय मकान के 50 मीटर के दायरे में खनन गतिविधियां प्रतिबंधित हैं।

### 3. पीड़ित परिवार ने 30 लाख रुपये का विकल्प क्यों ठुकराया?
पीड़ित महिला हेमा देवी के अनुसार, परिवार को वित्तीय मुआवजे की जगह लिखित समझौते के अनुरूप सुरक्षित स्थान पर बना हुआ नया मकान चाहिए।

### 4. मामले पर जिला खनन अधिकारी का क्या रुख है?
जिला खनन अधिकारी नाजिया हसन ने स्पष्ट किया है कि पट्टाधारक ने पूर्व आश्वासन और 50 मीटर दूरी के नियम का उल्लंघन किया है, तथा बिना अनुमति खनन करने पर पहले भी कार्रवाई हो चुकी है।

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