# मुलेठी को मामूली जड़ी समझकर रोज खाना पहुंचा सकता है सेहत को नुकसान

> आयुर्वेद में मुलेठी को गले की खराश और पाचन के लिए असरदार माना गया है, लेकिन इसका जरूरत से ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर और हृदय पर गंभीर असर डाल सकता है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/mulethi-ko-mamuli-jari-samajhakara-roja-khana-pahuncha-sakata-hai-sehata-ko-nukasana-33681 · **Language:** Hindi
**Tags:** मुलेठी के नुकसान, आयुर्वेदिक जड़ी बूटी, ग्लाइसीराइजिन, हाई ब्लड प्रेशर, पोटैशियम की कमी, घरेलू नुस्खे, स्वास्थ्य सलाह

पारंपरिक घरेलू उपचारों में मुलेठी की गिनती बेहद लोकप्रिय जड़ी-बूटियों में होती है। गले में अचानक खराश महसूस हो या लगातार सूखी खांसी परेशान कर रही हो, बुजुर्ग अक्सर मुलेठी का छोटा टुकड़ा चूसने या इसका काढ़ा बनाकर पीने की सलाह देते हैं। पेट की गड़बड़ी और पाचन संबंधी परेशानियों से राहत पाने के लिए भी इसका उपयोग काफी आम है। कई लोग इसे पूरी तरह कुदरती मानकर बिना किसी नियम के हर दिन खाना शुरू कर देते हैं, जिससे फायदे की जगह परेशानियां बढ़ने लगती हैं।

## लंबे समय तक मुलेठी के सेवन से जुड़ी जटिलताएं
किसी भी प्राकृतिक जड़ी-बूटी का स्वास्थ्य लाभ तभी मिलता है जब उसका प्रयोग संयमित मात्रा में और निश्चित अवधि के लिए किया जाए। मुलेठी के अधिक या अनियंत्रित सेवन से शरीर के आंतरिक संतुलन पर नकारात्मक असर पड़ता है। विशेष रूप से वे लोग जो पहले से ही हृदय रोग, गुर्दे की खराबी या उच्च रक्तचाप जैसी पुरानी बीमारियों से जूझ रहे हैं, उन्हें इसके अत्यधिक उपयोग से गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।

## ग्लाइसीराइज़िन के कारण शरीर में खनिज असंतुलन
आयुष विशेषज्ञ डॉ. राजकुमार के अनुसार, मुलेठी के भीतर ग्लाइसीराइज़िन नाम का एक खास सक्रिय यौगिक मौजूद होता है। यह तत्व जहां एक तरफ औषधीय गुणों के लिए जिम्मेदार है, वहीं दूसरी तरफ ज्यादा मात्रा में शरीर में पहुंचने पर जटिलताएं भी पैदा करता है। जब कोई व्यक्ति लगातार मुलेठी का सेवन करता है, तो ग्लाइसीराइज़िन के प्रभाव से शरीर में सोडियम और पानी रुकने लगता है, जिससे रक्तचाप अनियंत्रित होकर बढ़ सकता है।

इसके साथ ही शरीर में मौजूद जरूरी खनिज पोटैशियम का स्तर तेजी से नीचे गिरने लगता है। पोटैशियम हमारे शरीर की नसों और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज के लिए अनिवार्य माना जाता है। इस खनिज की कमी होने पर अत्यधिक थकावट, शारीरिक कमजोरी, मांसपेशियों में खिंचाव या ऐंठन और सिरदर्द जैसे लक्षण उभर आते हैं। कई मामलों में अत्यधिक पानी जमा होने के कारण पैरों और पंजों में सूजन भी देखी जा सकती है।

## प्राकृतिक होने का मतलब पूरी तरह सुरक्षित होना नहीं
जनमानस में यह धारणा बहुत गहरी है कि आयुर्वेदिक और कुदरती उपचारों का शरीर पर कोई दुष्परिणाम नहीं होता। यह सोच बेहद भ्रामक साबित हो सकती है, क्योंकि किसी भी प्राकृतिक तत्व की अत्यधिक मात्रा शरीर की कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती है। खासकर उच्च रक्तचाप की नियमित दवा ले रहे मरीजों को मुलेठी का दैनिक उपयोग करने से पहले बेहद सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि यह दवाओं के प्रभाव को प्रभावित कर सकती है।

गुर्दे या हृदय संबंधी विकारों का इलाज करा रहे व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय परामर्श के लंबे समय तक मुलेठी कभी नहीं लेनी चाहिए। जो लोग किसी अन्य पुरानी बीमारी की दवाएं ले रहे हैं, उन्हें भी अपनी दैनिक दिनचर्या में मुलेठी शामिल करने से पहले किसी योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से मिलकर इसकी सुरक्षित मात्रा की जानकारी अवश्य लेनी चाहिए।

## इसका आप पर असर
मुलेठी का अनियंत्रित और नियमित सेवन आपके ब्लड प्रेशर और इलेक्ट्रोलाइट्स के संतुलन को बिगाड़ सकता है।

- **आम उपभोक्ताओं के लिए:** मुलेठी को गले की दवा समझकर रोज खाना तुरंत बंद कर दें। केवल खांसी या गले में खराश होने पर ही सीमित समय के लिए इसका प्रयोग करें।
- **बीपी और दिल के मरीजों के लिए:** यह शरीर में सोडियम बढ़ाकर ब्लड प्रेशर को अचानक बढ़ा सकती है। अगर बीपी की दवा चल रही है, तो मुलेठी लेने से पहले अपने डॉक्टर की राय अवश्य लें।
- **मांसपेशियों और कमजोरी के संकेत:** अधिक सेवन से पोटैशियम घट सकता है जिससे कमजोरी और पैरों में सूजन आ सकती है। ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर मुलेठी लेना बंद करें और स्वास्थ्य जांच कराएं।
- **किडनी मरीजों के लिए:** शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने से गुर्दे पर दबाव बढ़ सकता है। किडनी से जुड़ी बीमारी वाले लोग इसके नियमित सेवन से पूरी तरह परहेज करें।

## ऐसा क्यों हुआ
मुलेठी में मौजूद सक्रिय यौगिक का शरीर के हार्मोन्स और मिनरल्स पर सीधा प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण इसके अधिक सेवन से दुष्प्रभाव सामने आते हैं।

- **सक्रिय घटक का प्रभाव:** मुलेठी में पाया जाने वाला ग्लाइसीराइज़िन यौगिक शरीर में पहुंचकर सोडियम और तरल पदार्थों के निष्कासन को बाधित कर देता है। इसके चलते शरीर में अतिरिक्त पानी जमा होने लगता है और रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ता है।
- **पोटैशियम का तेजी से ह्रास:** ग्लाइसीराइज़िन के कारण गुर्दे मूत्र के जरिए सामान्य से अधिक पोटैशियम बाहर निकालने लगते हैं। जब शरीर में इस आवश्यक खनिज की कमी होती है, तो मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर कमजोरी पैदा हो जाती है।
- **दवाओं के साथ नकारात्मक प्रतिक्रिया:** पहले से चल रही एलोपैथिक दवाओं, विशेष रूप से बीपी और हृदय की दवाओं के साथ मिलकर मुलेठी का रासायनिक प्रभाव अनपेक्षित जटिलताएं पैदा कर देता है। इसी कारण चिकित्सक बिना सलाह इसे लंबे समय तक न लेने की चेतावनी देते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. मुलेठी का मुख्य रूप से किस काम के लिए इस्तेमाल किया जाता है?
घरेलू नुस्खों में मुलेठी का इस्तेमाल आमतौर पर गले की खराश, खांसी और पाचन से जुड़ी सामान्य दिक्कतों से राहत पाने के लिए किया जाता है।

### 2. मुलेठी के अधिक सेवन से क्या नुकसान हो सकता है?
लगातार ज्यादा मुलेठी खाने से शरीर में सोडियम और पानी जमा होने लगता है, जिससे हाई ब्लड प्रेशर और पोटैशियम की कमी जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

### 3. मुलेठी में कौन सा तत्व स्वास्थ्य पर उल्टा असर डालता है?
मुलेठी में ग्लाइसीराइज़िन नाम का सक्रिय यौगिक होता है, जिसकी अधिक मात्रा शरीर में खनिज संतुलन बिगाड़कर परेशानियां खड़ी करती है।

### 4. किन मरीजों को मुलेठी खाने से पहले डॉक्टर की सलाह लेनी चाहिए?
हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग और किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों को मुलेठी का नियमित सेवन करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर लेना चाहिए।

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