# नैनीताल की सूखाताल रामलीला में मुस्लिम कलाकार दे रहे हैं अनूठी मिसाल, अनवर और नासिर निभा रहे हैं अहम किरदार

> नैनीताल की सूखाताल रामलीला में गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल देखने को मिलती है, जहां मुस्लिम समुदाय के कलाकार रामलीला के मंच पर भगवान श्रीराम के प्रसंगों को जीवंत कर रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/nainital-ki-sukhatal-ramlila-mein-muslim-kalakar-de-rahe-hain-anuthi-misal-47016 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीताल रामलीला, सूखाताल रामलीला, गंगा जमुनी तहजीब, उत्तराखंड संस्कृति, रामायण मंचन, अनवर रजा, नासिर अली

उत्तराखंड के नैनीताल में नवरात्र की शुरुआत के साथ ही रामलीला का मंचन धूमधाम से शुरू हो चुका है। यहां भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से जुड़े प्रसंगों को देखने के लिए बड़ी संख्या में दर्शक पहुंचते हैं। हालांकि, सरोवर नगरी नैनीताल की सूखाताल रामलीला की एक सबसे खास विशेषता है, जो इसे दूसरी जगहों से पूरी तरह अलग और खास बनाती है। इस मंच पर धर्म की दीवारों को दरकिनार करते हुए इंसानियत और भाईचारे का अनूठा संदेश दिया जाता है, जहां कला और आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।

## अनवर और नासिर निभाते हैं प्रमुख भूमिकाएं
इस ऐतिहासिक रामलीला में अनवर रजा केवट की भूमिका निभाते हैं और भगवान श्रीराम को नदी पार कराते हैं। वहीं दूसरी ओर, नासिर अली गुरु वशिष्ठ के रूप में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या का ज्ञान देते हैं। इसके अलावा, जावेद नाम के कलाकार भी ताड़का वध और नारद मोह जैसे महत्वपूर्ण प्रसंगों में अपने शानदार अभिनय से मंच पर जान फूंक देते हैं। इन सभी कलाकारों का प्रदर्शन दर्शकों के बीच हमेशा आकर्षण का केंद्र रहता है और लोग इनके अभिनय की जमकर सराहना करते हैं।

## दो दशकों से रामलीला का अटूट हिस्सा हैं नासिर अली
सूखाताल की इस रामलीला में नासिर अली पिछले 20 वर्षों से लगातार अलग-अलग किरदार निभाते आ रहे हैं। कभी वह मारीच की भूमिका में नजर आते हैं, तो कभी गुरु वशिष्ठ बनकर मर्यादा पुरुषोत्तम राम और लक्ष्मण को शिक्षा देते हैं। इतने लंबे समय से इस धार्मिक आयोजन से जुड़े नासिर के लिए यह केवल कोई नाटक खेलने जैसा नहीं है, बल्कि एक ऐसा कार्य है जिससे उन्हें मानसिक शांति और अपार खुशी मिलती है। उनका मानना है कि रामलीला के मंच पर जाति या धर्म से कहीं ज्यादा महत्व अपने किरदार के प्रति समर्पण और निष्ठा का होता है। यही कारण है कि वह हर साल पूरे उत्साह और लगन के साथ इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं।

## केवट की भूमिका में अनवर और जावेद के अभिनय का जादू
सूखाताल की रामलीला में अनवर रजा भी कई वर्षों से सक्रिय रूप से विभिन्न किरदार निभाते चले आ रहे हैं। वह मुख्य रूप से केवट और मुनि जैसे पात्रों को जीवंत करते हैं। रामायण की कथा के अनुसार केवट का प्रसंग भगवान श्रीराम के वनवास काल से जुड़ा हुआ है, जब वह अपनी नाव से श्रीराम को गंगा पार कराते हैं। जब अनवर मंच पर यह किरदार निभाते हैं, तो रामायण का वह पौराणिक प्रसंग दर्शकों के सामने बिल्कुल जीवंत हो उठता है। इसके अलावा जावेद भी रामलीला के बेहद अहम और लोकप्रिय कलाकारों में गिने जाते हैं। ताड़का वध और नारद मोह जैसे जटिल और रोमांचक दृश्यों में उनका अभिनय दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है।

## कला और संस्कृति के जरिए आपसी भाईचारे की मिसाल
नैनीताल में रामलीला के दौरान विभिन्न समुदायों के लोगों का इस तरह मिलकर काम करना कोई नई या अनोखी बात नहीं है। पिछले कई सालों से मुस्लिम समुदाय के लोग भी इसमें बढ़-चढ़कर अभिनय करते आ रहे हैं। मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन करने से लेकर पर्दे के पीछे की व्यवस्था और तैयारियों संभालने तक, हर कोई अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाता है। इस तरह की रामलीलाएं लोगों को आपस में जोड़ने और दिलों की दूरियां मिटाने का काम करती हैं। भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों में हमेशा न्याय, मर्यादा और सामाजिक सद्भाव का संदेश छिपा होता है, जिसे सूखाताल के ये कलाकार अपने शानदार अभिनय के जरिए जन-जन तक पहुंचा रहे हैं।

## इसका आप पर असर
यह आयोजन क्षेत्रीय स्तर पर आपसी भाईचारे और सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने का एक बड़ा उदाहरण प्रस्तुत करता है।

- **नैनीताल में:** स्थानीय लोग और पर्यटक इस अनोखे मंचन के जरिए धार्मिक सौहार्द और सांस्कृतिक मेलजोल की परंपरा का प्रत्यक्ष अनुभव करते हैं।
- **व्यापक प्रभाव:** यह आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों के बीच की दूरियों को मिटाकर सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से एकता का संदेश देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह परंपरा वर्षों के आपसी मेलजोल और सांस्कृतिक जुड़ाव के कारण विकसित हुई है, जहां स्थानीय कला को धर्म से ऊपर रखा जाता है।

- **स्थानीय परंपरा:** नैनीताल के सूखाताल क्षेत्र में विभिन्न समुदायों के लोग पीढ़ियों से मिलकर सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजनों में हिस्सा लेते आ रहे हैं।
- **कला का सम्मान:** यहां के आयोजनों में कलाकारों की योग्यता और उनके समर्पण को उनकी व्यक्तिगत धार्मिक पहचान से ज्यादा महत्व दिया जाता है।
- **सांस्कृतिक सद्भाव:** क्षेत्र का सामाजिक ताना-बाना आपसी भाईचारे और सामूहिक सहभागिता को बढ़ावा देता है, जिससे ऐसे आयोजनों को निरंतरता मिलती है।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीताल के किस स्थान पर यह रामलीला आयोजित होती है?
यह रामलीला नैनीताल के सूखाताल क्षेत्र में आयोजित की जाती है।

### 2. रामलीला में अनवर रजा कौन सा किरदार निभाते हैं?
अनवर रजा रामलीला में केवट का किरदार निभाते हैं।

### 3. नासिर अली कितने वर्षों से इस रामलीला से जुड़े हैं?
नासिर अली पिछले 20 वर्षों से सूखाताल की रामलीला में विभिन्न किरदार निभा रहे हैं।

### 4. नासिर अली मंच पर कौन सा मुख्य पात्र निभाते हैं?
नासिर अली गुरु वशिष्ठ की भूमिका में भगवान श्रीराम और लक्ष्मण को शस्त्र विद्या सिखाते हैं।

### 5. जावेद रामलीला में कौन से प्रसंगों में अभिनय करते हैं?
जावेद ताड़का वध और नारद मोह जैसे प्रसंगों में अपने अभिनय से हिस्सा लेते हैं।

## प्रेरणा और सबक
यह प्रसंग जीवन में कला, निष्ठा और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वपूर्ण सबक देता है।

- **धर्म से ऊपर कला:** किसी भी रचनात्मक या कलात्मक कार्य में व्यक्ति की पहचान उसकी प्रतिभा और समर्पण से होनी चाहिए, न कि उसकी पृष्ठभूमि से।
- **लंबे समय की प्रतिबद्धता:** नासिर अली की तरह दो दशकों तक किसी रचनात्मक कार्य से जुड़े रहना यह सिखाता है कि निरंतरता और लगन से सच्ची संतुष्टि मिलती है।
- **सामूहिक सद्भाव:** विभिन्न पृष्ठभूमियों के लोगों का मिलकर काम करना समाज में आपसी भाईचारे और शांति को मजबूत करता है।

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