# नैनीताल में नैनीझील का संतुलन बचाने को रोज निकाली जा रही कुंतलों मछलियां, खास प्रजातियों पर नियंत्रण

> नैनीताल की प्रसिद्ध नैनीझील में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए प्रशासन रोज कॉमन कार्प और बिग हेड प्रजाति की मछलियों को बाहर निकाल रहा है, जबकि महाशीर और सिल्वर कार्प जैसी प्रजातियों का संरक्षण किया जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-11-03 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/nainital-men-naini-lake-ka-sntulana-bachane-ko-roja-nikali-ja-rahi-kuntalon-machhaliyan-khasa-prajatiyon-para-niyntrana-55531 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीझील, नैनीताल, उत्तराखंड, मछली पालन, कॉमन कार्प, गोल्डन महाशीर, पंतनगर विश्वविद्यालय

उत्तराखंड के प्रमुख पर्यटन केंद्र नैनीताल में स्थित प्रसिद्ध नैनीझील के प्राकृतिक वातावरण और जलीय जीवन को सुरक्षित रखने के लिए एक विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य झील में कुछ आक्रामक और तेजी से पनपने वाली मछलियों की आबादी को सीमित करना है, जिससे झील का पारिस्थितिक तंत्र बिगड़ने से बचाया जा सके। इस प्रयास के अंतर्गत झील से प्रतिदिन बड़ी मात्रा में मछलियां पकड़ी जा रही हैं, जिनकी मात्रा कुंतलों में दर्ज की जा रही है। विशेष रूप से कॉमन कार्प और बिग हेड प्रजाति की मछलियों की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने झील के मूल जलीय संतुलन के समक्ष गंभीर चुनौती उत्पन्न कर दी है।

## झील के तल और पानी की गुणवत्ता पर असर
नैनीझील सिर्फ अपनी बाहरी सुंदरता या नौकायन के लिए ही महत्व नहीं रखती, बल्कि इसका अपना एक समृद्ध और संवेदनशील जलीय संसार है। जब कुछ खास प्रजातियों की तादाद अनियंत्रित रूप से बढ़ती है, तो वह दूसरी देशी प्रजातियों के अस्तित्व के लिए संकट बन जाती है। कॉमन कार्प मछली अपने स्वभाव के अनुसार भोजन की खोज में झील के तलहटी वाले हिस्से को खंगालती है। तलहटी में बार-बार की जाने वाली इस गतिविधि से वहां जमा गाद और जैविक संरचना उथल-पुथल की शिकार होती है। इस प्रक्रिया से पानी का मैलापन बढ़ता है, पारदर्शिता घटती है और जल की गुणवत्ता पर सीधा नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। साथ ही तलहटी में रहने वाले अन्य छोटे जलीय जीवों और देशी मछलियों के प्राकृतिक आवास नष्ट होने का खतरा उत्पन्न हो जाता है। दूसरी तरफ, बिग हेड मछली की अत्यधिक संख्या भी झील की संपूर्ण खाद्य शृंखला और जैव विविधता के लिए प्रतिकूल साबित हो रही है।

## मंगुरा मछली की मौजूदगी पर कड़ी नजर
कॉमन कार्प और बिग हेड को नियंत्रित करने के साथ-साथ जल संसाधन विभाग मंगुरा मछली को लेकर भी अत्यधिक सतर्कता बरत रहा है। मंगुरा मछली मांसाहारी प्रवृत्ति की मानी जाती है, जो स्थानीय जलीय जीवों के लिए बड़ा खतरा बन सकती है। ग्लोबल एक्वा ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी की विशेषज्ञ टीम झील के विभिन्न हिस्सों में इस प्रजाति की खोज और निगरानी में जुटी हुई है। विभाग के सुपरवाइजर आनंद सिंह कोरंगा ने स्पष्ट किया है कि नैनीझील के पारिस्थितिक तंत्र के लिए मंगुरा की उपस्थिति एक बड़ी चुनौती बन सकती है, जिसे समय रहते काबू करना आवश्यक है। निरंतर निगरानी के दौरान झील में अब तक केवल एक मंगुरा मछली दिखाई दी है, लेकिन पानी के भीतर अन्य संभावित मछलियों का पता लगाने के लिए खोजी अभियान लगातार जारी है।

## देशी प्रजातियों के संरक्षण के लिए 21 हजार मछलियां छोड़ी गईं
झील के पारिस्थितिक संतुलन को दोबारा पटरी पर लाने की यह कवायद केवल हानिकारक प्रजातियों को निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि वांछित और अनुकूल प्रजातियों के संवर्धन पर भी उतना ही जोर दिया जा रहा है। अक्टूबर 2026 में पंतनगर विश्वविद्यालय की विशेषज्ञ टीम ने नैनीझील के जल में लगभग 21 हजार मछलियों के बीज और छोटी मछलियां डाली थीं। इस संवर्धन कार्यक्रम के तहत 15 हजार सिल्वर कार्प, 5 हजार गोल्डन महाशीर और 1 हजार बुनियस प्रजाति की मछलियां झील के प्राकृतिक परिवेश में छोड़ी गईं। इस पूरी योजना का केंद्रबिंदु झील में जलीय विविधता का विस्तार करना और पानी को प्राकृतिक रूप से स्वच्छ बनाए रखने में मदद करने वाले जीवों को सुरक्षित फलने-फूलने का अवसर प्रदान करना है।

## संरक्षण और नियंत्रण के बीच संतुलन का प्रयास
झील प्रबंधन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह सुनिश्चित करना है कि पानी से मछलियां निकालने और नए बीज डालने के बीच एक वैज्ञानिक सामंजस्य बना रहे। सुपरवाइजर आनंद सिंह कोरंगा के अनुसार, बिग हेड, कॉमन कार्प और मंगुरा जैसी आक्रामक प्रजातियों की संख्या कम करने के साथ ही महाशीर, सिल्वर कार्प और चौकुनिया जैसी उपयोगी प्रजातियों के विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। झील से रोज निकाली जाने वाली मछलियों के वजन और उनकी प्रजातियों का नियमित रिकॉर्ड तैयार किया जा रहा है। विभागीय अधिकारियों का मानना है कि निरंतर निगरानी और समयबद्ध वैज्ञानिक हस्तक्षेप से ही नैनीझील के जल स्वास्थ्य और उसकी अनूठी जैव विविधता को दीर्घकाल तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

## इसका आप पर असर
नैनीझील में मछलियों की संख्या को संतुलित करने के इस अभियान का सीधा असर झील के पानी की स्वच्छता और स्थानीय पर्यावरण संरक्षण पर पड़ेगा।

- **भारत में:** प्राकृतिक झीलों और जलस्रोतों के संरक्षण के लिए काम करने वाले पर्यावरणविदों और शोधकर्ताओं के लिए यह एक महत्वपूर्ण उदाहरण है। देश भर में आक्रामक प्रजातियों से स्थानीय जैव विविधता को बचाने के लिए ऐसे वैज्ञानिक प्रबंधन मॉडल को लागू करने में मदद मिल सकती है।
- **नैनीताल में:** नैनीझील के पानी की गुणवत्ता सुधरने से स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को स्वच्छ वातावरण और बेहतर प्राकृतिक दृश्य मिलेगा। झील की तलहटी में गाद कम होने और पानी साफ रहने से नौकायन और पर्यटन से जुड़े स्थानीय कारोबारियों को दीर्घकालिक लाभ होगा।
- **जलीय जीवन पर प्रभाव:** गोल्डन महाशीर जैसी लुप्तप्राय और स्थानीय प्रजातियों को सुरक्षित पनपने का मौका मिलेगा। आक्रामक मछलियों के हटने से पानी के भीतर खाद्य संतुलन और प्राकृतिक आवास सुरक्षित रहेंगे।
- **शोध और प्रबंधन:** विश्वविद्यालय की टीमों और तकनीकी विशेषज्ञों की निगरानी से झील प्रबंधन में वैज्ञानिक डेटा का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा। इससे भविष्य में झील में किसी भी प्रजाति के अनियंत्रित फैलाव को समय रहते रोका जा सकेगा।

## ऐसा क्यों हुआ
नैनीझील में कुछ खास प्रजातियों की मछलियों की बेतहाशा बढ़ती संख्या ने पानी की गुणवत्ता और देशी जलीय जीवों के आवास के लिए गंभीर संकट पैदा कर दिया था।

- **आक्रामक प्रजातियों का व्यवहार:** कॉमन कार्प मछली भोजन की तलाश में झील की तलहटी को खंगालती है, जिससे गाद उठती है और पानी मैला होता है। इसके अलावा बिग हेड प्रजाति की अत्यधिक संख्या भी पूरे पारिस्थितिक तंत्र पर भारी पड़ रही थी।
- **मांसाहारी मंगुरा का खतरा:** झील में मांसाहारी मंगुरा मछली की उपस्थिति की आशंका ने खतरे को और बढ़ा दिया। यदि मंगुरा की संख्या बढ़ती है, तो वह दूसरी मछलियों और जलीय जीवों को खाकर स्थानीय विविधता को समाप्त कर सकती है।
- **देशी प्रजातियों के संरक्षण की जरूरत:** झील के प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने के लिए यह आवश्यक हो गया कि नुकसानदेह मछलियों को बाहर निकाला जाए और महाशीर जैसी अनुकूल प्रजातियों को पनपने का वातावरण दिया जाए।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीझील से प्रतिदिन कौन सी मछलियां निकाली जा रही हैं?
झील से मुख्य रूप से कॉमन कार्प और बिग हेड प्रजाति की मछलियों को प्रतिदिन कुंतलों के हिसाब से बाहर निकाला जा रहा है।

### 2. कॉमन कार्प मछली से झील को क्या नुकसान पहुंच रहा है?
कॉमन कार्प झील के तल में भोजन तलाशती है, जिससे वहां की तलछट और गाद फैलती है तथा पानी की गुणवत्ता व अन्य जीवों के आवास पर असर पड़ता है।

### 3. नैनीझील में मंगुरा मछली को लेकर क्या स्थिति है?
झील में अब तक केवल एक मंगुरा मछली देखी गई है, लेकिन इसकी मांसाहारी और आक्रामक प्रवृत्ति के कारण विशेष निगरानी टीम अन्य मछलियों की तलाश कर रही है।

### 4. झील में कितनी नई मछलियां छोड़ी गई थीं?
अक्टूबर 2026 में पंतनगर विश्वविद्यालय की टीम ने झील में 15 हजार सिल्वर कार्प, 5 हजार गोल्डन महाशीर और 1 हजार बुनियस समेत कुल 21 हजार मछलियां छोड़ी थीं।

### 5. झील में मंगुरा मछली की तलाश किस एजेंसी द्वारा की जा रही है?
ग्लोबल एक्वा ट्रीटमेंट टेक्नोलॉजी की ओर से झील के विभिन्न हिस्सों में मंगुरा मछली की निगरानी और खोज की जा रही है।

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