# उत्तराखंड के नैनीताल में बेटियों का कमाल, रामलीला के मंच पर भगवान राम और लक्ष्मण की भूमिका निभा रहीं बालिकाएं

> नैनीताल की ऐतिहासिक रामलीला में बेटियां सिर्फ महिला किरदार ही नहीं, बल्कि भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख पुरुष पात्रों को भी जीवंत कर रही हैं, जिससे महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल कायम हो रही है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/nainital-men-ramlila-ke-mncha-para-bhagavana-rama-aura-lakshmana-ki-bhumika-nibha-rahin-balikaen-48166 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीताल रामलीला, महिला सशक्तिकरण, श्री राम सेवक सभा, उत्तराखंड संस्कृति, रामायण मंचन

उत्तराखंड के नैनीताल शहर की ऐतिहासिक रामलीला अब धार्मिक आस्था के साथ-साथ महिला सशक्तिकरण का एक अनूठा केंद्र बनती जा रही है। मल्लीताल स्थित श्री राम सेवक सभा की इस रामलीला में मंच पर नजर आने वाले लगभग 70 प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं। खास बात यह है कि अब ये बेटियां केवल सीता, कैकेयी या मंदोदरी तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि भगवान राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे बड़े पुरुष किरदारों को भी पूरी शिद्दत के साथ निभा रही हैं। नैनीताल से शुरू हुई इस अनोखी परंपरा का असर अब कुमाऊं के दूसरे इलाकों की रामलीलाओं में भी साफ दिखाई देने लगा है, जो समाज में बदलते नजरिए और बालिकाओं के बढ़ते आत्मविश्वास को दर्शाता है।

## भगवान राम के रूप में अनुष्का कोहली का लंबा सफर
श्री राम सेवक सभा की रामलीला में भगवान राम का मुख्य किरदार निभाने वाली अनुष्का कोहली पिछले 14 वर्षों से इस मंच से जुड़ी हुई हैं और लगातार अभिनय कर रही हैं। उनके परिवार की अन्य बहनें भी इस सांस्कृतिक परंपरा का अहम हिस्सा हैं और अलग-अलग भूमिकाएं निभाकर इसे आगे बढ़ा रही हैं। अनुष्का ने साझा किया कि पहले उनकी चारों बहनें एक साथ रामलीला में अभिनय करती थीं, हालांकि इस साल किसी वजह से एक बहन मंचन का हिस्सा नहीं बन पाई हैं। उनकी एक बहन रामलीला में लक्ष्मण का किरदार निभाती हैं, जबकि दूसरी बहन शूर्पणखा, शबरी और कैकेयी जैसे विभिन्न पात्रों को मंच पर जीवंत करती हैं। उनके अनुसार, वक्त के साथ इस आयोजन में बालिकाओं की संख्या और उनकी भागीदारी में काफी इजाफा हुआ है और आज लड़कियां हर तरह के पुरुष पात्रों को भी पूरी खूबी के साथ निभा रही हैं। राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न जैसे प्रमुख किरदारों में बेटियों का यह अभिनय देखने आने वाले दर्शकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन गया है।

## सीता के रूप में अनुसूया वर्मा का अनुभव
रामलीला के मंच पर माता सीता का अहम किरदार निभा रही अनुसूया वर्मा पिछले तीन वर्षों से इस परंपरा का हिस्सा बनी हुई हैं। उनका कहना है कि श्री राम सेवक सभा के अंतर्गत रामलीला का पूरा माहौल बेहद सकारात्मक और encouraging है, जहां बालिकाओं को लगातार आगे बढ़ने और अपनी कला को दिखाने का पूरा अवसर मिलता है। अनुसूया बताती हैं कि उन्हें हर साल रामलीला का बेसब्री से इंतजार रहता है, क्योंकि इसके माध्यम से उन्हें अपनी अभिनय कला को प्रदर्शित करने का बेहतरीन मंच मिलता है। उनके विचार में, बालिकाएं हर तरह के किरदारों को पूरी कुशलता से निभा सकती हैं और ऐसे आयोजनों से उनका आत्मविश्वास काफी मजबूत होता है, जिससे उन्हें अपनी छिपी हुई क्षमताओं को समझने का मौका मिलता है।

## इतिहास और पुरानी परंपराओं की झलक
नैनीताल की यह रामलीला कोई नई नहीं है, बल्कि इसका इतिहास 129 साल पुराना है और एक समय ऐसा भी था जब इस मंच से अंग्रेजों के खिलाफ आवाज उठाई जाती थी। समय के इस लंबे सफर में इस मंच ने कई बदलाव देखे हैं। इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका अदा कर रही निवेदिता उप्रेती पहली बार एक कलाकार के रूप में इस मंच से जुड़ी हैं। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही नैनीताल की रामलीला देखती आ रही हैं और जब भी वह मंच पर लड़कियों को भगवान राम या लक्ष्मण जैसे बड़े पुरुष किरदार निभाते देखती थीं, तो उन्हें अंदर से काफी खुशी होती थी। इसी प्रेरणा से उन्होंने भी इस साल रामलीला में भाग लेने का पक्का मन बनाया।

## युवाओं के लिए प्रेरणा और महिलाओं की बढ़ती भागीदारी
निवेदिता उप्रेती ने बताया कि श्री राम सेवक सभा के सहयोग से उन्हें इस साल मंदोदरी का किरदार निभाने का मौका मिला, जिससे वह बेहद प्रसन्न हैं। उनका मानना है कि यह रामलीला महिलाओं को सशक्त बनाने के साथ-साथ उन्हें अपनी प्रतिभा को खुलकर सबके सामने लाने का एक सशक्त माध्यम प्रदान करती है। उन्होंने आज के युवाओं और Gen Z पीढ़ी से अपील की है कि उन्हें ऐसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेना चाहिए, ताकि हमारी प्राचीन परंपराएं भी सुरक्षित रहें और अपनी कला को भी निखारा जा सके। पिछले 30 से 40 वर्षों के अंतराल में महिलाओं की इस आयोजन में भागीदारी में अभूतपूर्व वृद्धि दर्ज की गई है।

## पार्वती बिष्ट और लीला ठठोला का योगदान
श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी मुकेश जोशी ‘मंटू’ इस बात पर रोशनी डालते हैं कि पिछले तीन से चार दशकों में महिलाओं और बालिकाओं की उपस्थिति इस रामलीला में बहुत तेजी से बढ़ी है। उन्होंने याद किया कि नैनीताल में पार्वती बिष्ट और लीला ठठोला जैसी कई महिलाओं ने अलग-अलग दशकों में रामलीला के मंच पर अपनी कला का प्रदर्शन किया है। स्थानीय बालिकाओं की इस लगातार सक्रिय भागीदारी ने इस सांस्कृतिक परंपरा को और अधिक मजबूती प्रदान की है। मुकेश जोशी के अनुसार, अब केवल नैनीताल तक ही नहीं, बल्कि आसपास के तमाम क्षेत्रों में होने वाली रामलीलाओं में भी महिलाएं और बेटियां प्रमुख किरदारों की भूमिका संभाल रही हैं। इसे समाज में आ रहे एक बड़े सकारात्मक बदलाव और महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर माना जा रहा है। यह बदलाव न केवल धार्मिक परंपराओं को एक नई ऊर्जा दे रहा है, बल्कि हमारी बेटियों को आगे बढ़ने के नए आसमान भी मुहैया करा रहा है।

## इसका आप पर असर
नैनीताल और कुमाऊं क्षेत्र के सांस्कृतिक आयोजनों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी समाज में लैंगिक रूढ़ियों को तोड़ने की दिशा में एक बड़ा व्यावहारिक बदलाव ला रही है।

- **उत्तराखंड में:** नैनीताल और आसपास के कुमाऊं क्षेत्रों में बालिकाओं के लिए सांस्कृतिक व मंच कलाओं में भाग लेने के नए रास्ते खुल रहे हैं। इससे स्थानीय स्तर पर लड़कियों का आत्मविश्वास और सार्वजनिक मंचों पर उनकी उपस्थिति मजबूत हो रही है।
- **भारत में:** यह पहल देश भर के पारंपरिक आयोजनों और धार्मिक उत्सवों में महिलाओं को मुख्य भूमिकाएं देने के लिए एक सकारात्मक प्रेरणा का काम करती है। इससे यह संदेश जाता है कि कला और संस्कृति के क्षेत्र में पारंपरिक भूमिकाओं की सीमाएं अब तेजी से टूट रही हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
रामलीला के मंच पर महिलाओं और बालिकाओं की बढ़ती यह भागीदारी दशकों के सामाजिक विकास और आयोजकों के बदलते दृष्टिकोण का परिणाम है।

- **बदलता सामाजिक दृष्टिकोण:** पिछले 30 से 40 वर्षों में समाज की सोच में आए सकारात्मक बदलाव के कारण महिलाओं को धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में खुलकर भाग लेने की अनुमति मिली है।
- **आयोजकों का प्रोत्साहन:** श्री राम सेवक सभा जैसे स्थानीय संगठनों द्वारा बालिकाओं को मंच पर आगे बढ़ाने और उनकी प्रतिभा को निखारने के लिए लगातार दिए जा रहे अवसरों ने इस बदलाव को संभव बनाया है।
- **युवाओं में प्रेरणा:** पुरानी पीढ़ियों की महिला कलाकारों जैसे पार्वती बिष्ट और लीला ठठोला के कार्यों से प्रेरणा लेकर आज की पीढ़ी की युवतियां और किशोरियां आगे आ रही हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीताल की इस रामलीला में कितने प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं?
मल्लीताल स्थित श्री राम सेवक सभा की रामलीला में करीब 70 प्रतिशत पात्रों की भूमिका बालिकाएं निभा रही हैं।

### 2. अनुष्का कोहली रामलीला के मंच पर कौन सा किरदार निभा रही हैं?
अनुष्का कोहली रामलीला में भगवान राम की भूमिका निभा रही हैं और वह पिछले 14 वर्षों से अभिनय कर रही हैं।

### 3. अनुसूया वर्मा पिछले कितने वर्षों से रामलीला का हिस्सा हैं?
अनुसूया वर्मा पिछले तीन वर्षों से रामलीला में माता सीता का किरदार निभा रही हैं।

### 4. इस वर्ष मंदोदरी का किरदार कौन निभा रहा है?
निवेदिता उप्रेती इस वर्ष रामलीला में मंदोदरी की भूमिका निभा रही हैं और वह पहली बार कलाकार के रूप में इसमें शामिल हुई हैं।

### 5. नैनीताल की रामलीला का इतिहास कितना पुराना है?
नैनीताल की यह ऐतिहासिक रामलीला 129 साल पुरानी है।

### 6. श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी कौन हैं जिन्होंने महिलाओं की भागीदारी पर बात की?
मुकेश जोशी 'मंटू' श्री राम सेवक सभा के पदाधिकारी हैं।

## प्रेरणा और सबक
नैनीताल की बालिकाओं और महिलाओं की यह यात्रा पारंपरिक सीमाओं को पार कर अपनी कला के दम पर पहचान बनाने का एक प्रेरणादायक उदाहरण पेश करती है।

- **भूमिका की कोई सीमा नहीं:** बेटियां अपनी क्षमता के बल पर पारंपरिक रूप से पुरुष माने जाने वाले किरदारों को भी पूरी उत्कृष्टता के साथ निभा सकती हैं।
- **संस्कृति के साथ जुड़ाव:** धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों में सक्रिय भागीदारी से न केवल परंपराएं सुरक्षित रहती हैं, बल्कि युवाओं का अपनी जड़ों से जुड़ाव भी मजबूत होता है।
- **आत्मविश्वास का निर्माण:** सार्वजनिक मंचों पर कला का प्रदर्शन करने से बालिकाओं का व्यक्तिगत आत्मविश्वास बढ़ता है और वे जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी नेतृत्व करने के लिए प्रेरित होती हैं।

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