नैनीताल में बारिश का बदला मिजाज, कुछ घंटों की तेज बौछारें क्यों बन रही हैं पहाड़ों के लिए बड़ा खतरा? उत्तराखंड के नैनीताल में बारिश का पैटर्न पूरी तरह बदल चुका है। स्थानीय लोग बताते हैं कि पहले जहां लगातार कई दिनों तक धीमी बारिश होती थी, वहीं अब कुछ घंटों की मूसलाधार बारिश से भूस्खलन और जलभराव का खतरा बढ़ गया है। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में इस बार मानसून का मिजाज पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। खासकर सरोवर नगरी नैनीताल में लगातार बरस रहे पानी ने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। शहर की सड़कें जलमग्न हो रही हैं और पहाड़ी इलाकों से पत्थरों के साथ मलबा खिसकने का गंभीर खतरा बना हुआ है। बादलों के इस आक्रामक तेवर को देखकर यहां के बाशिंदे भी हैरान और सहमे हुए हैं। लोगों का कहना है कि पूर्व के वर्षों में बारिश का दौर लंबा जरूर होता था, लेकिन उसकी रफ्तार इतनी विनाशकारी नहीं हुआ करती थी। अब महज कुछ ही घंटों की मूसलाधार बारिश से हालात विकट हो जाते हैं। सतझड़ का पुराना दौर और धीमी बौछारें नैनीताल के बुजुर्ग और पुराने बाशिंदे याद करते हैं कि पहले के समय में बरसात का मौसम बिल्कुल अलग हुआ करता था। उस दौर में बारिश लगातार पांच से सात दिनों तक खिंचती थी, जिसे स्थानीय बोलचाल में सतझड़ के नाम से जाना जाता था। हालांकि वह बारिश मूसलाधार नहीं होती थी। पानी रुक-रुककर और बेहद धीमी गति से बरसता था, जिसके कारण धरती को उस पानी को अपने भीतर समाने के लिए पर्याप्त वक्त मिल जाता था। पहाड़ों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव काफी धीमा और सीमित रहता था। स्थानीय लोगों के संस्मरण बताते हैं कि हफ्तों पानी गिरने के बावजूद अचानक जलभराव, तेज सैलाब और बड़े पैमाने पर भूस्खलन जैसी आपदाओं का खौफ नहीं सताता था। इसके विपरीत, आधुनिक दौर की बारिश बहुत कम समय में अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाती है, जिसका सीधा असर पहाड़ी ढलानों, नालों और रास्तों पर दिखाई देता है. स्थानीय लोगों के अनुभव और पुरानी यादें नैनीताल में जन्मे और पले-बढ़े अरुण जाटव अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए बताते हैं कि उन्होंने अपनी आंखों से यहां के मौसम का रूप बदलते देखा है। उनके मुताबिक, वर्तमान समय की बरसात का तरीका पुरानी बरसात से बिल्कुल जुदा है। पहले पांच से सात दिन तक रुक-रुककर धीमी गति से पानी बरसता था, जिसे स्थानीय भाषा में सतझड़ कहा जाता था। उस वक्त बादलों के गरजने पर भी इस तरह का डर मन में नहीं आता था। अब स्थिति यह है कि अचानक आसमान से भारी पानी बरसता है और कुछ ही पलों में जलस्तर तथा बहाव तेजी से बढ़ जाता है। इसी वजह से शहर के भीतरी इलाकों से लेकर आसपास की पटरियों तक भूस्खलन और संपत्ति के नुकसान की घटनाएं आम होने लगी हैं। पचास साल के सफर में मौसम का बदला रूप नैनीताल के एक अन्य निवासी परवेज खान ने अपने जीवन के करीब पचास साल इसी शहर में बिताए हैं और मौसम के मिजाज में आए हर बड़े बदलाव को बेहद करीब से महसूस किया है। उनका कहना है कि उन्होंने अपने जीवनकाल में कई तरह के उतार-चढ़ाव देखे हैं, जिनमें पर्यावरण और मौसम का यह बदलाव सबसे चिंताजनक है। परवेज खान का अनुभव है कि पहले पांच से सात दिनों तक चलने वाली बारिश बहुत मंद और अंतराल वाली हुआ करती थी। इसके विपरीत, आज के समय में बारिश की तीव्रता काफी आक्रामक हो चुकी है। कम अंतराल में बहुत ज्यादा पानी बरसने के कारण हर पल आपदा का खतरा मंडराता रहता है। उन्होंने साफ कहा कि मौजूदा दौर की यह तेज बारिश अब डरावनी लगने लगी है। होटल कारोबारियों और जानकारों की चिंता नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट भी इस बात से पूरी तरह इत्तेफाक रखते हैं कि मौसम के चरित्र में बड़ा बदलाव आया है। उनका जन्म भी इसी शहर में हुआ है और वे याद करते हैं कि पहले बारिश होने पर फिजा सुहावनी हो जाती थी। उस दौर में बारिश रुक-रुककर होती थी और सतझड़ के दिनों में भी फूहड़ जैसी धीमी बौछारें पड़ती थीं। दिग्विजय सिंह बिष्ट बताते हैं कि अब बारिश के पूरे स्वरूप में बुनियादी बदलाव आ चुका है। उनका मानना है कि यह सब क्लाइमेट चेंज का सीधा असर है जो पर्वतीय आबोहवा पर साफ झलक रहा है। अब कम वक्त में अत्यधिक पानी गिरने की वजह से बाढ़ जैसे हालात और भूस्खलन का खतरा कई गुना बढ़ गया है। पहाड़ों पर मंडराता नया और बड़ा संकट नैनीताल जैसे संवेदनशील पहाड़ी भूभाग में बारिश की मारक क्षमता का बढ़ना कई मोर्चों पर भारी चुनौतियों को जन्म दे रहा है। जब आसमान से बहुत तेजी से पानी गिरता है, तो पहाड़ों के प्राकृतिक जल निकास तंत्र पर भारी दबाव बन जाता है। इस दौरान सड़कें पूरी तरह डूब जाती हैं, नाले उफान पर आकर तबाही मचाते हैं और कमजोर हो चुकी ढलानों पर लैंडस्लाइड का जोखिम चरम पर पहुंच जाता है। स्थानीय निवासियों के ये सारे अनुभव महज मौसम बदलने की कहानी नहीं बयां करते, बल्कि पहाड़ों की पारिस्थितिकी को लेकर गहरी होती चिंता की ओर इशारा करते हैं। जहां एक ओर पहले कई दिनों की लगातार बारिश भी सामान्य और सहज लगती थी, वहीं आज कुछ ही घंटों की मूसलाधार बारिश लोगों की रातों की नींद उड़ाने के लिए काफी साबित हो रही है। इसका आप पर असर नैनीताल और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम के बदले मिजाज और मूसलाधार बारिश का यह बदलाव स्थानीय निवासियों और पर्यटकों के लिए गंभीर खतरे पैदा कर रहा है। • भारत में: देश के अन्य पहाड़ी राज्यों में भी कम समय में अत्यधिक बारिश होने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जिससे यात्रा करने वालों को सुरक्षा के कड़े उपाय अपनाने चाहिए। • नैनीताल में: नैनीताल और आसपास के इलाकों में अचानक होने वाले भूस्खलन और जलभराव के कारण सड़कों पर आवाजाही जोखिम भरी हो गई है, जिससे स्थानीय लोगों और पर्यटकों को सतर्क रहने की आवश्यकता है। सवाल-जवाब 1. नैनीताल में पहले बारिश का पैटर्न कैसा था? पहले नैनीताल में बारिश लगातार पांच से सात दिनों तक रुक-रुक कर और धीमी गति से होती थी, जिसे स्थानीय लोग 'सतझड़' कहते थे। 2. वर्तमान बारिश और पुरानी बारिश में क्या अंतर है? पहले जहां धीमी बारिश जमीन में आसानी से समा जाती थी, वहीं अब कुछ ही घंटों में बहुत तेज बारिश होने से जलभराव और भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। 3. अरुण जाटव ने नैनीताल की बारिश के बारे में क्या बताया है? अरुण जाटव का कहना है कि उनके बचपन के समय बारिश धीमी और लंबे समय तक होती थी, जबकि अब अचानक तेज बहाव और नुकसान की घटनाएं बढ़ने लगी हैं। 4. परवेज खान ने मौसम में आए किस बदलाव का जिक्र किया है? परवेज खान ने बताया कि पचास वर्षों के अपने अनुभव में उन्होंने देखा है कि अब बारिश की तीव्रता काफी बढ़ गई है और यह डरावनी लगने लगी है। 5. दिग्विजय सिंह बिष्ट के अनुसार इस बदलाव की क्या वजह है? नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट का मानना है कि मौसम के इस बदले स्वरूप के पीछे क्लाइमेट चेंज का असर है। https://trendkia.com/uttarakhand/nainitala-men-barisha-ka-badala-mijaja-kuchha-ghnton-ki-teja-bauchharen-kyon-bana-rahi-hain-paharon-ke-lie-bara-khatara-27615 TrendKia — Har trend, sabse pehle.