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  "title": "ऑनलाइन कारोबार की मार से हरिद्वार का ऐतिहासिक कटहरा बाजार खाली, कारोबारियों की बिक्री 90 फीसदी घटी",
  "summary": "हरिद्वार के ज्वालापुर स्थित सौ साल पुराने कटहरा बाजार में ई-कॉमर्स कंपनियों के बढ़ते प्रभाव के चलते करीब 90 प्रतिशत ग्राहक घट चुके हैं, जिससे त्योहारी सीजन में भी दुकानदार खाली बैठने को मजबूर हैं।",
  "content": "उत्तराखंड के धर्मनगरी हरिद्वार स्थित ज्वालापुर क्षेत्र का कटहरा बाजार जिले का सबसे बड़ा और एक सदी से भी अधिक पुराना व्यापारिक केंद्र रहा है। किसी दौर में कपड़े, गहने, बर्तन और दैनिक उपयोग की वस्तुओं की खरीदारी के लिए यह बाजार ग्राहकों से खचाखच भरा रहता था और यहां तिल रखने की भी जगह नहीं होती थी। वक्त के साथ ऑनलाइन शॉपिंग की बढ़ती लोकप्रियता ने इस ऐतिहासिक व्यापारिक केंद्र की आर्थिक रीढ़ को हिलाकर रख दिया है। अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसी डिजिटल कंपनियों के चलते इस परंपरागत बाजार की रौनक गायब हो गई है और दुकानदारों का कहना है कि उनके लगभग 90 प्रतिशत ग्राहक कम हो चुके हैं।\n\nसाल 2017 के बाद तेजी से बिगड़े हालात\nबाजार के स्थानीय कारोबारी अशोक गुप्ता, जो 1991 से अपनी पुश्तैनी दुकान चला रहे हैं, बताते हैं कि परंपरागत व्यापार में असली गिरावट साल 2017 के आसपास शुरू हुई। उनके मुताबिक बड़ी ऑनलाइन कंपनियों और विशाल स्टोरों के प्रसार ने छोटे व्यापारियों के सामने आजीविका का बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। चाय की पत्ती से लेकर किराना और गारमेंट्स तक का कारोबार सीमित उद्योगपतियों के नियंत्रण में जाने लगा है। उनका कहना है कि इस बदलाव से देश की पूंजी विदेशी कंपनियों के पास जा रही है, जबकि दशकों से स्थानीय अर्थव्यवस्था को संभालने वाले छोटे खुदरा व्यापारी अब त्योहारों के सीजन में भी ग्राहकों का इंतजार करने को मजबूर हैं।\n\nतस्वीरों के आकर्षण बनाम धरातल की गुणवत्ता\nअंग्रेजों के जमाने से चले आ रहे इस बाजार के एक अन्य कारोबारी वीरेंद्र अरोड़ा का मानना है कि ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर विज्ञापनों और एडिट की गई आकर्षक तस्वीरों के जरिए लोगों को लुभाया जा रहा है। उनका कहना है कि डिजिटल माध्यमों पर खरीदारी करने वाले ग्राहकों को कई बार वह गुणवत्ता नहीं मिलती जो स्क्रीन पर दिखाई देती है, और अक्सर सामान की बनावट को लेकर शिकायतें रहती हैं। इसके विपरीत, कटहरा बाजार जैसे पारंपरिक बाजारों में ग्राहक अपनी आंखों के सामने कपड़े और अन्य सामग्री को परखते थे और उचित मोलभाव के साथ वास्तविक उत्पाद खरीदते थे। डिजिटल माध्यमों की तेज रफ्तार ने त्योहारी दिनों में बाजारों में उमड़ने वाली भीड़ और सामाजिक जुड़ाव की रौनक को काफी हद तक छीन लिया है।\n\nकपड़ों के फैब्रिक की परख और स्थानीय कारोबार का भविष्य\nव्यापारी पौरुष अरोड़ा भी मानते हैं कि त्योहारी सीजन में भी दुकानों पर ग्राहकों की उपस्थिति काफी कम रह गई है। उनका कहना है कि ऑनलाइन मंचों पर कपड़ों का फैब्रिक, धागे की मजबूती और वास्तविक रंग का अंदाजा लगाना संभव नहीं होता। परंपरागत दुकानों में व्यापारी ग्राहक को सामान की पूरी जांच कराकर और संतुष्ट करके ही बेचते हैं, जिससे विश्वास का रिश्ता बनता था। डिजिटल युग की ओर लोगों के बढ़ते झुकाव की वजह से हरिद्वार जिले का यह सबसे पुराना और प्रतिष्ठित व्यापारिक केंद्र अब वीरान नजर आने लगा है, जिससे जुड़े सैकड़ों परिवारों की आजीविका पर गहरा असर पड़ रहा है।\n\nइसका आप पर असर\nई-कॉमर्स के तेजी से बढ़ते प्रसार के कारण स्थानीय खुदरा बाजार खाली हो रहे हैं, जिसका सीधा असर छोटे व्यापारियों और खरीदारों की जेब पर पड़ रहा है।\n\n• भारत में: डिजिटल शॉपिंग के चलते देश भर के पारंपरिक बाजारों से छोटे व्यापारियों का कारोबार बड़े कॉरपोरेट्स के हाथों में जा रहा है। इससे स्थानीय खुदरा दुकानों पर निर्भर लाखों कर्मचारियों और कारीगरों के रोजगार पर संकट गहरा रहा है।\n• हरिद्वार में: ज्वालापुर के कटहरा बाजार में दुकानों की बिक्री 90 फीसदी तक गिरने से पीढ़ियों से काम कर रहे दुकानदारों की आजीविका प्रभावित हो गई है। त्योहारी सीजन में भी स्थानीय बाजार सूने रहने से जिले की पारंपरिक आर्थिक व्यवस्था चरमरा रही है।\n• ग्राहकों के लिए: ऑनलाइन विज्ञापनों और फोटो देखकर ऑर्डर करने से लोगों को अक्सर खराब गुणवत्ता या गलत सामान मिलने की समस्या झेलनी पड़ रही है। दुकान पर जाकर सीधे कपड़े या सामान की जांच करने का विकल्प छूटने से उपभोक्ता संतुष्टि प्रभावित हो रही है।\n• कीमत और मोलभाव: पारंपरिक बाजारों में ग्राहकों को मौके पर परखने और बातचीत कर सही दाम तय करने की सुविधा मिलती है। ऑनलाइन माध्यमों पर छूट के बावजूद रिटर्न और एक्सचेंज की औपचारिकताओं में ग्राहकों का समय बर्बाद होता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nकटहरा बाजार में ग्राहकों की भारी कमी ई-कॉमर्स मंचों की बढ़ती पहुंच, आक्रामक छूट और खरीदारी की बदलती आदतों का सीधा नतीजा है।\n\n• ई-कॉमर्स का विस्तार: अमेजन, फ्लिपकार्ट और मीशो जैसे प्लेटफॉर्म्स ने घर बैठे डिलीवरी और आसान रिटर्न की सुविधा देकर ग्राहकों को बाजारों से दूर कर दिया है। साल 2017 के बाद इंटरनेट और स्मार्टफोन की सस्ती पहुंच ने इस प्रक्रिया को और तेज कर दिया।\n• आकर्षक विज्ञापन: डिजिटल मंचों पर एडिट की गई तस्वीरों और भारी छूट के विज्ञापनों ने ग्राहकों को आकर्षित किया है, जिससे पारंपरिक दुकानों पर जाने का चलन घट गया।\n• खरीदारी के तरीकों में बदलाव: नई पीढ़ी के ग्राहक समय बचाने के लिए डिजिटल ऑर्डरिंग को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिससे भौतिक बाजारों में सामान छूकर परखने की परंपरा कमजोर पड़ी है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. कटहरा बाजार कहां स्थित है और इसकी क्या खासियत है?\nकटहरा बाजार उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के ज्वालापुर क्षेत्र में स्थित है, जो 100 साल से भी अधिक पुराना और जिले का सबसे बड़ा व्यापारिक केंद्र है।\n\n2. कटहरा बाजार के व्यापारियों का कारोबार कितना घट गया है?\nस्थानीय व्यापारियों के अनुसार ऑनलाइन शॉपिंग कंपनियों के कारण बाजार से लगभग 90 फीसदी ग्राहक कम हो चुके हैं।\n\n3. व्यापारियों के अनुसार कारोबार में गिरावट कब से तेज हुई?\nदुकानदारों के मुताबिक साल 2017 के बाद बड़े ऑनलाइन मंचों और कॉर्पोरेट स्टोर्स के विस्तार से छोटे दुकानदारों का कारोबार तेजी से गिरा।\n\n4. व्यापारियों ने ऑनलाइन शॉपिंग की क्या कमियां बताई हैं?\nव्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन में कपड़ों का फैब्रिक और गुणवत्ता जांची नहीं जा सकती और विज्ञापनों की आकर्षक तस्वीरों के मुकाबले असल सामान अक्सर अलग निकलता है।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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