# निठारी कांड से बरी सुरेंद्र कोली हरिद्वार के चाय खोखे में मृत मिला, पुलिस कर रही जांच

> नोएडा के कुख्यात निठारी कांड के आरोपी सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय की दुकान में फंदे से लटका पाया गया है, जिसकी पुलिस गहनता से जांच कर रही है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/nithari-kand-se-bari-surendra-koli-haridwar-ke-chai-khokhe-mein-mrit-mila-police-kar-rahi-jaanch-33210 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुरेंद्र कोली, हरिद्वार, निठारी कांड, आत्महत्या मामला, भूपतवाला, नोएडा पुलिस

नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड से बरी हो चुके सुरेंद्र कोली का शव शुक्रवार सुबह हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक चाय के खोखे के भीतर फंदे से लटका मिला। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। करीब दो दशक तक जेल में रहने के बाद हाल ही में देश की शीर्ष अदालत से बरी होने वाले कोली की इस तरह हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद पुलिस हर संभावित पहलू को ध्यान में रखकर मामले की तफ्तीश में जुट गई है।

## हरिद्वार के चाय खोखे में मिला शव
शुक्रवार की सुबह हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में उस समय हड़कंप मच गया जब स्थानीय लोगों को एक चाय के खोखे के भीतर कुछ संदिग्ध गतिविधि का आभास हुआ। इसकी सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस टीम जब खोखे के अंदर दाखिल हुई, तो वहां सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका हुआ पाया गया। शहर कोतवाल कुंदन सिंह राणा ने बताया कि पुलिस शुरुआती जांच में इसे आत्महत्या का मामला मानकर चल रही है, लेकिन मौत की वास्तविक वजहों का पता लगाने के लिए शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। घटना स्थल से पुलिस को कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है, जिससे उसकी मौत की गुत्थी और उलझ गई है।

## बरी होने के बाद गुमनामी की जिंदगी
जेल से रिहा होने के बाद सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार को अपना ठिकाना बनाया था और वह यहां पूरी तरह गुमनामी की जिंदगी बसर कर रहा था। वह भूपतवाला इलाके में स्थित एक छोटी सी चाय की दुकान यानी खोखे पर काम करता था और उसी से मिलने वाले पैसों से अपना गुजारा चला रहा था। वह इस दुकान के पास ही बनी एक झुग्गी में रहता था ताकि किसी की नजरों में न आ सके। पुलिस अब इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि कोली जेल से छूटने के बाद कब हरिद्वार आया था, वह यहां किसके संपर्क में था और कितने समय से इस चाय की दुकान पर काम कर रहा था।

## निठारी कांड का खौफनाक इतिहास
साल 2006 में नोएडा के निठारी गांव में नाले के पास से भारी मात्रा में बच्चों और महिलाओं के कंकाल, मानव अवशेष और कपड़े बरामद हुए थे, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था। इस बेहद वीभत्स मामले में सुरेंद्र कोली और उसके मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर को मुख्य आरोपी बनाया गया था। इन दोनों पर हत्या, बलात्कार और नरभक्षण जैसे बेहद संगीन आरोप लगे थे। इस कांड के खुलासे के बाद देश भर में भारी आक्रोश पैदा हुआ था और यह मामला सालों तक देश की विभिन्न अदालतों में चलता रहा।

## नवंबर 2025 में मिली थी पूरी राहत
सुरेंद्र कोली को निचली अदालतों से कई मामलों में मौत की सजा सुनाई गई थी, लेकिन लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने उसके खिलाफ लंबित अंतिम मामले में भी दोषसिद्धि को पूरी तरह से खारिज कर दिया था। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद कोली के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया था और वह बरी होकर बाहर आ गया था। सालों जेल की सलाखों के पीछे रहने के बाद बाहर आया कोली खुली हवा में एक साल भी पूरा नहीं जी सका और रहस्यमयी परिस्थितियों में उसकी जीवनलीला समाप्त हो गई। पुलिस को अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है ताकि मौत के सटीक समय और कारणों का खुलासा हो सके।

## इसका आप पर असर
सुरेंद्र कोली की रहस्यमयी परिस्थितियों में हुई मौत लंबे समय तक कैद में रहने के बाद बरी हुए व्यक्तियों के सामाजिक पुनर्वास और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर ध्यान आकर्षित करती है।

- **पुनर्वास की चुनौतियां:** गंभीर मामलों में बरी होने के बाद भी पूर्व कैदियों के लिए समाज में दोबारा जगह बनाना बेहद कठिन होता है। वे अक्सर भारी अकेलेपन और आर्थिक तंगी का सामना करते हैं, जिससे उनके मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ता है।
- **सुरक्षा और कानून व्यवस्था:** हाई-प्रोफाइल मामलों से जुड़े व्यक्तियों की रिहाई के बाद उनकी गतिविधियों पर निगरानी रखना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि क्या उनकी सुरक्षा या स्थानीय स्तर पर कोई अन्य बाहरी कारक इस घटना के पीछे जिम्मेदार था।
- **पीड़ित परिवारों के लिए कानूनी समापन:** निठारी कांड के पीड़ितों के परिवारों के लिए यह घटना इस दर्दनाक इतिहास के एक बड़े किरदार के जीवन के अंत को दर्शाती है। हालांकि, मौत के कारणों पर स्पष्टता न होने से कानूनी बहसें जारी रह सकती हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
सुरेंद्र कोली की मौत जेल से रिहाई के बाद उसके एकांत जीवन, अत्यधिक गुमनामी और संभावित मानसिक तनाव के कारण हुई प्रतीत होती है।

- **न्यायिक बरी होने के बाद का तनाव:** नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट से बरी होने के बाद कोली ने हरिद्वार में एक छोटे से चाय के खोखे पर काम करना शुरू किया था। एक बेहद खूंखार अतीत के साए में शून्य से जीवन शुरू करने का दबाव और सामाजिक अलगाव मानसिक तनाव का मुख्य कारण हो सकता है।
- **आत्महत्या की प्रारंभिक आशंका:** प्राथमिक पुलिस जांच में घटना स्थल पर किसी बाहरी संघर्ष के निशान नहीं मिले हैं, जिसके आधार पर इसे फांसी लगाकर की गई आत्महत्या माना जा रहा है। हालांकि, पुलिस को अभी तक कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।
- **अंतिम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार:** मौत के सही समय और किसी संभावित साजिश की आशंका को खारिज करने के लिए पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आने का इंतजार कर रही है।

## सवाल-जवाब

### 1. सुरेंद्र कोली कौन था?
सुरेंद्र कोली साल 2006 के नोएडा निठारी कांड का मुख्य आरोपी था, जिस पर कई गंभीर हत्याओं और बलात्कार के आरोप लगे थे।

### 2. कोली का शव कहां और किस स्थिति में मिला?
सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार के भूपतवाला इलाके में एक चाय के खोखे के भीतर फंदे से लटका हुआ पाया गया।

### 3. निठारी कांड में कोली को कब बरी किया गया था?
सुप्रीम कोर्ट ने नवंबर 2025 में सुरेंद्र कोली को निठारी कांड से जुड़े आखिरी लंबित मामले में भी दोषमुक्त कर बरी कर दिया था।

### 4. क्या पुलिस को घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट मिला है?
नहीं, पुलिस को घटना स्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है।

### 5. सुरेंद्र कोली बरी होने के बाद क्या काम कर रहा था?
वह हरिद्वार के भूपतवाला क्षेत्र में एक छोटी सी चाय की दुकान पर काम करके अपना गुजारा कर रहा था और पास की झुग्गी में रहता था।

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