निठारी मामले के आरोपी सुरेंद्र कोली ने हरिद्वार में की खुदकुशी, आखिरी फोन कॉल में बयां किया था आर्थिक तंगी का दर्द नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी रहे सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में उनकी चाय की दुकान में फंदे से लटका मिला, मरने से ठीक पहले उन्होंने आर्थिक बेबसी जताई थी। नोएडा के बहुचर्चित निठारी कांड के आरोपी 50 वर्षीय सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में मिला है। पुलिस की शुरुआती जांच में सामने आया है कि उसने फांसी लगाकर अपनी जीवनलीला समाप्त कर ली। अपनी गुजर-बसर के लिए हाईवे के किनारे एक छोटी सी चाय की टपरी चलाने वाले कोली ने मौत को गले लगाने से पहले अपने एक पुराने मददगार को फोन किया था। इस फोन कॉल पर उसने अपनी लाचारी और गंभीर आर्थिक तंगी का जिक्र किया था, लेकिन जब तक कोई उसकी मदद के लिए कदम उठा पाता, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आखिरी फोन कॉल और आर्थिक तंगी का दबाव अपनी जान देने से पहले सुरेंद्र कोली भारी मानसिक और आर्थिक तनाव से गुजर रहा था। अत्यंत परेशान होकर उसने अपने पुराने परिचित और पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत को फोन मिलाया। कोली ने रावत को बताया कि चाय के खोखे का मालिक पैसों के लिए उस पर लगातार दबाव बना रहा है और उसे परेशान कर रहा है। कोली की इस बेबसी को सुनने के बाद जब तक उसका कोई मददगार कुछ समझ पाता या उसकी सहायता के लिए पहुंच पाता, अगली सुबह वह अपनी ही चाय की टपरी में मृत अवस्था में पाया गया। पुलिस की तफ्तीश और मौके से मिले हालात यह दुखद घटना हरिद्वार के एक हाईवे के किनारे स्थित चाय की दुकान के अंदर हुई। शुक्रवार दोपहर को वहां से गुजरने वाले कुछ राहगीरों ने कोली के शव को फंदे से लटका हुआ देखा, जिसके बाद तुरंत स्थानीय पुलिस को सूचित किया गया। हरिद्वार सिटी के सर्कल ऑफिसर शिशुपाल सिंह नेगी ने इस संबंध में बताया कि जानकारी मिलते ही पुलिस की एक टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को फंदे से नीचे उतारा। घटनास्थल की बारीकी से जांच करने और वैज्ञानिक साक्ष्य जुटाने के लिए एक फोरेंसिक टीम को भी मौके पर भेजा गया था। अधिकारी नेगी के अनुसार, प्रथम दृष्टया यह मामला आत्महत्या का लग रहा है, हालांकि मृतक के कपड़ों या दुकान के अंदर से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। नई शुरुआत की एक नाकाम कोशिश पिछले साल नवंबर महीने में देश की सुप्रीम कोर्ट ने आखिरी मामले में सुरेंद्र कोली को बरी कर दिया था। जेल से बाहर आने के बाद कोली ने अपनी रोजी-रोटी कमाने के लिए करीब 10 दिन पहले ही हरिद्वार में चाय की एक छोटी सी टपरी शुरू की थी। वह इसी टपरी में काम करता था और रात को यहीं सोता भी था। लेकिन दुकान के मालिक द्वारा किराये और पैसों की लगातार मांग और अपनी लाचारी के कारण वह इस कदर टूट गया कि उसने मौत का रास्ता चुन लिया। इसका आप पर असर यह दुखद घटना समाज में बरी हो चुके कैदियों के पुनर्वास और उनके मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी गंभीर चुनौतियों को उजागर करती है, जो सीधे तौर पर सामाजिक सुरक्षा को प्रभावित करती हैं। • पुनर्वास की चुनौतियां: लंबे समय तक जेल में रहने के बाद समाज में दोबारा पहचान बनाना और आर्थिक रूप से खड़ा होना बेहद मुश्किल होता है। बरी हुए लोगों को मुख्यधारा में लाने के लिए सामाजिक और सरकारी मदद बेहद जरूरी है। • मानसिक स्वास्थ्य और सहायता: अत्यधिक आर्थिक तंगी और अकेलापन किसी को भी गंभीर मानसिक तनाव में धकेल सकता है। संकट के समय राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबरों से मदद लेना जीवन बचा सकता है। • किराएदारों के अधिकार: छोटे व्यवसायियों या टपरी चलाने वालों को अपने कानूनी अधिकारों के प्रति जागरूक होना चाहिए। मकान या दुकान मालिक के अत्यधिक दबाव के खिलाफ स्थानीय पुलिस या कानूनी सलाहकारों की मदद ली जा सकती है। ऐसा क्यों हुआ यह दुखद अंत अचानक आए आर्थिक संकट, टपरी के मालिक के दबाव और समाज में दोबारा स्थापित होने के संघर्ष के कारण हुआ। • आर्थिक लाचारी: कोली ने मात्र 10 दिन पहले ही अपनी चाय की टपरी शुरू की थी, जिससे वह पर्याप्त कमाई नहीं कर पा रहा था। दुकान मालिक द्वारा किराये और पैसों की लगातार मांग ने उस पर भारी आर्थिक दबाव बना दिया। • सामाजिक अलगाव: चर्चित निठारी मामले से जुड़े होने के कारण, बरी होने के बावजूद कोली के पास कोई सामाजिक सहारा या परिवार का साथ नहीं था। इस अकेलेपन ने उसकी बेबसी को और बढ़ा दिया। • किराये को लेकर प्रताड़ना: आखिरी समय में टपरी के मालिक द्वारा रुपयों के लिए किए जा रहे तगादे ने कोली को पूरी तरह से लाचार महसूस कराया, जिसके बाद उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। सवाल-जवाब 1. सुरेंद्र कोली कौन था? सुरेंद्र कोली नोएडा के चर्चित निठारी कांड का आरोपी था, जिसे पिछले साल नवंबर में सुप्रीम कोर्ट ने उसके आखिरी मामले में बरी कर दिया था। 2. कोली का शव कब और कहां मिला? कोली का शव शुक्रवार दोपहर को हरिद्वार में एक हाईवे के किनारे स्थित उसकी चाय की टपरी के अंदर लटका हुआ मिला। 3. कोली ने अपने आखिरी फोन कॉल में क्या कहा था? अपने परिचित नारायण सिंह रावत को किए गए आखिरी फोन कॉल में कोली ने कहा था कि टपरी का मालिक पैसों के लिए उसे परेशान कर रहा है। 4. क्या पुलिस को कोई सुसाइड नोट मिला है? नहीं, पुलिस को कोली के कपड़ों या दुकान के अंदर से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है, हालांकि शुरुआती जांच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है। https://trendkia.com/uttarakhand/nithari-mamale-ke-aropi-surendra-koli-ne-haridwar-men-ki-khudakushi-akhiri-phona-kola-men-bayan-kiya-tha-arthika-tngi-ka-darda-33254 TrendKia — Har trend, sabse pehle.