निठारी मामले के मुख्य अभियुक्त सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में फंदे से लटका मिला, परिवार ने जताई हत्या की आशंका हरिद्वार में एक चाय की दुकान में संदिग्ध हालत में मिले सुरेंद्र कोली के शव को लेकर परिजनों ने निष्पक्ष जांच की मांग की है, जबकि पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रही है। कुख्यात निठारी हत्याकांड के केंद्र में रहे सुरेंद्र कोली का शव उत्तराखंड के हरिद्वार में एक चाय की टपरी के भीतर संदिग्ध दशा में फंदे से झूलता पाया गया। शुक्रवार को सामने आई इस अनहोनी के बाद शनिवार को शव परीक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई। इस घटना की जानकारी मिलते ही कोली का बेटा, उसका बड़ा भाई तथा उनके पैतृक गांव से जुड़े करीब चार से पांच अन्य ग्रामीण सीधे हरिद्वार स्थित मोर्चरी पहुंच गए। घटना के सामने आते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई है और वर्षों पुराने चर्चित मामले की परतें एक बार फिर लोगों के जेहन में ताजा हो गई हैं। परिजनों ने उठाए सवाल और निष्पक्ष जांच की उठाई मांग इस अप्रत्याशित मौत को लेकर सुरेंद्र कोली के पारिवारिक सदस्यों तथा पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने गंभीर संदेह व्यक्त किए हैं। परिजनों का साफ दावा है कि यह आत्महत्या का मामला नहीं हो सकता, बल्कि इसके पीछे गहरी साजिश और सुनियोजित कत्ल का अंदेशा है। उनका कहना है कि जिस मुद्रा और जिन परिस्थितियों के बीच शव बरामद हुआ है, वे खुद कई अनुत्तरित सवाल खड़े कर रही हैं। प्रारंभिक नजरिए से देखने पर यह पूरी तरह कत्ल का मामला महसूस होता है। इसी आधार पर उन्होंने समूचे घटनाक्रम की पारदर्शी और निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने का आग्रह किया है। दूसरी तरफ स्थानीय पुलिस अधिकारियों का कहना है कि छानबीन आगे बढ़ाई जा रही है और डॉक्टरों के पैनल द्वारा तैयार की जाने वाली पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के पश्चात ही मौत के वास्तविक कारणों का खुलासा हो सकेगा। नोएडा की डी-5 कोठी और रोंगटे खड़े करने वाले खुलासे यह पूरा विवाद नोएडा के चर्चित निठारी गांव से जुड़ा है, जहां कारोबारी मोनिंदर सिंह पंढेर के बंगले डी-5 के पास मौजूद नाले से भारी मात्रा में नरकंकाल, इंसानी खोपड़ियां और मासूमों के अवशेष बरामद किए गए थे। पंढेर के घर पर घरेलू सहायक के रूप में कार्यरत सुरेंद्र कोली पर ही इन जघन्य कृत्यों को अंजाम देने का सीधा आरोप लगा था। कोली पर बच्चों और महिलाओं के अपहरण, यौन उत्पीड़न, बर्बर कत्ल और नरभक्षण जैसे दिल दहला देने वाले संगीन आरोप दर्ज हुए थे। केंद्रीय जांच ब्यूरो ने अलग-अलग दर्ज प्रकरणों में आरोप पत्र पेश किए थे, जिसके आधार पर विशेष अदालत ने उसे मृत्युदंड का फैसला सुनाया था। हालांकि बाद के कानूनी घटनाक्रम में साक्ष्यों के अभाव के चलते उच्च न्यायालय से उसे कई मुकदमों में राहत भी मिल चुकी थी। कैसे हुआ था इस खौफनाक सिलसिले का पर्दाफाश साल 2005 से 2006 के दौरान निठारी इलाके से अचानक कई छोटे बच्चे और महिलाएं रहस्यमयी तरीके से लापता होने लगे थे। शुरुआती दौर में स्थानीय थाने की पुलिस ने दर्ज कराई गई गुमशुदगी की शिकायतों पर कतई ध्यान नहीं दिया और इन्हें मामूली मानकर नजरअंदाज करती रही। इस पूरे स्याह सच से पर्दा तब उठा जब 'पायल' नाम की एक लड़की अचानक लापता हो गई। लापता पायल के पिता द्वारा दी गई शिकायत के बाद जब पुलिस टीम ने उसके मोबाइल की तकनीकी जांच, कॉल डिटेल रिकॉर्ड और टावर लोकेशन की पड़ताल की, तो फोन की आखिरी उपस्थिति मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के इर्द-गिर्द केंद्रित मिली। इसी सुराग के आधार पर 29 दिसंबर 2006 को पुलिस ने कोठी के ठीक पीछे बहने वाले गंदे नाले में सघन सफाई और खुदाई का अभियान शुरू कराया। नाले की तलहटी से पुलिस को सिलसिलेवार ढंग से 19 नरकंकाल, खोपड़ियां और बच्चों के फटे-पुराने कपड़े मिले। इस खौफनाक बरामदगी के तुरंत बाद पुलिस ने कोठी मालिक मोनिंदर सिंह पंढेर और उसके नौकर सुरेंद्र कोली को हिरासत में ले लिया। गहन पूछताछ के दौरान कोली ने मासूमों के अपहरण, दुष्कर्म, नृशंस हत्या और नरभक्षण से जुड़े अपने गुनाहों का इकबाल किया था। अदालती मुकदमों और फैसलों का पूरा कालक्रम इस मामले के कानूनी उतार-चढ़ाव का विवरण वर्षों तक विभिन्न अदालतों में चला • 2005 से 2006 का दौर: निठारी गांव के अनेक परिवारों के बच्चे और महिलाएं लगातार गायब होते रहे। • 29 दिसंबर 2006: कोठी के नाले से नरकंकाल बरामद किए गए और पुलिस ने मोनिंदर सिंह पंढेर व सुरेंद्र कोली को दबोच लिया। • 11 जनवरी 2007: मामले की भयावहता और पुलिस महकमे की भारी लापरवाही के मद्देनजर पूरी जांच सीबीआई के हवाले कर दी गई। • मई 2007: केंद्रीय जांच एजेंसी ने रिमपा हलदर मामले में अपनी पहली औपचारिक चार्जशीट दाखिल की। • 13 फरवरी 2009: गाजियाबाद स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने रिमपा हलदर हत्याकांड में कोली और पंढेर दोनों को दोषी मानते हुए फांसी की सजा का ऐलान किया। • सितंबर 2009: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंढेर को इस मामले में दोषमुक्त करार दिया, जबकि सुरेंद्र कोली के मृत्युदंड को यथावत बनाए रखा। • 2010 से 2014: देश की शीर्ष अदालत ने कोली की फांसी की सजा पर मुहर लगाई, जिसके बाद राष्ट्रपति भवन ने भी उसकी दया याचिका खारिज कर दी। • 2015 से 2022: गाजियाबाद की सीबीआई अदालत ने भिन्न-भिन्न मुकदमों का निपटारा करते हुए कोली को 12 से अधिक मुकदमों में मृत्युदंड दिया, जबकि कुछ प्रकरणों में पंढेर भी मुजरिम ठहराया गया। • 16 अक्टूबर 2023: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक युगांतरकारी निर्णय देते हुए कोली को 12 मामलों में और पंढेर को 2 मामलों में पूरी तरह बरी कर दिया। अदालत ने पाया कि अभियोजन पक्ष परिस्थितियों पर आधारित साक्ष्यों की कड़ी साबित करने में पूरी तरह नाकाम रहा और जांच प्रक्रिया में भारी खामियां थीं। गवाहों के बयानों में भारी विरोधाभास और ठोस सबूतों की कमी के चलते उन्हें रिहा करने का आदेश दिया गया। इसका आप पर असर निठारी हत्याकांड के मुख्य आरोपी की संदिग्ध मौत देश की आपराधिक न्याय प्रणाली और साक्ष्य सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है। • देशभर में: यह घटना दिखाती है कि लंबे समय तक चलने वाले जघन्य आपराधिक मामलों में जांच की कमजोरियां किस तरह न्याय प्रक्रिया को प्रभावित करती हैं। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियों की कार्यप्रणाली और गवाहों व आरोपियों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठना लाजिमी है। • हरिद्वार और नोएडा में: हरिद्वार में पुलिस प्रशासन के लिए शव परीक्षण और निष्पक्ष जांच के जरिए मौत की असल वजह उजागर करना प्राथमिकता बन गया है। वहीं नोएडा के निठारी गांव के पीड़ित परिवारों के लिए वर्षों पुरानी दुखद यादें और न्याय की अधूरी उम्मीदें फिर चर्चा में आ गई हैं। • जांच प्रक्रिया पर प्रभाव: संदिग्ध मौत के बाद परिजनों द्वारा उठाए गए कत्ल के दावों की मजिस्ट्रियल या पुलिस जांच जरूरी हो गई है। जब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं होती, तब तक मौत की गुत्थी को लेकर प्रशासनिक दबाव बना रहेगा। • आम नागरिकों के लिए: यह मामला नागरिकों को सतर्क करता है कि लापता व्यक्तियों की शिकायतों पर पुलिस की तत्परता कितनी महत्वपूर्ण होती है। समय रहते कदम न उठाए जाने से होने वाले दुष्परिणामों को रोकने के लिए प्रशासनिक जवाबदेही बेहद आवश्यक है। ऐसा क्यों हुआ हरिद्वार में एक चाय की टपरी के भीतर सुरेंद्र कोली का शव फंदे से लटका मिला, जिससे यह घटनाक्रम शुरू हुआ। इस मौत के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर परिजनों और स्थानीय प्रशासन के बीच परस्पर विरोधी बातें सामने आई हैं। • शव का संदिग्ध बरामदगी स्थल: सुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार की एक चाय की दुकान में फंदे से लटकता पाया गया, जिसे देखकर परिजनों ने आत्महत्या मानने से इनकार कर दिया। परिजनों का तर्क है कि हालात और शव की स्थिति सामान्य आत्महत्या की ओर इशारा नहीं करते। • हत्या की आशंका और जांच की मांग: मृतक के परिवार और पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने इसे सोची-समझी हत्या करार दिया है। उन्होंने आरोप लगाया कि निष्पक्ष और विस्तृत जांच के बिना मामले को खुदकुशी मान लेना गलत होगा। • पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर निर्भरता: स्थानीय पुलिस ने स्पष्ट किया है कि मौत का सटीक कारण अभी प्रमाणित नहीं हुआ है। डॉक्टरों के पैनल द्वारा किए जाने वाले पोस्टमार्टम के नतीजे आने के बाद ही स्थिति साफ हो सकेगी। • अदालती फैसलों की पृष्ठभूमि: इलाहाबाद हाईकोर्ट द्वारा अक्टूबर 2023 में 12 मुकदमों से बरी किए जाने के बाद कोली कानूनी राहत पा चुका था। रिहाई के बाद उसकी इस तरह संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई नए सवालों को जन्म दे दिया है। सवाल-जवाब 1. सुरेंद्र कोली का शव कहां और किस स्थिति में मिला? सुरेंद्र कोली का शव उत्तराखंड के हरिद्वार में एक चाय की टपरी के अंदर फंदे से लटकती संदिग्ध अवस्था में बरामद हुआ। 2. कोली के परिवार वालों का इस मौत पर क्या कहना है? परिजनों ने इसे आत्महत्या मानने से इनकार करते हुए हत्या की आशंका जताई है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। 3. पुलिस ने सुरेंद्र कोली की मौत के संबंध में क्या बयान दिया है? पुलिस के अनुसार मामले की जांच की जा रही है और पोस्टमार्टम रिपोर्ट सामने आने के बाद ही मौत की असली वजह स्पष्ट हो पाएगी। 4. निठारी हत्याकांड का खुलासा किस मामले की जांच के दौरान हुआ था? निठारी कांड का खुलासा 'पायल' नाम की एक लापता युवती के मोबाइल फोन की लोकेशन मोनिंदर सिंह पंढेर की डी-5 कोठी के पास मिलने के बाद हुआ था। 5. कोठी के पीछे नाले की खुदाई में क्या बरामद हुआ था? 29 दिसंबर 2006 को नाले की खुदाई के दौरान पुलिस को 19 नरकंकाल, खोपड़ियां और बच्चों के कपड़े मिले थे। 6. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अक्टूबर 2023 में क्या फैसला सुनाया था? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जांच में खामियों और साक्ष्यों के अभाव का हवाला देते हुए सुरेंद्र कोली को 12 मुकदमों में और पंढेर को 2 मुकदमों में बरी कर दिया था। https://trendkia.com/uttarakhand/nithari-mamale-ke-mukhya-abhiyukta-surendra-koli-ka-shava-haridwar-men-phnde-se-lataka-mila-parivara-ne-jatai-hatya-ki-ashnka-33847 TrendKia — Har trend, sabse pehle.