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  "title": "निठारी मामले से बरी सुरेंद्र कोली की संदिग्ध मौत पर परिजनों ने उठाए सवाल, हत्या की आशंका जताते हुए मांगी उच्च स्तरीय जांच",
  "summary": "निठारी मामले में 19 साल बाद बरी हुए सुरेंद्र कोली की हरिद्वार में संदिग्ध मौत के बाद परिजनों ने आत्महत्या के पुलिस दावे को खारिज कर साजिश और हत्या का आरोप लगाया है.",
  "content": "निठारी मामले में बरी होने के बाद अपनी नई जिंदगी की शुरुआत करने की कोशिश में जुटे सुरेंद्र कोली की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. हरिद्वार के जिला अस्पताल में शनिवार को शव परीक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीर परिवार को सौंप दिया गया. हालांकि, मृतक के परिजनों और उनके नजदीकी सहयोगियों ने इसे खुदकुशी मानने से पूरी तरह इनकार कर दिया है. उनका आरोप है कि यह आत्महत्या नहीं बल्कि सुनियोजित हत्या और एक गहरी साजिश का परिणाम है, जिसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.\n\nप्रारंभिक स्तर पर पुलिस प्रशासन का रुख आर्थिक दिक्कतों और अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई से उपजे दबाव को संभावित वजह मानकर चल रहा है. लेकिन 19 वर्षों तक चली लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद मिली रिहाई के कुछ ही समय बाद सामने आई इस रहस्यमयी मौत ने कई अनसुलझी पहेलियां छोड़ दी हैं. परिवार के साथ अस्पताल पहुंचे सल्ट क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने घटना स्थल की भौतिक परिस्थितियों को रेखांकित करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई है.\n\nअस्पताल परिसर में दिखा खौफ और सामाजिक तिरस्कार का डर\nशव परीक्षण गृह के बाहर सुरेंद्र कोली के परिजनों के चेहरे पर केवल अपने प्रियजन को खोने का शोक नहीं था, बल्कि अनजाने भय की छाया भी साफ महसूस की जा रही थी. लगभग दो दशकों तक झेले गए सामाजिक अलगाव, बहिष्कार और कानूनी खींचतान के बाद भी यह परिवार सामान्य जीवन में लौटने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है. उन्हें लगातार यह अंदेशा सता रहा है कि सार्वजनिक रूप से सामने आने पर उन्हें बदले की कार्रवाई या अतिरिक्त सामाजिक अपमान का सामना करना पड़ सकता है.\n\nइस भय का असर अस्पताल परिसर में उस समय सीधे देखने को मिला जब एक छायाकार ने परिवार के सदस्यों की तस्वीर खींचने का प्रयास किया. परिजनों ने तुरंत दखल देकर संबंधित फोन से वह तस्वीर हटवा दी. इसके साथ ही उन्होंने मीडिया के कैमरों के सामने कोई भी बयान दर्ज कराने अथवा अपनी तस्वीरें साझा करने से साफ मना कर दिया. परिवार के साथ मौजूद नारायण सिंह रावत ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि परिजन अत्यधिक सहमे हुए हैं और किसी भी संभावित सामाजिक भेदभाव अथवा अनहोनी की आशंका के चलते अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करना चाहते.\n\nलंबी कानूनी लड़ाई, कमजोर पृष्ठभूमि और पुनर्वास का अभाव\nसुरेंद्र कोली के अतीत और सामाजिक पृष्ठभूमि की चर्चा करते हुए नारायण सिंह रावत ने कहा कि वर्ष 2006 से शुरू हुआ यह पूरा कानूनी घटनाक्रम करीब 20 वर्षों तक चला. अंततः अदालत से कानूनी तौर पर उन्हें न्याय तो प्राप्त हो गया, किंतु सामाजिक, आर्थिक और जातीय न्याय का पहलू पूरी तरह उपेक्षित रह गया. इतने लंबे समय तक कारागार में बंद रहने के कारण उनका भविष्य पहले ही तबाह हो चुका था, लेकिन जेल से बाहर आने के उपरांत न तो शासन की ओर से और न ही न्यायिक व्यवस्था के स्तर पर उनके भरण-पोषण अथवा आजीविका की कोई स्थायी व्यवस्था की गई.\n\nरावत के अनुसार सुरेंद्र कोली बेहद गरीब, अशिक्षित और दलित वर्ग से ताल्लुक रखते थे, जिस वजह से वे प्रतिकूल परिस्थितियों का मुकाबला करने में सदा असमर्थ रहे. कमजोर आर्थिक स्थिति और सामाजिक हाशिए पर होने के कारण पूरे परिवार के लिए यह कानूनी संघर्ष प्रारंभ से ही असहनीय और दर्दनाक साबित हुआ था. रिहाई हासिल करने के पश्चात वे हरिद्वार में मात्र एक छोटा सा खोखा संचालित कर अपनी रोजी-रोटी कमाने और अपने पैरों पर दोबारा खड़ा होने का संघर्ष कर रहे थे.\n\nमौके के साक्ष्य और परिस्थितियों पर गंभीर आपत्तियां\nघटनास्थल पर मिली परिस्थितियों का बारीकी से उल्लेख करते हुए नारायण सिंह रावत ने कहा कि यह घटना खुदकुशी का रूप नहीं ले सकती. जिस खोखे में शव बरामद हुआ, उसकी कुल ऊंचाई लगभग सात फीट है. इतनी सीमित ऊंचाई वाले स्थान पर किसी सामान्य वयस्क व्यक्ति द्वारा फंदे से लटक कर जान देना व्यावहारिक रूप से संभव नहीं दिखता. इसके अतिरिक्त शव के गले पर जिस बनावट में गांठ लगी हुई थी और जिस प्रकार रस्सी बिल्कुल बराबर काटी गई थी, वह आत्महत्या की सामान्य प्रकृति से बिल्कुल मेल नहीं खाती.\n\nउन्होंने यह भी रेखांकित किया कि मृतक के मुंह और नाक से खून का रिसाव हुआ था, जबकि सामान्यतः फांसी के मामलों में ऐसे लक्षण नहीं पाए जाते. इसके अलावा जिस समय घटना सामने आई, उस वक्त दुकान का शटर खुला हुआ पाया गया था. इन तमाम संदिग्ध बिंदुओं को सामने रखते हुए उन्होंने दावा किया कि ये सारे तथ्य स्थानीय स्तर पर रची गई किसी बड़ी साजिश की गवाही दे रहे हैं. उन्होंने मांग की कि इस समूचे मामले की किसी विशेष समिति के माध्यम से निष्पक्ष उच्च स्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच सामने आ सके और पीड़ित परिवार को वास्तविक न्याय हासिल हो सके.\n\nइसका आप पर असर\nयह घटना न्याय प्रणाली, बरी हुए कैदियों के पुनर्वास और सामाजिक सुरक्षा से जुड़े गंभीर नीतिगत मुद्दों को उजागर करती है.\n\n• पुनर्वास व्यवस्था: लंबे समय तक जेल में रहने के बाद बरी होने वाले गरीब व्यक्तियों के लिए सरकारी पुनर्वास नीति की भारी कमी उजागर हुई है. बिना किसी वित्तीय अथवा सामाजिक सुरक्षा तंत्र के ऐसे लोगों के लिए दोबारा सामान्य जीवन शुरू करना बेहद कठिन बना हुआ है.\n• हरिद्वार में: स्थानीय स्तर पर छोटे खोखे या रेहड़ी-पटरी लगाने वाले दुकानदारों के लिए अतिक्रमण हटाने की कार्रवाइयों के दौरान प्रशासनिक दबाव और मानसिक तनाव का मसला चर्चा में आ गया है. स्थानीय प्रशासन पर इस मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी बढ़ गई है.\n• सामाजिक सुरक्षा: हाशिए पर रहने वाले दलित और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए कानूनी जीत के बाद भी सामाजिक स्वीकार्यता मिलना एक बड़ी चुनौती बनी हुई है. पीड़ित परिवारों को किसी भी अनहोनी या उत्पीड़न से बचाने के लिए कानूनी व प्रशासनिक सुरक्षा जरूरी है.\n• जांच और जवाबदेही: संदिग्ध परिस्थितियों में मिले शव और परिजनों के हत्या के आरोपों के बाद पुलिस और चिकित्सा रिपोर्ट की निष्पक्षता पर नजरें टिकी हैं. उच्च स्तरीय जांच समिति गठित होने पर स्थानीय स्तर पर कानून व्यवस्था की जवाबदेही तय होगी.\n\nऐसा क्यों हुआ\nसुरेंद्र कोली की मृत्यु के पीछे की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर पुलिस और परिजनों के बीच गंभीर विरोधाभास बना हुआ है, जिसकी निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है.\n\n• पुलिस का प्रारंभिक दृष्टिकोण: पुलिस की प्राथमिक थ्योरी आर्थिक तंगी और हरिद्वार में खोखे पर संभावित अतिक्रमण कार्रवाई के दबाव को खुदकुशी का कारण मान रही है. हालांकि परिजनों ने इस थ्योरी को सिरे से खारिज करते हुए किसी गहरी साजिश का दावा किया है.\n• घटनास्थल के भौतिक साक्ष्य: जिस खोखे में शव मिला उसकी ऊंचाई मात्र सात फीट थी, जहां सामान्य रूप से फांसी लगाना असंभव बताया गया है. इसके अलावा गले पर बंधी गांठ की असामान्य स्थिति, समान रूप से कटी रस्सी और खुला हुआ शटर हत्या की आशंका को गहराते हैं.\n• शारीरिक लक्षण: शव के मुंह और नाक से खून का बहना सामान्य फांसी के मामलों से भिन्न बताया गया है. इन चिकित्सीय व फॉरेंसिक लक्षणों के चलते परिजनों ने इसे सुनियोजित हत्या करार देते हुए उच्च स्तरीय समिति से जांच कराने की मांग रखी है.\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुरेंद्र कोली का शव कहां और किस स्थिति में मिला था?\nसुरेंद्र कोली का शव हरिद्वार में लगभग सात फीट ऊंचे एक खोखे के भीतर संदिग्ध परिस्थितियों में मिला था, जिसका शटर खुला हुआ था.\n\n2. सुरेंद्र कोली के परिजनों ने हत्या की आशंका क्यों जताई है?\nपरिजनों का कहना है कि खोखे की ऊंचाई बहुत कम थी, गले पर बंधी रस्सी और गांठ असामान्य थी तथा नाक और मुंह से खून बह रहा था, जो खुदकुशी की ओर इशारा नहीं करते.\n\n3. पुलिस की प्राथमिक जांच में मौत की क्या वजह बताई जा रही है?\nपुलिस की प्राथमिक थ्योरी आर्थिक तंगी और खोखे पर अतिक्रमण हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के दबाव की ओर इशारा कर रही है.\n\n4. अस्पताल में परिजनों ने फोटो क्यों डिलीट करवा दी?\nपरिवार अत्यधिक डरा-सहमा हुआ है और उन्हें डर है कि सामने आने से उन्हें नए सामाजिक भेदभाव या किसी अनहोनी का सामना न करना पड़े, इसलिए उन्होंने फोटो डिलीट कराई और इंटरव्यू देने से मना कर दिया.\n\n5. सल्ट क्षेत्र के पूर्व जिला पंचायत सदस्य नारायण सिंह रावत ने क्या मांग की है?\nनारायण सिंह रावत ने मामले में एक उच्च स्तरीय जांच समिति गठित करने और निष्पक्ष जांच कराकर पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की है.",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-09-19",
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