पालीवाल धर्मशाला के प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर का चमत्कारी इतिहास, 1970 के जलप्रलय में भी रहा अडिग हरिद्वार के अपर रोड पर स्थित 200 साल पुराना राधा कृष्ण मंदिर अपनी दुर्लभ कसौटी पत्थर की प्रतिमा और 1970 की भयंकर बाढ़ से जुड़ी चमत्कारी गाथा के कारण श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बना हुआ है। तीर्थनगरी हरिद्वार के अपर रोड इलाके में स्थित पालीवाल धर्मशाला का राधा कृष्ण मंदिर सदियों से भक्तों की असीम आस्था का प्रतीक रहा है। लगभग दो सौ वर्ष पुराने इस देवालय का अपना एक अनूठा ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व है। ब्रिटिश हुकूमत के समय निर्मित इस भवन का ढांचा इतना मजबूत है कि इसकी दीवारें लगभग बीस इंच मोटी बनाई गई हैं। इस मजबूती और देवीय कृपा के कारण ही यह संरचना कई प्राकृतिक आपदाओं को सहने के बाद भी जस की तस खड़ी है। इस पवित्र परिसर की सबसे खास बात यहां स्थापित भगवान श्री कृष्ण की अत्यंत दुर्लभ प्रतिमा है, जो बेशकीमती कसौटी पत्थर से तराशी गई है। कसौटी पत्थर की दुर्लभ प्रतिमा और इसकी खासियत मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित योगेश पंत के अनुसार पूरे भारतवर्ष में कसौटी पत्थर से बनी देव प्रतिमाएं बहुत कम स्थानों पर देखने को मिलती हैं। हरिद्वार के कनखल क्षेत्र के एक मंदिर और वृंदावन स्थित सुप्रसिद्ध बांके बिहारी मंदिर के अलावा यह दुर्लभ पाषाण रूप यहां पालीवाल धर्मशाला के राधा कृष्ण मंदिर में सुशोभित है। मान्यता है कि कसौटी पत्थर की इस दिव्य प्रतिमा के सम्मुख किया गया पूजन भक्तों के जीवन की हर कसौटी पर खरा साबित होता है। काले रंग के इस चमत्कारी पाषाण से निर्मित विग्रह के दर्शन मात्र से भक्तों को असीम मानसिक शांति की अनुभूति होती है और वातावरण में एक विशेष ऊर्जा का संचार महसूस होता है। 1970 की विनाशकारी बाढ़ और मंदिर की चमत्कारी घटना इस पवित्र धाम के साथ वर्ष 1970 में आई हरिद्वार की प्रलयंकारी बाढ़ की एक बेहद हैरतअंगेज घटना जुड़ी हुई है। उस वर्ष जब भीषण जलप्रलय ने संपूर्ण तीर्थ क्षेत्र में कोहराम मचाया था, तब बाढ़ का पानी हरिद्वार के मुख्य बाजारों को जलमग्न करते हुए अपर रोड तक पहुंच गया था। तेज बहाव के साथ पानी इस प्राचीन देवालय के भीतर तक प्रवेश कर गया। स्थानीय जनश्रुति और मंदिर से जुड़ी मान्यताओं के मुताबिक, जैसे ही बाढ़ के जल ने गर्भगृह में विराजमान भगवान श्री कृष्ण के पावन चरणों को स्पर्श किया, वैसे ही जलस्तर में अप्रत्याशित रूप से गिरावट शुरू हो गई। देखते ही देखते पानी का विकराल सैलाब पीछे हटने लगा, जिससे नगर में होने वाला बड़ा नुकसान टल गया था। श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं और दैनिक पूजा का समय पंडित योगेश पंत बताते हैं कि जो भी भक्त सच्चे और निश्छल मन से यहां प्रार्थना करते हैं, उनकी कोई भी याचना निष्फल नहीं जाती। मान्यता है कि इस पावन स्थल पर शीश नवाने से निःसंतानों को संतान सुख मिलता है, साथ ही व्यापार और जीवन में आर्थिक सम्पन्नता एवं सुख समृद्धि का वास होता है। मंदिर प्रशासन और पुजारी ने हरिद्वार आने वाले सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया है कि वे गंगा स्नान के साथ इस ऐतिहासिक मंदिर में दर्शन के लिए अवश्य पधारें। मंदिर के कपाट श्रद्धालुओं के लिए नियमित खुलते हैं, जहां प्रतिदिन सुबह 6:15 बजे प्रभात आरती और शाम 6:15 बजे संध्या आरती विधि विधान के साथ संपन्न कराई जाती है। इसका आप पर असर हरिद्वार आने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए इस ऐतिहासिक मंदिर के दर्शन और आरती का नियमित समय आध्यात्मिक लाभ लेने का सुगम अवसर प्रदान करता है। • उत्तराखंड और हरिद्वार में: अपर रोड से गुजरने वाले तीर्थयात्री सुबह और शाम 6:15 बजे की दैनिक आरती में भाग लेकर दुर्लभ कसौटी प्रतिमा के दर्शन कर सकते हैं। स्थानीय बाजार और धर्मशाला क्षेत्र के व्यापारियों एवं निवासियों के लिए यह स्थल सांस्कृतिक धरोहर और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। • देशभर के श्रद्धालुओं के लिए: वृंदावन और कनखल के अलावा कसौटी पत्थर की दुर्लभ देव प्रतिमा देखने के इच्छुक भक्तों के लिए यह मंदिर एक अनूठा धार्मिक गंतव्य है। जो श्रद्धालु संतान सुख, आर्थिक समृद्धि और मानसिक शांति की मनोकामना रखते हैं, वे अपनी हरिद्वार यात्रा में इस 200 साल पुराने मंदिर के दर्शन शामिल कर सकते हैं। ऐसा क्यों हुआ पालीवाल धर्मशाला में स्थित यह प्राचीन मंदिर अपनी मजबूत ब्रिटिशकालीन वास्तुकला और दुर्लभ प्रतिमा के कारण 1970 की बाढ़ जैसी भीषण आपदा में भी सुरक्षित बचा रहा। • प्राचीन निर्माण शैली: मंदिर भवन का निर्माण करीब दो सौ वर्ष पूर्व ब्रिटिश काल में किया गया था। इसकी दीवारें लगभग 20 इंच मोटी होने के कारण यह भवन सदियों तक बाढ़ और भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना करने में सक्षम रहा है। • 1970 की भीषण बाढ़: वर्ष 1970 में हरिद्वार में आए भयानक जलप्रलय का पानी बाजारों से होता हुआ मंदिर के गर्भगृह तक जा पहुंचा था। लोक मान्यता के अनुसार भगवान के चरणों को स्पर्श करते ही जलस्तर अचानक घटने लगा और सैलाब वापस लौट गया, जिससे मंदिर और शहर को बड़ा नुकसान नहीं हुआ। • दुर्लभ पाषाण की स्थापना: मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की मूर्ति दुर्लभ कसौटी पत्थर से बनाई गई है। ऐसे विग्रह पूरे देश में केवल वृंदावन और कनखल जैसे अत्यंत सीमित स्थानों पर ही पाए जाते हैं, जिसके चलते यह स्थल जनआस्था का केंद्र बना। सवाल-जवाब 1. हरिद्वार का यह प्राचीन राधा कृष्ण मंदिर कहां स्थित है? यह मंदिर हरिद्वार के अपर रोड पर स्थित 200 साल पुरानी ऐतिहासिक पालीवाल धर्मशाला के परिसर में स्थित है। 2. इस मंदिर में स्थापित भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा किस पत्थर से बनी है? मंदिर में विराजमान भगवान श्री कृष्ण की दिव्य मूर्ति अत्यंत दुर्लभ कसौटी पत्थर से तराशी गई है। 3. देश में कसौटी पत्थर की मूर्तियां और कहां देखने को मिलती हैं? मंदिर के पुजारी के अनुसार कसौटी पत्थर की ऐसी विग्रह प्रतिमाएं केवल वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और हरिद्वार के कनखल क्षेत्र के मंदिर में पाई जाती हैं। 4. 1970 की बाढ़ से इस मंदिर का क्या संबंध है? 1970 के जलप्रलय के दौरान जब बाढ़ का पानी मंदिर में भगवान कृष्ण के चरणों तक पहुंचा, तो बहाव अचानक कम हो गया और पानी वापस लौट गया था। 5. मंदिर की दीवारों की मोटाई कितनी है? ब्रिटिश काल में बनी इस ऐतिहासिक पालीवाल धर्मशाला के मंदिर की दीवारें 20-20 इंच मोटी हैं। 6. मंदिर में दैनिक आरती का समय क्या है? मंदिर में रोजाना सुबह 6:15 बजे प्रभात आरती और शाम को 6:15 बजे संध्या आरती आयोजित की जाती है। https://trendkia.com/uttarakhand/paliwal-dharamshala-ke-prachina-radha-krishna-mndira-ka-chamatkari-itihasa-1970-ke-jalapralaya-men-bhi-raha-adiga-48944 TrendKia — Har trend, sabse pehle.