पेड़ों को ऐपण राखी बांधकर स्वर्गाश्रम में पर्यावरण रक्षा का संकल्प, भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी ने बागेश्वर में रोपे सैकड़ों पौधे बागेश्वर के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में रक्षाबंधन पर पौधरोपण अभियान के दौरान स्थानीय महिलाओं ने पेड़ों को पारंपरिक ऐपण राखियाँ बाँधकर उनकी सुरक्षा और नियमित देखभाल का संकल्प लिया। बागेश्वर जिले के स्वर्गाश्रम क्षेत्र में रक्षाबंधन के अवसर पर पर्यावरण संरक्षण को लेकर एक अनूठी और प्रेरणादायक पहल देखने को मिली। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी बागेश्वर की अगुवाई में आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में विभिन्न प्रजातियों के सैकड़ों नए पौधे रोपे गए। इस आयोजन की सबसे बड़ी खासियत यह रही कि यहाँ केवल पौधरोपण ही नहीं किया गया, बल्कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और देखभाल का पवित्र संकल्प भी लिया गया। स्थानीय निवासियों और रेडक्रॉस के कार्यकर्ताओं ने मिलकर प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का ठोस संदेश दिया। पेड़ों की सुरक्षा और लोककला का अनोखा संगम इस कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण पेड़ों को रक्षा सूत्र यानी राखी बांधना रहा। स्थानीय महिलाओं ने कुमाऊँ की पारंपरिक ऐपण लोककला से सुसज्जित राखियाँ अपने हाथों से तैयार की थीं। इन सुंदर ऐपण राखियों को पेड़ों के तनों पर बाँधकर उनकी रक्षा का वचन लिया गया। इस पहल के माध्यम से समाज को यह भावुक और गहरा संदेश दिया गया कि जिस प्रकार रक्षाबंधन पर भाई और बहन एक-दूसरे की रक्षा एवं सुरक्षा का अटूट वादा करते हैं, उसी प्रकार हम सभी को अपने आस-पास मौजूद पेड़-पौधों तथा प्राकृतिक पर्यावरण की रक्षा का संकल्प उठाना चाहिए। इस मौके पर एक रचनात्मक राखी प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने कला के जरिए पर्यावरण संरक्षण के संदेश को उकेरा। बाद में प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कृत कर सम्मानित किया गया। ऐपण कला के उपयोग ने इस पर्यावरणीय अभियान को क्षेत्र की सांस्कृतिक धरोहर से भी जोड़ दिया। विभिन्न प्रजातियों के पौधे और वन संरक्षण का संदेश कार्यक्रम के दौरान पौधरोपण अभियान की विस्तृत जानकारी देते हुए पर्यावरण विद् किशन मलड़ा ने बताया कि स्वर्गाश्रम परिसर में कई महत्वपूर्ण और स्थानीय प्रजातियों के पौधे लगाए गए। इनमें देवदार, बुरांश, काफल, अतीस, टून, खुरमानी, वैगनबेनिया और मेहल जैसी उपयोगी एवं औषधीय प्रजातियाँ शामिल हैं। इस आयोजन में बच्चों, महिलाओं, युवाओं तथा बुजुर्गों ने अत्यधिक उत्साह और उमंग के साथ हिस्सा लिया। कार्यक्रम के मंच से लोगों से यह पुरजोर अपील की गई कि वे केवल पौधे लगाने तक सीमित न रहें, बल्कि रोपे गए पौधों की नियमित सिंचाई और देखभाल भी सुनिश्चित करें। इसके साथ ही जंगलों को भीषण आग से बचाने, पेड़ों की अनावश्यक कटाई रोकने और सभी प्राकृतिक संसाधनों के विवेकपूर्ण संरक्षण का सशक्त संदेश भी जन-जन तक पहुँचाया गया। प्रशासन और रेडक्रॉस पदाधिकारियों का दृष्टिकोण पौधरोपण और संरक्षण की इस मुहिम में प्रशासनिक और सामाजिक क्षेत्र के प्रमुख प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने कहा कि यह अभियान सिर्फ नए पौधे लगाने का उपक्रम नहीं है, बल्कि पौधों को जीवित रखने के लिए व्यापक जनसहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने बल दिया कि प्रकृति का संरक्षण किसी एक व्यक्ति या किसी संस्था का कार्य नहीं है, बल्कि यह पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी के चेयरमैन इंद्र सिंह फर्स्वाण ने बताया कि इस प्रकार के संवेदनशील कार्यक्रम लोगों को प्रकृति के प्रति जागरूक बनाने में बेहद अहम भूमिका निभाते हैं, क्योंकि जब लोग वृक्षों से भावनात्मक रूप से जुड़ते हैं तो उनके संरक्षण का भाव स्वतः ही मजबूत होता है। वहीं रेडक्रॉस सचिव आलोक पांडे ने स्पष्ट किया कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी सुरक्षा करना सबसे ज्यादा जरूरी है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि रोपे गए पौधों को बड़ा करने के लिए लगातार देखभाल जारी रहेगी। बागेश्वर में पूर्व की परंपरा और भावी संकल्प बागेश्वर में पेड़ों को रक्षा सूत्र बाँधकर पर्यावरण बचाने का संदेश देने का यह कोई पहला प्रयास नहीं है। इससे पूर्व भी जिले के मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिका में वृक्षों को राखी बाँधकर प्रकृति संरक्षण का अलख जगाया जाता रहा है। इस बार स्वर्गाश्रम क्षेत्र में आयोजित इस विस्तृत कार्यक्रम ने रक्षाबंधन के पारंपरिक त्योहार को सीधे प्रकृति से जोड़ने का काम किया है। इस अनोखे प्रयास के जरिए आम जनता को यह समझाने की कोशिश की गई है कि पेड़ केवल जंगल या जमीन का हिस्सा मात्र नहीं हैं, बल्कि वे मानव जीवन के मुख्य आधार हैं। आने वाली भावी पीढ़ियों को एक सुरक्षित, स्वच्छ और हरा-भरा पर्यावरण सौंपने की दिशा में पेड़ों की रक्षा करना अत्यंत अनिवार्य कदम है। इसका आप पर असर यह खबर आपके लिए क्यों महत्वपूर्ण है: इस पहल से पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ पारंपरिक लोककला के पुनरुद्धार का मार्ग प्रशस्त होता है। • भारत में: रक्षाबंधन जैसे त्योहारों को प्रकृति संरक्षण से जोड़ने की यह पहल देश भर में पर्यावरण जागरूकता बढ़ाने के लिए एक मॉडल बन सकती है। यह नागरिकों को पौधा लगाने के साथ-साथ उसकी दीर्घकालिक देखभाल के लिए प्रेरित करती है। • उत्तराखंड / बागेश्वर में: बागेश्वर और आसपास के पर्वतीय क्षेत्रों में ऐपण कला को बढ़ावा मिलने से स्थानीय हस्तशिल्प और संस्कृति को नया जीवन मिलेगा। इसके अतिरिक्त, देवदार और बुरांश जैसे पौधों के संरक्षण से पहाड़ों में भूस्खलन और जंगलों की आग पर नियंत्रण पाने में मदद मिलेगी। सवाल-जवाब 1. बागेश्वर में रक्षाबंधन पर क्या विशेष पहल की गई? बागेश्वर के स्वर्गाश्रम में रक्षाबंधन के अवसर पर सैकड़ों पौधे रोपे गए और स्थानीय महिलाओं द्वारा बनाई गई ऐपण राखियाँ पेड़ों को बांधकर उनकी सुरक्षा का संकल्प लिया गया। 2. यह कार्यक्रम किस संस्था द्वारा आयोजित किया गया था? यह पर्यावरण संरक्षण कार्यक्रम भारतीय रेडक्रॉस सोसायटी बागेश्वर की ओर से आयोजित किया गया था। 3. पौधरोपण में कौन-कौन सी प्रजातियों के पौधे लगाए गए? अभियान के दौरान देवदार, बुरांश, काफल, अतीस, टून, खुरमानी, वैगनबेनिया और मेहल समेत कई महत्वपूर्ण प्रजातियों के पौधे लगाए गए। 4. क्या बागेश्वर में पेड़ों को राखी बांधने की ऐसी पहल पहले भी हुई है? हाँ, इससे पहले बागेश्वर के मंडलसेरा स्थित देवकी लघु वाटिका में भी पेड़ों को रक्षा सूत्र बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया था। 5. जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने इस अभियान के बारे में क्या कहा? जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने कहा कि प्रकृति की रक्षा पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और यह पहल पौधों को बचाने के लिए जनसहभागिता बढ़ाने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: बागेश्वर का यह अभियान सिखाता है कि किस प्रकार हमारी प्राचीन परंपराएँ और कला आधुनिक पर्यावरणीय चुनौतियों का समाधान बन सकती हैं। • संस्कृति को प्रकृति से जोड़ना: त्योहारों के पारंपरिक स्वरूप में पर्यावरणीय चेतना शामिल करके समाज को बड़े पैमाने पर जागरूक किया जा सकता है। • केवल रोपना नहीं, संभालना भी: किसी भी हरित पहल की वास्तविक सफलता पौधे लगाने के बाद उनकी नियमित सुरक्षा और देखभाल पर निर्भर करती है। • सामूहिक भागीदारी का बल: जब बच्चे, महिलाएँ, युवा और बुजुर्ग एक साथ मिलकर कार्य करते हैं, तो कोई भी सामाजिक अभियान अधिक प्रभावी बन जाता है। https://trendkia.com/uttarakhand/peron-ko-aipana-rakhi-bandhakara-swargashram-men-paryavarana-raksha-ka-snkalpa-indian-red-cross-society-ne-bageshwar-men-rope-saik-23975 TrendKia — Har trend, sabse pehle.