# पिथौरागढ़ के गंगोलीहाट में विराजीं मां हाटकलिका, कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक देवी के दरबार में हर सुबह दिखता है अनूठा रहस्य

> उत्तराखंड के पिथौरागढ़ स्थित गंगोलीहाट में देवदार के जंगलों के बीच मां हाटकलिका का शक्तिपीठ स्थापित है, जिन्हें भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट की संरक्षक देवी माना जाता है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/pithoragarh-ke-gangolihat-men-virajin-man-haat-kalika-kumaon-regiment-ki-rakshaka-devi-ke-darabara-men-hara-subaha-dikhata-hai-anu-35085 · **Language:** Hindi
**Tags:** हाटकलिका मंदिर, गंगोलीहाट, पिथौरागढ़, कुमाऊं रेजिमेंट, उत्तराखंड मंदिर, आदि गुरु शंकराचार्य, शक्तिपीठ

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में स्थित गंगोलीहाट घने देवदार के पेड़ों से घिरा एक ऐसा धार्मिक केंद्र है, जहां मां हाटकलिका का प्रसिद्ध और जागृत शक्तिपीठ स्थित है। इस पावन धाम को मां महाकाली के भक्तों की आस्था का प्रमुख केंद्र माना जाता है। इस मंदिर की पहचान इसकी आध्यात्मिक ऊर्जा, ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और समृद्ध धार्मिक परंपराओं से जुड़ी हुई है। दूर-दराज के क्षेत्रों से श्रद्धालु अपने जीवन की मनोकामनाएं लेकर यहां पहुंचते हैं और मां के जागृत स्वरूप के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

## कुमाऊं रेजिमेंट की रक्षक और अगाध आस्था का केंद्र
भारतीय सेना की विख्यात कुमाऊं रेजिमेंट के लिए यह सिद्धपीठ अत्यंत पूजनीय है। कुमाऊं रेजिमेंट के जवान और अधिकारी मां हाटकलिका को अपनी आराध्य और संरक्षक देवी मानते हैं। सीमा पर तैनात जवानों और सैनिकों की इस मंदिर के प्रति अटूट आस्था जुड़ी है, और सैन्य कर्मियों द्वारा यहां आकर पूजा-अर्चना करने की एक लंबी परंपरा चली आ रही है। सैनिकों और श्रद्धालुओं का अटूट विश्वास है कि मां हाटकलिका हर विपत्ति और संकट की घड़ी में अपने भक्तों की ढाल बनकर रक्षा करती हैं।

## आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा स्थापना और पौराणिक इतिहास
धार्मिक मान्यताओं और ऐतिहासिक साक्ष्यों के अनुसार, इस पावन शक्तिपीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी। इसके ऐतिहासिक निर्माण और विकास का संबंध 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं के शासनकाल से जोड़ा जाता है। इसके अलावा, स्कंद पुराण के मानस खंड में भी इस पावन स्थल का विशेष उल्लेख मिलता है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, माता काली पश्चिम बंगाल से आकर गंगोलीहाट के इस स्थान पर बस गई थीं। इसी पावन भूमि पर माता काली ने सुमैया नामक दैत्य का संहार कर धर्म की रक्षा की थी।

## रात में देवी का विश्राम और सुबह बिस्तर पर सिलवटों का चमत्कार
स्थानीय लोकमान्यताओं में इस मंदिर से जुड़ा एक बड़ा रहस्य सदियों से चर्चा का विषय रहा है। मान्यता है कि रात्रि के समय साक्षात मां काली मंदिर परिसर में विश्राम करने के लिए पधारती हैं। इसी आस्था के तहत मंदिर के पुजारी रोजाना रात को माता रानी के विश्राम हेतु बिस्तर सजाते हैं। अगली सुबह जब पूजा-अर्चना के लिए मंदिर के कपाट खोले जाते हैं, तो उस बिस्तर पर स्पष्ट सिलवटें दिखाई देती हैं। श्रद्धालु और स्थानीय निवासी इसे देवी के जागृत होने और रात में वहां उपस्थित रहने का प्रत्यक्ष प्रमाण मानते हैं।

## नकारात्मक शक्तियों का निवारण और नवरात्रि में विशेष अनुष्ठान
धार्मिक परंपराओं में मां हाटकालिका को भगवान शिव की शक्ति और देवी काली के अत्यंत उग्र स्वरूप के रूप में पूजा जाता है। श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि सच्चे मन से की गई प्रार्थना से हर मनोकामना पूर्ण होती है और देवी की कृपा से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों, बाधाओं और कष्टों से मुक्ति मिलती है। नवरात्रि और प्रमुख पर्वों के दौरान इस पहाड़ी परिसर में श्रद्धालुओं का भारी तांता लगता है। मंदिर में गूंजती घंटियों की ध्वनि, वेदमंत्रों का पाठ और देवदार के वनों से घिरी शांत वादियों का संगम यहां आने वाले हर साधक को एक अलौकिक आध्यात्मिक अनुभूति से भर देता है।

## इसका आप पर असर
मां हाटकलिका मंदिर से जुड़ी धार्मिक और ऐतिहासिक परंपराएं श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए महत्वपूर्ण आध्यात्मिक महत्व रखती हैं।

- **भारत में:** देशभर से आने वाले श्रद्धालु और सैन्य परिवारों के सदस्य यहां दर्शन और मन्नत मांगने के लिए पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन और शक्तिपीठों के दर्शन की योजना बनाने वाले यात्रियों के लिए यह स्थल प्रमुख केंद्र है।
- **उत्तराखंड में:** पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट क्षेत्र में स्थित इस धाम से स्थानीय अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन को सीधा संबल मिलता है। विशेषकर नवरात्रि के समय यहां भारी संख्या में पहुंचने वाले भक्तों के लिए स्थानीय स्तर पर पूजा-अर्चना और यात्रा की व्यवस्थाएं की जाती हैं।
- **सैन्य परिवारों के लिए:** कुमाऊं रेजिमेंट की संरक्षक देवी होने के कारण सेवारत और पूर्व सैनिकों की इस मंदिर में गहरी श्रद्धा जुड़ी रहती है। अपनी तैनाती या यात्रा के दौरान जवान यहां विशेष सुरक्षा और विजय के संकल्प के साथ शीश नवाते हैं।
- **आध्यात्मिक साधकों के लिए:** नकारात्मक ऊर्जा और बाधाओं से मुक्ति पाने की चाह रखने वाले साधकों के लिए यह एक जाग्रत पीठ माना जाता है। श्रद्धालु यहां विशेष पूजा और अनुष्ठानों में भाग लेकर मानसिक शांति का अनुभव करते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
गंगोलीहाट में मां हाटकलिका मंदिर की विशिष्ट धार्मिक पहचान और परंपराओं के निर्माण के पीछे कई ऐतिहासिक, पौराणिक और आध्यात्मिक कारण मौजूद हैं।

- **पौराणिक पृष्ठभूमि:** स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार माता काली पश्चिम बंगाल से आकर इस सुरम्य स्थल पर स्थापित हुई थीं। इस स्थान पर उन्होंने सुमैया नामक दैत्य का वध किया था, जिसके कारण इसे एक सिद्ध और जाग्रत शक्तिपीठ के रूप में मान्यता मिली।
- **आदि गुरु का योगदान:** 8वीं-9वीं शताब्दी के दौरान आदि गुरु शंकराचार्य ने सनातन धर्म और शक्ति उपासना के पुनर्जागरण के क्रम में इस पावन पीठ की विधिवत स्थापना की थी। इसके बाद 9वीं से 14वीं शताब्दी के मध्य कत्यूरी और चंद राजाओं ने मंदिर के संरक्षण और निर्माण को विस्तार दिया।
- **सैन्य परंपरा:** भारतीय सेना की कुमाऊं रेजिमेंट के जवानों ने देवी को अपनी आराध्य और रक्षक माना, जिसके चलते यह आस्था सैन्य परंपरा का अभिन्न अंग बन गई। युद्ध और कठिन परिस्थितियों में रक्षा की भावना ने मंदिर के प्रति इस विश्वास को और सुदृढ़ किया।
- **रहस्यमयी लोकमान्यता:** रात को देवी के विश्राम हेतु बिस्तर सजाने और सुबह उस पर सिलवटें मिलने की परंपरा ने इस स्थल को जागृत देवी के रूप में श्रद्धालुओं के बीच स्थापित किया। यह निरंतर चलने वाली अलौकिक आस्था भक्तों के आकर्षण का प्रमुख कारण बनी हुई है।

## सवाल-जवाब

### 1. मां हाटकलिका का मंदिर कहां स्थित है?
यह मंदिर उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में घने देवदार के जंगलों के बीच स्थित है।

### 2. हाटकलिका मंदिर किस सैन्य रेजिमेंट की आराध्य देवी है?
यह मंदिर भारतीय सेना की प्रसिद्ध कुमाऊं रेजिमेंट की आराध्य और संरक्षक देवी का पावन स्थल है।

### 3. इस शक्तिपीठ की स्थापना किसने की थी?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस सिद्धपीठ की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने की थी।

### 4. मंदिर के निर्माण का संबंध किन राजवंशों से माना जाता है?
मंदिर का निर्माण 9वीं से 14वीं शताब्दी के दौरान कत्यूरी और चंद वंश के राजाओं के काल से जुड़ा हुआ है।

### 5. स्कंद पुराण के अनुसार मां काली ने यहां किस दैत्य का वध किया था?
स्कंद पुराण के मानस खंड के अनुसार मां काली ने इस स्थान पर सुमैया नामक दैत्य का वध किया था।

### 6. मंदिर में सुबह दिखने वाला चमत्कार क्या है?
रात में पुजारी द्वारा लगाए गए माता के बिस्तर पर सुबह कपाट खोलने पर सिलवटें दिखाई देती हैं, जिसे देवी की उपस्थिति का प्रमाण माना जाता है।

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