# पूर्व सहयोगी पर ईडी की कार्रवाई के बाद हरीश रावत का बड़ा कदम, कांग्रेस के सभी पदों से दिया इस्तीफा

> उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अपने पूर्व निजी सहायक पर ईडी की छापेमारी के बाद कांग्रेस के सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है। रावत ने कहा कि वे नहीं चाहते कि इस विवाद की वजह से पार्टी के राजनीतिक संघर्ष को कोई नुकसान पहुंचे।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/purva-sahayogi-para-ed-ki-karravai-ke-bada-harish-rawat-ka-bara-kadama-congress-ke-sabhi-padon-se-diya-istipha-31337 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरीश रावत, उत्तराखंड कांग्रेस, ईडी छापेमारी, उत्तराखंड राजनीति, कांग्रेस इस्तीफा

उत्तराखंड की राजनीति में एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला है। राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कांग्रेस पार्टी के अपने सभी संगठनात्मक पदों से इस्तीफा देने की घोषणा कर दी है। यह अप्रत्याशित फैसला प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा उनके पूर्व निजी सहायक (PA) यानी पूर्व ओएसडी (OSD) के ठिकानों पर की गई छापेमारी के बाद आया है, जिसमें भारी मात्रा में नकदी और आभूषण बरामद होने की बात सामने आई है। इस बड़ी कार्रवाई के बाद राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां तेज हो गई हैं।

 

## इस्तीफे की मुख्य वजह

अपने इस बड़े फैसले की जानकारी देते हुए हरीश रावत ने स्पष्ट किया कि चूंकि वे वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए सरकारी ओहदे से इस्तीफा देने का कोई सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने अपने इष्ट देवता का स्मरण करने के बाद यह निर्णय लिया। रावत ने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) की कार्यकारिणी की सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से हटने की पेशकश की है। उन्होंने कहा कि वे बेहद विनम्रता के साथ इन दोनों सांगठनिक पदों को छोड़ रहे हैं ताकि उनके कारण पार्टी के संघर्ष में कोई कमजोरी न आए।

 

## ईडी की रेड और गर्माती सियासत

पूर्व मुख्यमंत्री के करीबी सहयोगी के घर पर केंद्रीय जांच एजेंसी की इस कार्रवाई से उत्तराखंड का सियासी पारा चढ़ गया है। इस छापेमारी के बाद सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि हरीश रावत ने यह कदम अपनी पार्टी को भ्रष्टाचार के आरोपों से बचाने और नैतिक आधार पर खुद को पाक-साफ साबित करने के लिए उठाया है। हाल के दिनों में वे राज्य की राजनीति के साथ-साथ राष्ट्रीय स्तर पर भी काफी सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।

 

## हालिया राजनीतिक गतिविधियां

पदों को छोड़ने का यह फैसला ऐसे समय में आया है जब कुछ ही दिन पहले हरीश रावत ने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की खबरों को सिरे से खारिज किया था। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि वे उस कान को ढूंढ रहे हैं, जिस पर उन्होंने संन्यास की घोषणा की थी। अगस्त के महीने में उन्होंने दिल्ली में कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में भी हिस्सा लिया था और लगातार युवाओं को पार्टी से जोड़ने की वकालत कर रहे थे। लेकिन इस नई कानूनी कार्रवाई ने उनकी राजनीतिक दिशा को फिलहाल एक नया मोड़ दे दिया है।

## इसका आप पर असर
इस बड़े राजनीतिक घटनाक्रम का सीधा असर उत्तराखंड की राजनीति और कांग्रेस पार्टी की सांगठनिक ताकत पर पड़ेगा।

  - **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस को भ्रष्टाचार के आरोपों पर अपनी छवि बचाने के लिए कड़े संघर्ष का सामना करना पड़ सकता है। इसका मतलब है कि विपक्ष के रूप में पार्टी की नैतिक विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो सकते हैं।

  - **उत्तराखंड में:** राज्य कांग्रेस के भीतर गुटीय समीकरण तेजी से बदल सकते हैं और नए चेहरों को आगे आने का मौका मिल सकता है। इसका सीधा परिणाम यह होगा कि आगामी स्थानीय चुनावों में टिकट वितरण और सांगठनिक नियुक्तियां पूरी तरह प्रभावित होंगी।

  - **जनता के बीच संदेश:** भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच वरिष्ठ नेताओं द्वारा जिम्मेदारी लेने के इस कदम से जनता में नैतिकता की राजनीति को लेकर बहस तेज होगी। मतदाता अब राजनीतिक शुचिता और जांच एजेंसियों की कार्रवाई को अधिक ध्यान से देखेंगे।

## ऐसा क्यों हुआ
हरीश रावत का इस्तीफा उनके एक पूर्व करीबी सहयोगी के खिलाफ केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई अचानक कार्रवाई और उसके बाद पैदा हुई असहज स्थिति का परिणाम है।

  - **ईडी की छापेमारी:** प्रवर्तन निदेशालय द्वारा उनके पूर्व ओएसडी के घर पर मारे गए छापे में भारी नकदी और आभूषण मिलने की खबरें आईं। इस कार्रवाई ने रावत को सीधे तौर पर राजनीतिक रूप से असहज स्थिति में डाल दिया था।

  - **नैतिक जिम्मेदारी का दबाव:** चूंकि राज्य में राजनीतिक सरगर्मी तेज थी, रावत ने पार्टी को इस विवाद से बचाने के लिए खुद आगे आकर सांगठनिक पदों से हटने का फैसला किया। वे नहीं चाहते थे कि उनके कारण कांग्रेस की भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम पर कोई आंच आए।

  - **भाजपा की घेराबंदी:** इस छापेमारी के तुरंत बाद सत्ताधारी दल द्वारा राजनीतिक हमले तेज होने की आशंका थी। रावत ने यह कदम उठाकर भाजपा को उन पर सीधे सांगठनिक प्रहार करने का अवसर नहीं दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. हरीश रावत ने कांग्रेस के किन पदों से इस्तीफा दिया है?
उन्होंने उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी सदस्यता और राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस कार्यसमिति (CWC) के स्थायी आमंत्रित सदस्य के पद से इस्तीफा दिया है।

### 2. उनके इस्तीफे का तात्कालिक कारण क्या था?
उनके पूर्व निजी सहायक (PA) / ओएसडी (OSD) के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी में भारी नकदी और जेवरात मिलने के बाद उन्होंने यह कदम उठाया।

### 3. क्या हरीश रावत ने किसी सरकारी पद से भी इस्तीफा दिया है?
नहीं, उन्होंने स्पष्ट किया कि वे वर्तमान में किसी सरकारी पद पर नहीं हैं, इसलिए उन्होंने केवल अपने सांगठनिक पदों से इस्तीफा दिया है।

### 4. क्या हरीश रावत राजनीति से संन्यास ले रहे हैं?
नहीं, उन्होंने हाल ही में संन्यास की खबरों का खंडन किया था और स्पष्ट किया था कि वे फिलहाल केवल अपने सांगठनिक दायित्वों से अलग हो रहे हैं।

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