पूर्वजों की तस्वीर से जुड़ी इस एक चूक से निष्फल हो सकता है श्राद्ध, हरिद्वार के पुरोहित ने बताए नियम पितृ पक्ष के दौरान पूर्वजों के चित्रों पर साल भर पुरानी मालाएं चढ़ी छोड़ देना या उन्हें अनुचित जगह फेंकना पितृ दोष का कारण बन सकता है, जिससे तर्पण और पिंडदान का पुण्य समाप्त हो जाता है। हिंदू धर्म संस्कृति में पितृ पक्ष को केवल पारंपरिक तर्पण या जल अर्पण का पर्व नहीं माना गया है, बल्कि यह अपने दिवंगत पुरखों के प्रति गहरी कृतज्ञता, आदर और मर्यादा प्रकट करने का एक अत्यंत पावन अनुष्ठान है। भाद्रपद पूर्णिमा से आरंभ होकर आश्विन अमावस्या तक चलने वाले इस विशेष पखवाड़े में सनातन धर्मावलंबी अपने दिवंगत माता-पिता, दादा-दादी तथा अन्य पूर्वजों की छवियों को नमन करते हैं और उनका पुण्य स्मरण करते हैं। धार्मिक ग्रंथों तथा शास्त्रों में श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान से जुड़े कड़े विधि-विधान निर्धारित किए गए हैं। इन नियमों के अंतर्गत जहां मंत्रोच्चार और दान का महत्व है, वहीं घर में पितरों के स्थान तथा उनकी तस्वीरों के रखरखाव को लेकर भी स्पष्ट मर्यादाएं तय की गई हैं। अनजाने में हुई उपेक्षा से नष्ट हो सकता है पूरे अनुष्ठान का फल धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, श्राद्ध कर्म के दौरान अनजाने में की गई एक साधारण सी लापरवाही भी पूरे अनुष्ठान के फल को समाप्त कर सकती है। अक्सर देखने में आता है कि लोग अपने पूर्वजों के चित्रों पर लगी पुरानी मालाओं और पूजा सामग्रियों पर ध्यान नहीं देते, किंतु शास्त्रों में यह उपेक्षा पितृ दोष का एक गंभीर कारण मानी गई है। हरिद्वार के पंडित मनोज मिश्रा के अनुसार, पूर्वजों की तस्वीर पर पूरे साल चढ़ी रहने वाली पुरानी माला और उनके स्थान पर रखी गई पूर्व पूजन सामग्री को अगले वर्ष के पितृ पक्ष के आगमन से पूर्व ही सम्मानपूर्वक हटा लेना पूरी तरह अनिवार्य होता है। इन पुरानी वस्तुओं को अनदेखा करना शास्त्रों के नियमों के विरुद्ध माना जाता है। उतारी गई माला को विसर्जित करने की शास्त्रसम्मत विधि पंडित मनोज मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि पूर्वजों के चित्रों से उतारी गई पुरानी माला का निस्तारण भी पूर्ण मर्यादा के साथ किया जाना चाहिए। इसे भूलकर भी कूड़ेदान में या घर के बाहर इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना सीधे तौर पर पितरों का अनादर माना जाता है। शास्त्रों के अनुसार, दिवंगत पुरखों के चित्रों पर चढ़ाई गई पुष्पों की माला हो अथवा प्लास्टिक से निर्मित माला, उसे उतारने के पश्चात गंगा नदी अथवा किसी अन्य पवित्र नदी, नहर या बहते हुए स्वच्छ जल में ही विसर्जित किया जाना चाहिए। बहते जल में विसर्जन करने से उस सामग्री की पवित्रता और पितरों का सम्मान दोनों सुरक्षित रहते हैं। पुरानी माला न हटाने पर निष्फल हो जाते हैं पिंडदान और तर्पण पंडित मनोज मिश्रा ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति अपने पितरों और पूर्वजों के चित्रों पर चढ़ी पुरानी माला का अपमान करता है, अथवा वह माला अगले साल के पितृ पक्ष तक वैसी ही टंगी रह जाती है, तो व्यक्ति द्वारा पूर्ण श्रद्धा भाव से किए गए श्राद्ध, पिंडदान और तर्पण का कोई भी शुभ फल प्राप्त नहीं होता। ऐसी स्थिति में पूर्वज प्रसन्न होने के स्थान पर रुष्ट हो जाते हैं। पितरों की इस नाराजगी के परिणामस्वरूप परिवार में निरंतर कलह, आर्थिक तंगी, मांगलिक आयोजनों में रुकावट और वंश वृद्धि में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं। नई माला अर्पित करने से मिलता है पूर्वजों का संपूर्ण आशीष शास्त्रों के विधि-विधान का उल्लेख करते हुए पंडित मनोज मिश्रा ने बताया कि पितृ पक्ष के पावन दिनों में पूर्वजों के चित्रों पर पुरानी माला हटाकर नई माला अर्पित करनी चाहिए। इसके साथ ही उतारी गई पुरानी माला को श्रद्धापूर्वक गंगा जी अथवा किसी बहते हुए साफ जल में प्रवाहित कर देना चाहिए। इस मर्यादा और नियम का पालन करने से दिवंगत पूर्वज अत्यंत संतुष्ट होते हैं और परिवार को उनका संपूर्ण आशीर्वाद तथा सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। इसका आप पर असर पितृ पक्ष के दौरान अपने पूर्वजों की तस्वीरों और पूजा सामग्रियों के रख-रखाव से जुड़े नियमों का पालन करके परिवार में पितृ दोष से बचा जा सकता है। • घर में बदलाव: पितरों के चित्रों पर टंगी साल भर पुरानी मालाओं को नए पितृ पक्ष के शुरू होने से पहले तुरंत हटा दें। इससे पुरानी सामग्री के कारण लगने वाले दोष से मुक्ति मिलती है और घर में शुचिता बनी रहती है। • विसर्जन का नियम: हटाई गई मालाओं को कचरे में फेंकने के बजाय गंगा या किसी भी साफ बहते पानी में प्रवाहित करें। ऐसा करने से पूर्वजों के प्रति अनादर की भूल नहीं होती और तर्पण का पुण्य सुरक्षित रहता है। • पारिवारिक शांति: पुरानी मालाओं के अनादर से बचने पर परिवार में अशांति, आर्थिक परेशानियां और वंश वृद्धि में आने वाली रुकावटें दूर होती हैं। इससे घर के मांगलिक कार्यों में आने वाली बाधाएं भी समाप्त होती हैं। • श्राद्ध का फल: पितृ पक्ष में पूर्वजों के चित्रों पर नई माला अर्पित करके ही तर्पण और पिंडदान का संपूर्ण फल प्राप्त किया जा सकता है। यह सुनिश्चित करता है कि आपकी पूजा और दान-पुण्य व्यर्थ न जाए। ऐसा क्यों हुआ शास्त्रों के अनुसार पितृ पक्ष केवल एक रस्म नहीं बल्कि पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और मर्यादा का काल है, जिसमें उनकी वस्तुओं की उपेक्षा को अनादर माना जाता है। • मर्यादा का उल्लंघन: साल भर पुरानी बासी या धूल भरी मालाओं को पूर्वजों के चित्रों पर छोड़े रखना उनकी उपेक्षा का प्रतीक माना गया है। शास्त्रों में ऐसी लापरवाही को सीधा अनादर माना गया है, जिससे पितृ दोष उत्पन्न होता है। • अशुद्ध निस्तारण: उतारी गई मालाओं को कचरे में या घर के बाहर फेंकने से पवित्र सामग्री अशुद्ध स्थलों के संपर्क में आती है। इसी कारण शास्त्रों में केवल पवित्र और बहते जल में विसर्जन का स्पष्ट नियम दिया गया है। • आशीर्वाद में रुकावट: जब पूर्वजों का अनादर होता है, तो वे प्रसन्न होने के बजाय रुष्ट हो जाते हैं। इस असंतोष के कारण व्यक्ति द्वारा किए गए पिंडदान और तर्पण का फल निष्फल हो जाता है। सवाल-जवाब 1. पितृ पक्ष कब से कब तक मनाया जाता है? पितृ पक्ष भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन अमावस्या तक चलता है। 2. पूर्वजों की तस्वीर पर चढ़ी पुरानी माला कब हटानी चाहिए? तस्वीर पर साल भर रहने वाली माला को अगले वर्ष के पितृ पक्ष के आगमन से पहले ही हटा लेना अनिवार्य है। 3. पुरानी माला को हटाने के बाद कहां विसर्जित करना चाहिए? उतारी गई माला को गंगा या किसी पवित्र नदी, नहर और बहते हुए साफ पानी में ही विसर्जित करना चाहिए। 4. क्या पूर्वजों की माला को कचरे में फेंका जा सकता है? नहीं, पुरानी माला को भूलकर भी कूड़ेदान या घर के बाहर नहीं फेंकना चाहिए क्योंकि यह पितरों का अनादर माना जाता है। 5. पुरानी माला न हटाने या अनादर करने पर क्या नुकसान होता है? ऐसा करने से पितृ नाराज होते हैं, जिससे परिवार में कलह, आर्थिक तंगी, मांगलिक कार्य और वंश वृद्धि में बाधाएं आ सकती हैं तथा श्राद्ध निष्फल हो जाता है। 6. पितृ पक्ष में पूर्वजों के चित्र पर किस तरह की माला चढ़ानी चाहिए? पितृ पक्ष के दौरान पुरानी माला हटाकर पूर्वजों के चित्र पर नई माला अर्पित करनी चाहिए। https://trendkia.com/uttarakhand/purvajon-ki-tasvira-se-juri-isa-eka-chuka-se-nishphala-ho-sakata-hai-shraddha-haridwar-ke-purohita-ne-batae-niyama-42209 TrendKia — Har trend, sabse pehle.