रेलवे भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने से पहले बनभूलपुरा बना पुलिस छावनी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले हल्द्वानी के बनभूलपुरा में पुलिस ने पूरे इलाके को दो सुपर जोन और चार जोन में बांटकर भारी सुरक्षा बल, ड्रोन और दंगा रोधी टीमें तैनात कर दी हैं, ताकि रेलवे जमीन विवाद पर आने वाला फैसला बिना किसी तनाव के गुजर सके। उत्तराखंड के हल्द्वानी में बनभूलपुरा इलाका इन दिनों सन्नाटे और सतर्कता के बीच अपनी सुबहें गुजार रहा है। रेलवे की जमीन पर बरसों से बसे परिवारों को हटाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट 9 सितंबर को अपना अहम फैसला सुना सकता है, और इसी आशंका ने पूरे प्रशासन को हरकत में ला दिया है। पिछले कुछ दिनों से गलियों में पुलिस की गश्त बढ़ गई है और लोगों के बीच यह चर्चा आम है कि अदालत का रुख आखिर किस तरफ जाएगा। एसएसपी खुद मौके पर, दिए सख्त निर्देश नैनीताल के पुलिस कप्तान डॉ. मंजुनाथ टीसी सुबह ही बनभूलपुरा पहुंचे और वहां तैनात हर टुकड़ी का हाल जाना। इस दौरान उन्होंने खुद कई गलियों का मुआयना किया और मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों से हालात की जानकारी ली। उन्होंने ड्यूटी में लगे अफसरों और सिपाहियों से कहा कि संवेदनशील गलियों-मोहल्लों पर आंख लगातार टिकाए रखें, ताकि किसी भी हरकत को समय रहते भांपा जा सके। दो सुपर जोन, चार जोन और तीन एसपी की कमान शहर के इस हिस्से को सुरक्षा की दृष्टि से दो सुपर जोन और चार जोन में विभाजित किया गया है। मोर्चा तीन पुलिस अधीक्षकों, पांच क्षेत्राधिकारियों और 15 थाना प्रभारियों के जिम्मे है, जिनकी अगुवाई में जगह-जगह जवान खड़े किए गए हैं। इसके साथ ही पीएसी की दो कंपनियां भी बुला ली गई हैं ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत मोर्चा संभाला जा सके। अफसरों का कहना है कि जोन आधारित यह ढांचा हर छोटी-बड़ी घटना पर तुरंत नजर रखने और जरूरत पड़ने पर फौरन कुमक भेजने में मदद करेगा। छतों और गलियों पर ड्रोन से पैनी नजर जमीन पर तैनात जवानों के अलावा आसमान से भी नजर रखी जा रही है। दो अलग-अलग ड्रोन टुकड़ियां लगातार इलाके के ऊपर चक्कर लगा रही हैं और संकरी गलियों, घरों की छतों और भीड़भाड़ वाले हिस्सों पर बारीकी से निगाह रख रही हैं। इसके समानांतर पैदल गश्त भी जारी है, ताकि जमीनी हालात की भी पल-पल जानकारी मिलती रहे। अफसरों के मुताबिक, इस तरह की दोहरी निगरानी व्यवस्था से किसी भी असामान्य जमावड़े या हलचल की जानकारी तुरंत कंट्रोल रूम तक पहुंच सकेगी। आग बुझाने से लेकर दंगा रोकने तक, हर टीम मुस्तैद किसी भी हालात से निपटने के लिए प्रशासन ने कई मोर्चों पर तैयारी की है। दमकल विभाग की चार यूनिट और ट्रैफिक संभालने के लिए चार टीमें मौके पर बुला ली गई हैं। इसके अलावा बम निरोधक दस्ता, हॉक पुलिस की दो यूनिट, आंसू गैस छोड़ने वाली दो टीमें और दंगा नियंत्रण की दो टुकड़ियां भी तैनात कर दी गई हैं। पुलिस का कहना है कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो फायरिंग दस्ते समेत अतिरिक्त गाड़ियां और संसाधन भी फौरन भेजे जाएंगे। प्रशासन नहीं चाहता कि कोई भी स्थिति उसे बिना तैयारी के पकड़े। छतों पर पत्थर या हथियार मिले तो होगी कार्रवाई पुलिस ने साफ चेतावनी दी है कि अगर किसी के घर की छत पर पत्थर, ईंट, रोड़ी, मलबा या हथियार जैसी चीजें जमा मिलीं तो उसके खिलाफ सख्ती से पेश आया जाएगा। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह चेतावनी सिर्फ औपचारिकता नहीं बल्कि किसी भी तरह की हिंसा या पथराव की आशंका को शुरुआत में ही खत्म करने की कोशिश है। एसएसपी ने लोगों से गुजारिश की है कि अदालत का जो भी फैसला आए, उसका सम्मान करें और इलाके का माहौल शांत बनाए रखें। सोशल मीडिया पर भी पैनी नजर रखी जा रही है, अफवाह उड़ाने, भड़काने वाली पोस्ट डालने या भ्रामक जानकारी फैलाने वालों पर कानूनी शिकंजा कसने की चेतावनी दी गई है। विवाद की जड़: 4,365 परिवार और रेलवे की जमीन इस पूरी कवायद के पीछे एक बरसों पुराना जमीन विवाद है। रेलवे का दावा है कि उसकी जमीन पर 4,365 परिवारों ने अवैध रूप से कब्जा कर रखा है, और इस बस्ती में तकरीबन 50 हजार लोगों का बसेरा बताया जाता है। इन्हीं परिवारों ने कब्जा हटाने के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। असल में दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे की इस जमीन को खाली कराने का निर्देश दे दिया था, जिसके बाद यह लड़ाई शीर्ष अदालत तक पहुंच गई। अब जबकि फैसला किसी भी वक्त आ सकता है, रेलवे और स्थानीय प्रशासन दोनों की नजर अगली सुनवाई पर टिकी है, और बनभूलपुरा में सुरक्षा को लेकर कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। इसका आप पर असर बनभूलपुरा और आसपास के इलाकों में रहने वालों के लिए अगले कुछ दिन खास सतर्कता वाले रहेंगे। • भारत में: रेलवे जमीन पर अतिक्रमण से जुड़े इस मामले का सुप्रीम कोर्ट का फैसला देशभर में इसी तरह के दूसरे मामलों के लिए नजीर बन सकता है। जिन शहरों में रेलवे की जमीन पर बस्तियां बसी हैं, वहां भी आगे इसी आधार पर कार्रवाई या राहत तय हो सकती है। • हल्द्वानी/नैनीताल में: बनभूलपुरा और आसपास से गुजरने वालों को ड्रोन निगरानी, भारी पुलिस बल और चेकिंग का सामना करना पड़ सकता है, इसलिए बेवजह इलाके में जाने से बचें। • प्रभावित परिवारों के लिए: घर की छत पर पत्थर, ईंट या हथियार जैसी चीजें रखना अब सीधे कानूनी कार्रवाई की वजह बन सकता है, इसलिए तुरंत ऐसा सामान हटा लेना जरूरी है। • सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वालों के लिए: अफवाह, भड़काऊ पोस्ट या भ्रामक जानकारी शेयर करने पर पुलिस सीधे कानूनी कार्रवाई कर सकती है, इसलिए किसी भी अपुष्ट जानकारी को आगे बढ़ाने से पहले सोच लें। • स्थानीय दुकानदारों और कारोबारियों के लिए: भारी पुलिस बल और संभावित प्रतिबंधों के चलते इलाके में रोजमर्रा के कामकाज और आवाजाही पर असर पड़ सकता है, इसलिए फैसले के दिन के आसपास जरूरी सामान पहले से जुटा लेना बेहतर रहेगा। ऐसा क्यों हुआ बनभूलपुरा में यह हाई अलर्ट अचानक नहीं है, बल्कि एक लंबी कानूनी लड़ाई और उसके संभावित बड़े असर की वजह से है। • हाईकोर्ट का आदेश: दिसंबर 2022 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने रेलवे की जमीन से अतिक्रमण हटाने का आदेश दिया था, जिसे प्रभावित परिवारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। • बड़ी आबादी का सवाल: रेलवे के मुताबिक 4,365 परिवार और करीब 50 हजार लोग इस जमीन पर बसे हैं, इसलिए फैसले का असर बहुत बड़े पैमाने पर हो सकता है। • संवेदनशील समय: 9 सितंबर को संभावित फैसले से ठीक पहले प्रशासन किसी भी तरह की अफरातफरी या टकराव की आशंका को टालना चाहता है, इसीलिए भारी पुलिस बल, ड्रोन और अतिरिक्त टीमें पहले से तैनात कर दी गई हैं। • आगे क्या: फैसला आने के बाद उसे कैसे लागू किया जाएगा, यह अभी साफ नहीं है, लेकिन प्रशासन ने दमकल, बम निरोधक दस्ता, हॉक पुलिस और दंगा रोधी टीमें हर स्थिति के लिए तैयार रखी हैं। सवाल-जवाब 1. सुप्रीम कोर्ट के फैसले की उम्मीद कब है? 9 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने की संभावना है। 2. यह पूरा मामला किससे जुड़ा है? हल्द्वानी के बनभूलपुरा में रेलवे की जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा यह मामला है। 3. कितने परिवारों पर अतिक्रमण का आरोप है? रेलवे के मुताबिक 4,365 परिवारों ने उसकी जमीन पर अवैध कब्जा कर रखा है। 4. इस बस्ती में कितने लोग रहते हैं? रेलवे के दावे के मुताबिक करीब 50 हजार लोग यहां रहते हैं। 5. सुरक्षा के लिए इलाके को कैसे बांटा गया है? पूरे क्षेत्र को दो सुपर जोन और चार जोन में बांटा गया है। 6. निगरानी के लिए ड्रोन का इस्तेमाल कैसे हो रहा है? दो ड्रोन टीमें संवेदनशील गलियों और घरों की छतों पर लगातार नजर रख रही हैं। 7. छतों पर क्या चीजें मिलने पर कार्रवाई होगी? पत्थर, ईंट, रोड़ी, मलबा या हथियार जैसी चीजें मिलने पर सख्त कार्रवाई होगी। 8. हाईकोर्ट ने अतिक्रमण हटाने का आदेश कब दिया था? उत्तराखंड हाईकोर्ट ने दिसंबर 2022 में यह आदेश दिया था। https://trendkia.com/uttarakhand/relave-bhumi-vivada-para-supreme-court-ka-phaisala-ane-se-pahale-banbhoolpura-bana-pulisa-chhavani-29633 TrendKia — Har trend, sabse pehle.