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  "type": "article",
  "title": "ऋषिकेश और मुनिकीरेती के आस्था पथ जल्द जुड़ेंगे, चंद्रभागा पर मंजूर हुआ 32 करोड़ का पुल",
  "summary": "चंद्रभागा नदी पर 32 करोड़ रुपये की लागत से 150 मीटर लंबा बो-स्ट्रिंग पुल बनने जा रहा है, जिससे गंगा किनारे टहलने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सीधा पैदल मार्ग मिलेगा।",
  "content": "गंगा किनारे टहलने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय नागरिकों के लिए एक बड़ी और बहुप्रतीक्षित राहत सामने आई है। चंद्रभागा नदी के बहाव की वजह से अलग-थलग पड़े दो प्रमुख पैदल रास्तों को आपस में जोड़ने के लिए प्रशासनिक स्तर पर 32 करोड़ रुपये का बजट स्वीकृत कर दिया गया है। इस वित्तीय मंजूरी के साथ ही लगभग 150 मीटर लंबे आधुनिक बो-स्ट्रिंग सेतु के धरातल पर उतरने का रास्ता साफ हो गया है। निर्माण एजेंसी का लक्ष्य अगले एक माह के भीतर मौके पर काम शुरू कराने का है, ताकि लोगों को एक छोर से दूसरे छोर जाने के लिए लगने वाले लंबे चक्कर से मुक्ति मिल सके।\n\nपुल का ढांचा और निर्माण एजेंसी की तैयारी\nप्रस्तावित पुल की इंजीनियरिंग योजना के तहत इसमें 75-75 मीटर लंबाई के दो बड़े स्पैन तैयार किए जाएंगे। निर्माण कार्य के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी उत्तराखंड प्रोजेक्ट डेवलपमेंट एंड कंस्ट्रक्शन कॉरपोरेशन लिमिटेड को सौंपी गई है, जिसे यह दायित्व उत्तराखंड इंफ्रास्ट्रक्चर एंड इन्वेस्टमेंट डेवलपमेंट बोर्ड के माध्यम से मिला है। कार्यदायी इकाई के परियोजना प्रबंधक संजीव कुमार ने स्पष्ट किया है कि बजट की औपचारिक संस्तुति हासिल हो चुकी है और तय समयसीमा के भीतर मैदानी स्तर पर काम शुरू करने की पूरी तैयारी कर ली गई है।\n\nदेहरादून और टिहरी सीमा पर खत्म होगी पैदल दूरी\nचंद्रभागा नदी दरअसल देहरादून और टिहरी जनपद की सीमा पर बहते हुए दोनों किनारों के रास्तों को बांट देती है। एक तरफ त्रिवेणी घाट का आस्था पथ है, तो दूसरी तरफ मुनिकीरेती क्षेत्र का पूर्णानंद आस्था पथ स्थित है। जलधारा के बीच में आने के कारण अब तक दोनों मार्गों के बीच कोई सीधा जमीनी जुड़ाव नहीं था। नया पुल बन जाने के बाद गंगा दर्शन के लिए आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों और नियमित रूप से घूमने वाले स्थानीय निवासियों को दोनों नगर निकायों के बीच सीधा व सुरक्षित पैदल गलियारा मिल जाएगा।\n\nचार साल के लंबे इंतजार के बाद मिली वित्तीय हरी झंडी\nइस संपर्क मार्ग की आवश्यकता स्थानीय लोग कई वर्षों से महसूस कर रहे थे और इसके लिए लगातार आवाज भी उठाई जा रही थी। पूर्व में सिंचाई महकमे ने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट बनाकर कई मर्तबा शासन को प्रेषित की, मगर तकनीकी व प्रशासनिक कारणों से फाइलें अटकती रहीं। बाद में वर्ष 2022 के दौरान श्रीदेव सुमन उत्तराखंड विश्वविद्यालय के पं. ललित मोहन शर्मा परिसर में एक जनसभा हुई थी। उस मंच से तत्कालीन शहरी विकास मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के समक्ष मांगपत्र सौंपकर इस पुल के निर्माण की पैरवी की थी। इसके उपरांत मुख्यमंत्री ने सेतु निर्माण की सार्वजनिक घोषणा की थी। ऋषिकेश नगर निगम के मेयर शंभू पासवान ने भी इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह परियोजना समूचे इलाके के विकास और आवागमन को सुगम बनाने में बेहद मददगार साबित होगी।\n\nइसका आप पर असर\nऋषिकेश और मुनिकीरेती के बीच आवागमन करने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए यह पुल रोजमर्रा के सफर को सुगम और समय बचाने वाला बना देगा।\n\n• उत्तराखंड में: गंगा किनारे आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को दोनों प्रमुख घाटों के बीच बिना सड़क पर जाए सुरक्षित व प्राकृतिक पैदल संपर्क मिलेगा। इससे तटीय पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और मुख्य मार्गों पर वाहनों व पैदल यात्रियों का दबाव घटेगा।\n• ऋषिकेश और मुनिकीरेती में: स्थानीय निवासियों को चंद्रभागा नदी के एक छोर से दूसरे छोर जाने के लिए अब कई किलोमीटर का लंबा चक्कर नहीं लगाना पड़ेगा। लगभग एक माह में निर्माण कार्य शुरू होने के बाद स्थानीय स्तर पर आवागमन की बड़ी समस्या हमेशा के लिए हल हो जाएगी।\n\nऐसा क्यों हुआ\nचंद्रभागा नदी के बहाव की वजह से दोनों आस्था पथ कटे हुए थे, जिन्हें जोड़ने के लिए लंबे समय से उठ रही सार्वजनिक मांग को अब बजट का सहारा मिला है।\n\n• भौगोलिक बाधा: देहरादून और टिहरी जिलों की सीमा पर बहने वाली चंद्रभागा नदी त्रिवेणी घाट और पूर्णानंद आस्था पथ के बीच एक प्राकृतिक रुकावट बनी हुई थी। दोनों तरफ पैदल पथ विकसित होने के बावजूद नदी पार करने के लिए कोई सीधा रास्ता नहीं था।\n• लंबित प्रशासनिक प्रक्रिया: सिंचाई विभाग द्वारा कई बार विस्तृत कार्य योजना तैयार कर शासन को भेजी गई, मगर वित्तीय आवंटन न होने से कार्य अटका रहा। वर्ष 2022 में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब जाकर 32 करोड़ रुपये की औपचारिक स्वीकृति जारी हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. चंद्रभागा नदी पर बनने वाले पुल की कुल लागत कितनी है?\nइस पुल के निर्माण के लिए सरकार की ओर से 32 करोड़ रुपये की वित्तीय स्वीकृति प्रदान की गई है।\n\n2. प्रस्तावित पुल की लंबाई और संरचना कैसी होगी?\nयह लगभग 150 मीटर लंबा बो-स्ट्रिंग पुल होगा, जिसमें 75-75 मीटर लंबाई के दो स्पैन शामिल रहेंगे।\n\n3. पुल किन दो स्थानों को आपस में जोड़ेगा?\nयह पुल त्रिवेणी घाट के आस्था पथ और मुनिकीरेती के पूर्णानंद आस्था पथ को आपस में सीधे जोड़ेगा।\n\n4. पुल का निर्माण कार्य कब तक शुरू होने की संभावना है?\nकार्यदायी संस्था के अनुसार वित्तीय स्वीकृति मिलने के बाद एक महीने के भीतर मौके पर निर्माण कार्य शुरू करने की तैयारी है।",
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  "publishedAt": "2026-10-31",
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    "आस्था पथ",
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