ऋषिकेश के झरनों पर बारिश में सेल्फी का शौक बन सकता है जानलेवा, प्रशासन की चेतावनी को न करें नजरअंदाज मानसून में ऋषिकेश के झरनों पर उमड़ रही भीड़ के बीच पानी का अचानक बढ़ता बहाव और फिसलन भरी चट्टानें बड़ा खतरा बन सकती हैं, स्थानीय निवासी वकील चंद्र जैन ने सतर्क रहने की सलाह दी है। ऋषिकेश और आसपास के पहाड़ी इलाकों में बारिश शुरू होते ही झरनों की तरफ पर्यटकों की भीड़ उमड़ने लगती है, लेकिन यही खूबसूरत नजारा जानलेवा भी साबित हो सकता है अगर थोड़ी सी भी लापरवाही बरती जाए। मानसून में पहाड़ों से गिरने वाले झरनों में पानी का बहाव तेज हो जाता है और चारों तरफ हरियाली के बीच ठंडी फुहारें लोगों को अपनी ओर खींचती हैं। यही वजह है कि बारिश के मौसम में स्थानीय लोगों के साथ-साथ बाहर से आने वाले सैलानी भी बड़ी संख्या में इन झरनों का रुख करते हैं। दोस्तों संग मस्ती के बीच बढ़ जाता है खतरा बारिश के दिनों में झरनों के इर्द-गिर्द लोगों की चहल-पहल कई गुना बढ़ जाती है। कोई परिवार के साथ पिकनिक मनाने पहुंचता है तो कोई दोस्तों की टोली के साथ मोबाइल में तस्वीरें और वीडियो कैद करने में जुट जाता है। यह नजारा देखने में जितना सुहावना लगता है, हकीकत में उतना ही जोखिम भरा भी हो सकता है, क्योंकि पानी के पास मौजूद हर पल सतर्कता मांगता है। चंद मिनटों में बदल सकती है झरने की धारा पहाड़ी इलाकों में मौसम का मिजाज बेहद अनिश्चित होता है। ऊपरी पहाड़ों पर हुई बारिश का पानी कुछ ही देर में नीचे झरने तक पहुंच जाता है, जिससे धारा अचानक तेज हो जाती है। जो जगह थोड़ी देर पहले तक शांत नजर आ रही होती है, वहां देखते ही देखते तेज बहाव आ सकता है, जिससे पानी के करीब या बीच में खड़े लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। फिसलन भरी चट्टानें और अनजान गहराई बनती हैं खतरा बारिश के मौसम में झरनों के इर्द-गिर्द मौजूद पत्थर काफी फिसलन भरे हो जाते हैं। दूर से चट्टान मजबूत और सुरक्षित दिख सकती है, मगर पैर टिकाते ही संतुलन बिगड़ने का डर बना रहता है। बच्चों और तैराकी न जानने वालों के लिए पानी के नजदीक जाना और भी खतरनाक हो जाता है, क्योंकि झरने के नीचे पानी असल में कितना गहरा है, यह ऊपर से देखकर बता पाना मुमकिन नहीं होता। स्थानीय निवासी ने दी सतर्क रहने की सलाह स्थानीय निवासी वकील चंद्र जैन का कहना है कि बारिश में झरनों की तरफ जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए। उनका मानना है कि खूबसूरत तस्वीर खींचने के चक्कर में पर्यटक अक्सर पानी के बेहद करीब पहुंच जाते हैं, जबकि पहाड़ों में मौसम पल भर में बदल सकता है और ऊपर बरसी बारिश नीचे झरने के बहाव को प्रभावित कर देती है। उन्होंने प्रशासन की तरफ से लगाए गए संकेत बोर्ड और घेराबंदी को नजरअंदाज न करने की सलाह भी दी। बरतें ये जरूरी सावधानियां झरने तक पहुंचने पर पानी से कुछ दूरी बनाए रखना सबसे जरूरी कदम है। तेज बहाव दिखने पर उसमें कदम रखने की भूल कभी न करें और पत्थरों पर चढ़कर तस्वीर या रील बनाने से भी परहेज करें। बच्चों को पानी के आसपास अकेला बिल्कुल न छोड़ें और मौसम बिगड़ते ही वहां रुकने के बजाय तुरंत सुरक्षित स्थान की ओर लौट जाएं। यात्रा पर निकलने से पहले मौसम का हाल जरूर जान लें और अगर लगातार बारिश हो रही है या प्रशासन ने किसी क्षेत्र में जाने पर रोक या चेतावनी जारी कर रखी है, तो वहां जाने का जोखिम कतई न उठाएं। इसका आप पर असर मानसून में पहाड़ी झरनों पर घूमने जा रहे हैं तो पानी से दूरी बनाकर रखना सबसे जरूरी सावधानी है। • भारत में: देश भर के पहाड़ी और झरना पर्यटन स्थलों पर मानसून में यही खतरा बना रहता है। कहीं भी झरने या नदी किनारे घूमने जाने से पहले मौसम विभाग की चेतावनी जरूर देख लें। • उत्तराखंड में: ऋषिकेश और आसपास के इलाकों में इन दिनों झरनों पर सैलानियों की भीड़ बढ़ रही है। यहां जाने वाले पर्यटकों को प्रशासन के चेतावनी बोर्ड और बैरिकेडिंग का पालन करना चाहिए। • तस्वीर के चक्कर में जोखिम: फोटो-वीडियो बनाने के लिए पानी या फिसलन भरी चट्टानों के करीब जाना बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकता है। सुरक्षित दूरी से ही तस्वीरें लें। • बच्चों के लिए खास सावधानी: बच्चों और तैरना न जानने वालों को झरने के पानी के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। गहराई का अंदाजा न होने से हल्की सी चूक भी भारी पड़ सकती है। ऐसा क्यों हुआ झरनों के पास मानसून में खतरा किसी एक हादसे से नहीं, बल्कि पहाड़ी इलाकों के मौसम के मिजाज से जुड़ा है। ऊपर होने वाली बारिश का सीधा असर नीचे झरने के बहाव पर पड़ता है, और यही अनिश्चितता इसे जोखिम भरा बनाती है। • ऊपरी पहाड़ों की बारिश: पहाड़ों की चोटी पर होने वाली बारिश का पानी थोड़ी देर में नीचे झरने तक पहुंच जाता है, जिससे बहाव अचानक तेज हो जाता है। • फिसलन भरी चट्टानें: बारिश से गीली हुई चट्टानों पर पैर फिसलने का खतरा बढ़ जाता है, खासकर उन जगहों पर जो दूर से सुरक्षित दिखती हैं। • लापरवाही और भीड़: मानसून में झरनों पर पर्यटकों की भीड़ बढ़ने और फोटो-वीडियो के चक्कर में पानी के करीब जाने की प्रवृत्ति भी जोखिम बढ़ाती है। • चेतावनियों की अनदेखी: प्रशासन के लगाए बोर्ड और बैरिकेडिंग को नजरअंदाज करना खतरे को और बढ़ा देता है। सवाल-जवाब 1. मानसून में झरनों पर सबसे बड़ा खतरा क्या है? ऊपरी पहाड़ों में बारिश होने से झरने का पानी अचानक बढ़ सकता है, जिससे पानी के पास मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। 2. झरने के आसपास चट्टानें खतरनाक क्यों हो जाती हैं? बारिश से गीली होने पर चट्टानें फिसलन भरी हो जाती हैं और दूर से सुरक्षित दिखने वाली चट्टान पर भी पैर फिसलने का खतरा रहता है। 3. स्थानीय निवासी वकील चंद्र जैन ने क्या सलाह दी? उन्होंने कहा कि बारिश में झरनों पर जाने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए और प्रशासन के चेतावनी बोर्ड व बैरिकेडिंग को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 4. बच्चों के लिए झरनों पर क्या सावधानी जरूरी है? बच्चों और तैरना न जानने वालों को पानी के पास अकेला नहीं छोड़ना चाहिए, क्योंकि झरने के नीचे पानी की गहराई का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है। 5. झरने पर जाने से पहले क्या ध्यान रखें? जाने से पहले मौसम की जानकारी लें और अगर लगातार बारिश हो रही है या प्रशासन ने चेतावनी जारी की है, तो वहां जाने का जोखिम न उठाएं। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikesh-ke-jharanon-para-barisha-men-selphi-ka-shauka-bana-sakata-hai-janaleva-prashasana-ki-chetavani-ko-na-karen-najaraandaja-29490 TrendKia — Har trend, sabse pehle.