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  "type": "article",
  "title": "तीर्थनगरी में लें असली दक्षिण भारतीय स्वाद का आनंद, ये चार ठिकाने हैं सबसे खास",
  "summary": "ऋषिकेश में पारंपरिक दक्षिण भारतीय व्यंजनों के शौकीनों के लिए दशकों पुराने भोजनालयों से लेकर लोकप्रिय फूड कार्ट तक कई बेहतरीन विकल्प मौजूद हैं।",
  "content": "गंगा किनारे बसे ऋषिकेश में योग और अध्यात्म के साथ-साथ खानपान के कई बेहतरीन ठिकाने मौजूद हैं, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों का पारंपरिक स्वाद चखने को मिलता है। आमतौर पर पहाड़ी और उत्तर भारतीय व्यंजनों के लिए पहचाने जाने वाले इस शहर में दक्षिण भारतीय जायके का भी एक बड़ा और पुराना बाजार तैयार हो चुका है। स्थानीय बाशिंदों से लेकर यहां आने वाले तीर्थयात्रियों और विदेशी सैलानियों के बीच कुरकुरे डोसे, नर्म इडली और तीखे रसम की जबरदस्त मांग रहती है। अगर आप ऋषिकेश की यात्रा पर हैं और प्रामाणिक स्वाद की तलाश में हैं, तो शहर के ये चार प्रमुख भोजन स्थल आपके लिए सबसे मुफीद साबित हो सकते हैं।\n\nमद्रास होटल: पांच दशक पुरानी परंपरा और डोसे की सौ से ज्यादा किस्में\nराम झूला मार्ग पर मौजूद मद्रास होटल को इस तीर्थनगरी में दक्षिण भारतीय खानपान की नींव रखने वाला पहला प्रतिष्ठान माना जाता है। इस ऐतिहासिक होटल की शुरुआत वर्ष 1970 में हुई थी, जब ऋषिकेश में गिनती की ही दुकानें संचालित होती थीं। पिछले पचास वर्षों से अधिक समय से यह प्रतिष्ठान अपने पारंपरिक स्वाद और गुणवत्ता के दम पर खानपान के शौकीनों की पहली पसंद बना हुआ है। पुराने दौर से लेकर आज तक यहां मिलने वाले खाने की प्रामाणिकता बरकरार है, जिसके चलते सुबह के नाश्ते से लेकर रात के भोजन तक यहां ग्राहकों का तांता लगा रहता है।\n\nइस प्रतिष्ठान के मेन्यू की बात करें तो यहां पारंपरिक इडली, मेदु वड़ा, उत्तपम और उपमा के अलावा डोसे का एक बेहद विस्तृत संसार मौजूद है। यहां डोसे की करीब 100 से अधिक किस्में तैयार की जाती हैं, जिनमें पुराने पारंपरिक अंदाज से लेकर आधुनिक फ्यूजन स्वाद तक शामिल हैं। चीज डोसा और चाइनीज डोसा जैसे नए प्रयोग युवा पीढ़ी और बच्चों के बीच खासे पसंद किए जाते हैं। अलग-अलग स्वादों की इतनी बड़ी श्रृंखला होने के कारण ग्राहकों को अपनी मनपसंद डिश चुनने की पूरी आजादी मिलती है।\n\nडोसा डार्लिंग फूड कार्ट: कप्रवाण अस्पताल के पास लाजवाब रसम का केंद्र\nसड़क किनारे खड़े होकर ठेठ पारंपरिक अंदाज में भोजन का आनंद लेने वालों के लिए डोसा डार्लिंग फूड कार्ट एक बेहद लोकप्रिय जगह है। कप्रवाण अस्पताल के समीप लगने वाला यह फूड कार्ट सुबह और शाम के तय वक्त पर अपनी सेवाएं देता है। यहां इडली, डोसा, सांभर और अप्पलम जैसी पारंपरिक दक्षिण भारतीय थाली की चीजें पूरी ताजगी के साथ परोसी जाती हैं। इस ठेले पर मिलने वाले हर व्यंजन में दक्षिण भारतीय मसालों का संतुलित और प्रामाणिक स्वाद साफ महसूस किया जा सकता है।\n\nयूं तो इस कार्ट पर मिलने वाली सभी चीजें बेहद स्वादिष्ट हैं, मगर यहां तैयार होने वाले रसम की शोहरत सबसे ज्यादा है। आमतौर पर इडली और डोसे के साथ केवल सांभर परोसा जाता है, लेकिन यहां आने वाले अधिकांश लोग खास तौर पर रसम की चुस्कियां लेने के लिए पहुंचते हैं। दक्षिण भारतीय खानपान में रसम का अपना एक अलग और पाचक महत्व माना जाता है, और इस कार्ट पर मसालों का जो विशेष तालमेल बिठाया जाता है, वह इसके स्वाद को शहर के बाकी ठिकानों से एकदम जुदा और असरदार बना देता है।\n\nरामेश्वरम रसोई: किफायती दाम और खास नारियल चटनी\nएम्स गेट नंबर 2 के सामने प्रतिदिन लगने वाली रामेश्वरम रसोई उन लोगों के लिए बेहतरीन ठिकाना है, जो वाजिब दामों में उम्दा भोजन की तलाश में रहते हैं। इस फूड कार्ट की सबसे बड़ी खूबी यह है कि यहां स्वादिष्ट खाना खाने के लिए जेब पर बिल्कुल भी भारी बोझ नहीं पड़ता। अगर कोई व्यक्ति सामान्य इडली या डोसा खाकर कुछ अलग चखना चाहता है, तो उसके लिए यहां गरमा-गरम उपमा, कुरकुरा वड़ा और साथ में अप्पलम का बेहतरीन विकल्प मौजूद रहता है।\n\nइस कार्ट की लोकप्रियता का एक बड़ा राज यहां परोसी जाने वाली खास नारियल की चटनी भी है, जिसे विशुद्ध दक्षिण भारतीय शैली में तैयार किया जाता है। इसके साथ मिलने वाले सांभर का जायका भी सामान्य होटलों के सांभर से काफी अलग और गाढ़ा होता है। एम्स के आसपास आने-जाने वाले मरीजों के तीमारदार, छात्र और स्थानीय लोग बड़ी संख्या में हर रोज यहां पौष्टिक और किफायती नाश्ते का लुत्फ उठाने पहुंचते हैं।\n\n5 स्टेट्स रेस्टोरेंट: जानकी झूला के पास पांच राज्यों का अनूठा संगम\nजानकी झूला के समीप स्थित 5 स्टेट्स रेस्टोरेंट अपने बहु-सांस्कृतिक मेन्यू के लिए पर्यटकों के बीच जाना जाता है। इस भोजनालय की विशेषता यह है कि यह एक ही छत के नीचे देश के पांच अलग-अलग राज्यों का प्रामाणिक स्वाद परोसता है। यहां आने वाले अतिथियों के लिए उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, दक्षिण भारत और बंगाल की पारंपरिक थालियां तैयार की जाती हैं। एक ही मेज पर बैठकर देश के अलग-अलग कोनों के भोजन का आनंद लेना यहां की सबसे बड़ी यूएसपी है, हालांकि अधिकांश ग्राहक यहां दक्षिण भारतीय स्वाद को ही प्राथमिकता देते हैं।\n\nदक्षिण भारतीय मेन्यू में यहां मसाला डोसा, सादा डोसा, इडली, मेदु वड़ा, उत्तपम और उपमा नारियल चटनी व सांभर के साथ उपलब्ध कराए जाते हैं। इडली के शौकीनों के लिए यहां प्लेन इडली के अलावा वेजिटेबल इडली और चाइनीज इडली जैसे फ्यूजन विकल्प भी मिलते हैं। जानकी झूला घूमने आने वाले सैलानियों के बीच यहां की संपूर्ण दक्षिण भारतीय थाली बेहद लोकप्रिय है, क्योंकि एक ही थाली में उन्हें मिनी डोसा, इडली, अप्पलम, वड़ा, सांभर और चटनी का पूरा संयोजन एक साथ मिल जाता है।\n\nइसका आप पर असर\nऋषिकेश जाने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों के लिए यह जानकारी भोजन के बेहतर और किफायती विकल्प चुनने में सीधे तौर पर मददगार है।\n\n• भारत में: देश भर से ऋषिकेश आने वाले पर्यटकों को उत्तर भारत में भी ठेठ दक्षिण भारतीय भोजन के विश्वसनीय पते मिल जाते हैं। इससे यात्रा के दौरान घर जैसा हल्का और सात्विक नाश्ता तलाशने में समय और मेहनत बचती है।\n• ऋषिकेश में: स्थानीय निवासियों, एम्स के छात्रों और तीमारदारों को सुबह और शाम के समय बेहद सस्ते और पौष्टिक खानपान के विकल्प मिलते हैं। राम झूला, जानकी झूला और एम्स के पास मौजूद इन ठिकानों से वे अपनी सुविधानुसार ताजा नाश्ता चुन सकते हैं।\n• बजट यात्रियों के लिए: कम खर्च में यात्रा करने वाले सैलानी महंगे होटलों के बजाय इन प्रमाणित फूड कार्ट पर भोजन कर सकते हैं। इससे प्रति व्यक्ति नाश्ते और खाने के दैनिक बजट में उल्लेखनीय बचत होती है।\n• भोजन के शौकीनों के लिए: सौ से ज्यादा किस्मों के डोसे और पारंपरिक रसम का विकल्प मिलने से खानपान का अनुभव丰富 बनता है। सैलानी अपनी रुचि के अनुसार पारंपरिक स्वाद या फ्यूजन डिशेज का आनंद ले सकते हैं।\n\nऐसा क्यों हुआ\nऋषिकेश में दक्षिण भारतीय व्यंजनों की मांग और उपस्थिति पिछले पचास वर्षों में लगातार बढ़ी है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की विविधता और सात्विक भोजन की जरूरत ने यहां दक्षिण भारतीय स्वाद को स्थापित किया है।\n\n• पर्यटन और तीर्थाटन का संगम: ऋषिकेश में दक्षिण भारत सहित पूरे देश और विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और योग साधक पहुंचते हैं। विविध पृष्ठभूमि के लोगों की मौजूदगी के कारण शहर में क्षेत्रीय स्वादों की निरंतर मांग बनी रहती है।\n• पांच दशक पुरानी शुरुआत: वर्ष 1970 में राम झूला मार्ग पर खुले पहले दक्षिण भारतीय होटल ने स्थानीय लोगों को इस स्वाद से परिचित कराया। समय के साथ यह भोजन स्थानीय खानपान की दिनचर्या का एक अभिन्न हिस्सा बन गया।\n• हल्का और सुपाच्य भोजन: इडली, डोसा और उपमा जैसे भाप व कम तेल में बने व्यंजन योग और ध्यान के लिए आने वाले लोगों की पहली पसंद होते हैं। इस कारण सड़क किनारे लगने वाले कार्ट से लेकर बड़े रेस्टोरेंट तक इसका दायरा तेजी से फैला।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ऋषिकेश का पहला दक्षिण भारतीय होटल कौन सा है और यह कब शुरू हुआ था?\nराम झूला मार्ग पर स्थित मद्रास होटल ऋषिकेश का पहला दक्षिण भारतीय होटल माना जाता है, जिसकी शुरुआत साल 1970 में हुई थी।\n\n2. मद्रास होटल में डोसे की कितनी किस्में मिलती हैं?\nमद्रास होटल में डोसे की करीब 100 से अधिक वैरायटी उपलब्ध हैं, जिनमें पारंपरिक डोसे के साथ चीज डोसा और चाइनीज डोसा जैसे फ्यूजन भी शामिल हैं।\n\n3. ऋषिकेश में प्रामाणिक रसम पीने के लिए कौन सी जगह प्रसिद्ध है?\nकप्रवाण अस्पताल के पास सुबह और शाम लगने वाला डोसा डार्लिंग फूड कार्ट अपने खास और प्रामाणिक रसम के लिए जाना जाता है।\n\n4. रामेश्वरम रसोई फूड कार्ट कहां लगता है और इसकी क्या खासियत है?\nरामेश्वरम रसोई रोजाना एम्स गेट नंबर 2 के पास लगता है, जो अपने बेहद किफायती दामों और स्वादिष्ट दक्षिण भारतीय नारियल चटनी के लिए लोकप्रिय है।\n\n5. जानकी झूला के पास 5 स्टेट्स रेस्टोरेंट में कौन-कौन से राज्यों का खाना मिलता है?\nइस रेस्टोरेंट में उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, दक्षिण भारत और बंगाल की पारंपरिक थालियां परोसी जाती हैं।\n\n6. 5 स्टेट्स रेस्टोरेंट की दक्षिण भारतीय थाली में क्या-क्या शामिल होता है?\nयहां की दक्षिण भारतीय थाली में मिनी डोसा, इडली, अप्पलम, वड़ा, सांभर और नारियल चटनी एक साथ परोसी जाती है।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-10-20",
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