ऋषिकेश में गणेश उत्सव की धूम, शाम की आरती और रंग-बिरंगे पंडालों में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ ऋषिकेश में गणेश चतुर्थी से शुरू हुए उत्सव के चलते शाम होते ही शहर का माहौल भक्तिमय हो रहा है, जहां लोग परिवारों के साथ आरती और दर्शन के लिए पंडालों में पहुंच रहे हैं। ऋषिकेश में गणेश चतुर्थी के शुभारंभ के साथ ही पूरे शहर का वातावरण भक्ति और उल्लास से सराबोर हो गया है। दिन ढलते ही शहर की गलियों और प्रमुख चौराहों पर उत्सव का अलग ही रंग देखने को मिल रहा है। कहीं रंग-बिरंगी रोशनी से सजे भव्य पंडाल लोगों को आकर्षित कर रहे हैं, तो कहीं भगवान गणेश की मनमोहक प्रतिमाएं श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। यह उत्सव अब शहर के विभिन्न हिस्सों में रहने वाले लोगों के लिए शाम के समय परिवार सहित बाहर निकलने, पूजा-अर्चना करने और सामाजिक मेलजोल बढ़ाने का एक बड़ा जरिया बन चुका है। बच्चे, युवा और बुजुर्ग सभी आयु वर्ग के लोग पूरी श्रद्धा के साथ पंडालों में पहुंचकर दैनिक पूजा और आरती में अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। फूलों, रोशनी और अलग-अलग रूपों में विराजे गणपति शहर के अलग-अलग क्षेत्रों में भगवान गणेश की प्रतिमाओं को विभिन्न स्वरूपों में स्थापित किया गया है। भक्तों ने अपनी-अपनी पसंद और श्रद्धा के अनुसार पंडालों को आकर्षक स्वरूप दिया है। कुछ स्थानों पर ताजे फूलों और आधुनिक विद्युत झालरों की भव्य सजावट की गई है, जबकि कुछ जगहों पर बेहद सादगीपूर्ण लेकिन मनोहारी तरीके से पंडाल तैयार किए गए हैं। जैसे ही शाम ढलती है और विद्युत सजावट जगमगाती है, इन सभी पूजा स्थलों पर लोगों की आवाजाही अचानक बढ़ जाती है। पंडालों के इर्द-गिर्द फूलों के स्टॉल, पारंपरिक पूजा सामग्री और विभिन्न तरह के प्रसाद की दुकानें सज गई हैं। स्थानीय निवासियों के अलावा बाहर से आने वाले श्रद्धालु और तीर्थयात्री भी इन पंडालों में विघ्नहर्ता के दर्शन और आशीर्वाद के लिए निरंतर पहुंच रहे हैं। शाम की आरती में उमड़ रहा श्रद्धा का सैलाब शाम के समय आयोजित होने वाली सामूहिक आरती इस पूरे उत्सव का सबसे प्रमुख आकर्षण बनकर उभरी है। स्थानीय निवासी शमशेर का कहना है कि गणेश उत्सव के दौरान हर साल शहर का माहौल पूरी तरह बदल जाता है। उनके अनुसार, इन दिनों पूजा के बहाने पूरा परिवार एक साथ घर से बाहर निकलता है, जिससे आपसी जुड़ाव भी मजबूत होता है। खासतौर पर छोटे बच्चों में गणपति की अलग-अलग स्वरूपों वाली प्रतिमाओं और पंडालों की भव्य सजावट को देखने का जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। शाम ढलते ही जब लोग बाजारों और मुख्य मार्गों की ओर निकलते हैं, तो चारों तरफ किसी बड़े मेले जैसा माहौल नजर आता है। शहर के अधिकांश पंडालों में सुबह और शाम दोनों पहर नियमपूर्वक आरती का आयोजन किया जा रहा है। आरती का समय होते ही आसपास की बस्तियों और कॉलोनियों के लोग बड़ी संख्या में एकत्र हो जाते हैं। पूजा की घंटियों, शंखनाद और गणपति के जयकारों से पूरा वातावरण कुछ पलों के लिए पूरी तरह आध्यात्मिक ऊर्जा से भर जाता है। सामुदायिक एकता और बच्चों के लिए खास अवसर इस धार्मिक आयोजन ने सामाजिक मेलमिलाप को भी एक नई दिशा दी है। स्थानीय निवासी कमल के मुताबिक, गणेश उत्सव का सबसे सकारात्मक पहलू यह है कि लोग अपनी रोजमर्रा की व्यस्त दिनचर्या से कुछ समय निकालकर एक जगह एकत्र होते हैं। शाम की आरती के बहाने पास-पड़ोस के लोग एक साथ जुटते हैं और बच्चे भी धार्मिक रीति-रिवाजों को करीब से देखते हुए पूरे उत्साह से शामिल होते हैं। उनका मानना है कि इन आयोजनों से केवल धार्मिक माहौल ही नहीं बनता, बल्कि मोहल्ले के लोगों के बीच आपसी सौहार्द और बातचीत का दायरा भी बढ़ता है। परिवार के सदस्य साथ समय बिताते हैं और युवा पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ती है। विसर्जन यात्रा की तैयारियों में जुटा शहर उत्सव के अंतिम पड़ाव यानी विसर्जन के दिन शहर की सड़कों पर एक बिल्कुल अलग और भव्य नजारा दिखाई देगा। गणेश उत्सव के समापन पर श्रद्धालु पारंपरिक ढोल-नगाड़ों और वाद्य यंत्रों की थाप पर बप्पा को विदाई देने के लिए सड़कों पर उतरेंगे। इस दौरान पूरे रास्ते गणपति बप्पा मोरया के गगनभेदी जयकारे गूंजेंगे और श्रद्धालु गाते-नाचते हुए जलस्रोतों की ओर प्रस्थान करेंगे। जहां पूरे उत्सव के दौरान प्रतिदिन होने वाली शाम की आरती और सुंदर पंडाल लोगों को एक सूत्र में बांधते रहे हैं, वहीं विसर्जन के दिन सभी भक्त अपार श्रद्धा और भावुकता के साथ विघ्नहर्ता को विदाई देंगे। इसका आप पर असर गणेश उत्सव के कारण ऋषिकेश के सामाजिक, धार्मिक और स्थानीय बाजार परिदृश्य में महत्वपूर्ण बदलाव देखने को मिल रहा है। • ऋषिकेश में: शाम के समय पंडालों और प्रमुख बाजारों के आसपास श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटने से यातायात धीमा हो सकता है। शहरवासियों को शाम की आरती के वक्त मुख्य बाजार मार्गों पर अतिरिक्त समय लेकर निकलने या वैकल्पिक रास्तों का उपयोग करने की सलाह है। • स्थानीय कारोबारियों के लिए: पंडालों के पास फूल, पूजन सामग्री, मिठाई और प्रसाद की मांग में भारी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। छोटे खुदरा व्यापारियों और पटरी दुकानदारों के लिए यह त्योहारी अवधि दैनिक बिक्री बढ़ाने का बेहतरीन अवसर लेकर आई है। • श्रद्धालुओं और परिवारों के लिए: रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच शाम के समय परिवारों को एक साथ समय बिताने और सामुदायिक मेलजोल का मंच मिल रहा है। बच्चे धार्मिक रीति-रिवाजों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से शामिल होकर अपनी परंपराओं को समझ पा रहे हैं। • यातायात और विसर्जन योजना: उत्सव के अंतिम दिन विसर्जन जुलूस के चलते प्रमुख मार्गों पर ढोल-नगाड़ों के साथ भारी भीड़ निकलेगी। यात्रियों और वाहन चालकों को विसर्जन के दिन निर्धारित रूट डायवर्जन और प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का ध्यान रखना होगा। ऐसा क्यों हुआ ऋषिकेश में यह विशेष रौनक गणेश चतुर्थी के वार्षिक धार्मिक अनुष्ठान और स्थानीय निवासियों की सामुदायिक भागीदारी के चलते देखने को मिल रही है। • धार्मिक परंपरा: भाद्रपद मास के दौरान गणेश चतुर्थी से शुरू होकर अनंत चतुर्दशी तक चलने वाला गणेशोत्सव पूरे देश में श्रद्धापूर्वक मनाया जाता है। इसी परंपरा के तहत ऋषिकेश के अलग-अलग मोहल्लों में भगवान गणेश की प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं। • सामुदायिक पहल: शहर के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय नागरिकों और समितियों ने मिलकर पंडालों की स्थापना और सजावट की जिम्मेदारी संभाली है। इस तरह के आयोजनों से आवासीय कॉलोनियों में आपसी संपर्क और सामूहिक सौहार्द का माहौल तैयार होता है। • शाम की नियमित पूजा: पंडालों में सुबह और शाम दोनों समय विधिवत आरती का समय तय होने से लोगों को नियमित रूप से एक निश्चित समय पर जुटने का अवसर मिलता है। यही वजह है कि शाम ढलते ही पंडालों के आसपास स्वाभाविक रूप से श्रद्धालुओं की भीड़ एकत्र हो जाती है। सवाल-जवाब 1. ऋषिकेश में इन दिनों शाम को किस वजह से खास रौनक देखने को मिल रही है? गणेश उत्सव के चलते शहर के विभिन्न इलाकों में स्थापित आकर्षक पंडालों और शाम की आरती में शामिल होने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है। 2. पंडालों में किस तरह की सजावट की गई है? पंडालों में भगवान गणेश की विभिन्न स्वरूपों वाली प्रतिमाएं स्थापित की गई हैं, जिन्हें रंग-बिरंगी रोशनी और ताजे फूलों से सजाया गया है। 3. स्थानीय निवासियों के अनुसार इस उत्सव का सामाजिक महत्व क्या है? स्थानीय लोगों का मानना है कि इस उत्सव से रोजमर्रा की भागदौड़ के बीच लोगों को एक साथ आने और आपस में मेलजोल बढ़ाने का अच्छा मौका मिलता है। 4. गणेश उत्सव के अंतिम दिन शहर में क्या खास कार्यक्रम होगा? उत्सव के अंतिम दिन श्रद्धालु ढोल-नगाड़ों और जयकारों के साथ पारंपरिक विसर्जन जुलूस निकालेंगे और गणपति को भावुक विदाई देंगे। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikesh-men-ganesh-utsava-ki-dhuma-shama-ki-arati-aura-rnga-birnge-pndalon-men-umara-rahi-shraddhaluon-ki-bhira-35348 TrendKia — Har trend, sabse pehle.