ऋषिकेश में टूटी सड़कों और जाम से स्थानीय लोग परेशान, बुनियादी सुविधाओं की मांग उठी गंगा नगरी ऋषिकेश में पर्यटकों की भारी भीड़ के बीच स्थानीय निवासियों ने बदहाल सड़कों, गड्ढों, ट्रैफिक जाम और बुनियादी सुविधाओं की कमी को लेकर अपनी नाराजगी जताई है। गंगा किनारे बसे प्रसिद्ध पर्यटन केंद्र ऋषिकेश में हर साल लाखों की तादाद में सैलानी पहुंचते हैं, लेकिन शहर में तेजी से बढ़ते पर्यटन के साथ ही स्थानीय निवासियों की दैनिक परेशानियां भी बढ़ गई हैं। यहां के रहवासियों का रोजमर्रा का जीवन बदहाल सड़कों, भारी जाम, पार्किंग की किल्लत और जल निकासी जैसी गंभीर बुनियादी दिक्कतों से बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। काम पर निकलने वाले लोगों को समय पर गंतव्य तक पहुंचने के लिए भारी जद्दोजहद करनी पड़ती है, जिससे आम जीवन काफी तनावपूर्ण हो चुका है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ नहीं, गंदगी और अंधेरा भी बड़ी समस्या शहर के बुनियादी ढांचे में पैदल यात्रियों के लिए सुविधाओं की भारी कमी दिखाई देती है। अधिकांश मार्गों पर फुटपाथ की व्यवस्था न होने के कारण राहगीरों को मुख्य सड़कों पर ही वाहनों के बीच चलने के लिए मजबूर होना पड़ता है। इसके अलावा, सार्वजनिक शौचालयों में नियमित साफ-सफाई का अभाव, जगह-जगह कचरे का फैलाव और कई प्रमुख रास्तों पर स्ट्रीट लाइटों के बंद रहने से शाम ढलते ही लोगों के लिए सुरक्षा और आवाजाही से जुड़े खतरे बढ़ जाते हैं। पुराने निवासियों ने गिनाईं ट्रैफिक और गड्ढों की जमीनी हकीकत जन्म से ऋषिकेश में रह रहे स्थानीय नागरिक महेंद्र ग्रोवर का कहना है कि शहर में वाहनों की अनियंत्रित भीड़ बढ़ चुकी है। लापरवाह ड्राइविंग की वजह से पैदल चलने वाले लोगों के लिए सड़क पार करना तक मुश्किल हो जाता है। मुख्य सड़कों पर बने बड़े गड्ढों की बारिश के बाद से मरम्मत नहीं कराई गई है, जिससे आवाजाही बेहद खतरनाक हो गई है। लोग मनमाने ऑटो किराए से भी परेशान हैं और इसके विकल्प के तौर पर सिटी बस सेवा शुरू करने की मांग उठा रहे हैं। अंबेडकर चौक, तिलक रोड और रेलवे रोड की हालत सबसे खराब वर्ष 1946 से ऋषिकेश में निवास कर रहे महेश्वर लाल बताते हैं कि संकरी गलियों में वाहनों का प्रवेश और रास्तों के गड्ढे सबसे बड़ी बाधा बन चुके हैं। बरसात के दिनों में इन रास्तों पर पानी भरने से हालात और बिगड़ जाते हैं। उनके अनुसार, अंबेडकर चौक, तिलक रोड और रेलवे रोड जैसे व्यस्त और प्रमुख मार्गों की तुरंत मरम्मत कराई जानी चाहिए और खराब स्ट्रीट लाइटों को ठीक किया जाना बेहद जरूरी है। हाईवे बेहतर, लेकिन अंदरूनी कॉलोनियों में बुनियादी ढांचे की उपेक्षा पिछले 60 वर्षों से शहर में रह रहे अजय कुमार का मानना है कि यद्यपि मुख्य राजमार्ग पर स्थिति अपेक्षाकृत ठीक है, लेकिन शहर की अंदरूनी गलियों और मार्गों पर हालात बहुत खराब हैं। वहां ट्रैफिक जाम रोजाना का नियम बन चुका है। नागरिकों का स्पष्ट कहना है कि यदि प्रशासन ने तुरंत सड़कों के गड्ढे भरने, नालियों की सफाई दुरुस्त करने और यातायात प्रबंधन पर ध्यान नहीं दिया, तो स्थानीय नागरिकों की समस्याएं और विकराल रूप ले लेंगी। इसका आप पर असर स्थानीय बुनियादी ढांचे की बदहाली से नागरिकों और सैलानियों के रोजमर्रा के सफर पर सीधा असर पड़ रहा है। • ऋषिकेश में: मुख्य बाजारों और तिलक रोड जैसे क्षेत्रों में आने-जाने वाले लोगों को अतिरिक्त समय लेकर निकलना होगा। वाहन चालकों को गड्ढों की वजह से गाड़ी के नुकसान और दुर्घटना के खतरे का सामना करना पड़ रहा है। • भारत में: देश भर से ऋषिकेश आने वाले तीर्थयात्रियों और पर्यटकों को स्थानीय आवाजाही के दौरान भारी जाम और महंगे ऑटो किराए की परेशानी झेलनी पड़ सकती है। यात्रा की योजना बनाते समय प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक की स्थिति का ध्यान रखना जरूरी है। • सुरक्षा पर असर: सड़कों पर स्ट्रीट लाइटें बंद रहने और फुटपाथ न होने के कारण रात के समय पैदल चलने वालों को बेहद सतर्क रहने की जरूरत है। महिलाओं और बुजुर्गों के लिए अंधेरे रास्तों पर चलना जोखिम भरा हो सकता है। • सार्वजनिक परिवहन: नियमित सिटी बसें न होने से आम लोगों को महंगे निजी साधनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। स्थानीय प्रशासन द्वारा सिटी बस सेवा शुरू किए जाने तक दैनिक यात्रा खर्च ऊंचा बना रहेगा। ऐसा क्यों हुआ ऋषिकेश में पर्यटन के अनियंत्रित विस्तार और नियमित नागरिक रख-रखाव के अभाव के चलते यह स्थिति पैदा हुई है। • पर्यटन का भारी दबाव: हर साल लाखों पर्यटकों और निजी वाहनों के शहर में आने से संकरी सड़कों पर उनकी क्षमता से कई गुना अधिक दबाव पड़ रहा है। बुनियादी ढांचे का विस्तार इस बढ़ती आबादी और वाहन संख्या के अनुपात में नहीं हो पाया है। • मानसून के बाद मरम्मत का अभाव: बारिश के मौसम में टूटी सड़कों और गहरे गड्ढों को समय पर नहीं भरा गया। संबंधित विभागों द्वारा नियमित मरम्मत न किए जाने से सड़कें बदहाल होती चली गईं। • योजना और निगरानी की कमी: जल निकासी, स्ट्रीट लाइट और फुटपाथ जैसे बुनियादी कार्यों की नियमित समीक्षा नहीं होने से आंतरिक मार्गों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। सवाल-जवाब 1. ऋषिकेश के स्थानीय निवासियों की सबसे बड़ी शिकायतें क्या हैं? स्थानीय लोग सड़कों पर बने गहरे गड्ढों, भारी ट्रैफिक जाम, संकरी गलियों में वाहनों की भीड़, फुटपाथ के अभाव और खराब स्ट्रीट लाइटों से परेशान हैं। 2. शहर के कौन से मार्ग सबसे अधिक खस्ताहाल बताए गए हैं? स्थानीय नागरिकों के अनुसार अंबेडकर चौक, तिलक रोड और रेलवे रोड की हालत सबसे ज्यादा खराब है, जहां तुरंत मरम्मत की आवश्यकता है। 3. परिवहन को लेकर स्थानीय नागरिक क्या विकल्प चाहते हैं? ऑटो चालकों द्वारा मनमाना किराया वसूले जाने से तंग आकर नागरिक शहर में व्यवस्थित सिटी बस सेवा शुरू करने की मांग कर रहे हैं। 4. पैदल यात्रियों को किन विशेष दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है? फुटपाथ न होने के कारण राहगीरों को मुख्य सड़कों पर चलना पड़ता है, जहां अनियंत्रित ड्राइविंग और बंद स्ट्रीट लाइटों से दुर्घटना का खतरा रहता है। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikesh-men-tuti-sarakon-aura-jama-se-sthaniya-loga-pareshana-buniyadi-suvidhaon-ki-manga-uthi-46892 TrendKia — Har trend, sabse pehle.