ऋषिकेश के योगाचार्य से जानिए सर्दियों में क्यों जरूरी है सूर्य नमस्कार सर्दियों के मौसम में सुबह सूर्य नमस्कार करने से शरीर में गर्माहट बनी रहती है और आलस दूर होता है। इसे एक संपूर्ण शारीरिक व्यायाम माना जाता है जिसमें 12 अलग-अलग मुद्राएं शामिल हैं। ऋषिकेश में सर्दियों के दौरान सुबह के वक्त बिस्तर छोड़ने और योग अभ्यास करने में अक्सर बहुत अधिक सुस्ती महसूस होती है। हालांकि अगर दिन की शुरुआत सूर्य नमस्कार के साथ की जाए तो शरीर को चमत्कारी स्वास्थ्य लाभ मिल सकते हैं। सूर्य नमस्कार योग का एक ऐसा अनूठा और प्रभावशाली अभ्यास है जिसमें शरीर के लगभग हर एक अंग की बेहतरीन कसरत हो जाती है। इस प्राचीन योग पद्धति को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाने से शरीर के भीतर प्राकृतिक गर्माहट बनी रहती है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर की लचीलापन यानी फ्लेक्सिबिलिटी में भी उल्लेखनीय सुधार होता है। स्थानीय जानकारियों के आधार पर ऋषिकेश के योगाचार्य दिनेश बताते हैं कि सूर्य नमस्कार दरअसल योग की एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें शरीर को पूरी तरह स्वस्थ और सक्रिय बनाए रखने के लिए कुल 12 अलग-अलग मुद्राओं का अभ्यास करना पड़ता है। इन सभी आसनों और मुद्राओं को एक बेहद खास और निर्धारित क्रम में पूरा किया जाता है ताकि शरीर को इसका अधिकतम लाभ मिल सके। सूर्य नमस्कार की 12 विशेष मुद्राएं और क्रम सूर्य नमस्कार की पूरी प्रक्रिया की शुरुआत एकदम सीधे खड़े होकर दोनों हाथ जोड़ने की मुद्रा से होती है। इसके बाद धीरे-धीरे हाथों को ऊपर की दिशा में उठाना, फिर आराम से आगे की ओर झुकना, हथेलियों को जमीन पर टिकाना और पैरों को एक-एक करके पीछे की तरफ ले जाना जैसी कई महत्वपूर्ण क्रियाएं शामिल होती हैं। इस योग क्रम के दौरान कुछ ऐसी मुद्राएं भी आती हैं जिनमें शरीर को जमीन के बिल्कुल करीब लाना पड़ता है, जबकि कुछ अन्य आसनों में कमर और रीढ़ की हड्डी को पीछे की तरफ मोड़ना होता है। इस पूरे अभ्यास के दौरान इंसान के हाथ, पैर, कमर, पीठ, पेट और कंधों की बहुत ही शानदार कसरत हो जाती है। यही मुख्य वजह है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञों और योग गुरुओं द्वारा इसे एक संपूर्ण यानी फुल बॉडी वर्कआउट के रूप में मान्यता दी गई है जो शरीर के हर हिस्से को सक्रिय कर देता है। अभ्यास का सही समय और चरणों की पूरी जानकारी योगाचार्य दिनेश के अनुसार सूर्य नमस्कार हमेशा सुबह के समय सूर्योदय के दौरान पूरी तरह खाली पेट करना सबसे ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। इस पूरी योग श्रृंखला की शुरुआत सबसे पहले प्रणामासन से की जानी चाहिए, जिसके बाद क्रमशः हस्त उत्तानासन, पादहस्तासन, अश्व संचालनासन, दंडासन, अष्टांग नमस्कार, भुजंगासन और पर्वतासन का अभ्यास करना होता है। इन आसनों को पूरा करने के बाद इस क्रम को उल्टा दोहराया जाता है जिसमें दोबारा अश्व संचालनासन, पादहस्तासन, हस्त उत्तानासन और अंत में वापस प्रणामासन की स्थिति में आना पड़ता है। इन सभी चरणों के मेल से कुल 12 आसनों का एक पूरा राउंड या चक्र सफलतापर्वक पूरा होता है, जिसे अपनी क्षमता के अनुसार कई बार दोहराया जा सकता है। नियमित अभ्यास से मिलने वाले प्रमुख स्वास्थ्य लाभ योगाचार्य दिनेश का यह भी कहना है कि सर्दियों के मौसम में अगर नियमित रूप से सूर्य नमस्कार का अभ्यास किया जाए तो शरीर को कई प्रकार के शारीरिक और मानसिक फायदे मिलते हैं। इस योग के प्रभाव से शरीर के भीतर अंदरूनी गर्माहट पैदा होती है और ठंड के मौसम में हावी होने वाली सुस्ती तथा थकान काफी हद तक कम हो जाती है। सूर्य नमस्कार की बदौलत हमारे हाथ, पैर, कमर और पेट के अंगों की बहुत अच्छी स्ट्रेचिंग और कसरत हो जाती है जिससे मांसपेशियां अंदर से मजबूत बनती हैं और शरीर की फ्लैक्सिबिलिटी तेजी से बढ़ती है। इसके अलावा इस योग का रोजाना अभ्यास करने से शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को तेजी से बर्न करने में बहुत मदद मिलती है, जिससे वजन को नियंत्रित रखने और घटाने में भी काफी फायदा पहुंचता है। इसका आप पर असर सर्दियों के मौसम में सुबह सूर्य नमस्कार करने से आम लोगों को ठंड से राहत और फिटनेस बनाए रखने में मदद मिलती है। • शरीर में गर्माहट: नियमित अभ्यास से सर्द मौसम में शरीर का तापमान नियंत्रित रहता है और अंदरूनी गर्माहट बनी रहती है। इससे ठंड के कारण होने वाली जकड़न कम होती है। • सुस्ती से राहत: सुबह के समय यह योगासन करने से दिनभर की सुस्ती और आलस दूर होता है जिससे ऊर्जा का स्तर बढ़ता है। यह काम करने की क्षमता को बेहतर बनाता है। • मांसपेशियों की मजबूती: इसके 12 आसनों से हाथ, पैर और पीठ की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और शरीर का लचीलापन बढ़ता है। यह शारीरिक कमजोरी दूर करने में सहायक है। • वजन नियंत्रण: रोजाना इसके अभ्यास से कैलोरी तेजी से बर्न होती है जिससे सर्दियों में बढ़ने वाले वजन को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। यह पाचन तंत्र को भी दुरुस्त रखता है। ऐसा क्यों हुआ सर्दियों के समय सूर्य नमस्कार को सबसे प्रभावी अभ्यास इसलिए माना जाता है क्योंकि इसकी शारीरिक मुद्राएं शरीर के मेटाबोलिज्म को तेजी से सक्रिय करती हैं। • शारीरिक मुद्राएं: इस योग में शामिल 12 अलग-अलग आसन शरीर के हर प्रमुख अंग को स्ट्रेच और सक्रिय करते हैं। यह रक्त संचार को बेहतर बनाता है। • मौसम का प्रभाव: ठंड के दिनों में लोग शारीरिक गतिविधि कम कर देते हैं जिससे सुस्ती बढ़ती है। सूर्य नमस्कार बिना किसी उपकरण के घर पर ही इस समस्या का समाधान देता है। • पारंपरिक क्रम: प्रणामासन से लेकर भुजंगासन तक का यह विशेष क्रम शरीर के संतुलन और लचीलेपन को प्राकृतिक रूप से विकसित करता है। सवाल-जवाब 1. सूर्य नमस्कार में कुल कितने आसन या मुद्राएं होती हैं? सूर्य नमस्कार में कुल 12 अलग-अलग मुद्राएं होती हैं जिन्हें एक खास क्रम में किया जाता है। 2. सूर्य नमस्कार करने का सबसे सही समय कौन सा माना गया है? इसे सुबह के समय सूर्योदय के दौरान पूरी तरह खाली पेट करना सबसे अच्छा माना जाता है। 3. सूर्य नमस्कार की शुरुआत किस आसन से होती है? इस योग क्रम की शुरुआत सबसे पहले प्रणामासन से की जाती है। 4. सर्दियों में सूर्य नमस्कार करने के क्या मुख्य फायदे हैं? इससे शरीर में गर्माहट आती है, सुस्ती दूर होती है, मांसपेशियां मजबूत होती हैं और वजन घटाने में मदद मिलती है। 5. यह जानकारी किस योगाचार्य द्वारा दी गई है? यह जानकारी ऋषिकेश के योगाचार्य दिनेश द्वारा दी गई है। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikesha-ke-yogacharya-se-janie-sardiyon-men-kyon-jaruri-hai-surya-namaskar-57612 TrendKia — Har trend, sabse pehle.