ऋषिकेश में मानसून कैंपिंग के दौरान बरते ये एहतियात, नदी किनारे लापरवाही पड़ सकती है भारी ऋषिकेश में मानसून के दौरान नदी किनारे कैंपिंग करने से पहले मौसम के मिजाज और जलस्तर से जुड़ी सावधानियों के बारे में जान लेना बेहद जरूरी है। ऊपर पहाड़ों की बारिश का असर निचले इलाकों में कुछ देर बाद दिखाई देता है, जिससे शांत दिखने वाली नदियां अचानक उफान पर आ सकती हैं। यदि आप इन दिनों ऋषिकेश और उसके आसपास के इलाकों में घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो नदी के पास कैंपिंग करने से पहले कुछ जरूरी एहतियात बरतना बेहद आवश्यक है। मौजूदा समय में मानसून का मौसम होने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार बारिश हो रही है, जिसका सीधा असर गंगा और आसपास की अन्य नदियों के जलस्तर पर कभी भी पड़ सकता है। सबसे गौर करने वाली बात यह है कि नदी का जलस्तर हमेशा स्थानीय बारिश के तुरंत बाद नहीं बढ़ता है। कई बार पहाड़ों के ऊपरी हिस्सों में होने वाली मूसलाधार बारिश का पानी कुछ घंटों बाद नीचे मैदानी या तलहटी वाले इलाकों में बहती नदियों तक पहुंचता है। ऐसे हालात में नदी के बहुत करीब बैठना, वहां अपना टेंट लगाना या पानी के इर्द-गिर्द फोटोग्राफी और रील्स बनाना जानलेवा साबित हो सकता है। मानसून के दिनों में क्यों बढ़ जाता है रिवर साइड कैंपिंग का क्रेज ऋषिकेश और इसके आसपास के इलाकों में मानसून के सीजन के दौरान रिवर साइड कैंपिंग का रोमांच पर्यटकों को अपनी ओर खींचता है। गंगा के घाटों के नजदीक बैठना, हरे-भरे जंगलों के बीच तंबू गाड़ना और बारिश की बूंदों के बीच वादियों के मनमोहक नजारों का आनंद लेना सैलानियों को बहुत भाता है। हालांकि, यही सुहाना मौसम कई बार गंभीर आपदा या परेशानी की वजह भी बन जाता है। पहाड़ी इलाकों में जब लगातार बारिश होती है, तो छोटी नदियां और बरसाती नाले अचानक उफनने लगते हैं। इसका सीधा प्रभाव मुख्य नदी के प्रवाह पर पड़ता है और कुछ ही पलों में शांत बहने वाली जलधारा विकराल और तेज बहाव वाली बन जाती है। शांत दिखने वाली नदी को सुरक्षित समझने की भूल न करें अक्सर देखा गया है कि बाहर से आने वाले पर्यटक नदी के पानी को सामान्य और शांत देखकर उसके बेहद करीब चले जाते हैं। लोग पानी के किनारे बैठकर भोजन करते हैं, तस्वीरें खिंचवाते हैं या फिर नदी के पास ही टेंट लगाकर रात गुजारने का जोखिम उठाते हैं। उस वक्त उन्हें देखकर ऐसा लगता है कि नदी की स्थिति बिल्कुल सामान्य है और कोई खतरा नहीं है, लेकिन ऊपरी पहाड़ों में होने वाली बारिश की वजह से हालात किसी भी पल बदल सकते हैं। यही वजह है कि मानसून के इस दौर में नदी के एकदम करीब जाना किसी भी लिहाज से बुद्धिमानी नहीं मानी जाती है। ऊपरी पहाड़ों की बारिश का असर बाद में आता है नजर स्थानीय निवासी अंकित ने बातचीत के दौरान इस खतरे के बारे में विस्तार से बताया कि बाहर से आने वाले अधिकांश लोग केवल मौके पर पानी की स्थिति को देखकर यह मान लेते हैं कि सब कुछ पूरी तरह सुरक्षित है, जबकि पहाड़ों पर हो रही बारिश का असर कुछ समय बाद नीचे दिखाई देता है। उनका यह सुझाव है कि पर्यटकों को हमेशा नदी के अत्यंत करीब जाने से बचना चाहिए और कैंपिंग के लिए ऐसे स्थानों का चयन करना चाहिए जो पूरी तरह सुरक्षित और वैध हों। खासकर रात के वक्त नदी के आसपास जाना और भी ज्यादा खतरनाक हो जाता है, क्योंकि अंधेरा होने के कारण पानी के बहाव में होने वाले बदलावों का सही अनुमान लगाना लगभग असंभव हो जाता है। केवल सुंदर लोकेशन देखकर न चुनें कैंपिंग की जगह कैंपिंग के दौरान सैलानियों द्वारा की जाने वाली एक और बड़ी चूक यह होती है कि वे नदी के पास टेंट लगाने के लिए सिर्फ ऐसी जमीन तलाशते हैं जो समतल हो और देखने में बहुत आकर्षक लगे। कई बार जलस्तर बढ़ने की स्थिति में यही खूबसूरत और सपाट जगहें पानी की चपेट में सबसे पहले आती हैं। इसलिए केवल सुंदर लोकेशन या दृश्य देखकर अपने कैंपिंग स्पॉट का चुनाव करना बिल्कुल भी सही फैसला नहीं है। फोटो और रील्स के चक्कर में न उठाएं बड़ा जोखिम पर्यटकों को इस बात का भी विशेष ध्यान रखना चाहिए कि नदी के किनारे मौज-मस्ती के दौरान बरती गई जरा सी भी लापरवाही उन पर भारी पड़ सकती है। तेज वेग वाले पानी में उतरना, चिकने पत्थरों पर खड़े होकर सेल्फी क्लिक करना या फिर बच्चों को पानी के बेहद नजदीक जाने की छूट देना किसी भी परिस्थिति में उचित नहीं है। बारिश के इस मौसम में नदी का ऊपर से बहता पानी भले ही शांत नजर आए, लेकिन उसकी गहराई और अंदरूनी बहाव की गति काफी खतरनाक हो सकती है। इसका आप पर असर ऋषिकेश या पहाड़ी इलाकों में मानसून के दौरान यात्रा करने वाले पर्यटकों को अचानक बढ़ते जलस्तर और अचानक आने वाली बाढ़ जैसी स्थितियों से सतर्क रहना चाहिए। • भारत में: पहाड़ी पर्यटक स्थलों पर मानसून के दौरान यात्रा करने वाले सभी सैलानियों को सतर्क रहना चाहिए क्योंकि ऊपरी इलाकों की बारिश निचले क्षेत्रों में अचानक जलस्तर बढ़ा सकती है। • उत्तराखंड में: ऋषिकेश और आसपास के नदी किनारे कैंपिंग करने वाले पर्यटकों को रात के समय या बिना अनुमति वाले अनधिकृत स्थानों पर टेंट लगाने से बचना चाहिए। ऐसा क्यों हुआ पहाड़ी क्षेत्रों में मानसून के समय नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ने का मुख्य कारण ऊपरी इलाकों में होने वाली मूसलाधार बारिश है। • ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में बारिश: पहाड़ों की चोटियों और ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में होने वाली बारिश का पानी कुछ घंटों बाद निचले बहाव वाले क्षेत्रों तक पहुंचता है। • सहायक नदियों और नालों का उफान: लगातार बारिश के कारण छोटी नदियां और बरसाती नाले अचानक उफनने लगते हैं, जिससे मुख्य नदी का वेग बढ़ जाता है। • अंधेरे में जोखिम का अनुमान न लगना: रात के समय पानी के बहाव में होने वाले बदलावों को देख पाना कठिन होता है, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। सवाल-जवाब 1. ऋषिकेश में मानसून के दौरान नदी किनारे कैंपिंग करना क्यों खतरनाक हो सकता है? पहाड़ों में लगातार बारिश के कारण नदी का जलस्तर अचानक बढ़ सकता है, जिससे शांत दिखने वाली नदी तेज बहाव वाली बन जाती है। 2. पहाड़ की बारिश का असर नदियों में कब दिखाई देता है? पहाड़ के ऊपरी इलाकों में हुई बारिश का असर कुछ घंटों बाद नीचे बहने वाली नदियों में दिखाई देता है। 3. कैंपिंग के लिए किस तरह की जगह चुननी चाहिए? पर्यटकों को कैंपिंग के लिए ऐसी जगह चुननी चाहिए जो सुरक्षित और अधिकृत हो, और सिर्फ खूबसूरत लोकेशन देखकर स्पॉट तय नहीं करना चाहिए। 4. रात के समय नदी के पास जाना क्यों जोखिम भरा है? अंधेरे में पानी के बहाव में होने वाले बदलावों का अंदाजा लगाना मुश्किल होता है, इसलिए रात में नदी के पास जाना जोखिम भरा है। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikesha-men-manasuna-kainpinga-ke-daurana-barate-ye-ehatiyata-nadi-kinare-laparavahi-para-sakati-hai-bhari-29321 TrendKia — Har trend, sabse pehle.