ऋषिकुल संस्थान के कायाकल्प को धामी सरकार की मंजूरी, कक्षा छह से एमए तक मिलेगी मुफ्त पढ़ाई उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में हरिद्वार के ऋषिकुल स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के समग्र विकास के लिए बड़ा निर्णय लिया गया है। हरिद्वार के मेला नियंत्रण भवन में एक अहम प्रशासनिक बैठक आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने की। इस उच्च स्तरीय बैठक में हरिद्वार स्थित श्री मदन मोहन मालवीय प्राच्य शोध संस्थान के भविष्य को लेकर एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मुहर लगाई गई। सरकार के इस कदम का मुख्य उद्देश्य प्राचीन भारतीय विद्याओं और सनातन ज्ञान परंपरा को संबल प्रदान करना है। स्वायत्त सोसायटी के रूप में होगा संचालन कैबिनेट के फैसलों के अनुसार अब यह संस्थान एक स्वतंत्र स्वायत्त सोसायटी के दायरे में रहकर काम करेगा। इस बदलाव से संस्थान को प्रशासनिक फैसलों और वित्तीय प्रबंधन में अधिक स्वतंत्रता तथा स्थिरता हासिल होगी। परिसर को पंडित मदन मोहन मालवीय के विचारों और हिंदू संस्कृति के मूल सिद्धांतों के अनुरूप एक वृहद केंद्र के रूप में ढाला जाएगा। परिसर में विकसित होंगे कई नए केंद्र इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत पूरे परिसर में कई विशिष्ट अध्ययन और साधना केंद्र बनाए जाने की रूपरेखा तैयार की गई है। इनमें योग और ध्यान केंद्र के अलावा आयुर्वेद अध्ययन और अनुसंधान केंद्र शामिल हैं। साथ ही ज्योतिष, प्राच्य अध्ययन, ललित कला, हिंदू दर्शन और एक भव्य आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र का निर्माण भी इस परियोजना का हिस्सा है। वैदिक परंपरा और आधुनिक शोध का समन्वय इस पूरी परियोजना का मूल लक्ष्य प्राचीन वैदिक विज्ञान, भारतीय ज्ञान परंपरा और आज के दौर के आधुनिक अनुसंधान के बीच एक मजबूत सेतु का निर्माण करना है। आगामी अर्धकुंभ 2027 के आयोजन से ठीक पहले लिए गए इस निर्णय से हरिद्वार को वैश्विक स्तर पर आध्यात्मिक और दार्शनिक शोध के एक बड़े मानचित्र पर स्थापित करने में मदद मिलेगी। दुनिया भर से आने वाले शोधकर्ताओं, संतों और विद्यार्थियों के लिए यह स्थान उच्च स्तरीय केंद्र बनेगा। निःशुल्क शिक्षा और अध्ययन का दायरा इस संस्थान से जुड़े शिक्षक डॉ. नवीन पंत ने बताया कि यहां संचालित संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में कक्षा 6 से लेकर एमए तक के लगभग 250 छात्र किसी भी शुल्क के बिना शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। इस परिसर में साहित्य, व्याकरण, ज्योतिष, वेद और गीता जैसे प्राचीन विषयों की विधिवत शिक्षा दी जाती है। आर्थिक तंगी से जूझने वाले परिवारों के बच्चों के लिए यह व्यवस्था बेहद मददगार साबित हो रही है, जिसे अब सरकार के नए फैसलों से और अधिक विस्तार दिया जा रहा है। इसका आप पर असर उत्तराखंड सरकार के इस निर्णय से राज्य में पारंपरिक शिक्षा प्राप्त कर रहे विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं को सीधा लाभ मिलेगा। • भारत में: सनातन संस्कृति और प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण के लिए देशभर के शिक्षाविदों को एक नया और आधुनिक मंच प्राप्त होगा। • उत्तराखंड में: हरिद्वार के ऋषिकुल परिसर में निशुल्क शिक्षा ले रहे करीब 250 छात्रों को उन्नत शैक्षणिक सुविधाएं और बेहतर संसाधन मिल सकेंगे। • आर्थिक सहायता: आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के परिवारों से आने वाले विद्यार्थियों को कक्षा 6 से लेकर एमए स्तर तक की पढ़ाई पूरी तरह मुफ्त मिलेगी। • धार्मिक पर्यटन: अर्धकुंभ 2027 के आयोजन से पहले संस्थान के विकास से स्थानीय स्तर पर आध्यात्मिक पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। ऐसा क्यों हुआ यह निर्णय प्राचीन विद्याओं के संरक्षण और अर्धकुंभ की तैयारियों को ध्यान में रखकर लिया गया है। • स्वायत्तता की आवश्यकता: संस्थान को प्रशासनिक और वित्तीय मोर्चे पर अधिक मजबूत बनाने के लिए इसे सोसायटी मोड पर संचालित करने का निर्णय लिया गया। • वैदिक शिक्षा का विस्तार: आर्थिक रूप से कमजोर पृष्ठभूमि के छात्रों को आधुनिक संसाधनों से जोड़ते हुए वैदिक और पारंपरिक शिक्षा को बढ़ावा देना मुख्य लक्ष्य है। • अर्धकुंभ की तैयारियां: वर्ष 2027 में होने वाले अर्धकुंभ आयोजन से पहले हरिद्वार को एक वैश्विक दार्शनिक और सांस्कृतिक शोध केंद्र के रूप में विकसित किया जाना है। सवाल-जवाब 1. ऋषिकुल संस्थान के विकास के लिए कौन सा बड़ा फैसला लिया गया है? धामी कैबिनेट ने इसके समग्र विकास के लिए एक कमेटी के गठन और इसे स्वायत्त सोसायटी मोड पर संचालित करने की मंजूरी दी है। 2. इस संस्थान में कुल कितने छात्र निशुल्क शिक्षा पा रहे हैं? यहां संचालित संस्कृत विद्यालयों और महाविद्यालयों में कक्षा 6 से एमए तक लगभग 250 छात्र निशुल्क शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं। 3. इस परिसर में कौन-कौन से नए केंद्र विकसित किए जाएंगे? परिसर में योग, आयुर्वेद अनुसंधान, ज्योतिष, ललित कला, हिंदू दर्शन और एक आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र विकसित किए जाएंगे। 4. इस संस्थान के विस्तार का मुख्य उद्देश्य क्या है? इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक शोध के बीच समन्वय स्थापित कर हरिद्वार को वैश्विक पहचान दिलाना है। 5. यह घोषणा किस आयोजन से पहले की गई है? यह निर्णय अर्धकुंभ 2027 के आयोजन से ठीक पहले लिया गया है। https://trendkia.com/uttarakhand/rishikula-snsthana-ke-kayakalpa-ko-dhami-sarakara-ki-mnjuri-kaksha-chhaha-se-emae-taka-milegi-muphta-parhai-47060 TrendKia — Har trend, sabse pehle.