रुद्रप्रयाग के नगरासू गुरुद्वारे में बढ़ा तनाव, कर्णप्रयाग विवाद को लेकर निहंगों ने सेवादार को बनाया बंधक उत्तराखंड के नगरासू गुरुद्वारे पर पिछले 28 घंटों से निहंगों का कब्जा है। कर्णप्रयाग झड़प मामले में गिरफ्तार साथियों की रिहाई की मांग को लेकर एक सेवादार को बंधक बनाया गया है। नगरासू गुरुद्वारे में दूसरे दिन भी तनाव बरकरार उत्तराखंड में बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर स्थित नगरासू गुरुद्वारे में बीते 28 घंटों से भारी तनाव की स्थिति बनी हुई है। निहंग सिखों के एक समूह ने इस गुरुद्वारे पर नियंत्रण कर लिया है और वहां के एक सेवादार को अपने कब्जे में ले रखा है। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए रुद्रप्रयाग के जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर भारी सुरक्षा बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। प्रशासन की ओर से निहंगों से फोन के जरिए संपर्क साधा जा रहा है ताकि सेवादार को सुरक्षित मुक्त कराया जा सके और गतिरोध को समाप्त किया जा सके। दोनों पक्षों के अपने-अपने दावे और आशंकाएं गुरुद्वारा प्रबंधन ने निहंगों की इस कार्रवाई को सरासर गुंडागर्दी करार दिया है। गुरुद्वारे के मुख्य सेवादार बेअंत सिंह ने ट्रेंडकिया से बातचीत के दौरान आरोप लगाया कि निहंगों ने उनके साथ बर्बरतापूर्वक मारपीट की और जबरन गुरुद्वारे की संपत्ति पर अपना कब्जा जमा लिया। उन्होंने यह भी बताया कि कब्जा करने वाले लोग लगातार धमकियां दे रहे हैं कि आगामी 25 जून तक उनके समर्थन में करीब दो से ढाई लाख लोग वहां पहुंचने वाले हैं। इस चेतावनी के कारण स्थानीय सिख समुदाय और प्रबंधन से जुड़े लोग बेहद भयभीत हैं। दूसरी तरफ, निहंगों का कहना है कि वे कर्णप्रयाग की घटना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने मांग की है कि कर्णप्रयाग मामले में जिन निहंगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया है, उन्हें तत्काल रिहा किया जाए। इसके साथ ही उन्होंने गुरुद्वारा प्रबंधन पर भी मारपीट करने और बंदूक दिखाकर डराने-धमकाने के गंभीर आरोप लगाए हैं। कर्णप्रयाग विवाद की असल वजह क्या है? चमोली के जिलाधिकारी गौरव कुमार ने इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि को स्पष्ट किया है। उन्होंने बताया कि यह विवाद 16 जून को कर्णप्रयाग में निहंग श्रद्धालुओं और एक स्थानीय युवक के बीच वाहन पार्किंग को लेकर शुरू हुआ था। मामूली बहस के बाद दोनों पक्षों में झड़प हो गई थी। जिलाधिकारी ने साफ किया कि इस मामले का किसी भी विशेष धर्म, जाति या समुदाय से कोई लेना-देना नहीं है। यह केवल दो पक्षों के बीच अचानक उपजा एक व्यक्तिगत विवाद था। इलाके में अमन-चैन बनाए रखने के लिए कर्णप्रयाग में धारा 163 लागू कर दी गई है। इसके तहत चार या पांच से अधिक लोगों के एक जगह जमा होने और हथियार लेकर चलने पर पूरी तरह पाबंदी है। प्रशासन ने चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया या अन्य मंचों पर धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वाली टिप्पणियां करने वालों और अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। शांति बनाए रखने की अपील और सुरक्षा के इंतजाम इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीतिक सरगर्मियां भी तेज हो गई हैं। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालुओं और पर्यटकों से स्थानीय समाज की संस्कृति, परंपराओं और भावनाओं का सम्मान करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि विवाद की स्थिति में दोनों पक्षों को संयम और विवेक से काम लेना चाहिए। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से धार्मिक प्रतीकों से जुड़े नियमों को लेकर एक स्पष्ट नीति बनाने का आग्रह किया ताकि भविष्य में ऐसे टकरावों से बचा जा सके। इस बीच, हेमकुंड साहिब की यात्रा सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्वक जारी है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए गोविंद घाट समेत सभी प्रमुख चेक पोस्टों पर अतिरिक्त पुलिस बल और ITBP के जवानों को तैनात किया गया है। स्थानीय निवासी भी लगातार श्रद्धालुओं और निहंगों से पहाड़ों की शांति और सौहार्द को बनाए रखने की अपील कर रहे हैं। इसका आप पर असर • यात्रियों के लिए: बद्रीनाथ हाईवे और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर जाने वाले श्रद्धालुओं को अतिरिक्त सुरक्षा जांच से गुजरना पड़ सकता है, हालांकि यात्रा सुचारू रूप से जारी है। • उत्तराखंड में: कर्णप्रयाग और नगरासू के आसपास धारा 163 लागू होने के कारण स्थानीय निवासियों और पर्यटकों को सलाह दी जाती है कि वे किसी भी स्थान पर भीड़ जमा न करें और अफवाहों से बचें। सवाल-जवाब 1. नगरासू गुरुद्वारे में तनाव की मुख्य वजह क्या है? निहंग सिखों के एक गुट ने गुरुद्वारे पर कब्जा कर एक सेवादार को बंधक बना लिया है। वे कर्णप्रयाग झड़प मामले में गिरफ्तार किए गए साथियों की रिहाई की मांग कर रहे हैं। 2. कर्णप्रयाग में विवाद क्यों शुरू हुआ था? यह विवाद 16 जून को निहंग श्रद्धालुओं और स्थानीय युवक के बीच वाहन पार्किंग को लेकर हुई आपसी कहासुनी और झड़प के बाद शुरू हुआ था। 3. स्थानीय प्रशासन ने सुरक्षा के क्या कदम उठाए हैं? कर्णप्रयाग में धारा 163 लागू कर दी गई है और हथियार ले जाने व भीड़ इकट्ठा होने पर पाबंदी है। गोविंद घाट समेत विभिन्न स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस और ITBP के जवान तैनात हैं। 4. मुख्य सेवादार बेअंत सिंह ने क्या आरोप लगाए हैं? उन्होंने आरोप लगाया कि निहंगों ने गुरुद्वारे के कर्मचारियों के साथ मारपीट की और जबरन कब्जा किया। साथ ही 25 जून तक बड़ी संख्या में समर्थकों के वहां जुटने की धमकी दी गई है। https://trendkia.com/uttarakhand/rudraprayag-ke-nagrasu-gurudwara-men-barha-tanava-karnaprayag-vivada-ko-lekara-nihngon-ne-sevadara-ko-banaya-bndhaka-2210 TrendKia — Har trend, sabse pehle.