# सख्त रूट डायवर्जन और शटल व्यवस्था के खौफ से नैनीताल में सिमटा पर्यटन, चालीस फीसदी ही पहुंचे सैलानी

> उत्तराखंड के नैनीताल में नवरात्र के लंबे वीकेंड पर ट्रैफिक की नई व्यवस्था और जाम की आशंका के चलते सैलानियों की संख्या 30 से 40 प्रतिशत ही रह गई, जिससे स्थानीय कारोबारियों को भारी निराशा का सामना करना पड़ा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-20 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/sakhta-ruta-dayavarjana-aura-shatala-vyavastha-ke-khaupha-se-nainital-men-simata-paryatana-chalisa-phisadi-hi-pahunche-sailani-49690 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीताल, उत्तराखंड पर्यटन, कैंची धाम, ट्रैफिक प्लान, होटल एसोसिएशन, दिग्विजय सिंह बिष्ट, दशहरा

उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्वतीय नगर नैनीताल में नवरात्र और लंबे सप्ताहांत के दौरान पर्यटकों की भारी भीड़ जुटने की उम्मीदें पूरी तरह धराशायी हो गई हैं। सुहावने मौसम और त्योहारों की गहमा-गहमी के बावजूद शहर की सड़कें और होटल काफी हद तक वीरान नजर आए। स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों का कहना है कि पुलिस और प्रशासन द्वारा लागू किए गए ट्रैफिक प्लान, रूट डायवर्जन और लंबे जाम की आशंका के चलते लोगों ने अपनी यात्राएं रद्द कर दीं। इसके चलते सप्ताहांत पर पर्यटन कारोबार सामान्य दिनों के मुकाबले सिमटकर महज 30 से 40 प्रतिशत तक ही रह गया है।

## यातायात व्यवस्था में उलझन बनी पर्यटकों के कतराने की वजह
कारोबारियों का मानना है कि नैनीताल आने वाले सैलानियों और कैंची धाम जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए एक जैसी यातायात व्यवस्था लागू करने से बड़ी गड़बड़ी पैदा हो रही है। हल्द्वानी से नैनीताल के मार्ग पर जगह-जगह किए गए रूट डायवर्जन और शटल सेवा के भ्रम ने लोगों के मन में डर पैदा कर दिया है। पर्यटकों को लगता है कि शहर पहुंचने से पहले ही उन्हें कई घंटों तक जाम में फंसना पड़ेगा या गाड़ियां बदलनी पड़ेंगी। इस मानसिक तनाव और असुविधा से बचने के लिए कई सैलानी या तो घर पर ही रहे या उन्होंने अन्य पर्यटन स्थलों का रुख कर लिया।

## होटल एसोसिएशन ने उठाई अलग ट्रैफिक प्लान की मांग
नैनीताल होटल एसोसिएशन के अध्यक्ष दिग्विजय सिंह बिष्ट ने स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि लंबे वीकेंड को देखते हुए कारोबारियों ने बड़े पैमाने पर सैलानियों के आने की तैयारी की थी, लेकिन आंकड़े बेहद निराशाजनक रहे। उनके अनुसार, शहर में सामान्य क्षमता की तुलना में केवल 30 से 40 फीसदी पर्यटक ही पहुंचे हैं। दिग्विजय सिंह बिष्ट ने बताया कि पहले दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में हुए आंदोलनों और प्रदर्शनों के कारण उत्तराखंड के पर्यटन पर बुरा असर पड़ा था, और अब पुलिस के भ्रमपूर्ण ट्रैफिक प्लान ने कारोबार को और अधिक नुकसान पहुंचाया है।

उन्होंने स्पष्ट किया कि जब नैनीताल में पार्किंग पूरी तरह भर जाती है या वाहनों का दबाव बहुत बढ़ जाता है, तब पुलिस प्रशासन द्वारा विशेष यातायात नियम लागू करना समझ में आता है। लेकिन जब सैलानियों की संख्या पहले से ही कम हो, तब भी अचानक रूट बदल देना और शटल सेवा का डर दिखाना यात्रियों को असमंजस में डाल देता है। उन्होंने मांग की कि कैंची धाम और नैनीताल दोनों की भौगोलिक और व्यावहारिक स्थितियां अलग हैं, इसलिए दोनों के लिए अलग-अलग यातायात योजनाएं बनाई जानी चाहिए। कैंची धाम में श्रद्धालुओं की नियंत्रित आवाजाही के लिए शटल सेवा उपयुक्त हो सकती है, लेकिन नैनीताल के लिए शहर की वास्तविक पार्किंग क्षमता और भीड़ के आधार पर ही निर्णय लिया जाना चाहिए।

## नाव चालकों और छोटे कारोबारियों पर पड़ा सीधा असर
पर्यटकों की कमी का खामियाजा केवल बड़े होटल मालिकों को ही नहीं, बल्कि नैनी झील में नाव चलाने वाले नाव चालकों, टैक्सी चालकों, रेस्टोरेंट संचालकों और छोटे दुकानदारों को भी भुगतना पड़ रहा है। स्थानीय नाव चालक वीरेंद्र पवार ने बताया कि इस समय नैनीताल का मौसम बेहद खुशनुमा है और उन्हें अच्छे कारोबार की उम्मीद थी। हालांकि, उनके अनुमान के मुताबिक पूरे सप्ताहांत के दौरान केवल पांच से छह हजार पर्यटक ही नैनीताल पहुंचे, जो त्योहार के सीजन के हिसाब से काफी कम है। उन्होंने कहा कि हल्द्वानी से आने वाले रास्ते पर रूट डायवर्जन के कारण सैलानियों को भारी असुविधा हो रही है, जिससे लोग रास्ते में ही परेशान हो जाते हैं।

## प्रशासन से पारदर्शी जानकारी की मांग और दशहरे से आस
आर्थिक नुकसान झेल रहे पर्यटन कारोबारियों ने जिला प्रशासन और पुलिस विभाग से गुहार लगाई है कि यातायात व्यवस्था को लेकर स्पष्ट और पारदर्शी जानकारी पहले से जारी की जाए। कारोबारियों का कहना है कि परिस्थितियों का सही आकलन किए बिना एक समान नियम थोपने से स्थानीय अर्थव्यवस्था को भारी नुकसान पहुंच रहा है। होटल, रेस्टोरेंट, हस्तशिल्प और परिवहन से जुड़े सभी लोग सैलानियों की आवक पर ही निर्भर हैं। नवरात्र के वीकेंड में हुई निराशा के बाद अब तमाम कारोबारियों की निगाहें आगामी दशहरे की छुट्टियों पर टिक गई हैं, और वे उम्मीद कर रहे हैं कि प्रशासन अपनी गलतियों में सुधार करेगा ताकि दशहरे पर पर्यटन व्यवसाय में सुधार हो सके।

## इसका आप पर असर
नैनीताल में यातायात व्यवस्था और रूट डायवर्जन के कारण पर्यटन पर पड़े असर से सैलानियों और स्थानीय अर्थव्यवस्था दोनों पर सीधा प्रभाव पड़ रहा है।

- **उत्तराखंड में पर्यटकों के लिए:** नैनीताल या कैंची धाम की यात्रा योजना बनाते समय यात्रा से पहले ही पुलिस के नए रूट डायवर्जन और शटल सेवा संबंधी दिशा-निर्देशों की जांच अवश्य कर लें। ऐन वक्त पर रूट बदलने से बचने के लिए सुबह जल्दी यात्रा शुरू करना बेहतर रहेगा।
- **नैनीताल के स्थानीय कारोबारियों के लिए:** होटल, रेस्टोरेंट, टैक्सी और नाव चालकों की आय में 60 से 70 प्रतिशत तक की गिरावट दर्ज की गई है। दशहरे के आगामी सीजन को देखते हुए स्थानीय व्यापारी संघ प्रशासन से बेहतर यातायात प्रबंधन की मांग कर रहे हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
नैनीताल में लंबे वीकेंड के दौरान पर्यटकों की संख्या में आई भारी गिरावट के पीछे प्रशासनिक नीतियां और यातायात संबंधी अनिश्चितता प्रमुख कारण हैं।

- **संयुक्त यातायात योजना:** पुलिस ने कैंची धाम के श्रद्धालुओं और नैनीताल के पर्यटकों के लिए एक जैसी ट्रैफिक व्यवस्था लागू कर दी, जिससे दोनों स्थानों के यात्रियों में भ्रम फैल गया।
- **शटल सेवा और डायवर्जन का डर:** हल्द्वानी मार्ग पर अचानक किए गए रूट डायवर्जन और शटल वाहनों के उपयोग की खबरों से सैलानियों में घंटों जाम में फंसने का डर पैदा हुआ।
- **पूर्वानुमान का अभाव:** शहर के अंदर पार्किंग की वास्तविक स्थिति का आकलन किए बिना अंतिम समय में यातायात नियमों में बदलाव किए गए।
- **आंदोलनों का पिछला असर:** दिल्ली-एनसीआर में पूर्व में हुए आंदोलनों और विरोध प्रदर्शनों के कारण भी क्षेत्र में पर्यटकों का आगमन पहले से प्रभावित चल रहा था।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीताल में लंबे वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या क्यों कम रही?
कैंची धाम और नैनीताल के लिए एक समान ट्रैफिक नियमों और शटल सेवा के भ्रम के कारण कई पर्यटकों ने अपनी यात्रा रद्द कर दी।

### 2. इस वीकेंड पर सामान्य के मुकाबले कितने प्रतिशत पर्यटक पहुंचे?
इस वीकेंड पर पर्यटन कारोबार सामान्य के मुकाबले महज 30 से 40 प्रतिशत तक ही सिमटकर रह गया।

### 3. स्थानीय अनुमान के मुताबिक वीकेंड पर कितने पर्यटक नैनीताल पहुंचे?
स्थानीय नाव चालक वीरेंद्र पवार के अनुसार वीकेंड पर लगभग पांच से छह हजार पर्यटक ही नैनीताल पहुंचे।

### 4. स्थानीय होटल कारोबारी प्रशासन से क्या मांग कर रहे हैं?
वे कैंची धाम और नैनीताल के लिए अलग-अलग यातायात योजना, स्पष्ट जानकारी और पार्किंग की वास्तविक स्थिति के आधार पर फैसले लेने की मांग कर रहे हैं।

### 5. नैनीताल के कारोबारी अब किस आगामी त्योहार से उम्मीदें लगा रहे हैं?
कारोबारी अब आगामी दशहरे की छुट्टियों के दौरान पर्यटकों की संख्या में बढ़ोतरी की उम्मीद कर रहे हैं।

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