समान नागरिक संहिता के तहत नया निकाहनामा जारी करेगा उत्तराखंड वक्फ बोर्ड, बहुविवाह के विकल्प और दूसरी शादी पर पूर्ण रोक उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने के बाद वक्फ बोर्ड ने नया निकाहनामा जारी करने का फैसला किया है, जिसमें एक से अधिक विवाह का कोई उल्लेख नहीं होगा। इसके तहत पहली पत्नी के रहते या बिना कानूनी तलाक के दूसरा निकाह कराने वाले मौलवियों और व्यक्तियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद अब राज्य के मुस्लिम विवाह नियमों में एक ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने एक महत्वपूर्ण फैसला लेते हुए नया निकाहनामा जारी करने का निर्णय लिया है। इस नए दस्तावेज में अब सिर्फ एक निकाह की जानकारी दर्ज करने की व्यवस्था होगी। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई व्यक्ति पहली पत्नी के जीवित रहते हुए या बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करने की कोशिश करेगा, तो उसके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और सजा का प्रावधान लागू होगा। इसके साथ ही राज्य भर की मस्जिदों में निकाह पढ़ाने वाले मौलवियों के लिए भी इन नए नियमों का पालन करना अनिवार्य कर दिया गया है। नए निकाहनामे के प्रावधान और मौलवियों के लिए निर्देश वक्फ बोर्ड द्वारा तैयार किए जा रहे नए निकाहनामे के प्रारूप में दूसरे, तीसरे या चौथे निकाह से जुड़े सभी कॉलम और उल्लेख पूरी तरह से हटा दिए गए हैं। इसका सीधा अर्थ यह है कि राज्य में अब एक समय पर केवल एक ही विवाह को कानूनी और धार्मिक रूप से मान्यता दी जाएगी। उत्तराखंड वक्फ बोर्ड और UCC के तय मानकों के अनुसार, यदि कोई शख्स अपनी पहली पत्नी के रहते या विधिवत कानूनी तलाक की प्रक्रिया पूरी किए बिना दूसरा निकाह रचाने का प्रयास करता है, तो मौलाना या मौलवी उनका निकाह नहीं पढ़ाएंगे। नियमों का उल्लंघन कर जबरन या छिपाकर निकाह कराने वाले पक्षों और इसमें सहयोग करने वाले धर्मगुरुओं दोनों के लिए कानूनी दंड की व्यवस्था की गई है। मौलवियों का पंजीकरण और विवाह का सरकारी रजिस्ट्रेशन राज्य में विवाह की पूरी प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, व्यवस्थित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से सरकार एक नई प्रशासनिक प्रणाली विकसित कर रही है। इस व्यवस्था के अंतर्गत अब उत्तराखंड में केवल सरकार द्वारा पंजीकृत मौलवी ही निकाह संपन्न कराने के लिए अधिकृत होंगे। बिना पंजीकरण वाले किसी भी व्यक्ति द्वारा कराया गया निकाह अमान्य माना जाएगा। इसके अलावा, मौलवी द्वारा निकाह संपन्न कराए जाने के बाद निकाहनामे का सरकारी स्तर पर अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराना होगा। इस कदम से फर्जीवाड़े और अनधिकृत शादियों पर पूरी तरह रोक लगने की उम्मीद है। उत्तराखंड में UCC की शुरुआत और समान नागरिक अधिकारों का दायरा गौरतलब है कि उत्तराखंड देश का पहला ऐसा राज्य बन चुका है जिसने जनवरी 2025 में समान नागरिक संहिता को पूरे प्रदेश में औपचारिक रूप से लागू किया था। वर्तमान समय में देश के कई अन्य राज्यों में भी UCC को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है, जहां कुछ राज्य इसे लागू करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। यूनिफॉर्म सिविल कोड का मूल सिद्धांत यह है कि देश या राज्य में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए, चाहे वे किसी भी धर्म, समुदाय, जाति या लिंग के हों, एक समान नागरिक कानून लागू होगा। इसके प्रभाव में आते ही विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप तथा बच्चा गोद लेने के अधिकार जैसे मामलों में सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानून समाप्त होकर एक पारदर्शी और समान कानूनी ढांचा काम करने लगता है। उत्तराखंड सरकार का यह निर्णय राज्य में सामाजिक न्याय, समानता और कानूनी सुधारों को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर माना जा रहा है। इसका आप पर असर उत्तराखंड में वक्फ बोर्ड के इस निर्णय और समान नागरिक संहिता के नए नियमों का सीधा प्रभाव राज्य और देश के नागरिकों के वैवाहिक और कानूनी अधिकारों पर पड़ेगा। • भारत में: समान नागरिक संहिता को लेकर विभिन्न राज्यों में चल रही तैयारियों के बीच उत्तराखंड का मॉडल एक राष्ट्रीय नजीर बन रहा है। देश भर के नागरिक यह समझ सकते हैं कि भविष्य में UCC लागू होने पर सभी धर्मों के व्यक्तिगत कानूनों में एकरूपता आएगी। • उत्तराखंड में (विवाह पंजीकरण): राज्य में रहने वाले मुस्लिम जोड़ों को अब अपना निकाह केवल सरकार द्वारा पंजीकृत मौलवियों से ही संपन्न कराना होगा। निकाह के बाद सरकारी पोर्टल या कार्यालय में इसका अनिवार्य रजिस्ट्रेशन कराना कानूनी रूप से आवश्यक होगा। • उत्तराखंड में (बहुविवाह पर रोक): पहली पत्नी के रहते या बिना कानूनी तलाक के दूसरी शादी करने पर पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है। नियम तोड़ने वाले व्यक्ति और शादी कराने वाले मौलवी दोनों को कानूनी सजा का सामना करना पड़ेगा। • उत्तराखंड में (पारदर्शिता और अधिकार): नए निकाहनामे में केवल एक विवाह का कॉलम होने से महिलाओं के कानूनी और सामाजिक अधिकारों को सुरक्षा मिलेगी। इससे अनधिकृत शादियों और पारिवारिक विवादों में कमी आएगी। सवाल-जवाब 1. उत्तराखंड वक्फ बोर्ड ने निकाहनामे में क्या बदलाव किया है? नए निकाहनामे से दूसरे, तीसरे और चौथे विवाह के कॉलम और उल्लेख पूरी तरह हटा दिए गए हैं, जिससे अब केवल एक विवाह दर्ज हो सकेगा। 2. यदि कोई व्यक्ति उत्तराखंड में पहली पत्नी के रहते दूसरा निकाह करने की कोशिश करेगा तो क्या होगा? पहली पत्नी के रहते या बिना कानूनी तलाक के दूसरा निकाह कराने पर मौलवी निकाह नहीं पढ़ाएंगे और ऐसा करने वालों के खिलाफ कानूनी सजा का प्रावधान होगा। 3. उत्तराखंड में मौलवियों और निकाह के पंजीकरण के लिए क्या नए नियम लागू किए गए हैं? अब प्रदेश में केवल सरकार द्वारा पंजीकृत मौलवी ही निकाह करा सकेंगे और निकाहनामे का सरकारी स्तर पर रजिस्ट्रेशन कराना अनिवार्य होगा। 4. उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) कब लागू हुई थी? उत्तराखंड में जनवरी 2025 में समान नागरिक संहिता (UCC) को औपचारिक रूप से लागू किया गया था और वह इसे लागू करने वाला देश का पहला राज्य है। 5. समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होने से किन अधिकारों में एकरूपता आती है? UCC लागू होने से विवाह, तलाक, लिव-इन रिलेशनशिप और बच्चा गोद लेने के अधिकारों में सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून लागू होता है। https://trendkia.com/uttarakhand/samana-nagarika-snhita-ke-tahata-naya-nikahanama-jari-karega-uttarakhand-waqf-board-bahuvivaha-ke-vikalpa-aura-dusari-shadi-para-p-26588 TrendKia — Har trend, sabse pehle.