# सावन की भीड़ में ऋषिकेश के घाटों पर कूड़े का बढ़ता संकट

> सावन के महीने में ऋषिकेश गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं और कांवड़ियों की भारी भीड़ से गुलजार है, लेकिन सड़कों और घाटों पर बढ़ते कूड़े ने सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-08-12 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/savana-ki-bhira-men-rishikesh-ke-ghaton-para-kure-ka-barhata-snkata-15905 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऋषिकेश, सावन, गंगा घाट, सफाई व्यवस्था, कांवड़िए, श्रद्धालु, कूड़ा, उत्तराखंड

सावन के महीने में हर साल की तरह इस बार भी ऋषिकेश शिवभक्तों और श्रद्धालुओं से खचाखच भरा नजर आ रहा है, लेकिन गंगा घाटों और शहर की सड़कों पर बढ़ते कूड़े के ढेर स्थानीय सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहे हैं.

## बोल-बम के जयकारों के बीच सड़कों पर कचरे का ढेर
शहर में हर तरफ भोले के जयकारे गूंज रहे हैं और गंगा घाटों पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुट रही है. बड़ी संख्या में कांवड़िए और तीर्थयात्री ऋषिकेश पहुंच रहे हैं. सुबह से देर रात तक बाजारों, घाटों और मुख्य सड़कों पर लोगों का तांता लगा रहता है. लेकिन इसी भीड़ के साथ शहर में जमा होने वाला कूड़ा भी लगातार बढ़ रहा है, और कई इलाकों में यह समय पर उठ नहीं पा रहा. सड़क किनारे प्लास्टिक की बोतलें, खाने-पीने के सामान के खाली पैकेट और तरह-तरह का कचरा जमा दिखाई देता है. घाटों के आसपास भी गंदगी फैली नजर आती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि ऋषिकेश की पहचान ही गंगा और धार्मिक पर्यटन से जुड़ी है, इसलिए यहां आने वाले श्रद्धालुओं को जगह-जगह कूड़ा दिखना शहर की छवि के लिए ठीक नहीं है.

## भीड़ बढ़ी, लेकिन सफाई का इंतजाम पुराने ढर्रे पर
स्थानीय निवासी नरेंद्र गिरी ने बताया कि सावन में हर साल इतनी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, लेकिन सफाई व्यवस्था उस अनुपात में मजबूत होती नजर नहीं आती. उनके मुताबिक सुबह के वक्त सफाई तो होती है, मगर कुछ ही घंटों में कूड़ा दोबारा जमा हो जाता है. उन्होंने कहा कि बाहर से आने वाले श्रद्धालुओं और पर्यटकों का शहर स्वागत करता है, लेकिन इसके साथ ही शहर का साफ बना रहना भी जरूरी है. घाटों और सड़कों पर फैली गंदगी की वजह से स्थानीय निवासियों को भी रोजाना दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

## सिर्फ सफाईकर्मी बढ़ाना काफी नहीं, जागरूकता भी जरूरी
नरेंद्र गिरी के मुताबिक सिर्फ सफाई कर्मचारियों की संख्या बढ़ा देने भर से समस्या पूरी तरह हल नहीं होगी. उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच भी इस बारे में जागरूकता फैलानी होगी. उनका सुझाव है कि शहर में जगह-जगह पर्याप्त संख्या में डस्टबिन लगाए जाएं और लोगों को यह समझाया जाए कि कूड़ा सड़क या घाट पर न फेंका जाए. उनका मानना है कि अगर भीड़भाड़ वाले इलाकों में लगातार और नियमित सफाई की व्यवस्था बनाई जाए, तो हालात काफी हद तक सुधर सकते हैं.

## ट्रैफिक और दूसरी व्यवस्थाओं पर भी दबाव
सावन के दौरान ऋषिकेश में भीड़ बढ़ने से सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि ट्रैफिक और दूसरी नागरिक व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ जाता है. ऐसे में प्रशासन के लिए सफाई व्यवस्था को लेकर अतिरिक्त और ठोस इंतजाम करना जरूरी हो जाता है, ताकि गंगा किनारे उमड़ने वाली आस्था की भीड़ को साफ-सुथरा शहर भी मिल सके.

## इसका आप पर असर
अगर आप सावन में ऋषिकेश या आसपास दर्शन-यात्रा पर जाने की सोच रहे हैं तो घाटों और बाजारों में साफ-सफाई को लेकर आपको खुद सतर्क रहना पड़ सकता है.

- **भारत में:** देशभर से आने वाले कांवड़ियों और श्रद्धालुओं के लिए यह मामला दिखाता है कि भीड़भाड़ वाले धार्मिक स्थलों पर सफाई व्यवस्था कितनी जरूरी है, ताकि तीर्थयात्रा सुरक्षित और सुखद बनी रहे.
- **ऋषिकेश, उत्तराखंड में:** स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को रोजाना घाटों-सड़कों पर फैली गंदगी से जूझना पड़ रहा है, और अगर हालात नहीं सुधरे तो शहर की धार्मिक पर्यटन वाली छवि पर भी असर पड़ सकता है.

## सवाल-जवाब

### 1. ऋषिकेश में इस समय इतनी भीड़ क्यों है?
सावन का महीना चल रहा है, जिसकी वजह से बड़ी संख्या में कांवड़िए और श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंच रहे हैं.

### 2. सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों की क्या शिकायत है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि सुबह सफाई होती है, लेकिन कुछ ही घंटों में घाटों और सड़कों पर कूड़ा फिर जमा हो जाता है.

### 3. यह मुद्दा किसने उठाया?
स्थानीय निवासी नरेंद्र गिरी ने सफाई व्यवस्था को लेकर अपनी बात रखी.

### 4. स्थिति सुधारने के लिए क्या सुझाव दिए गए हैं?
नरेंद्र गिरी के मुताबिक जगह-जगह पर्याप्त डस्टबिन लगाए जाएं, श्रद्धालुओं में जागरूकता फैलाई जाए और भीड़ वाले इलाकों में लगातार सफाई हो.

### 5. क्या सिर्फ सफाई कर्मचारी बढ़ाने से समस्या हल हो जाएगी?
नरेंद्र गिरी के अनुसार सिर्फ कर्मचारियों की संख्या बढ़ाना काफी नहीं है, श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच जागरूकता भी जरूरी है.

### 6. क्या भीड़ का असर सिर्फ सफाई पर पड़ रहा है?
नहीं, सफाई के अलावा ट्रैफिक और दूसरी नागरिक व्यवस्थाओं पर भी दबाव बढ़ रहा है.

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