# स्वयं सहायता समूहों से जुड़कर आर्थिक रूप से मजबूत हो रहीं नैनीताल की महिलाएं

> नैनीताल में सूडा और नगरपालिका की मदद से चल रहे 100 से ज्यादा सक्रिय स्वयं सहायता समूह महिलाओं को ऐपण, ऊनी उत्पाद, अचार-पापड़ और पीजी जैसी गतिविधियों से जोड़कर आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रहे हैं।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-08 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/svayn-sahayata-samuhon-se-jurakara-arthika-rupa-se-majabuta-ho-rahin-nainital-ki-mahilaen-29470 · **Language:** Hindi
**Tags:** नैनीताल, स्वयं सहायता समूह, सूडा, ऐपण कला, महिला स्वरोजगार, उत्तराखंड न्यूज़

उत्तराखंड के पर्वतीय पर्यटन शहर नैनीताल में सैकड़ों महिलाएं अब पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच अपनी अलग आर्थिक पहचान बना रही हैं। नगरपालिका और राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा की मदद से चल रहे स्वयं सहायता समूहों ने इन महिलाओं को प्रशिक्षण, रोजगार के अवसर और बाजार तक पहुंच, तीनों मोर्चों पर सहारा दिया है, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें। इसी कोशिश का नतीजा है कि आज ऊनी उत्पाद, ऐपण कला और घर के बने अचार जैसी चीजें इस पर्यटन नगरी की महिलाओं की कमाई का जरिया बन गई हैं।

## 2014 से अब तक 180 से ज्यादा समूह, आज भी 100 सक्रिय
नैनीताल नगरपालिका के सूडा विभाग में तैनात कम्युनिटी ऑर्गनाइजर चंदन सिंह भंडारी के अनुसार, साल 2014 से अब तक शहर में 180 से ज्यादा स्वयं सहायता समूह बन चुके हैं, जिनमें से करीब 100 समूह अभी भी सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं। हर समूह की अपनी एक तय नियमावली होती है, जिसके तहत महिलाएं मिलकर उत्पाद तैयार करती हैं और फिर किसी एक एजेंसी पर निर्भर रहने के बजाय खुद ही उन्हें बेचने के लिए बाजार ढूंढती हैं। विभाग की कोशिश रहती है कि हर समूह को उसकी गतिविधि और जरूरत के हिसाब से सरकारी योजनाओं का फायदा मिल सके, ताकि अकेले काम करने के बजाय सामूहिक मेहनत से महिलाएं अपनी आर्थिक स्थिति सुधार सकें। अधिकारियों का मानना है कि यही सामूहिक तरीका है जिसकी वजह से यह मॉडल एक दशक से भी ज्यादा समय से टिका हुआ है।

## ऐपण की कूची से लेकर अचार के मर्तबान तक
पहाड़ की पहचान मानी जाने वाली ऐपण कला को भी अब नैनीताल में रोजगार से जोड़ा जा रहा है। महिलाएं गेरू और पिसे हुए चावल से बने लेप से पारंपरिक डिज़ाइन उकेरती हैं और उनसे सजावटी सामान तैयार करती हैं, जिन्हें बाजार में बेचकर उन्हें अच्छी आमदनी मिल रही है। इसके साथ ही सूडा की मदद से महिलाओं को बुनाई-कताई, कैंडल बनाने और फूड प्रोसेसिंग जैसे हुनर भी सिखाए जा रहे हैं, जिन्हें वे घर के कामकाज के साथ-साथ भी कर सकती हैं। कई समूह जूस, जैम, अचार और पापड़ बनाकर उन्हें स्थानीय दुकानों तक पहुंचा रहे हैं। नैनीताल एक जाना-माना पर्यटन स्थल है, इसलिए यहां घरेलू और पारंपरिक स्वाद वाले उत्पादों के खरीदार आसानी से मिल जाते हैं। इसी सोच को आगे बढ़ाते हुए कुछ महिलाओं ने पर्यटकों के लिए पेइंग गेस्ट यानी पीजी सुविधा शुरू कर एक नया और थोड़ा अलग प्रयोग भी किया है, जो उनके लिए कमाई का अतिरिक्त जरिया साबित हो रहा है।

## मेलों और उत्सवों में मिल रहा सीधा मंच
चंदन सिंह भंडारी बताते हैं कि सिर्फ प्रशिक्षण देकर विभाग अपना काम पूरा नहीं मान लेता, बल्कि तैयार माल को ग्राहकों तक पहुंचाने पर भी उतना ही ध्यान दिया जाता है। केंद्र सरकार के सहयोग से लगने वाले विभिन्न मेलों में महिला समूहों को स्टॉल दिए जाते हैं, जहां वे बाहर से आने वाले लोगों को सीधे अपने उत्पाद बेच पाती हैं। इसके अलावा नैनीताल के चर्चित नंदा देवी महोत्सव के दौरान भी हर साल इन समूहों के लिए दुकानें आरक्षित रखी जाती हैं। इन आयोजनों से महिलाओं को न सिर्फ बिक्री बढ़ाने का मौका मिलता है, बल्कि नए ग्राहकों से जुड़ने का रास्ता भी खुलता है, जो अगले सीजन में दोबारा उनसे खरीदारी करने लौट सकते हैं।

## पुराना हाट बाजार हटा, नई जगह की तलाश जारी
कुछ समय पहले तक नैनीताल के पुराने घोड़ा स्टैंड इलाके में एक अलग महिला हाट बाजार भी चलता था, जहां समूहों की महिलाएं अपने स्टॉल लगाकर सीधे ग्राहकों को स्थानीय सामान बेचा करती थीं। लेकिन उस सड़क के चौड़ीकरण का काम शुरू होने पर इस बाजार को वहां से हटाना पड़ा, जिससे समूहों के पास कोई तय ठिकाना नहीं रह गया। अब विभाग एक बार फिर शहर में कहीं इसी तरह का स्थायी हाट बाजार शुरू करने के लिए उपयुक्त जगह तलाश रहा है। अगर यह जगह मिल जाती है और बाजार दोबारा शुरू हो पाता है, तो महिला समूहों को अपने सामान बेचने के लिए एक पक्का ठिकाना मिल जाएगा, जिससे उन्हें हर बार नई जगह की तलाश नहीं करनी पड़ेगी।

अधिकारियों का कहना है कि जो महिलाएं किसी स्वयं सहायता समूह से जुड़ जाती हैं, उनके लिए स्वरोजगार तक पहुंचने का रास्ता काफी आसान हो जाता है। समूह के जरिए उन्हें प्रशिक्षण, उत्पाद बनाने का मौका, साथ मिलकर काम करने का अनुभव और बाजार तक पहुंच, ये सब एक साथ मिल जाता है। यही वजह है कि नैनीताल की महिलाएं आज अपनी रुचि और हुनर के हिसाब से ऐपण, फूड प्रोसेसिंग, बुनाई-कताई, ऊनी सामान और कैंडल मेकिंग जैसे कामों से जुड़कर अपनी अलग आर्थिक पहचान बना रही हैं।

## इसका आप पर असर
यह खबर सीधे तौर पर उन महिलाओं के लिए मायने रखती है जो घर बैठे या छोटे स्तर पर अपना कोई काम शुरू करना चाहती हैं।

- **भारत में:** यह मॉडल दिखाता है कि नगरपालिका और सूडा जैसी सरकारी एजेंसियों से जुड़कर महिलाएं बिना बड़ी पूंजी के भी स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं। जो महिलाएं स्वयं सहायता समूह से जुड़ती हैं, उन्हें प्रशिक्षण से लेकर सरकारी मेलों में स्टॉल तक की सुविधा मिल सकती है।
- **नैनीताल में:** शहर की करीब 100 सक्रिय महिला समूहों को अब सूडा से सीधे संपर्क कर योजनाओं और मेलों की जानकारी लेनी चाहिए। नंदा देवी महोत्सव जैसे आयोजनों में मिलने वाली दुकानें उनके लिए बड़ी बिक्री और नए ग्राहकों का मौका बन सकती हैं।
- **पर्यटकों और खरीदारों के लिए:** नैनीताल घूमने वाले लोग अब ऐपण से बने सजावटी सामान, ऊनी उत्पाद और घर के बने अचार-पापड़ सीधे इन महिला समूहों से खरीद सकते हैं। इससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा और महिलाओं की सीधी कमाई भी बढ़ेगी।
- **हाट बाजार का इंतजार:** जिन महिलाओं का सामान पहले घोड़ा स्टैंड बाजार में बिकता था, उन्हें फिलहाल नई और स्थायी जगह मिलने का इंतजार करना होगा। जगह मिलते ही उन्हें बार-बार नया ठिकाना ढूंढने की परेशानी से राहत मिल जाएगी।

## ऐसा क्यों हुआ
नैनीताल में महिलाओं का यह स्वरोजगार मॉडल अचानक नहीं बना, बल्कि पिछले करीब एक दशक से चल रही सरकारी कोशिशों और स्थानीय परिस्थितियों का नतीजा है।

- **सरकारी सहयोग की शुरुआत:** साल 2014 से नगरपालिका और सूडा ने मिलकर महिलाओं को समूहों में संगठित करना शुरू किया, ताकि उन्हें प्रशिक्षण और योजनाओं का सीधा फायदा मिल सके।
- **पर्यटन नगरी होने का फायदा:** नैनीताल में साल भर पर्यटकों की आवाजाही रहती है, जिससे ऐपण, ऊनी सामान और घर के बने खाद्य उत्पादों जैसी स्थानीय चीजों की मांग बनी रहती है और महिलाओं को बाजार आसानी से मिल जाता है।
- **हाट बाजार क्यों बंद हुआ:** पुराने घोड़ा स्टैंड इलाके की सड़क का चौड़ीकरण होने पर वहां चल रहा महिला हाट बाजार हटाना पड़ा, जिसकी वजह से समूहों के पास फिलहाल कोई तय स्थायी जगह नहीं है।
- **आगे क्या:** विभाग नई जगह तलाश रहा है ताकि हाट बाजार दोबारा शुरू किया जा सके, हालांकि अभी तक कोई नई जगह तय नहीं हो पाई है।

## सवाल-जवाब

### 1. नैनीताल में अब तक कितने स्वयं सहायता समूह बन चुके हैं?
साल 2014 से अब तक 180 से ज्यादा समूह बन चुके हैं, जिनमें से करीब 100 अभी सक्रिय हैं।

### 2. इन महिला समूहों को कौन सी संस्थाएं सहयोग दे रही हैं?
नैनीताल नगरपालिका और राज्य शहरी विकास अभिकरण यानी सूडा मिलकर इन्हें सहयोग दे रहे हैं।

### 3. महिलाएं मुख्य रूप से कौन-कौन से उत्पाद बना रही हैं?
वे ऊनी उत्पाद, ऐपण कला के सामान, कैंडल, जूस, जैम, अचार और पापड़ जैसी चीजें बना रही हैं।

### 4. पुराना महिला हाट बाजार कहां था और क्यों बंद हुआ?
यह पुराने घोड़ा स्टैंड इलाके में था और सड़क चौड़ीकरण के कारण इसे वहां से हटाना पड़ा।

### 5. चंदन सिंह भंडारी कौन हैं?
वे नैनीताल नगरपालिका के सूडा विभाग में कम्युनिटी ऑर्गनाइजर हैं।

### 6. महिलाओं को अपने उत्पाद बेचने के लिए कौन सा मंच मिलता है?
उन्हें केंद्र सरकार के सहयोग से लगने वाले मेलों और नैनीताल के नंदा देवी महोत्सव में स्टॉल दिए जाते हैं।

### 7. पीजी सुविधा शुरू करने वाली महिलाओं का क्या मकसद है?
वे पर्यटकों के लिए पेइंग गेस्ट सुविधा चलाकर अपनी आमदनी का एक अतिरिक्त जरिया बना रही हैं।

## प्रेरणा और सबक
नैनीताल की महिलाओं की यह कहानी दिखाती है कि सही सहयोग और सामूहिक मेहनत से बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।

- **अकेले नहीं, समूह में ताकत:** महिलाओं ने अकेले जूझने के बजाय समूह बनाकर काम करना चुना, जिससे उत्पाद बनाने से लेकर बाजार ढूंढने तक हर काम आसान हो गया।
- **घर के हुनर को कमाई में बदला:** ऐपण जैसी पारंपरिक कला और घर पर बनने वाले अचार-पापड़ जैसी चीजों को उन्होंने आय के जरिए में बदल दिया, बिना अपनी जड़ों से दूर हुए।
- **नए प्रयोग करने का साहस:** पीजी सुविधा शुरू करना दिखाता है कि महिलाएं परंपरागत कामों तक सीमित न रहकर नए मौकों को भी अपनाने के लिए तैयार हैं।
- **रुकावट के बाद भी उम्मीद:** सड़क चौड़ीकरण से हाट बाजार छिनने के बाद भी समूह हार नहीं मानते और नई जगह की उम्मीद में जुटे हैं।

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