# ट्रेन में सवार होते ही हिरासत में लिए गए कार्यकर्ता के मामले में हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाबी हलफनामा

> जंतर मंतर पर चल रहे सोनम वांगचुक और CJP के प्रदर्शन में शामिल होने ऋषिकेश से ट्रेन पकड़ने वाले कार्यकर्ता प्रभाग ध्यानी को कथित तौर पर पुलिस उठा ले गई, जिसके बाद उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस से हिरासत के आधार पर जवाब मांगा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-07-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/trena-men-savara-hote-hi-hirasata-men-lie-gae-karyakarta-ke-mamale-men-haikorta-sakhta-sarakara-se-manga-javabi-halaphanama-9314 · **Language:** Hindi
**Tags:** सोनम वांगचुक, CJP प्रदर्शन, उत्तराखंड हाईकोर्ट, प्रभाग ध्यानी, हैबियस कॉर्पस याचिका, जंतर मंतर, ऋषिकेश हिरासत

उत्तराखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और पुलिस से यह बताने को कहा है कि एक सामाजिक कार्यकर्ता को ट्रेन में बैठते ही हिरासत में क्यों ले लिया गया और उसे दिल्ली में चल रहे एक प्रदर्शन में शामिल होने से क्यों रोका गया। मामला जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़ा है, जिसमें भाग लेने के लिए उत्तराखंड का एक कार्यकर्ता निकला था।

## कौन हैं प्रभाग ध्यानी और क्या हुआ था
यह कार्यकर्ता उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष प्रभाग ध्यानी हैं। उन्होंने अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट डालकर बताया था कि वह सोनम वांगचुक और CJP के समर्थन में जंतर मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में हिस्सा लेने दिल्ली रवाना हो रहे हैं। इसके लिए वह अपने दो साथियों के साथ ऋषिकेश से ट्रेन में सवार हुए थे, लेकिन इसके बाद घंटों तक उनका कोई अता-पता नहीं चला।

## स्टेशन पर उठाया, परिवार को नहीं दी कोई जानकारी
परिवार का कहना है कि रविवार शाम करीब सवा पांच बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर कुछ पुलिसकर्मी प्रभाग ध्यानी को अपने साथ ले गए। इसके बाद न तो यह बताया गया कि उन्हें कहां ले जाया गया है, और न ही हिरासत की कोई वजह स्पष्ट की गई। परिवार का आरोप है कि इस दौरान उनकी कोई खोज खबर नहीं ली जा सकी। इसी के बाद पार्टी के सचिव ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि पुलिस ने न तो हिरासत का आधार बताया, न स्थान और न ही उनकी सेहत या स्थिति की जानकारी दी, जो संविधान और कानून दोनों के विपरीत है।

## अदालत में सरकार का जवाब, और कोर्ट का पलटवार
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील ने अदालत को बताया कि प्रभाग ध्यानी को रिहा किया जा चुका है और फिलहाल वह अपनी मां की कस्टडी में हैं। हाईकोर्ट ने इस जवाब पर तीखी टिप्पणी की और पूछा कि जब वह एक वयस्क व्यक्ति हैं तो उन्हें मां की कस्टडी में क्यों सौंपा गया, उन्हें पूरी तरह स्वतंत्र क्यों नहीं छोड़ा गया। अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया कि हिरासत और रिहाई से जुड़े सभी दस्तावेज पेश किए जाएं, साथ ही यह भी स्पष्ट करें कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उन्हें रोका गया था।

## वारंट का दावा और पत्नी की ईमेल शिकायत
याचिका में एक और अहम दावा किया गया है कि प्रभाग ध्यानी को रामनगर पुलिस ने एक वारंट के आधार पर अपने पास रखा था। उनकी पत्नी उमा रानी ने ईमेल भेजकर पुलिस से हिरासत से जुड़ी जानकारी मांगी थी, लेकिन उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। परिजनों का कहना है कि पुलिस ने न तो उनकी शिकायत को गंभीरता से लिया और न ही हिरासत की कोई पुष्ट जानकारी साझा की। इस मामले की अगली सुनवाई मंगलवार यानी आज तय की गई है, जिसमें राज्य सरकार को अपना पूरा पक्ष दस्तावेजों के साथ रखना होगा।

## इसका आप पर असर
- **भारत में:** यह मामला दिखाता है कि किसी भी नागरिक को हिरासत में लेते वक्त पुलिस के लिए कारण और आधार बताना कानूनन जरूरी है, और अदालतें इस पर सख्ती से सवाल पूछ रही हैं।
- **उत्तराखंड में:** राज्य में प्रदर्शनों में शामिल होने जा रहे कार्यकर्ताओं और आम नागरिकों को यह मामला बताता है कि गलत हिरासत की स्थिति में हैबियस कॉर्पस याचिका के जरिए तुरंत राहत मांगी जा सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. प्रभाग ध्यानी कौन हैं?
वह उत्तराखंड परिवर्तन पार्टी के अध्यक्ष हैं और एक सामाजिक-राजनीतिक कार्यकर्ता हैं।

### 2. उन्हें कब और कहां हिरासत में लिया गया?
20 जुलाई रविवार शाम करीब सवा पांच बजे ऋषिकेश रेलवे स्टेशन पर पुलिस उन्हें अपने साथ ले गई।

### 3. वह कहां जा रहे थे?
वह जंतर मंतर पर सोनम वांगचुक और CJP के समर्थन में हो रहे प्रदर्शन में शामिल होने दिल्ली जा रहे थे।

### 4. याचिका किसने और क्यों दायर की?
पार्टी के सचिव ने हाईकोर्ट में हैबियस कॉर्पस याचिका दायर की क्योंकि पुलिस ने हिरासत के आधार, स्थान और स्थिति की कोई जानकारी नहीं दी।

### 5. हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से क्या पूछा?
अदालत ने पूछा कि एक वयस्क व्यक्ति को मां की कस्टडी में क्यों दिया गया और उसे पूरी तरह मुक्त क्यों नहीं छोड़ा गया।

### 6. वारंट किस पुलिस के पास था?
याचिका के मुताबिक प्रभाग ध्यानी को रामनगर पुलिस ने एक वारंट के आधार पर रखा था।

### 7. पत्नी उमा रानी ने क्या कदम उठाया?
उन्होंने ईमेल के जरिए पुलिस से हिरासत की जानकारी मांगी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।

### 8. अगली सुनवाई कब होगी?
मामले की अगली सुनवाई मंगलवार यानी आज तय है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._