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  "type": "article",
  "title": "त्योहारी शुभकामनाओं की आड़ में डिजिटल सेंधमारी, माता रानी के स्टिकर और लिंक से लाखों की ठगी",
  "summary": "नवरात्र के दौरान शुभकामना संदेशों और भक्ति भाव वाले स्टिकर के नाम पर भेजे जा रहे संदिग्ध लिंक से उत्तराखंड में दो लोग लाखों रुपये गंवा चुके हैं। पुलिस ने सतर्क रहने की चेतावनी दी है।",
  "content": "धार्मिक उत्सवों और पर्वों की शुरुआत होते ही साइबर अपराधियों ने लोगों की गाढ़ी कमाई उड़ाने का बेहद शातिर तरीका खोज निकाला है। नवरात्र के पावन अवसर पर जहां लोग एक दूसरे को बधाई देने और आस्था व्यक्त करने में जुटे हैं, वहीं जालसाज इसी मानवीय भावना को अपने शिकंजे का जरिया बना रहे हैं। मैसेजिंग ऐप व्हाट्सएप पर माता रानी के भक्तिमय स्टिकर, आकर्षक तस्वीरें और पर्व की शुभकामनाओं के साथ साथ त्योहारी खरीदारी पर भारी छूट के लुभावने संदेश भेजे जा रहे हैं। इन संदेशों के साथ संलग्न संदिग्ध वेब लिंक पर क्लिक करते ही लोग धोखाधड़ी के जाल में उलझ रहे हैं।\n\nउत्तराखंड में सामने आए ठगी के दो गंभीर मामले\nउत्तराखंड के भीतर इस नए हथकंडे के जरिए लोगों को निशाना बनाए जाने की दो अलग अलग घटनाएं प्रकाश में आई हैं। दोनों ही मामलों में पीड़ितों को माता रानी के स्टिकर अथवा धार्मिक तस्वीरों वाले लिंक के जरिए फंसाया गया। पहली घटना में एक पीड़ित के बैंक खाते से पांच लाख रुपये की भारी भरकम रकम साफ कर दी गई। वहीं दूसरे मामले में पीड़ित को दो लाख दस हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा। सामान्य तौर पर लोग त्योहारों के मौके पर अपने सगे संबंधियों, मित्रों और परिचितों को बधाई संदेश, वॉलपेपर तथा डिजिटल स्टिकर भेजते हैं। जालसाज इसी सामाजिक चलन का गलत फायदा उठाकर बेहद लुभावने शब्दों के साथ दुर्भावनापूर्ण लिंक प्रसारित कर रहे हैं।\n\nमुफ्त स्टिकर और विशेष छूट के लालच का खेल\nलोगों को झांसे में लेने के लिए जालसाज संदेशों में यह दावा करते हैं कि दिए गए लिंक से विशेष नवरात्रि स्टिकर पैक मुफ्त में प्राप्त किया जा सकता है। कुछ संदेशों में दुर्लभ धार्मिक तस्वीरें डाउनलोड करने या प्रसिद्ध ई-कॉमर्स मंचों पर विशेष त्योहारी ऑफर का लाभ उठाने का प्रलोभन दिया जाता है। उपभोक्ता इन संदेशों को धार्मिक संदर्भ और परिचितों द्वारा भेजा गया मानकर उन पर तुरंत भरोसा कर लेते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति उस लिंक पर टैप करता है, स्टिकर या फोटो डाउनलोड होने के बहाने बैकग्राउंड में एक खतरनाक एपीके फाइल फोन में इंस्टॉल हो जाती है। यह तकनीकी लापरवाही सीधे तौर पर उपभोक्ता के पूरे डिवाइस का नियंत्रण हमलावरों को सौंप देती है।\n\nव्हाट्सएप पर प्राप्त होने वाला संदेश बाहरी तौर पर किसी सामान्य पर्व संदेश जैसा ही प्रतीत होता है। लिंक खुलते ही यूजर को किसी नकली या संदिग्ध वेबसाइट पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है, जहां कोई अनजान मोबाइल एप्लिकेशन डाउनलोड करने का दबाव बनाया जाता है। कई मामलों में यह लिंक यूजर से उसकी निजी जानकारियां, इंटरनेट बैंकिंग का ब्योरा, डेबिट कार्ड नंबर अथवा वन टाइम पासवर्ड दर्ज कराने का प्रयास करते हैं। ठगी की कार्यप्रणाली इस बात पर निर्भर करती है कि उस लिंक के पीछे किस किस्म के मैलवेयर या फिशिंग तकनीक का प्रयोग किया गया है।\n\nसाइबर विशेषज्ञ नवनीत कुमार का विश्लेषण\nसाइबर मामलों के जानकार नवनीत कुमार का कहना है कि जालसाज हमेशा आम नागरिकों की आस्था, जिज्ञासा और स्वाभाविक विश्वास को अपना मुख्य हथियार बनाते हैं। त्योहारी माहौल में धार्मिक स्टिकर और बधाई संदेशों का आदान प्रदान बहुत सामान्य बात है, इसलिए किसी को भी इन संदेशों पर आसानी से संदेह नहीं होता। जब कोई व्यक्ति बिना सोचे समझे ऐसे लिंक खोलता है, तो उसे क्लोन की गई फर्जी वेबसाइटों पर पहुंचा दिया जाता है या उसके फोन में जासूसी करने वाला ऐप सक्रिय करा दिया जाता है। इस खतरे से सुरक्षित रहने का एकमात्र तरीका यह है कि किसी भी अनजान स्रोत से आए लिंक पर क्लिक न किया जाए और किसी भी फाइल को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रमाणिकता जांची जाए।\n\nसुरक्षा के लिए साइबर पुलिस के अहम दिशानिर्देश\nबढ़ती घटनाओं को देखते हुए साइबर पुलिस ने आम जनता के लिए परामर्श जारी किया है। पुलिस ने साफ तौर पर कहा है कि व्हाट्सएप अथवा अन्य सोशल मीडिया मंचों पर मिलने वाले किसी भी संदिग्ध अथवा अप्रत्याशित लिंक पर आंख मूंदकर क्लिक न करें। माता रानी के स्टिकर, बधाई संदेश या भारी डिस्काउंट का दावा करने वाले किसी भी संदेश की सत्यता की जांच करें। अनजान स्रोतों से भेजी गई किसी भी एपीके फाइल या अनजान ऐप को मोबाइल में कभी इंस्टॉल न करें। इसके अतिरिक्त किसी भी परिस्थिति में अपना बैंक पासवर्ड, यूपीआई पिन, कार्ड विवरण अथवा ओटीपी किसी के साथ साझा न करें।\n\nयदि किसी लिंक पर क्लिक करने के पश्चात मोबाइल फोन में कोई संदिग्ध हलचल नजर आए या बैंक खाते से अनधिकृत तरीके से धन कटने का मैसेज मिले, तो फौरन अपने बैंक से संपर्क कर खाते को ब्लॉक करवाएं। इसके साथ ही तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क कर अपनी शिकायत दर्ज कराएं। त्योहार के उल्लास में डिजिटल सावधानी बरतना बेहद जरूरी है, ताकि आस्था का नाम लेकर कोई आपकी मेहनत की जमापूंजी पर डाका न डाल सके।\n\nइसका आप पर असर\nत्योहारी सीजन में मैसेजिंग ऐप पर मिलने वाले अनजान लिंक आपके बैंक खाते को खाली कर सकते हैं।\n\n• भारत में: देश भर के मैसेजिंग ऐप उपयोगकर्ताओं को किसी भी अनजान लिंक या अनधिकृत एपीके फाइल को डाउनलोड करने से बचना चाहिए। ऐसा न करने पर संवेदनशील बैंकिंग विवरण और गोपनीय ओटीपी साइबर अपराधियों के हाथ लग सकते हैं।\n• उत्तराखंड में: राज्य में हाल ही में दो नागरिकों से 7 लाख 10 हजार रुपये की ठगी होने के बाद स्थानीय लोगों को विशेष सतर्कता बरतनी होगी। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की स्थिति में तुरंत नजदीकी बैंक शाखा से संपर्क करें और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं।\n• व्हाट्सएप उपयोगकर्ताओं के लिए: माता रानी के स्टिकर या भारी डिस्काउंट के नाम पर भेजे जा रहे फॉरवर्डेड संदेशों को बिना सोचे समझे आगे न भेजें। किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले भेजने वाले की पहचान और लिंक के यूआरएल की सत्यता अवश्य जांचें।\n• वित्तीय सुरक्षा: बैंक खातों से होने वाले अनधिकृत लेनदेन पर नजर रखने के लिए नियमित रूप से एसएमएस अलर्ट और खाते का बैलेंस चेक करते रहें। बैंक संबंधी कोई भी पासवर्ड, कार्ड पिन या ओटीपी किसी अज्ञात वेब पेज पर दर्ज न करें।\n\nऐसा क्यों हुआ\nत्योहारों के दौरान लोगों का ध्यान आस्था और पारिवारिक बधाई संदेशों में लगा रहता है, जिसका फायदा उठाकर जालसाज सुरक्षा घेरे में सेंध लगाते हैं।\n\n• आस्था और भावनाओं का दुरुपयोग: नवरात्र में लोग धार्मिक स्टिकर और बधाई संदेशों पर बिना किसी संदेह के विश्वास कर लेते हैं। इसी सामाजिक सहजता और धार्मिक भावना का लाभ उठाकर ठग दुर्भावनापूर्ण लिंक भेजते हैं।\n• छिपी हुई एपीके फाइलों की तकनीक: लुभावने लिंक के जरिए उपयोगकर्ताओं से अनजाने में दुर्भावनापूर्ण मोबाइल एप्लीकेशन डाउनलोड करवा ली जाती हैं। यह फाइल बैकग्राउंड में फोन का नियंत्रण हासिल कर वित्तीय विवरण और संदेश पढ़ने में सक्षम हो जाती है।\n• फिशिंग और फर्जी डिस्काउंट का झांसा: त्योहारों पर खरीदारी की मांग बढ़ने के कारण ठग भारी डिस्काउंट और ऑनलाइन ऑफर के झूठे वादे करते हैं। इन लुभावने दावों के जाल में फंसकर लोग अपनी संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारी फर्जी वेब पेजों पर साझा कर बैठते हैं।\n• जांच और आगे की कार्रवाई: उत्तराखंड में दर्ज दोनों मामलों के बाद पुलिस तंत्र सक्रिय हो गया है और लोगों को 1930 पर तुरंत सूचना देने की सलाह दी गई है। विशेषज्ञ अनधिकृत स्रोतों से आने वाले किसी भी डिजिटल दस्तावेज को न खोलने की सख्त हिदायत दे रहे हैं।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उत्तराखंड में नवरात्रि के दौरान ठगी के कितने मामले सामने आए हैं?\nउत्तराखंड में इस तरह के दो मामले सामने आए हैं, जिनमें धार्मिक स्टिकर और तस्वीरों के नाम पर लोगों को निशाना बनाया गया।\n\n2. इन दोनों मामलों में पीड़ितों का कितना वित्तीय नुकसान हुआ?\nएक पीड़ित के साथ 5 लाख रुपये की ठगी हुई, जबकि दूसरे पीड़ित को 2 लाख 10 हजार रुपये का नुकसान उठाना पड़ा।\n\n3. साइबर ठग लोगों को फंसाने के लिए किस तरह के संदेश भेज रहे हैं?\nजालसाज व्हाट्सएप पर माता रानी के स्टिकर, फोटो, त्योहारी बधाई और ऑनलाइन शॉपिंग पर विशेष ऑफर के नाम पर संदिग्ध लिंक भेज रहे हैं।\n\n4. संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से फोन में क्या समस्या आ सकती है?\nलिंक पर क्लिक करने से बैकग्राउंड में दुर्भावनापूर्ण एपीके फाइल डाउनलोड हो सकती है, जो बैंकिंग ब्योरा और ओटीपी चुरा सकती है।\n\n5. साइबर विशेषज्ञ नवनीत कुमार ने क्या चेतावनी दी है?\nउन्होंने बताया कि ठग लोगों की भावनाओं और जिज्ञासा का फायदा उठाते हैं, इसलिए किसी भी अनजान लिंक या फाइल को खोलने से पहले उसकी जांच जरूरी है।\n\n6. यदि किसी के साथ इस तरह की ऑनलाइन ठगी हो जाए तो उसे क्या करना चाहिए?\nपीड़ित को तुरंत अपने बैंक को सूचित करना चाहिए और राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करानी चाहिए।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-10-12",
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    "साइबर ठगी",
    "व्हाट्सएप फ्रॉड",
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