उत्तर भारत से मानसून की विदाई तेज, पूर्वोत्तर और दक्षिण के राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट देश के उत्तरी और पश्चिमी हिस्सों से दक्षिण-पश्चिम मानसून की वापसी तेजी से हो रही है, लेकिन चक्रवाती परिसंचरण और लो प्रेशर सिस्टम के चलते पूर्वोत्तर, दक्षिण भारत और पूर्वी इलाकों में बारिश जारी रहने के आसार हैं। देश भर में दक्षिण-पश्चिम मानसून अब अपने समापन चरण में पहुंच गया है, जहां उत्तर और पश्चिम भारत के बड़े भूभाग से मानसूनी हवाएं तेजी से पीछे हट रही हैं। मौसम के मौजूदा रुख को देखते हुए आने वाले दो से तीन दिनों में पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के शेष बचे हिस्सों से भी बारिश का यह दौर पूरी तरह विदा हो जाएगा। इसके साथ ही गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के समूचे क्षेत्रों से भी मानसून की औपचारिक विदाई तय मानी जा रही है। बिहार, झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में भी मानसून की वापसी के स्पष्ट लक्षण दिखने लगे हैं। हालांकि, मानसून के पीछे हटने का यह अर्थ कतई नहीं है कि वर्षा की सभी गतिविधियां अचानक थम जाएंगी, क्योंकि देश के अलग-अलग हिस्सों में बने स्थानीय और क्षेत्रीय मौसम तंत्रों के कारण पूर्वोत्तर और प्रायद्वीपीय भारत में तेज हवाओं, मेघगर्जन और भारी बौछारों का क्रम जारी रहने वाला है। उत्तर भारत में दो चक्रवाती तंत्रों की मौजूदगी इस समय उत्तर भारत के वायुमंडल पर दो अलग-अलग मौसम प्रणालियां एक साथ प्रभाव डाल रही हैं। पहला सिस्टम उत्तरी हरियाणा और उसके आसपास के मैदानी क्षेत्रों में सक्रिय है, जहां एक पश्चिमी विक्षोभ चक्रवाती परिसंचरण के रूप में मौजूद है। यह मौसमी हलचल समुद्र तल से लगभग 1.5 किलोमीटर से लेकर 5.8 किलोमीटर की ऊंचाई तक दर्ज की जा रही है, जिसके साथ पश्चिमी हवाओं की एक ट्रफ रेखा भी निरंतर आगे बढ़ रही है। वहीं दूसरी प्रणाली दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के वायुमंडल पर समुद्र तल से करीब 3.1 किलोमीटर की ऊंचाई पर ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण के रूप में बनी हुई है। इन दोनों सक्रिय तंत्रों के आपस में जुड़े प्रभाव के कारण उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में छिटपुट बादलों का जमावड़ा और रुक-रुक कर स्थानीय स्तर पर वर्षा दर्ज की जा सकती है। दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में शुष्क मौसम राजधानी दिल्ली और उससे सटे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के निवासियों के लिए 1 अक्टूबर का दिन मौसम के लिहाज से काफी राहत भरा और शांत रहने वाला है। क्षेत्र में मुख्य रूप से आसमान साफ रहेगा और धूप खिली रहेगी। मानसून की वापसी रेखा इस समय दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम और पश्चिमी छोर से आगे निकल चुकी है, जिससे बारिश की संभावना लगभग समाप्त हो गई है। यद्यपि उत्तरी हरियाणा के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा बिहार की सीमा पर बने चक्रवाती परिसंचरण की उपस्थिति क्षेत्रीय स्तर पर दर्ज है, लेकिन 1 अक्टूबर को दिल्ली और उसके उपनगरों में वर्षा का कोई पूर्वानुमान नहीं है। जैसे-जैसे मानसून की विदाई की प्रक्रिया पूरी होगी, वैसे-वैसे राजधानी और आसपास के वातावरण में नमी घटेगी और मौसम पूरी तरह शुष्क रुख अपना लेगा। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में वर्षा के आसार उत्तर प्रदेश के पश्चिमी इलाकों से मानसून तेजी से विदा हो रहा है और अगले दो से तीन दिनों के भीतर राज्य के शेष हिस्सों से भी दक्षिण-पश्चिम मानसून के पूरी तरह चले जाने की अनुकूल परिस्थितियां बनती दिख रही हैं। इसके बावजूद 30 सितंबर को पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ छिटपुट स्थानों पर हल्की से मध्यम दर्जे की बारिश देखने को मिल सकती है। इस वर्षा का मुख्य कारण दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश और उससे सटे बिहार के ऊपर बना 3.1 किलोमीटर ऊंचा ऊपरी हवा का चक्रवाती परिसंचरण है, जिसके चलते पूर्वी जिलों में बादलों की आवाजाही और हल्की बौछारों की स्थिति बनी रहेगी, जबकि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुष्क मौसम पूरी तरह हावी रहेगा। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों की स्थिति देखें तो यहां भी आगामी दिनों में मौसमी बदलाव साफ नजर आएंगे। 30 सितंबर से लेकर 2 अक्टूबर के दौरान पहाड़ी राज्य के कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश दर्ज की जा सकती है। इसके बाद 5 और 6 अक्टूबर को भी कुछ सीमित क्षेत्रों में वर्षा की नई गतिविधियां देखने को मिलेंगी। पर्वतीय ढलानों पर होने वाली यह वर्षा स्थानीय स्तर पर तापमान में गिरावट दर्ज कराएगी, हालांकि राज्य के अधिकांश हिस्सों से मानसून की वापसी की प्रक्रिया जारी रहेगी। बिहार और झारखंड में तेज हवाओं और आंधी का अंदेशा पूर्वी भारत के राज्यों बिहार और झारखंड में यद्यपि मानसून की वापसी के शुरुआती संकेत मिलने लगे हैं, परंतु वायुमंडलीय परिस्थितियों के चलते अगले कुछ दिनों तक मौसमी हलचल पूरी तरह शांत नहीं होगी। बिहार में 30 सितंबर को कुछ जगहों पर बारिश की संभावना है, जिसके उपरांत 3 से 6 अक्टूबर के दौरान राज्य के अलग-अलग जनपदों में रुक-रुक कर वर्षा का दौर चलेगा। दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश से सटे इलाके में बने ऊपरी हवा के चक्रवाती परिसंचरण का सीधा असर बिहार के मौसम पर पड़ रहा है। विशेष रूप से 4 से 6 अक्टूबर के मध्य राज्य में मेघगर्जन के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की गति वाली तूफानी हवाएं चलने और आंधी जैसी स्थिति उत्पन्न होने की संभावना है, जिसके चलते लोगों को सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी। झारखंड के मौसम की बात करें तो वहां 30 सितंबर से 2 अक्टूबर के बीच कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा के आसार बने हुए हैं। राज्य के कुछ इलाकों से अगले दो से तीन दिनों में मानसून की वापसी के लिए अनुकूल परिस्थितियां विकसित हो रही हैं। इसके पश्चात पूरे झारखंड में वर्षा की तीव्रता और दायरे में धीरे-धीरे क्रमिक कमी आएगी और वातावरण साफ होने लगेगा। पूर्वोत्तर के राज्यों में लो प्रेशर एरिया का बढ़ता प्रभाव पूर्वोत्तर भारत में इस समय मौसमी गतिविधियां सबसे अधिक उग्र रूप में सक्रिय हैं। उत्तरी म्यांमार और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश, मिजोरम तथा बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से के ऊपर एक वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया सक्रिय बना हुआ है। इस कम दबाव के क्षेत्र से जुड़ा चक्रवाती परिसंचरण समुद्र तल से करीब 7.6 किलोमीटर की ऊंचाई तक वायुमंडल में फैला हुआ है। यह मौसमी प्रणाली अगले 12 घंटों के दौरान उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ते हुए मिजोरम, त्रिपुरा और निकटवर्ती दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश के इलाकों की तरफ रुख करेगी। जैसे-जैसे यह तंत्र आगे बढ़ेगा, धीरे-धीरे कमजोर पड़कर एक सामान्य लो प्रेशर एरिया में तब्दील हो जाएगा। इस शक्तिशाली सिस्टम के असर से पूर्वोत्तर के अधिकांश राज्यों में लगातार वर्षा का क्रम जारी रहेगा, जिसमें विशेष रूप से 3 और 4 अक्टूबर को अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। दक्षिण भारत के राज्यों में मूसलाधार बारिश का अलर्ट एक तरफ जहां देश के उत्तरी छोर से मानसून विदा हो रहा है, वहीं दूसरी ओर दक्षिण भारत के कई राज्यों में मानसूनी बादलों की सक्रियता बेहद तेज बनी हुई है। केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के विस्तृत भूभाग में आगामी दिनों तक वर्षा का सिलसिला बना रहेगा। 1 अक्टूबर को केरल और माहे के तटीय क्षेत्रों, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल के अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की आशंका व्यक्त की गई है। इन समस्त इलाकों में बिजली चमकने, तेज बादलों की गड़गड़ाहट और तेज गति की हवाओं का प्रकोप भी देखने को मिल सकता है। केरल और माहे में 1 अक्टूबर से लेकर 6 अक्टूबर के दौरान लगातार कई स्थानों पर वर्षा जारी रहने का अनुमान है, जिससे जनजीवन प्रभावित हो सकता है। इसके अलावा तटीय कर्नाटक के हिस्सों में भी 1 और 2 अक्टूबर को बारिश का क्रम बना रहेगा, जिससे दक्षिणी प्रायद्वीप में जलभराव और नदी नालों में उफान जैसी परिस्थितियां बनी रह सकती हैं। इसका आप पर असर उत्तर भारत में जहां शुष्क मौसम से उमस घटेगी, वहीं दक्षिण और पूर्वोत्तर के राज्यों में भारी बारिश और तेज हवाओं से दैनिक गतिविधियों तथा यात्रा पर असर पड़ेगा। • भारत में: उत्तर और मध्य भारत में यात्रा करने वालों को साफ और शुष्क मौसम मिलेगा, जिससे बाहरी काम आसान होंगे। वहीं पूर्वोत्तर और दक्षिण भारत जाने वाले यात्रियों को उड़ानों और सड़क यातायात में बारिश के कारण संभावित देरी का सामना करना पड़ सकता है। • दिल्ली और उत्तर प्रदेश में: दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 1 अक्टूबर को बारिश न होने से मौसम साफ और धूप वाला रहेगा। पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ इलाकों में हल्की वर्षा के कारण खेती और परिवहन में मामूली रुकावट आ सकती है। • बिहार और झारखंड में: 4 से 6 अक्टूबर के दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की तेज आंधी और मेघगर्जन के कारण खुले में काम करने वाले श्रमिकों और किसानों को सतर्क रहना होगा। स्थानीय प्रशासन बिजली आपूर्ति बाधित होने और पेड़ों के गिरने की स्थिति से निपटने की तैयारी कर सकता है। • दक्षिण भारत में: केरल, तटीय व दक्षिण आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 1 से 6 अक्टूबर के बीच भारी बारिश से निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है। दैनिक यात्रियों और स्कूली बच्चों को स्थानीय मौसम चेतावनी और जलभराव वाले रास्तों को देखकर निकलने की सलाह दी जाती है। • पूर्वोत्तर राज्यों में: अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम और त्रिपुरा में लो प्रेशर तंत्र के कारण 3 और 4 अक्टूबर को भारी बारिश से पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और नदी नालों में उफान का जोखिम बढ़ सकता है। स्थानीय निवासियों को अनावश्यक यात्रा से बचने और आपातकालीन किट तैयार रखने की जरूरत है। ऐसा क्यों हुआ दक्षिण-पश्चिम मानसून की स्वाभाविक मौसमी वापसी के बीच कई क्षेत्रीय चक्रवाती तंत्रों और एक गहरे निम्न दबाव क्षेत्र के बनने से यह मिश्रित मौसम परिस्थिति उत्पन्न हुई है। • मानसून की मौसमी वापसी: उत्तर-पश्चिम भारत में शुष्क पछुआ हवाओं के मजबूत होने और नमी में गिरावट आने से मानसून की विदाई रेखा आगे बढ़ रही है। मौसमी चक्र के अनुसार हर वर्ष सितंबर के अंत तक उत्तर-पश्चिम भागों से मानसूनी हवाएं पीछे हटने लगती हैं। • उत्तर भारत में दोहरे तंत्र: उत्तरी हरियाणा के ऊपर सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और पूर्वी उत्तर प्रदेश-बिहार सीमा पर मौजूद 3.1 किमी ऊंचा चक्रवाती परिसंचरण स्थानीय तौर पर नम हवाओं को खींच रहे हैं, जिससे वहां छिटपुट बौछारें पड़ रही हैं। • पूर्वोत्तर में सुव्यवस्थित निम्न दबाव: म्यांमार और बांग्लादेश के तटों के पास बंगाल की खाड़ी के उत्तर-पूर्वी हिस्से में बना वेल-मार्क्ड लो प्रेशर सिस्टम नमी से भरे बादलों को पूर्वोत्तर की ओर धकेल रहा है। • दक्षिण भारत में नमी का जमावड़ा: अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के दक्षिणी हिस्सों से आने वाली हवाओं के मिलन से दक्षिणी प्रायद्वीप में लगातार गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश की परिस्थितियां बनी हुई हैं। सवाल-जवाब 1. 1 अक्टूबर को दिल्ली-एनसीआर में मौसम कैसा रहेगा? दिल्ली और एनसीआर में 1 अक्टूबर को बारिश का कोई अनुमान नहीं है। आसमान मुख्य रूप से साफ रहेगा और मौसम शुष्क बना रहेगा। 2. मानसून की वापसी की रेखा किन प्रमुख शहरों से गुजर रही है? मानसून वापसी की रेखा गुरदासपुर, चंडीगढ़, मुजफ्फरनगर, अलीगढ़, धौलपुर, उदयपुर, डीसा और नलिया से होकर गुजर रही है। 3. किन राज्यों से अगले 2 से 3 दिनों में मानसून पूरी तरह विदा हो जाएगा? पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से अगले दो-तीन दिनों में मानसून विदा हो जाएगा। 4. बिहार में मौसम कब सबसे अधिक उग्र होने की संभावना है? बिहार में 4 से 6 अक्टूबर के दौरान गरज-चमक के साथ 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज आंधी और हवाएं चलने का अंदेशा है। 5. पूर्वोत्तर भारत में कौन सा मौसमी सिस्टम असर डाल रहा है? उत्तर म्यांमार, दक्षिण-पूर्वी बांग्लादेश, मिजोरम और बंगाल की खाड़ी के ऊपर बना वेल-मार्क्ड लो प्रेशर एरिया पूर्वोत्तर में भारी बारिश का कारण बन रहा है। 6. 1 अक्टूबर को दक्षिण भारत के किन इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट है? केरल और माहे, दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, तथा तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 1 अक्टूबर को भारी बारिश की संभावना जताई गई है। https://trendkia.com/uttarakhand/uttara-bharata-se-monsoon-ki-vidai-teja-purvottara-aura-dakshina-ke-rajyon-men-bhari-barisha-ka-alert-40368 TrendKia — Har trend, sabse pehle.