# उत्तराखंड कांग्रेस में बढ़ी रार, हाईकमान की चेतावनी के बाद भी नहीं झुके हरीश रावत

> उत्तराखंड कांग्रेस में अंदरूनी कलह तेज हो गई है, जहां वरिष्ठ नेता हरीश रावत हाईकमान के एतराज के बावजूद अपनी धन्यवाद यात्रा जारी रखे हुए हैं। खानपुर से निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की पार्टी में संभावित एंट्री को इस तल्खी की मुख्य वजह माना जा रहा है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-07 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-congress-men-barhi-rara-haikamana-ki-chetavani-ke-bada-bhi-nahin-jhuke-harish-rawat-44498 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरीश रावत, उत्तराखंड कांग्रेस, उमेश कुमार, शैलजा, हरिद्वार, खानपुर विधानसभा, के सी वेणुगोपाल

उत्तराखंड के सियासी गलियारों में कांग्रेस की अंदरूनी खींचतान को लेकर हलचल तेज हो गई है। पार्टी के कद्दावर नेता हरीश रावत अपनी धन्यवाद यात्रा को लेकर सीधे तौर पर चर्चा में आ गए हैं। इस यात्रा को लेकर पार्टी हाईकमान की ओर से चेतावनी भी दी गई है, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री अपने रुख से पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहे हैं। अपने राजनीतिक कदम और पक्ष को आलाकमान के सामने रखने के लिए हरीश रावत दिल्ली का रुख कर रहे हैं, जहां उनकी मुलाकातों का सिलसिला तय किया गया है।

तय कार्यक्रम के मुताबिक हरीश रावत दिल्ली में उत्तराखंड की पार्टी प्रभारी शैलजा से मुलाकात करेंगे, जबकि गुरुवार को उनकी बातचीत पार्टी महासचिव के सी वेणुगोपाल के साथ होनी है। खास बात यह है कि जिस वक्त रावत और शैलजा की दिल्ली में मुलाकात तय हुई, उस समय शैलजा खुद उत्तराखंड में मौजूद थीं। इस घटनाक्रम से साफ जाहिर होता है कि प्रदेश संगठन और वरिष्ठ नेतृत्व के बीच गतिरोध किस स्तर तक पहुंच चुका है।

## धन्यवाद यात्रा और जमीनी सियासी लामबंदी
हरीश रावत के तल्ख तेवरों को समझने के लिए राज्य में पार्टी के मौजूदा शक्ति संतुलन को देखना होगा। रावत ने अपनी इस राजनीतिक यात्रा का दायरा हरिद्वार, नैनीताल और उधमसिंह नगर जिलों तक फैला रखा है। नैनीताल जिले के रामनगर विधानसभा क्षेत्र में समर्थकों से मिले स्वागत के बाद रावत ने अपने विचार साझा किए। उन्होंने लिखा कि रामनगर के जनसमर्थन और विश्वास ने उन्हें जनता के बीच खड़े होकर राज्य के हक और सम्मान के लिए संघर्ष जारी रखने का नया संकल्प दिया है।

अपनी इस सक्रियता के जरिए रावत न केवल अपने समर्थकों को एकजुट कर रहे हैं, बल्कि संगठन को भी अपनी जन स्वीकार्यता का संदेश दे रहे हैं। हालांकि, पार्टी के भीतर एक तबका ऐसा भी है जो इस यात्रा को संगठन के लिए नुकसानदेह मान रहा है। कई नेताओं ने इस मुहिम पर खुली आपत्ति दर्ज कराई है और इसे पार्टी के लिए घातक कदम करार दिया है।

## हरिद्वार का सियासी गणित और खानपुर सीट का पेंच
इस पूरे विवाद की जड़ हरिद्वार जिले और खासकर खानपुर विधानसभा सीट से जुड़ी मानी जा रही है। हरिद्वार जिला राजनीतिक लिहाज से कांग्रेस के लिए काफी मजबूत रहा है, जहां कुल 11 विधानसभा सीटों में से 5 पर कांग्रेस का कब्जा है। इन्हीं में हरिद्वार ग्रामीण सीट भी शामिल है, जिसका प्रतिनिधित्व हरीश रावत की बेटी अनुपमा विधायक के तौर पर करती हैं। इसके बावजूद रावत की नजर अब खानपुर सीट पर जा टिकी है।

खानपुर सीट से मौजूदा समय में उमेश कुमार निर्दलीय विधायक हैं। उमेश कुमार वही शख्स हैं जिन्होंने साल 2016 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ एक अंडरकवर ऑपरेशन किया था, जिससे उस समय की कांग्रेस सरकार बड़े संकट में घिर गई थी। अब पिछले कुछ महीनों के दौरान उमेश कुमार की कांग्रेस नेताओं के साथ नजदीकियां बढ़ने की चर्चाएं हैं। संगठन के भीतर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी से लेकर प्रदेश कांग्रेस कमेटी तक का एक धड़ा उमेश कुमार को पार्टी में शामिल कराने की पैरवी कर रहा है, जिसका हरीश रावत कड़ा विरोध कर रहे हैं।

## पोस्टर वार और सोशल मीडिया पर तीखे वार
हरीश रावत पहले ही साफ कर चुके हैं कि वह हरिद्वार जिले से चुनावी मैदान में उतरने के इच्छुक हैं और उन्होंने उमेश कुमार के प्रभाव वाली खानपुर सीट की ओर अपनी गतिविधियां बढ़ा दी हैं। रावत समर्थकों का दावा है कि खानपुर इलाके में राजनीतिक माहौल कांग्रेस के पक्ष में बन रहा है। इसी सियासी तनातनी के बीच सोशल मीडिया पर उमेश कुमार द्वारा पार्टी प्रभारी शैलजा को गुलदस्ता भेंट करने की तस्वीर भी काफी चर्चा में रही है।

मामला यहीं शांत नहीं हुआ। हाल ही में एक नया पोस्टर भी सामने आया है जिसमें कांग्रेस प्रभारी शैलजा को हटाने की मांग उठाई गई है, हालांकि इस पोस्टर को किसने जारी किया इसकी पुख्ता जानकारी सामने नहीं आई है। वहीं दूसरी तरफ, हरीश रावत ने सोशल मीडिया पर बिना नाम लिए अपने विरोधियों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने साफ कहा कि साल 2016 में सरकार गिराने में जो व्यक्ति माध्यम बना, उसे ही आज कुछ लोग पार्टी में महामंडित करने में जुटे हैं। उन्होंने नाराजगी जताते हुए लिखा कि जिस चेहरे की वजह से राज्य में पार्टी को 10 साल तक सत्ता से बाहर रहना पड़ा, उसे आज कुछ नेताओं द्वारा नायक के तौर पर पेश किया जा रहा है।

## इसका आप पर असर
उत्तराखंड कांग्रेस की इस अंदरूनी गुटबाजी का सीधा असर राज्य की राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों पर पड़ रहा है।

- **भारत में:** राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस संगठन के भीतर असंतोष और अनुशासनहीनता के संदेश से अन्य राज्यों में कार्यकर्ताओं का मनोबल प्रभावित होता है। हाईकमान के हस्तक्षेप और फैसलों पर आगामी चुनावों की रणनीति निर्भर करेगी।
- **उत्तराखंड में:** हरिद्वार और कुमाऊं मंडल के स्थानीय कार्यकर्ताओं में टिकट दावेदारी और नेतृत्व को लेकर असमंजस बना हुआ है। खानपुर और आसपास के क्षेत्रों में आम जनता के बीच पार्टी की गुटबाजी से विपक्षी दलों को लाभ मिल सकता है।
- **पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए:** वरिष्ठ नेताओं के अलग-अलग रुख के चलते जमीनी कार्यकर्ताओं के लिए स्पष्ट निर्देश मिलना कठिन हो गया है। आगामी कार्यक्रमों और यात्राओं में भागीदारी को लेकर समर्थक अलग-अलग गुटों में बंटते दिख रहे हैं।
- **क्षेत्रीय राजनीति पर:** निर्दलीय विधायकों के संभावित प्रवेश से पुराने वफादार नेताओं में असुरक्षा की भावना बढ़ सकती है। इससे संगठन के अंदर असंतोष खुलकर सड़कों और सोशल मीडिया पर दिखाई देने लगा है।

## ऐसा क्यों हुआ
हरीश रावत और पार्टी नेतृत्व के बीच इस तनातनी की मुख्य वजह 2016 के सियासी घटनाक्रम और निर्दलीय विधायक उमेश कुमार की पार्टी में संभावित एंट्री है।

- **2016 का स्टिंग ऑपरेशन:** तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत के खिलाफ उमेश कुमार द्वारा किए गए अंडरकवर ऑपरेशन के चलते सरकार गंभीर संवैधानिक संकट में पड़ गई थी। रावत उस घटना को राज्य में पार्टी की लंबी सत्ता विदाई का मुख्य कारण मानते हैं।
- **उमेश कुमार की नजदीकियों पर विरोध:** हाल के महीनों में पार्टी के एक धड़े द्वारा उमेश कुमार को संगठन में शामिल करने की कोशिशें की जा रही हैं। रावत इस कदम का कड़ा विरोध कर रहे हैं और इसे पार्टी के पुराने सिद्धांतों के खिलाफ बता रहे हैं।
- **हरिद्वार में वर्चस्व की जंग:** हरिद्वार जिले की 11 में से 5 सीटें कांग्रेस के पास हैं और रावत परिवार का वहां मजबूत आधार है। खानपुर सीट पर रावत की सक्रियता और चुनाव लड़ने की इच्छा ने स्थानीय समीकरणों को गरमा दिया है।
- **हाईकमान की अनदेखी:** चेतावनी जारी होने के बावजूद रावत ने अपनी यात्रा नहीं रोकी, जिससे यह मसला सीधे तौर पर दिल्ली दरबार और अनुशासन के दायरे में पहुंच गया।

## सवाल-जवाब

### 1. हरीश रावत अपनी धन्यवाद यात्रा को लेकर दिल्ली क्यों जा रहे हैं?
हरीश रावत अपनी यात्रा पर पार्टी हाईकमान की चेतावनी के बाद अपना पक्ष रखने के लिए दिल्ली जा रहे हैं, जहां वह प्रदेश प्रभारी शैलजा और महासचिव के सी वेणुगोपाल से मिलेंगे।

### 2. हरीश रावत और विधायक उमेश कुमार के बीच विवाद की मुख्य वजह क्या है?
साल 2016 में उमेश कुमार ने मुख्यमंत्री रहते हुए हरीश रावत का अंडरकवर ऑपरेशन किया था, जिससे उनकी सरकार संकट में आ गई थी। अब कांग्रेस में उनकी संभावित एंट्री का रावत विरोध कर रहे हैं।

### 3. हरीश रावत किन जिलों में अपनी यात्रा निकाल रहे हैं?
हरीश रावत हरिद्वार से लेकर नैनीताल और उधमसिंह नगर जिलों में अपनी धन्यवाद यात्रा निकाल रहे हैं।

### 4. हरिद्वार जिले में कांग्रेस की मौजूदा स्थिति क्या है?
हरिद्वार जिले की 11 विधानसभा सीटों में से 5 पर कांग्रेस का कब्जा है, जिसमें हरिद्वार ग्रामीण सीट से हरीश रावत की बेटी अनुपमा विधायक हैं।

### 5. हरीश रावत किस विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के इच्छुक हैं?
हरीश रावत ने हरिद्वार जिले की खानपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जताई है, जहां से वर्तमान में उमेश कुमार निर्दलीय विधायक हैं।

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