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  "type": "article",
  "title": "उत्तराखंड के नैनीताल में दूषित पानी से फैला पीलिया और टाइफाइड, अस्पतालों में बढ़े मरीज और बोतलबंद पानी की मांग",
  "summary": "नैनीताल जिले के ज्योलिकोट और आसपास के गांवों में गंदा पानी पीने से लोग पीलिया, टाइफाइड और डायरिया की चपेट में आ रहे हैं। एक 16 वर्षीय किशोर समेत दो लोगों की मौत के बाद स्थानीय लोग बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।",
  "content": "उत्तराखंड राज्य के पहाड़ी पर्यटन जिले नैनीताल के ग्रामीण इलाकों में दूषित पेयजल के उपयोग से फैली जलजनित बीमारियों ने गंभीर संकट पैदा कर दिया है। जिले के ज्योलिकोट क्षेत्र तथा उसके आसपास स्थित कई गांवों में पीलिया, टाइफाइड, तेज बुखार, पेट दर्द, उल्टी और डायरिया (दस्त) के मरीजों की संख्या में अचानक भारी उछाल दर्ज किया गया है। स्थिति उस समय बेहद चिंताजनक हो गई जब ज्योलिकोट क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सरियाताल गांव के रहने वाले 16 वर्षीय किशोर रितेश जीना की बीमारी के कारण जान चली गई। स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों का कहना है कि अब तक इस दूषित पानी के प्रकोप के कारण क्षेत्र के दो लोगों की मृत्यु हो चुकी है। इस त्रासदी के बाद पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल व्याप्त है, जबकि स्वास्थ्य विभाग तथा जिला प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी और राहत कार्यों में जुट गई हैं।\n\nबीमारी की मुख्य चपेट में आए क्षेत्र और अस्पतालों की स्थिति\nजलजनित संक्रमण का सबसे अधिक असर ज्योलिकोट, तल्ला कृष्णापुर, खुर्पाताल और सरियाताल जैसे इलाकों में देखने को मिल रहा है। इन गांवों से लगातार नए मरीज सामने आ रहे हैं और इलाज के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं। नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल में प्रभावित ग्रामीणों का आना लगातार जारी है। स्थानीय ग्रामीण प्रकाश आर्य ने क्षेत्र की स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि ग्रामीण इलाकों में जलजनित बीमारियों का यह प्रकोप 25 अगस्त से लगातार जारी है। उनके अनुसार, क्षेत्र के करीब 30 से 40 लोग अब तक इस संक्रमण की चपेट में आ चुके हैं। प्रकाश आर्य खुद पिछले पांच दिनों से बीडी पांडे जिला अस्पताल में भर्ती होकर अपना इलाज करा रहे हैं, और उनके साथ परिवार के छोटे बच्चों को भी अस्पताल में दाखिल कराया गया है। उन्होंने बताया कि कुछ मरीज इलाज के बाद ठीक होकर अपने घर लौट चुके हैं, लेकिन नए मरीजों का आना लगातार बना हुआ है। वर्तमान में केवल ज्योलिकोट क्षेत्र से ही लगभग 20 मरीज इसी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती हैं।\n\nसीवर रिसाव और पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका\nग्रामीणों का सीधा आरोप है कि पीने के पानी की आपूर्ति में सीवर का गंदा पानी मिलने के कारण यह भयावह बीमारी फैली है। प्रकाश आर्य के अनुसार, क्षेत्र में स्थापित सीवर पाइपलाइनों से रिसाव होकर गंदा पानी सीधे प्राकृतिक जल स्रोतों और पेयजल आपूर्ति की लाइनों में मिल रहा है। इसी दूषित जल का सेवन करने की वजह से गांव के लोग एक-एक करके बीमार पड़ रहे हैं। ज्योलिकोट के निवासी दिनेश तिवारी ने अपना अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्हें पिछले चार-पांच दिनों से लगातार तेज बुखार आ रहा था। स्थानीय स्तर पर दवाइयां लेने और शुरुआती इलाज के बाद भी जब उनकी तबीयत में कोई सुधार नहीं हुआ, तो वे जांच कराने अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में हुई चिकित्सीय जांचों में उनके लिवर में गंभीर संक्रमण और पीलिया के लक्षण उजागर हुए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में लोगों के बीमार पड़ने की मुख्य वजह जल संस्थान द्वारा आपूर्ति किया जाने वाला गंदा और दूषित पानी ही है।\n\nबीडी पांडे अस्पताल का चिकित्सीय आंकड़ा और डॉक्टरों की चेतावनी\nनैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. एमएस दुग्ताल ने बताया कि वर्तमान में जारी बरसात के मौसम के दौरान पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, पेट दर्द और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। उनके अनुसार, अस्पताल में हर दिन ऐसे 15 से अधिक मरीज इलाज के लिए पहुंच रहे हैं, जिनमें से 5 से अधिक गंभीर मरीजों को रोजाना वार्डों में भर्ती करना पड़ रहा है। भर्ती होने वाले इन मरीजों में अधिकांश लोग ज्योलिकोट और नैनीताल के नजदीकी ग्रामीण इलाकों से आ रहे हैं। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक (पीएमएस) डॉ. द्रोपदी गर्वयाल ने स्पष्ट किया कि पिछले करीब 15 दिनों से अस्पताल में इस तरह के मरीजों की आमद लगातार बनी हुई है। अब तक कुल 26 मरीज अस्पताल में भर्ती होकर इलाज करा चुके हैं। वर्तमान समय में अस्पताल के वार्डों में कुल 65 मरीज भर्ती हैं, जिनमें से 11 मरीज अकेले ज्योलिकोट क्षेत्र के निवासी हैं। इन सभी मरीजों में पीलिया, उल्टी, पेट दर्द, बुखार और टाइफाइड जैसे गंभीर लक्षण पाए गए हैं।\n\nबोतलबंद पानी की मांग में उछाल और पानी का बढ़ता बाजार\nपीने के पानी के दूषित होने की खबर फैलते ही ग्रामीणों के बीच खौफ का माहौल है, जिसके कारण लोग अब पीने के लिए सरकारी पानी के बजाय बाजार से खरीदा हुआ बोतलबंद पानी इस्तेमाल करने पर मजबूर हैं। ज्योलिकोट और आसपास के क्षेत्रों में पिछले लगभग दस दिनों के भीतर डिब्बाबंद और बोतलबंद पानी की मांग में अप्रत्याशित तेजी आई है। स्थानीय दुकानदार सुमित जोशी ने बताया कि उनकी अकेली दुकान से ही रोजाना करीब 20 से 30 पेटी बोतलबंद पानी बिक रहा है। बाजार में 5 लीटर वाली बड़ी पानी की बोतलों की मांग सबसे ज्यादा देखी जा रही है। सुमित जोशी का अनुमान है कि पूरे ज्योलिकोट क्षेत्र की सभी दुकानों को मिलाकर देखा जाए तो प्रतिदिन औसतन 40 से 50 पेटी बोतलबंद पानी की बिक्री हो रही है। सरियाताल के निवासी बसंत लाल आर्य ने बताया कि बीमारी का डर इतना अधिक है कि लोग अपनी सुरक्षा के लिए बिसलेरी और अन्य कंपनियों का बोतलबंद पानी खरीदने को विवश हैं। हालांकि, उन्होंने यह चिंता भी जताई कि हर रोज बाजार से महंगा बोतलबंद पानी खरीदकर पीना हर गरीब या मध्यमवर्गीय परिवार के आर्थिक वश में नहीं है।\n\nप्रशासनिक कार्रवाई, जांच और सरकारी कदम\nपूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए नैनीताल के जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने स्थिति का जायजा लिया है। जिलाधिकारी ने पुष्टि की कि ज्योलिकोट क्षेत्र के कई गांव इस जलजनित बीमारी के प्रभाव में आए हैं और वर्तमान में क्षेत्र के लगभग 50 से 60 लोग विभिन्न स्थानों पर उपचाराधीन हैं। जिलाधिकारी ने बताया कि प्रशासन की ओर से पानी के सभी स्थानीय स्रोतों तथा सामान्य पेयजल आपूर्ति के नमूने (सैंपल) एकत्र कर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए हैं। इसके साथ ही जल संस्थान से विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी गई है और जल संस्थान के अधिकारियों से पिछले दो महीनों का पेयजल आपूर्ति एवं रखरखाव रोस्टर तलब किया गया है। प्रभावित ग्रामीण इलाकों में स्वच्छता अभियान चलाने, कीटनाशक दवाओं का छिड़काव करने और स्वास्थ्य विभाग द्वारा मेडिकल कैंप लगाने का काम शुरू कर दिया गया है। मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ), जल संस्थान के अधिशासी अभियंताओं और मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) की एक संयुक्त टीम ने प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर जमीनी स्थिति का निरीक्षण किया है। प्रशासन ने जल संस्थान को टैंकरों के माध्यम से पानी की वैकल्पिक आपूर्ति करने के निर्देश दिए हैं, हालांकि ग्रामीणों का मानना है कि टैंकरों से मिलने वाला पानी उनकी दैनिक जरूरतों के मुकाबले काफी कम है। जिलाधिकारी ने कहा है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद बीमारी के सटीक कारणों का पता चलेगा, जिसके आधार पर आगे की सख्त प्रशासनिक कार्रवाई की जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nनैनीताल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में फैले इस जलजनित प्रकोप ने स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य और दैनिक जीवन पर सीधा प्रभाव डाला है।\n\n• उत्तराखंड में: दूषित जलापूर्ति के कारण पहाड़ी इलाकों में पानी की स्वच्छता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी पानी की जांच की मांग बढ़ रही है।\n• नैनीताल और ज्योलिकोट में: प्रभावित गांवों के लोगों को पीने के साफ पानी के लिए रोजाना बोतलबंद पानी खरीदना पड़ रहा है, जिससे परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।\n• स्वास्थ्य सुरक्षा: स्थानीय निवासियों को पीने के पानी को उबालकर या सही तरीके से फिल्टर करके ही इस्तेमाल करने की सलाह दी जा रही है।\n• अस्पताल और इलाज: बीडी पांडे जिला अस्पताल समेत स्थानीय स्वास्थ्य केंद्रों में मरीजों की बढ़ती संख्या से चिकित्सा सेवाओं पर दबाव बढ़ गया है।\n• जल आपूर्ति व्यवस्था: प्रशासन द्वारा टैंकरों से की जा रही पानी की आपूर्ति अपर्याप्त साबित हो रही है, जिससे ग्रामीणों को वैकल्पिक व्यवस्था करनी पड़ रही है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nबरसात के मौसम में जलापूर्ति लाइनों में सीवर का गंदा पानी मिलने और जल स्रोतों के दूषित होने के कारण यह बीमारी फैली है।\n\n• सीवर लाइनों का रिसाव: ग्रामीणों के अनुसार स्थानीय सीवर पाइपलाइनों से होने वाले रिसाव का गंदा पानी प्राकृतिक पेयजल स्रोतों में मिक्स हो गया।\n• मानसून का मौसम: बारिश के दौरान पहाड़ी क्षेत्रों में पानी के प्राकृतिक स्रोत आसानी से दूषित हो जाते हैं, जिससे पीलिया और टाइफाइड के जीवाणु पनपते हैं।\n• सफाई और रखरखाव में कमी: पेयजल आपूर्ति नेटवर्क की नियमित निगरानी और क्लोरीनेशन न होने से स्थिति अधिक गंभीर हुई।\n• जांच जारी: जिलाधिकारी ने पानी के सैंपल लैब भेजे हैं और जल संस्थान की रिपोर्ट आने के बाद ही सटीक कारण की आधिकारिक पुष्टि होगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. नैनीताल के ज्योलिकोट क्षेत्र में क्या स्वास्थ्य समस्या फैली है?\nज्योलिकोट और आसपास के गांवों में दूषित पानी पीने से पीलिया, टाइफाइड, डायरिया, उल्टी और पेट दर्द जैसी जलजनित बीमारियां फैली हैं।\n\n2. इस जलजनित बीमारी से अब तक कितने लोगों की मौत हुई है?\nस्थानीय रिपोर्टों के अनुसार सरियाताल गांव के 16 वर्षीय रितेश जीना समेत अब तक दो लोगों की मौत की बात सामने आई है।\n\n3. बीमारी फैलने की मुख्य वजह क्या मानी जा रही है?\nग्रामीणों का आरोप है कि सीवर लाइन से होने वाला रिसाव पीने के पानी के स्रोतों में मिलने के कारण पानी दूषित हो गया है।\n\n4. बीडी पांडे जिला अस्पताल में मरीजों की क्या स्थिति है?\nअस्पताल में रोजाना 15 से अधिक मरीज आ रहे हैं और 5 से अधिक भर्ती हो रहे हैं। अब तक 26 मरीज भर्ती हो चुके हैं और वर्तमान में 11 मरीज केवल ज्योलिकोट क्षेत्र से हैं।\n\n5. प्रशासन ने इस स्थिति से निपटने के लिए क्या कदम उठाए हैं?\nजिलाधिकारी के निर्देश पर पानी के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं, प्रभावित क्षेत्रों में मेडिकल कैंप और छिड़काव कराया जा रहा है तथा टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है।\n\n6. क्षेत्र में बोतलबंद पानी की बिक्री क्यों बढ़ गई है?\nसरकारी जलापूर्ति दूषित होने के डर से लोग बाजार से बोतलबंद पानी खरीद रहे हैं, जिससे क्षेत्र में रोजाना 40 से 50 पेटी बोतलबंद पानी बिक रहा है।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-09-08",
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