# उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में बर्फबारी से समय से पहले ठंड की दस्तक, देहरादून समेत कई जिलों में भारी बारिश का अलर्ट

> उत्तराखंड के ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में ताजा बर्फबारी और निचले इलाकों में लगातार बारिश के चलते ठंड बढ़ गई है, जबकि मौसम विभाग ने कई जिलों में येलो अलर्ट जारी किया है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-09-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-ke-parvatiya-kshetron-men-barphabari-se-samaya-se-pahale-thnda-ki-dastaka-dehradun-sameta-kai-jilon-men-bhari-barisha--31693 · **Language:** Hindi
**Tags:** उत्तराखंड मौसम, बर्फबारी चमोली, भारी बारिश अलर्ट, बद्रीनाथ मौसम, हेमकुंड साहिब, देहरादून मौसम, भूस्खलन चेतावनी

उत्तराखंड के पर्वतीय और मैदानी इलाकों में मौसम का मिजाज तेजी से बदल रहा है। मानसून की विदाई की बेला में राज्य के पहाड़ी हिस्सों में समय से पहले ही सर्दियों जैसी ठंड महसूस होने लगी है। इस बीच, भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने १३ सितंबर को लेकर प्रदेश के कई संवेदनशील पर्वतीय क्षेत्रों में भारी बारिश और आसमानी बिजली गिरने की आशंका जताते हुए येलो अलर्ट घोषित कर दिया है। देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के नए बुलेटिन के मुताबिक, राज्य की राजधानी देहरादून सहित टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में मौसम का रुख काफी आक्रामक रहने का अनुमान है। चमोली जिले की ऊंचाई पर स्थित चोटियों जैसे बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और फूलों की घाटी में लगातार नई बर्फबारी हो रही है, जिससे पूरे ऊपरी हिमालयी क्षेत्र में कड़ाके की ठंड बढ़ गई है। वहीं, घाटी वाले क्षेत्रों में रुक-रुक कर हो रही लगातार बारिश के चलते स्थानीय नदी-नालों का जलस्तर बढ़ रहा है, जिससे पहाड़ी रास्तों पर भूस्खलन का बड़ा खतरा पैदा हो गया है।

 

## पहाड़ी चोटियों पर बर्फबारी से गिरा तापमान, समय से पहले शुरू हुई हाड़ कंपाने वाली ठंड

चमोली जिले के ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का सबसे कड़ा रूप दिखाई दे रहा है। हिंदुओं के पवित्र धाम बद्रीनाथ, सिखों के प्रसिद्ध तीर्थ स्थल हेमकुंड साहिब और प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर फूलों की घाटी की ऊंची पहाड़ियों पर भारी बर्फबारी दर्ज की गई है। इन क्षेत्रों में चारों तरफ बर्फ की सफेद चादर बिछ जाने के कारण तापमान में भारी गिरावट आई है। हालांकि हेमकुंड साहिब के कपाट इस साल आगामी १० अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाने हैं, लेकिन कपाट बंद होने से करीब एक महीना पहले ही यहां के तापमान में भारी गिरावट आ चुकी है और लोगों को हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड का सामना करना पड़ रहा है। ऊपरी इलाकों से आ रही सर्द हवाओं के कारण निचले इलाकों में भी तापमान तेजी से गिरने लगा है, जिससे स्थानीय निवासियों को गरम कपड़ों का सहारा लेना पड़ रहा है।

 

## अगले ७२ घंटों के लिए मौसम विभाग की गंभीर चेतावनी

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून के विदा होने से पहले बादलों की यह बढ़ी हुई सक्रियता पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों को प्रभावित करने वाली है। मौसम विज्ञान विभाग ने चेतावनी जारी करते हुए स्पष्ट किया है कि अगले ७२ घंटे उत्तराखंड के लोगों के लिए बेहद संवेदनशील हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, १३ सितंबर को कुमाऊं मंडल के सीमांत जिलों बागेश्वर और पिथौरागढ़ में कुछ स्थानों पर अत्यंत तीव्र वेग के साथ मूसलाधार बारिश होने की आशंका है। इसके साथ ही, हरिद्वार और उधम सिंह नगर जैसे मैदानी जिलों में गरज-चमक के साथ आसमानी बिजली गिरने की प्रबल संभावना बनी हुई है। मौसम विभाग ने १४ और १५ सितंबर को भी पहाड़ी जिलों में तेज बारिश और बिजली चमकने का अलर्ट जारी रखा है, जिससे स्पष्ट संकेत मिलता है कि आने वाले दो-तीन दिनों तक उत्तराखंड के निवासियों को मौसम की इस मार से राहत नहीं मिलने वाली है।

 

## चारधाम यात्रा मार्गों पर विशेष सावधानी बरतने के निर्देश

गढ़वाल मंडल के प्रमुख पर्वतीय जिलों उत्तरकाशी, टिहरी और रुद्रप्रयाग में भी मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए सतर्कता बढ़ा दी गई है। खासकर केदारनाथ के पैदल यात्रा मार्ग और यमुनोत्री-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा कर रहे श्रद्धालुओं को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। इन जिलों में स्थानीय स्तर पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ने और आसीय बिजली गिरने का जोखिम बना हुआ है। पिछले २४ घंटों के दौरान यद्यपि इन पर्वतीय क्षेत्रों में दिन का अधिकतम तापमान सामान्य स्तर के आसपास बना रहा, लेकिन रुक-रुक कर हो रही बारिश के कारण शाम होते ही ठंडी हवाएं चलने लग रही हैं, जिससे लोगों को सिहरन का अहसास होने लगा है। प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि वे मौसम की स्थिति देखकर ही अपनी यात्रा आगे बढ़ाएं।

 

## बागेश्वर और पिथौरागढ़ में भूस्खलन और बंद रास्तों का खतरा बढ़ा

कुमाऊं क्षेत्र के बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों में मौसम का सबसे तीव्र असर देखने को मिल सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र ने इन दोनों सीमावर्ती जिलों के लिए भारी बारिश का विशेष येलो अलर्ट जारी किया है। इन पहाड़ी ढलानों पर रुक-रुक कर होने वाली तेज बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा अत्यधिक बढ़ गया है। पहाड़ों से लगातार मलबा गिरने और चट्टानों के खिसकने से ग्रामीण संपर्क मार्गों के बाधित होने की पूरी आशंका बनी हुई है। स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी मशीनों को तैनात किया है ताकि रास्ते बंद होने पर उन्हें तुरंत खोला जा सके। इसके बावजूद, यात्रियों और स्थानीय लोगों को पहाड़ों पर यात्रा करते समय बेहद सतर्क रहने और अनावश्यक यात्रा से बचने की सलाह दी गई है।

 

## देहरादून और मसूरी में बारिश से उमस भरी गर्मी से मिली बड़ी राहत

दूसरी तरफ, राजधानी देहरादून और इसके आसपास के पर्यटन स्थलों जैसे मसूरी, ऋषिकेश और विकासनगर में पिछले २४ घंटों से जारी भारी उमस के बाद मौसम ने आखिरकार करवट ली है। भीषण उमस और गर्मी से परेशान लोगों को बादलों के छाने और बारिश की फुहारों से बड़ी राहत मिली है। आईएमडी के पूर्वानुमान के अनुसार, देहरादून जिले के विभिन्न हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश के एक या दो तीव्र दौर आ सकते हैं। हालांकि राजधानी में हाल के दिनों में अधिकतम तापमान सामान्य से थोड़ा अधिक दर्ज किया जा रहा था, लेकिन बादलों के डेरा जमाने और हल्की बौछारें पड़ने से पारे में गिरावट आना तय है। प्रशासन ने शहर के संवेदनशील पहाड़ी ढलानों और बरसाती नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की हिदायत दी है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।

 

## मैदानी जिलों में आसमानी बिजली का खतरा, १७ सितंबर से मौसम में सुधार की उम्मीद

उत्तराखंड के मैदानी इलाकों, विशेषकर हरिद्वार और उधम सिंह नगर में पिछले दिनों अधिकतम तापमान सामान्य से काफी ऊपर चला गया था, जिसके चलते लोग भारी उमस और पसीने वाली गर्मी का सामना कर रहे थे। १३ सितंबर को इन जिलों में आकाशीय बिजली कड़कने के साथ छिटपुट बारिश होने की संभावना है, जिससे तापमान में कमी आएगी। मौसम विज्ञान विभाग के विश्लेषण के अनुसार, १७ और १८ सितंबर से पूरे राज्य में बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने लगेगी और उसके बाद केवल चुनिंदा जगहों पर ही हल्की बौछारें दर्ज की जाएंगी। हालांकि, मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि जब तक मानसून पूरी तरह विदा नहीं हो जाता, तब तक पर्यटकों और स्थानीय निवासियों को मौसम विभाग द्वारा जारी किए जाने वाले दैनिक बुलेटिनों पर लगातार नजर रखनी चाहिए और सुरक्षा नियमों का पालन करना चाहिए।

## इसका आप पर असर
मौसम में आए इस अचानक बदलाव का सीधा असर आम लोगों और उत्तराखंड आने वाले यात्रियों पर पड़ने वाला है। यात्रा की योजना बना रहे लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने की सलाह दी जाती है।

- **भारत भर के पर्यटकों के लिए:** यदि आप उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों जैसे बद्रीनाथ, केदारनाथ या फूलों की घाटी जाने की योजना बना रहे हैं, तो सड़क मार्ग के अवरुद्ध होने और अत्यधिक ठंड की तैयारी रखें। सितंबर मध्य में ही आपको भारी गर्म कपड़ों की आवश्यकता होगी क्योंकि उच्च क्षेत्रों में भीषण ठंड शुरू हो चुकी है।
- **उत्तराखंड के स्थानीय निवासियों के लिए:** विशेष रूप से बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली जिलों के ग्रामीणों को मलबे और अचानक आने वाली बाढ़ के प्रति सतर्क रहना होगा। भूस्खलन के कारण ग्रामीण संपर्क मार्ग प्रभावित हो सकते हैं, जिससे आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति में बाधा आ सकती है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह अचानक मौसमी बदलाव मानसून के लौटने से ठीक पहले की सक्रियता और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में पश्चिमी विक्षोभ के आंशिक प्रभाव का परिणाम है।

- **मानसून की विदाई का चरण:** मानसून के विदा होने से पहले वायुमंडल में नमी की बढ़ी हुई मात्रा तीव्र गरज-चमक वाले बादलों का निर्माण कर रही है, जिससे मैदानी इलाकों में बारिश और पर्वतीय इलाकों में भारी गिरावट हो रही है।
- **तापमान में भारी गिरावट:** चमोली के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में पहाड़ों पर बने कम दबाव के क्षेत्रों के कारण कम तापमान में आर्द्रता संघनित होकर भारी बर्फबारी में बदल गई।
- **भौगोलिक संवेदनशीलता:** उत्तराखंड के पहाड़ी ढलान मानसून के आखिरी दौर में मिट्टी के अत्यधिक नम हो जाने के कारण मलबे और भूस्खलन के प्रति सबसे अधिक संवेदनशील हो जाते हैं।

## सवाल-जवाब

### 1. उत्तराखंड के किन जिलों के लिए मौसम विभाग ने १३ सितंबर को येलो अलर्ट जारी किया है?
मौसम विभाग ने देहरादून, टिहरी, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है।

### 2. चमोली जिले की किन ऊंची चोटियों पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है?
बद्रीनाथ धाम, हेमकुंड साहिब और विश्व धरोहर फूलों की घाटी की ऊंची पर्वत श्रृंखलाओं पर ताजा बर्फबारी दर्ज की गई है।

### 3. सिखों के पवित्र स्थल हेमकुंड साहिब के कपाट कब बंद हो रहे हैं?
हेमकुंड साहिब के कपाट आगामी १० अक्टूबर को शीतकाल के लिए बंद किए जाने की योजना है।

### 4. देहरादून और आसपास के मैदानी इलाकों को उमस से राहत कैसे मिली?
देहरादून, मसूरी, ऋषिकेश और विकासनगर में बादलों के छाने और हल्की से मध्यम बारिश के बाद लोगों को उमस भरी गर्मी से राहत मिली है।

### 5. उत्तराखंड में बारिश की तीव्रता कब से कम होने की संभावना है?
मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, १७ और १८ सितंबर से पूरे राज्य में वर्षा की तीव्रता धीरे-धीरे घटने लगेगी।

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