# उत्तराखंड में रावण दहन रोकने के लिए मानवाधिकार आयोग में याचिका, हरिद्वार के वकील ने उठाया सवाल

> हरिद्वार में विजयदशमी के अवसर पर रावण के पुतले फूंके जाने की परंपरा के खिलाफ मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का तर्क है कि रावण एक प्रकांड विद्वान और शिवभक्त थे, इसलिए उनका पुतला दहन करना मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-16 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-mein-ravana-dahan-rokne-ke-liye-maanvadhikaar-aayog-mein-yaachika-48289 · **Language:** Hindi
**Tags:** हरिद्वार, मानवाधिकार आयोग, दशहरा, रावण दहन, उत्तराखंड, अरुण भदौरिया

हरिद्वार में विजयदशमी के पर्व से ठीक पहले एक अनूठा कानूनी और सामाजिक विवाद सामने आया है। हर साल देश भर में बुराई पर अच्छाई की जीत के प्रतीक के तौर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं, लेकिन इस परंपरा के खिलाफ हरिद्वार के एक अधिवक्ता ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है। इस याचिका के सामने आने के बाद से धार्मिक और सामाजिक हलकों में एक नई बहस छिड़ गई है।

याचिका दाखिल करने वाले अधिवक्ता का कहना है कि रावण कोई साधारण पात्र नहीं थे, बल्कि वे एक प्रकांड विद्वान, शिवभक्त और 52 विद्याओं के ज्ञाता थे। उनके नियंत्रण में नौ ग्रह भी माने जाते हैं। ऐसे महान तपस्वी, ज्ञानी और शक्तिशाली शासक का हर साल पुतला दहन किया जाना मानवाधिकारों के विरुद्ध है। दशहरे से ठीक पहले इस तरह की मांग उठने से हर कोई हैरान है।

## विद्वान का सम्मान जरूरी
हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने इस मामले पर अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज में हमेशा एक ज्ञानी और विद्वान व्यक्ति का सम्मान होना चाहिए और रावण इसी श्रेणी में आते हैं। भले ही उनका जन्म राक्षस कुल में हुआ था, लेकिन वे वेदों और पुराणों के गहरे ज्ञाता और भगवान शिव के परम भक्त थे। ऐतिहासिक ग्रंथों के अनुसार, प्रसिद्ध शिव तांडव स्तोत्र की रचना भी रावण द्वारा ही की गई थी।

अधिवक्ता ने तर्क दिया कि ललंकाधिपति रावण ने नारी के सम्मान का पूरा ध्यान रखा था। इसका सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि जब वे माता सीता को अपनी लंका लाए थे, तो उन्हें अपने महल के पास सुरक्षित स्थान पर रखा था, लेकिन कभी उनका अनादर या स्पर्श नहीं किया था। इसके अलावा, जब भगवान राम ने लंका विजय से पहले समुद्र तट पर महाशिवलिंग की स्थापना और हवन किया था, तब अनुष्ठान संपन्न कराने के लिए आचार्य के रूप में रावण को ही आमंत्रित किया गया था। ऐसे ज्ञानी और पराक्रमी पुरुष का पुतला जलाना अनुचित है।

## शासन और पुलिस को बनाया गया पक्षकार
अरुण भदौरिया ने जानकारी दी कि इसी गलत परंपरा पर रोक लगाने के उद्देश्य से उन्होंने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में औपचारिक याचिका दायर की है। इस याचिका में राज्य शासन के कई प्रमुख सचिवों के साथ-साथ उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक को भी पक्षकार बनाया गया है, ताकि पुतले जलाने की इस प्रथा पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।

अपनी याचिका में उन्होंने यह मांग भी रखी है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्कूलों के पाठ्यक्रम में रावण के ज्ञान, उनकी नीतियों और उनके द्वारा दिखाए गए नारी सम्मान के पहलुओं को शामिल किया जाना चाहिए। अधिवक्ता ने स्पष्ट किया है कि यदि मानवाधिकार आयोग इस मामले में कोई सख्त और ठोस कदम नहीं उठाता है, तो वे इस परंपरा पर कानूनी प्रतिबंध लगवाने के लिए उच्च न्यायालय का रुख करने से भी पीछे नहीं हटेंगे।

## इसका आप पर असर
यह याचिका सांस्कृतिक और सामाजिक परंपराओं पर चल रही बहसों को प्रभावित कर सकती है, हालांकि इससे आम नागरिकों के दैनिक जीवन या वित्त पर कोई सीधा असर नहीं पड़ेगा।

- **उत्तराखंड में:** राज्य के प्रशासनिक अधिकारियों और पुलिस विभाग को इस याचिका पर मानवाधिकार आयोग के निर्देशों का जवाब देना पड़ सकता है। स्थानीय स्तर पर सार्वजनिक आयोजनों को लेकर बहस तेज हो सकती है।
- **व्यापक प्रभाव:** इस तरह की कानूनी पहल से देश भर में पारंपरिक धार्मिक आयोजनों और सांस्कृतिक मान्यताओं को लेकर नए विमर्श और न्यायिक समीक्षा का दायरा बढ़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह याचिका एक व्यक्तिगत वैचारिक दृष्टिकोण और परंपराओं की नई व्याख्या के तहत दायर की गई है। याचिकाकर्ता का मानना है कि ऐतिहासिक पात्रों के विद्वान पक्ष को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

- **ऐतिहासिक और धार्मिक तर्क:** याचिकाकर्ता ने रावण के वेदों के ज्ञान, शिव भक्ति और नारी सम्मान के प्रसंगों को इस कानूनी कदम का मुख्य आधार बनाया है।
- **प्रशासनिक संलिप्तता:** इस प्रथा पर पूरी तरह रोक लगाने के उद्देश्य से राज्य शासन के प्रमुख सचिवों और पुलिस महानिदेशक को याचिका में पक्षकार बनाया गया है।

## सवाल-जवाब

### 1. हरिद्वार में किसने मानवाधिकार आयोग में याचिका दायर की है?
हरिद्वार के अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने उत्तराखंड राज्य मानवाधिकार आयोग में यह याचिका दायर की है।

### 2. याचिका में मुख्य मांग क्या की गई है?
याचिका में विजयदशमी के अवसर पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाने की परंपरा पर पूर्ण रूप से रोक लगाने की मांग की गई है।

### 3. याचिकाकर्ता ने रावण के पक्ष में क्या तर्क दिए हैं?
याचिकाकर्ता के अनुसार रावण एक प्रकांड विद्वान, शिवभक्त, 52 विद्याओं के ज्ञाता और नौ ग्रहों को वश में करने वाले थे, इसलिए उनका पुतला दहन मानवाधिकारों के खिलाफ है।

### 4. याचिका में किन अधिकारियों को पक्षकार बनाया गया है?
इसमें राज्य शासन के कई प्रमुख सचिवों और उत्तराखंड पुलिस महानिदेशक को पक्षकार बनाया गया है।

### 5. यदि मानवाधिकार आयोग ने कदम नहीं उठाया तो आगे क्या कदम उठाया जाएगा?
अधिवक्ता अरुण भदौरिया ने कहा है कि आयोग द्वारा ठोस कदम न उठाए जाने पर वे उच्च न्यायालय का रुख करेंगे।

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