उत्तराखंड में बांस की खेती से बदलेगी किसानों की तकदीर, बंजर जमीन बनेगी आय का नया जरिया उत्तराखंड सरकार किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूर्वोत्तर राज्यों की तर्ज पर बांस की खेती को बढ़ावा दे रही है। इस योजना के तहत स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं को बांस के उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। देहरादून में किसानों के लिए कमाई के नए रास्ते खोलने की दिशा में एक अहम कदम उठाया जा रहा है। राज्य सरकार अब बंजर और कम उपजाऊ जमीनों पर भी बांस की खेती कराने की तैयारी में जुटी है। इस योजना को जमीन पर उतारने की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है, जो पूर्वोत्तर राज्यों की सफल तर्ज पर इस पूरी पहल को आगे बढ़ा रहा है। योजना का दायरा केवल खेती तक सीमित नहीं है, बल्कि बांस से तैयार होने वाले विभिन्न उत्पादों के निर्माण पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। महिला स्वयं सहायता समूहों को जोड़ा जाएगा इस महत्वाकांक्षी योजना के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में सक्रिय स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी जोड़ा जा रहा है। इन महिलाओं को बांस के जरिए सजावटी सामान, बर्तन और दैनिक उपयोग की अन्य वस्तुएं तैयार करने का विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा। विभाग का मानना है कि इस कदम से ग्रामीण इलाकों में रोजगार के नए द्वार खुलेंगे। इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सकेंगी। हर जिले में पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत ग्राम्य विकास मंत्री भरत चौधरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश के प्रत्येक जिले में बांस का पायलट प्रोजेक्ट शुरू कर दिया गया है। इसके तहत उत्तराखंड ग्रामीण विकास संस्थान, रुद्रपुर में दो एकड़ जमीन पर बांस की पौध रोपी जा रही है। इस जगह को एक नर्सरी के साथ-साथ प्रयोगधर्मी प्रयोगशाला के रूप में भी विकसित किया जा रहा है। महिलाओं को हस्तशिल्प, पर्यावरण के अनुकूल बर्तन, डेकोरेशन आइटम्स और रोजमर्रा की जरूरत की चीजें बनाने की ट्रेनिंग दी जाएगी। तैयार उत्पादों को खुले बाजार में बेचकर महिलाएं अपनी आर्थिकी को मजबूत कर सकती हैं और सरकार का लक्ष्य इस पहल के जरिए महिलाओं को लखपति दीदी बनाने में मदद करना भी है। कम उपजाऊ जमीन पर खेती का विकल्प विभाग किसानों को लगातार यह प्रेरित कर रहा है कि वे अपनी ऐसी बंजर और कम उपजाऊ जमीनों पर बांस की पैदावार करें जहां पारंपरिक फसलों की पैदावार न के बराबर होती है। इस तरह किसान अपनी बेकार पड़ी जमीन का भी पूरा उपयोग कर पाएंगे। बांस की खेती को एक ऐसे विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है जिसमें लागत बेहद कम आती है और यह लंबे समय तक लगातार आमदनी का जरिया बना रहता है। ग्रामीण रोजगार और जंगलों पर घटती निर्भरता बांस की खेती और उससे जुड़े कुटीर उद्योगों के माध्यम से गांवों में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा करने की रूपरेखा तैयार की गई है। विभाग को पूरी उम्मीद है कि इससे स्थानीय स्तर पर कामगारों को रोजगार मिलेगा और ग्रामीण आबादी की जंगलों पर होने वाली निर्भरता में भी कमी आएगी। अगले पांच सालों के भीतर इस पूरे मॉडल को विस्तार देने की पूरी योजना है, जिससे पूरे प्रदेश में बांस के उत्पादन और उससे जुड़े उद्योगों को एक नई गति मिल सके। इसका आप पर असर उत्तराखंड के किसानों और ग्रामीण महिलाओं की आर्थिकी पर इस योजना का सीधा और सकारात्मक असर पड़ेगा। • उत्तराखंड में: किसानों को बंजर और अनुजाऊ जमीनों से भी नियमित कमाई का एक नया साधन मिल जाएगा। स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाओं को बांस आधारित हस्तशिल्प का प्रशिक्षण मिलने से उनकी आमदनी में सीधे बढ़ोतरी होगी। • लखपति दीदी लक्ष्य: इस पहल के जरिए सरकार ग्रामीण महिलाओं को लखपति दीदी बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रही है, जिससे उनके जीवन स्तर में सुधार आएगा। • कम लागत का विकल्प: बांस की खेती में शुरुआती निवेश कम होता है और यह लंबे समय तक किसानों को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करती है। • रोजगार सृजन: स्थानीय स्तर पर बांस आधारित उद्योग लगने से गांवों से होने वाले पलायन पर रोक लगाने में मदद मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ उत्तराखंड सरकार द्वारा यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और अनुजाऊ जमीनों के उपयोग के लिए उठाया गया है। • बंजर भूमि का उपयोग: प्रदेश में बड़ी मात्रा में जमीन बंजर या कम उपजाऊ पड़ी है जहाँ पारंपरिक फसलें नहीं उगती हैं, इसलिए सरकार बांस जैसी मजबूत फसल को विकल्प बना रही है। • पूर्वोत्तर मॉडल की सफलता: पूर्वोत्तर राज्यों में बांस आधारित आजीविका के सफल मॉडलों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने भी उसी तर्ज पर राज्य में इस पहल को लागू करने का निर्णय लिया है। • रोजगार की कमी: ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के सीमित अवसरों और जंगलों पर बढ़ती निर्भरता को कम करने के लिए यह दीर्घकालिक योजना तैयार की गई है। • महिला सशक्तिकरण: स्वयं सहायता समूहों के जरिए महिलाओं को आर्थिक रूप से स्वावलंबी बनाने और उनकी आमदनी बढ़ाने की जरूरत महसूस की जा रही थी। सवाल-जवाब 1. उत्तराखंड में बांस की खेती को कौन सा विभाग बढ़ावा दे रहा है? ग्राम्य विकास विभाग उत्तराखंड में बांस की खेती को बढ़ावा दे रहा है। 2. बांस की खेती के लिए किसानों को किस तरह की जमीन का उपयोग करने को कहा जा रहा है? सरकार किसानों को बंजर और कम उपजाऊ जमीन पर बांस उगाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। 3. उत्तराखंड ग्रामीण विकास संस्थान कहाँ स्थित है? उत्तराखंड ग्रामीण विकास संस्थान रुद्रपुर में स्थित है, जहाँ दो एकड़ जमीन पर बांस की पौध लगाई जा रही है। 4. इस योजना में किसे विशेष रूप से जोड़ा जा रहा है? इस योजना में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को जोड़कर उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है। 5. ग्राम्य विकास मंत्री कौन हैं? भरत चौधरी उत्तराखंड के ग्राम्य विकास मंत्री हैं। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-bamboo-ki-kheti-se-badalegi-kisanon-ki-takdeer-barren-land-banegi-income-ka-naya-jariya-48217 TrendKia — Har trend, sabse pehle.