उत्तराखंड में चुनाव से पहले कांग्रेस की बढ़ी मुश्किलें, संगठन की चेतावनी दरकिनार कर हरीश रावत ने शुरू की जनसंवाद यात्रा उत्तराखंड में विधानसभा चुनाव से पहले हरीश रावत और संगठन नेतृत्व में तकरार गहरा गई है। आलाकमान की रोक और प्रभारी कुमारी शैलजा की चिट्ठी के बावजूद पूर्व मुख्यमंत्री ने जनसंवाद यात्रा का दूसरा चरण शुरू कर दिया है। उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनावों से पहले कांग्रेस के भीतर अंदरूनी कलह तेज होती दिख रही है। पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत पार्टी संगठन की नसीहतों को दरकिनार करते हुए अपने तयशुदा राजनीतिक कार्यक्रमों पर अडिग हैं। संगठन नेतृत्व चाहता है कि रावत अपने स्तर पर अलग अभियान चलाने के बजाय पार्टी के आधिकारिक ढांचे के साथ समन्वय बनाकर काम करें। इसी खींचतान के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने रविवार को हरीश रावत को दिल्ली तलब किया था। वहां उन्हें स्पष्ट निर्देश दिए गए कि वे अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक गतिविधियों को सीमित रखें और पार्टी के सामूहिक फैसलों के अनुसार आगे बढ़ें। इसके बावजूद हरीश रावत ने अपने रुख में कोई नरमी नहीं दिखाई और राज्य में अपनी यात्रा जारी रखने का फैसला किया। प्रभारी कुमारी शैलजा की चिट्ठी से उपजा विवाद इस पूरे विवाद की जड़ उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी शैलजा की वह चिट्ठी है, जो उन्होंने एक अक्टूबर को हरीश रावत को भेजी थी। इस पत्र की एक प्रति राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल को भी सौंपी गई थी। चिट्ठी में शैलजा ने रावत के स्वतंत्र दौरों पर सीधे सवाल खड़े किए थे। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में लिखा कि राज्य भर में निकाली जा रही इस यात्रा को लेकर न तो उनसे कोई परामर्श किया गया और न ही प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को इस बारे में सूचित किया गया था। शैलजा का कहना था कि आगामी कुछ महीनों में राज्य में विधानसभा चुनाव होने हैं, लिहाजा पार्टी कार्यकर्ताओं और नेताओं को आपसी मतभेद भुलाकर एकजुट होना होगा ताकि जनता के सामने संगठित चेहरा पेश किया जा सके। ऊधम सिंह नगर से जनसंवाद यात्रा का दूसरा चरण आलाकमान और प्रदेश प्रभारी के कड़े ऐतराज के बावजूद हरीश रावत अपने अभियानों को रोकने के मूड में नजर नहीं आ रहे हैं। उन्होंने उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे ऊधम सिंह नगर जिले से अपनी जनसंवाद यात्रा के दूसरे पड़ाव की शुरुआत कर दी है। सोमवार सुबह उन्होंने सोशल मीडिया पर जनता और कार्यकर्ताओं के नाम संदेश साझा करते हुए अपने तेवर साफ कर दिए। रावत ने लिखा कि उत्तराखंड के मान-सम्मान और स्वाभिमान की रक्षा के संकल्प के सामने चुनौतियां भले ही बड़ी हों, लेकिन वे पीछे हटने वाले नहीं हैं। उन्होंने अपनी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा के तहत जसपुर से हल्द्वानी तक लोगों से सीधा संवाद स्थापित करने और राज्य के अधिकारों की लड़ाई को आगे बढ़ाने का आह्वान किया। जांच एजेंसियों का शिकंजा और रावत की वापसी हरीश रावत का यह कड़ा रुख ऐसे समय में सामने आया है जब वे हाल ही में सक्रिय राजनीति में लौटे हैं। स्वास्थ्य कारणों के चलते करीब दो महीने तक चले इलाज और विश्राम के बाद वे पिछले महीने ही देहरादून पहुंचे थे। इस अनुपस्थिति के दौरान वे काफी समय तक जमीनी गतिविधियों से दूर रहे। इसी बीच साल 2016 के एक कथित भर्ती घोटाले के सिलसिले में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके एक करीबी सहयोगी के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। इस जांच के सिलसिले में हरीश रावत अपने समर्थकों और अपनी मां की तस्वीर लेकर खुद प्रवर्तन निदेशालय के दफ्तर पहुंचे थे, जहां जांच अधिकारियों ने उनसे कई घंटों तक पूछताछ की थी। नेतृत्व के सामने दोहरी उलझन पार्टी आलाकमान के लिए हरीश रावत से निपटना आसान साबित नहीं हो रहा है। उत्तराखंड में कांग्रेस संगठन का एक बड़ा हिस्सा सीधे तौर पर रावत से जुड़ा हुआ है। राज्य के दर्जनों वर्तमान नेता और पदाधिकारी ऐसे हैं जिन्होंने हरीश रावत के सानिध्य में राजनीति सीखी और पहचान बनाई। ऐसे में संगठन के सामने दोहरा संकट खड़ा हो गया है। एक तरफ पार्टी को चुनाव से पहले अनुशासन और एकजुटता का संदेश देना है, वहीं दूसरी तरफ वह अपने सबसे कद्दावर और जनाधार वाले नेता को पूरी तरह नाराज करने का जोखिम भी नहीं उठा सकती। आने वाले दिनों में यह टकराव उत्तराखंड कांग्रेस के चुनावी भविष्य को गहराई से प्रभावित कर सकता है। इसका आप पर असर इस राजनीतिक टकराव से उत्तराखंड में चुनावी समीकरण और विपक्षी दल की संगठनात्मक कार्यशैली पर सीधा असर पड़ेगा। • भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के लिए राज्यों में क्षेत्रीय दिग्गजों और केंद्रीय अनुशासन के बीच संतुलन साधना लगातार मुश्किल साबित हो रहा है। अगर यह टकराव नहीं थमा तो अन्य चुनावी राज्यों में भी केंद्रीय नेतृत्व के अधिकार पर सवाल खड़े हो सकते हैं। • उत्तराखंड में: राज्य के आम मतदाताओं और पार्टी कार्यकर्ताओं के बीच नेतृत्व को लेकर असमंजस की स्थिति बन रही है। जमीनी स्तर पर गुटबाजी बढ़ने से आगामी विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ दल के सामने एक मजबूत और एकजुट विपक्ष पेश करने की रणनीति कमजोर पड़ सकती है। • कार्यकर्ताओं पर असर: स्थानीय स्तर पर पार्टी कार्यकर्ताओं में असमंजस है कि वे प्रदेश संगठन के आधिकारिक कार्यक्रमों में जुटें या पूर्व मुख्यमंत्री की जनसंवाद यात्रा में शामिल हों। इस खींचतान के चलते चुनाव प्रचार की जमीनी तैयारियां बाधित हो सकती हैं। • चुनावी अभियान पर प्रभाव: टिकट वितरण और चुनावी रणनीतियों पर इसका असर सीधे तौर पर उम्मीदवारों के चयन में देरी के रूप में सामने आ सकता है। मतदाताओं के सामने स्पष्ट और एकजुट राजनीतिक विकल्प पेश करने में पार्टी को अतिरिक्त मशक्कत करनी होगी। ऐसा क्यों हुआ यह राजनीतिक गतिरोध वरिष्ठ नेता के स्वतंत्र अभियानों और केंद्रीय नेतृत्व की अनुशासनात्मक अपेक्षाओं के बीच टकराव के कारण पैदा हुआ है। • सीधा कारण: पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत द्वारा प्रदेश प्रभारी और प्रदेश अध्यक्ष से सलाह किए बिना राज्य में अपनी स्वतंत्र जनसंवाद यात्रा निकालना इस विवाद की तात्कालिक वजह बना। इस पर प्रभारी कुमारी शैलजा ने एक अक्टूबर को चिट्ठी लिखकर सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति दर्ज कराई। • दिल्ली में बैठक का नतीजा: राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल द्वारा दिल्ली में बुलाकर व्यक्तिगत अभियान रोकने की नसीहत दिए जाने के बावजूद रावत ने अपने कार्यक्रम जारी रखने का ऐलान किया। सोशल मीडिया पर उनके स्पष्ट संदेश ने संगठन के निर्देशों को दरकिनार कर दिया। • राजनीतिक पृष्ठभूमि: बीमारी के बाद वापसी और कथित 2016 भर्ती घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय की जांच के बाद रावत अपने मजबूत जनाधार का प्रदर्शन कर पार्टी में अपनी अपरिहार्यता बनाए रखना चाहते हैं। राज्य स्तर पर उनके समर्थकों की बड़ी संख्या के चलते वे संगठन के किसी भी दबाव के आगे झुकने को तैयार नहीं दिखते। सवाल-जवाब 1. हरीश रावत को लेकर कांग्रेस नेतृत्व में नाराजगी की मुख्य वजह क्या है? कांग्रेस नेतृत्व इस बात से खफा है कि हरीश रावत संगठन और प्रदेश नेतृत्व से चर्चा किए बिना राज्य में अपने स्तर पर स्वतंत्र जनसंवाद यात्राएं आयोजित कर रहे हैं। 2. कुमारी शैलजा ने अपनी चिट्ठी में क्या आपत्ति जताई थी? कुमारी शैलजा ने एक अक्टूबर की चिट्ठी में लिखा कि इस यात्रा को लेकर न उनसे और न ही प्रदेश अध्यक्ष से सलाह ली गई, जबकि आगामी चुनाव के मद्देनजर पार्टी को एकजुट दिखना चाहिए। 3. केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को दिल्ली बुलाकर क्या निर्देश दिए थे? केसी वेणुगोपाल ने हरीश रावत को साफ निर्देश दिए थे कि वे अपनी व्यक्तिगत राजनीतिक गतिविधियों को सीमित करें और पार्टी के सामूहिक फैसलों के अनुसार काम करें। 4. हरीश रावत ने अपनी यात्रा का दूसरा चरण कहां से शुरू किया है? उन्होंने उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे ऊधम सिंह नगर जिले से अपनी धन्यवाद एवं जनसंवाद यात्रा का दूसरा चरण शुरू किया, जिसमें वे जसपुर से हल्द्वानी तक संवाद करेंगे। 5. हरीश रावत से हाल ही में किस मामले में पूछताछ की गई थी? साल 2016 के एक कथित भर्ती घोटाले के मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने उनके सहयोगी पर केस दर्ज करने के बाद हरीश रावत से कई घंटों तक पूछताछ की थी। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-chunava-se-pahale-congress-ki-barhi-mushkilen-sngathana-ki-chetavani-darakinara-kara-harish-rawat-ne-shuru-ki-jana-43065 TrendKia — Har trend, sabse pehle.