उत्तराखंड में कफनी ग्लेशियर का ट्रैक बदहाल, जान जोखिम में डालकर सफर कर रहे सैलानी उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित कफनी ग्लेशियर तक जाने वाला पैदल मार्ग जगह-जगह से टूट गया है, जिससे वहां पहुंचने वाले ट्रेकर्स और सैलानियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं। इस गंभीर समस्या को लेकर स्थानीय प्रशासन ने तुरंत संज्ञान लेते हुए जांच के लिए टीमों को रवाना कर दिया है। उत्तराखंड के बागेश्वर क्षेत्र में स्थित कफनी ग्लेशियर अपनी अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता और शांत परिवेश के लिए दुनियाभर में पहचाना जाता है। बर्फ से ढकी हिमालय की विशाल चोटियां और यहां का शांत वातावरण ट्रेकिंग के शौकीनों को अपनी ओर आकर्षित करता है, लेकिन यहां तक पहुंचने वाला पैदल मार्ग अपनी बदहाली के कारण पर्यटकों के लिए किसी बड़े खतरे से कम नहीं साबित हो रहा है। रास्ते के कई स्थानों पर मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है और रास्तों पर उगी लंबी झाड़ियों के बीच से गुजरना यात्रियों की मजबूरी बन गया है। इस खतरनाक स्थिति के कारण सफर के दौरान किसी भी समय कोई बड़ा हादसा होने की आशंका लगातार बनी रहती है। इस खतरनाक रास्ते की स्थिति को लेकर उत्तराखंड के प्रसिद्ध ट्रेकिंग गाइड जीतू दानू और नैनीताल के रहने वाले प्रकृति प्रेमी चंदन नयाल ने अपनी गहरी चिंता सार्वजनिक की है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में बताया है कि मार्ग के तमाम हिस्सों में पैदल चलना बेहद कठिन हो गया है और फैली हुई झाड़ियां रास्ते को पूरी तरह बाधित कर रही हैं। ऐसे दुर्गम रास्तों पर सैलानियों को बेहद चौकस होकर आगे बढ़ना पड़ता है। पहाड़ी इलाकों की यात्रा में सुरक्षित रास्तों का होना सबसे अहम होता है, जहां जरा सी भी चूक या लापरवाही भारी पड़ सकती है। खासकर उन लोगों के लिए यह चुनौती और भी बड़ी हो जाती है जिन्हें ऊंचे पहाड़ों पर पैदल चलने और इस तरह के मुश्किल रास्तों को पार करने का कोई पिछला अनुभव नहीं होता है। बागेश्वर क्षेत्र में पिंडारी और कफनी ग्लेशियर दोनों ही ट्रेकिंग के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं। जहां पिंडारी ग्लेशियर अपनी व्यापक लोकप्रियता की वजह से बड़ी संख्या में पर्यटकों को अपनी तरफ खींचता है, वहीं कफनी ग्लेशियर का रास्ता अपनी भौगोलिक दुर्गमता के कारण बिल्कुल अलग किस्म की मुश्किलें पैदा करता है। ट्रेकिंग गाइड जीतू दानू का कहना है कि इस इलाके की प्राकृतिक भव्यता जितनी मोहक है, वहां तक पहुंचना उतना ही ज्यादा श्रमसाध्य और जोखिम भरा है। यहां की घाटियों में हिमालय की चोटियों का विहंगम दृश्य पर्यटकों को एक अनोखा सुकून देता है, लेकिन बुनियादी मार्ग की जर्जर हालत इस सारी खूबसूरती के आनंद पर भारी पड़ रही है। इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए ट्रेकिंग गाइड जीतू दानू और चंदन नयाल ने राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों से इस ट्रेक का तुरंत निरीक्षण कराने की पुरजोर मांग उठाई है। उन्होंने आग्रह किया है कि रास्ते के टूटे हुए हिस्सों की तुरंत मरम्मत कराई जाए और पैदल मार्ग पर फैली झाड़ियों को साफ करके इसे सुरक्षित बनाया जाए ताकि आवागमन सुगम हो सके। उनका मानना है कि बागेश्वर जिले में एडवेंचर टूरिज्म यानी साहसिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए गाइड के तौर पर काम, होमस्टे संचालन और अन्य पर्यटन गतिविधियों के जरिए रोजगार के नए द्वार खुल सकते हैं। हालांकि इसके लिए सैलानियों की सुरक्षा और आधारभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देना बेहद आवश्यक है। इस बीच स्थिति का पता चलते ही बागेश्वर की जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रशासनिक अमले की अलग-अलग टीमों को जिले के तीनों प्रमुख ग्लेशियरों की ओर रवाना कर दिया है। प्रशासन की ये टीमें 16 अक्टूबर को ही पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियरों के लिए निकल चुकी हैं। ये दल मौके पर पहुंचकर रास्तों की मौजूदा हालत का बारीकी से निरीक्षण करेंगे और इसके बाद अपनी विस्तृत रिपोर्ट शासन को सौंपेंगे, जिसके आधार पर आगे युद्धस्तर पर सुधार कार्य किए जाएंगे। इसका आप पर असर कफनी ग्लेशियर मार्ग की यह स्थिति उत्तराखंड में साहसिक पर्यटन और पर्वतीय यात्राओं की सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवालिया निशान लगाती है। • राष्ट्रीय स्तर पर: देश के अन्य पर्वतीय राज्यों में भी इस तरह के ट्रेकिंग मार्गों की नियमित निगरानी और रखरखाव की आवश्यकता बढ़ जाती है। इससे भविष्य में किसी भी बड़े हादसे को समय रहते टाला जा सकता है। • बागेश्वर और उत्तराखंड में: स्थानीय स्तर पर यात्रा करने वाले सैलानियों और ट्रेकर्स को अब प्रशासन की रिपोर्ट आने तक बेहद सावधानी बरतनी होगी। साहसिक पर्यटन से जुड़े स्थानीय गाइडों और होमस्टे संचालकों की आजीविका पर भी इन रास्तों की सुस्ती का असर पड़ सकता है। ऐसा क्यों हुआ कफनी ग्लेशियर के पैदल मार्ग की यह दुर्दशा लंबे समय से उचित रखरखाव के अभाव और दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण हुई है। • रखरखाव की कमी: पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बारिश, बर्फबारी और भूस्खलन के बाद नियमित मरम्मत कार्यों का समय पर न होना रास्तों के टूटने का मुख्य कारण बनता है। • वनस्पति का बढ़ना: मानसून और उसके बाद के मौसम में पैदल मार्गों पर तेजी से उगने वाली जंगली झाड़ियां रास्तों को संकरा और खतरनाक बना देती हैं। • भौगोलिक दुर्गमता: कफनी का मार्ग अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भू-भाग पर स्थित है, जिससे वहां लगातार मानव श्रम और मशीनरी से काम कराना प्रशासनिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता है। सवाल-जवाब 1. कफनी ग्लेशियर कहां स्थित है? कफनी ग्लेशियर उत्तराखंड के बागेश्वर जिले में स्थित एक प्रमुख ट्रेकिंग स्थल है। 2. कफनी ग्लेशियर के रास्ते की क्या समस्या है? रास्ता जगह-जगह से टूटा हुआ है और उस पर बड़ी-बड़ी झाड़ियां उग आई हैं, जिससे ट्रेकर्स की जान को खतरा पैदा हो गया है। 3. इस स्थिति की जानकारी किन लोगों ने सार्वजनिक की है? उत्तराखंड के ट्रेकिंग गाइड जीतू दानू और नैनीताल के प्रकृति प्रेमी चंदन नयाल ने इस स्थिति पर चिंता जताई है। 4. प्रशासन ने इस मामले में क्या कदम उठाया है? बागेश्वर की जिलाधिकारी अपूर्वा पांडे ने 16 अक्टूबर को पिंडारी, सुंदरढूंगा और कफनी ग्लेशियरों के निरीक्षण के लिए प्रशासनिक टीमें भेजी हैं। 5. प्रशासनिक टीमें क्या करेंगी? ये टीमें मौके पर जाकर रास्तों का निरीक्षण करेंगी और शासन को रिपोर्ट सौंपेंगी जिसके आधार पर सुधार कार्य होंगे। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-kafni-glacier-ka-traika-badahala-jana-jokhima-men-dalakara-saphara-kara-rahe-sailani-48210 TrendKia — Har trend, sabse pehle.