उत्तराखंड में मॉनसून की रवानगी के बाद बर्फबारी और आंधी की नई चेतावनी चार महीने की मूसलाधार बारिश के बाद उत्तराखंड से मॉनसून विदा हो चुका है, लेकिन 5 अक्टूबर से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने से पहाड़ों पर बर्फबारी और बारिश का नया दौर शुरू होगा। उत्तराखंड की धरती से लगभग चार महीने के लंबे और चुनौतीपूर्ण बारिश के दौर के बाद मॉनसून पूरी तरह रुखसत हो चुका है। शनिवार को मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक सीएस तोमर ने राज्य भर से मॉनसून की संपूर्ण विदाई की आधिकारिक पुष्टि कर दी। पिछले बहत्तर घंटों के दौरान समूचे उत्तराखंड में मानसूनी चक्र काफी धीमा पड़ चुका था, जिसके चलते बीते दो दिनों से देहरादून के मैदानी भूभाग, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में तेज एवं तीखी धूप खिली रही। बीते चौबीस घंटों के आंकड़े बताते हैं कि राज्य के इक्का-दुक्का इलाकों में केवल मामूली बूंदाबांदी हुई और कुछ स्थानों पर ही बादलों की हल्की गर्जना सुनी गई। पश्चिमी विक्षोभ से बदलेगा पहाड़ी इलाकों का मिजाज भले ही मॉनसून का विदाई समारोह संपन्न हो गया हो, लेकिन राज्य के पहाड़ों को लंबे समय तक राहत मिलने के आसार नहीं हैं। पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता और स्थानीय स्तर पर विकसित हो रहे मौसमी बदलावों की वजह से पर्वतीय अंचलों में एक बार फिर मौसम करवट बदलने जा रहा है। मौसम विज्ञान केंद्र ने स्पष्ट किया है कि 4 अक्टूबर के दिन पूरे राज्य में आसमान पूरी तरह साफ और मौसम शुष्क बना रहेगा। इसके ठीक बाद 5 अक्टूबर से उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के अत्यधिक ऊंचाई पर स्थित क्षेत्रों में बादलों का डेरा जमना शुरू हो जाएगा। इन जिलों में हल्की बारिश के साथ आकाशीय बिजली कड़कने की गतिविधियां आरंभ होंगी, जिससे पूरे इलाके के तापमान में तीव्र गिरावट दर्ज की जाएगी। देहरादून, टिहरी और नैनीताल में मौसम का नया रुख राजधानी देहरादून और उसके नजदीकी भूभागों में बुधवार के दिन अधिकतम तापमान 32.1 डिग्री सेल्सियस जबकि न्यूनतम तापमान 19.8 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया था। मौसम विज्ञान केंद्र के ताजा पूर्वानुमान के अनुसार 6 अक्टूबर से देहरादून, टिहरी, नैनीताल, चम्पावत और पिथौरागढ़ जिलों के कई हिस्सों में गरज-चमक के साथ हल्की से मध्यम बारिश और आकाशीय बिजली चमकने की प्रबल संभावना बन रही है। 6 और 7 अक्टूबर को नैनीताल और देहरादून जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों के साथ टिहरी के पर्वतीय क्षेत्रों में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज झोंकेदार हवाएं जनजीवन को प्रभावित कर सकती हैं। हरिद्वार, उधम सिंह नगर और पौड़ी में उमस के बाद बौछारें मैदानी जिलों हरिद्वार और उधम सिंह नगर में 4 तथा 5 अक्टूबर को मौसम पूरी तरह सूखा रहेगा। इस दौरान चटख धूप निकलने के कारण स्थानीय निवासियों को तेज गर्मी और भारी उमस का सामना करना पड़ेगा। हालांकि यह शुष्क दौर ज्यादा लंबा नहीं खिंचेगा और 6 तथा 7 अक्टूबर को इन मैदानी हिस्सों में भी मौसमी चक्र में बड़ा बदलाव दिखाई देगा। विभाग ने पौड़ी गढ़वाल, हरिद्वार और उधम सिंह नगर में मेघगर्जन, तेज हवाओं के झोंकों और छिटपुट बौछारों की पूर्व चेतावनी जारी की है। इस मौसमी उथल-पुथल के परिणामस्वरूप इन जनपदों में सुबह तथा शाम के समय हल्की ठंडक का अहसास शुरू हो जाएगा। ऊंचे शिखरों पर सीजन की पहली बर्फबारी और अंधड़ का अलर्ट राज्य के पर्वतीय जिलों चमोली, रुद्रप्रयाग, उत्तरकाशी, अल्मोड़ा और चम्पावत में 5 अक्टूबर से ही 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से धूल भरी आंधी चलने और आकाशीय बिजली गिरने का यलो अलर्ट प्रभावी रहेगा। 7 अक्टूबर को पूरे राज्य में व्यापक पैमाने पर अनेक स्थानों पर हल्की से मध्यम स्तर की वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके उपरांत 8 अक्टूबर को राज्यव्यापी बारिश के साथ ही 4200 मीटर अथवा उससे अधिक ऊंचाई वाले शिखरों पर इस शरद ऋतु की पहली बर्फबारी दर्ज होने की संभावना जताई गई है। 9 अक्टूबर तक बर्फबारी का यह क्षेत्र नीचे खिसककर 3800 मीटर की ऊंचाई वाले इलाकों तक फैल जाएगा, जिससे उच्च हिमालयी घाटियों में हाड़ कंपाने वाली भीषण ठंड का आगाज हो जाएगा। चार महीने की बारिश का लेखा-जोखा और असंतुलित वितरण इस वर्ष उत्तराखंड में बीता मॉनसून सीजन अत्यधिक संकटपूर्ण और आपदा प्रबंधन के लिहाज से बेहद कठिन रहा। लगातार जारी भारी बारिश के दबाव के चलते स्थानीय प्रशासन को 25 से अधिक बार स्कूलों में छुट्टी घोषित करनी पड़ी। इतना ही नहीं, यात्रियों की जीवन रक्षा को ध्यान में रखते हुए चारधाम यात्रा को भी 4 बार अस्थायी रूप से स्थगित करना पड़ा था। पूरे मानसूनी कालखंड के आधिकारिक आंकड़े दर्शाते हैं कि 1 जून से 4 अगस्त के मध्य राज्य के केवल 3 जिलों में ही अत्यधिक घनघोर वर्षा हुई। बागेश्वर में सामान्य की तुलना में 135 प्रतिशत अधिक, चमोली में 56 प्रतिशत अधिक तथा टिहरी में 25 प्रतिशत ज्यादा बादल बरसे। इसके विपरीत राजधानी देहरादून में सामान्य वर्षा के मुकाबले 10 प्रतिशत कम पानी गिरा, जबकि पौड़ी गढ़वाल में सामान्य से आधे से भी कम बारिश मापी गई। बीते चौबीस घंटों में विभिन्न मौसम केंद्रों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार जखोली में 20 मिमी, जानकीचट्टी में 9 मिमी, कर्णप्रयाग में 8.5 मिमी, ताकुला में 7.5 मिमी, थल में 4 मिमी, रानीखेत के चौबटिया में 3.5 मिमी और मुक्तेश्वर में 3 मिमी वर्षा दर्ज की गई। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार विषम मौसमी दशाओं और स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों के कारण ही समूचे राज्य में वर्षा वितरण का यह अत्यधिक असंतुलित ढांचा देखने को मिला है। इसका आप पर असर उत्तराखंड के पहाड़ी और मैदानी इलाकों में रहने वाले निवासियों तथा वहां की यात्रा की योजना बना रहे पर्यटकों को आगामी दिनों में तेज आंधी, बारिश और तापमान में भारी गिरावट का सामना करना पड़ेगा। • चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए: 8 और 9 अक्टूबर को 3800 से 4200 मीटर की ऊंचाई पर बर्फबारी तथा 30 से 40 किमी प्रति घंटे की आंधी का पूर्वानुमान है। ऊंचाई वाले तीर्थस्थलों और हिल स्टेशनों की यात्रा करते समय पर्याप्त गर्म कपड़े साथ रखें और स्थानीय प्रशासनिक दिशा-निर्देशों का पालन करें। • उत्तराखंड के मैदानी इलाकों में: हरिद्वार और उधम सिंह नगर में 4 व 5 अक्टूबर को तेज धूप व उमस के बाद 6 और 7 अक्टूबर को झोंकेदार हवाओं के साथ बौछारें पड़ेंगी। अचानक मौसम बदलने से सुबह और शाम के समय ठंड बढ़ेगी, जिससे मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए सतर्कता जरूरी होगी। • दैनिक आवाजाही और परिवहन: 6 और 7 अक्टूबर को देहरादून, टिहरी और नैनीताल जैसे क्षेत्रों में तेज आंधी से पहाड़ी सड़कों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। संवेदनशील ढलानों पर सफर करते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और मौसम के ताजा अपडेट पर नजर रखें। • खेती और बागवानी पर असर: अचानक होने वाली बारिश और हवाओं से खुले में रखी फसलों को नुकसान पहुंचने की संभावना है। किसान अपनी कटाई की गई उपज को सुरक्षित स्थानों पर रखें और 5 से 8 अक्टूबर के मध्य छिड़काव जैसे कृषि कार्य टाल दें। ऐसा क्यों हुआ मानसून ट्रफ के पीछे हटने से जहां वर्षा तंत्र समाप्त हुआ, वहीं उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय हो रहे नए पश्चिमी विक्षोभ ने पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम में अचानक बदलाव की परिस्थितियां उत्पन्न कर दी हैं। • मॉनसून की आधिकारिक विदाई: बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नम हवाओं का प्रवाह बंद होने और पश्चिमी शुष्क हवाओं के प्रभावी होने से राज्य से मानसूनी धाराएं समाप्त हुईं। निदेशक सीएस तोमर के अनुसार पिछले 72 घंटों में वर्षा की गतिविधियां अत्यंत क्षीण होने के बाद यह औपचारिक घोषणा की गई। • पश्चिमी विक्षोभ की नई सक्रियता: भूमध्यसागरीय क्षेत्र से उठने वाले पश्चिमी विक्षोभ का प्रभाव 5 अक्टूबर से पश्चिमी हिमालय पर शुरू होगा। यह प्रणाली स्थानीय नमी और पहाड़ी उच्चावच के साथ मिलकर बादलों का निर्माण करेगी, जिससे वर्षा और बर्फबारी के हालात बनेंगे। • पहाड़ों पर तापमान में तीव्र गिरावट: 7 और 8 अक्टूबर को व्यापक वर्षा के उपरांत सर्द हवाओं के दबाव से हिमांक बिंदु 3800 मीटर तक नीचे आ जाएगा। इसी मौसमी तंत्र के चलते 4200 मीटर से शुरू होकर 9 अक्टूबर तक 3800 मीटर की ऊंचाई तक बर्फबारी का दायरा फैलेगा। सवाल-जवाब 1. उत्तराखंड से मॉनसून की आधिकारिक विदाई की घोषणा किसने की? मौसम विज्ञान केंद्र, देहरादून के निदेशक सीएस तोमर ने शनिवार को पूरे राज्य से मॉनसून की पूर्ण विदाई की औपचारिक घोषणा की। 2. उत्तराखंड में मौसम दोबारा कब से बदलने वाला है? मौसम 5 अक्टूबर से बदलने लगेगा, जब उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर और पिथौरागढ़ के ऊंचे इलाकों में बारिश और बादलों की आवाजाही शुरू होगी। 3. राज्य में सीजन की पहली बर्फबारी कब और कितनी ऊंचाई पर देखने को मिलेगी? 8 अक्टूबर को 4200 मीटर और उससे अधिक ऊंचाई पर सीजन की पहली बर्फबारी दर्ज होगी, जो 9 अक्टूबर को 3800 मीटर की ऊंचाई तक फैल जाएगी। 4. देहरादून और नैनीताल में तेज हवाएं कब चलेंगी? 6 और 7 अक्टूबर को देहरादून, नैनीताल और टिहरी में 30 से 40 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने का पूर्वानुमान है। 5. इस मॉनसून सीजन में राज्य में स्कूल और चारधाम यात्रा कितनी बार रोकी गई? भारी बारिश के चलते प्रशासन को 25 से अधिक बार स्कूलों में छुट्टी करनी पड़ी और 4 बार चारधाम यात्रा को अस्थायी रूप से रोकना पड़ा। 6. इस वर्ष मॉनसून के दौरान किन जिलों में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई? बागेश्वर में सामान्य से 135 प्रतिशत, चमोली में 56 प्रतिशत और टिहरी में 25 प्रतिशत अधिक बारिश दर्ज की गई। https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-monasuna-ki-ravanagi-ke-bada-barphabari-aura-andhi-ki-nai-chetavani-42522 TrendKia — Har trend, sabse pehle.