# उत्तराखंड में नेताओं के फोन हैक होने का आरोप, विधायक सुमित हृदयेश ने गैरसैंण में आत्मदाह की चेतावनी दी

> हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने राजनेताओं के फोन हैकिंग का बड़ा आरोप लगाते हुए 27 अक्टूबर को गैरसैंण विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की बात कही है।

**Type:** article · **Category:** उत्तराखंड · **Published:** 2026-10-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/uttarakhand/uttarakhand-men-netaon-ke-phona-haika-hone-ka-aropa-vidhayaka-sumit-hridayesh-ne-gairsain-men-atmadaha-ki-chetavani-di-47653 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुमित हृदयेश, उत्तराखंड राजनीति, फोन हैकिंग, गैरसैंण विधानसभा, हरीश रावत, हल्द्वानी

उत्तराखंड की राजनीति में नेताओं और उनके परिजनों की डिजिटल सुरक्षा को लेकर एक गंभीर विवाद खड़ा हो गया है। हल्द्वानी से कांग्रेस विधायक सुमित हृदयेश ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके आरोप लगाया है कि राज्य में एक संगठित हैकिंग सिंडिकेट सक्रिय है, जो जनप्रतिनिधियों और उनके परिवारों के निजी फोन में सेंधमारी कर रहा है। इस मामले में पुलिस कार्रवाई न होने से आहत होकर उन्होंने आगामी 27 अक्टूबर से गैरसैंण में शुरू होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने का कड़ा ऐलान किया है।

## अंतरराष्ट्रीय हैकरों के जरिए बातचीत ट्रैक करने का आरोप
विधायक सुमित हृदयेश ने दावा किया कि इस गिरोह में अंतरराष्ट्रीय स्तर के हैकर्स की सहायता ली जा रही है। उनका कहना है कि इस निगरानी तंत्र का मुख्य मकसद यह पता लगाना है कि प्रमुख राजनीतिक हस्तियां किससे, कब और क्या बातचीत कर रही हैं। उन्होंने अपनी पार्टी के शीर्ष नेताओं, जिनमें पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत और कांग्रेस चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह शामिल हैं, का विशेष रूप से उल्लेख किया। हृदयेश के अनुसार, यदि चुनावी रणनीतिकारों और वरिष्ठ नेताओं की गोपनीय बातचीत लीक हो जाती है, तो विरोधी दल चुनावों के दौरान उसके आधार पर रणनीतिक चालें चल सकते हैं।

## जांच के बहाने फोन देने और धोखे का दावा
पूरे घटनाक्रम का विवरण देते हुए कांग्रेस विधायक ने बताया कि जब उन्हें अपने मोबाइल फोन में कुछ संदिग्ध लगा, तो उन्होंने तकनीकी जांच के लिए उसे दो व्यक्तियों को सौंपा था। शुरुआती दौर में उन दोनों व्यक्तियों ने फोन में किसी भी तरह की हैकिंग या निगरानी से साफ इनकार कर दिया था। हालांकि, बाद में सामने आया कि वे दोनों व्यक्ति खुद इस गुप्त निगरानी और हैकिंग के नेटवर्क में शामिल थे। इस खुलासे के बाद विधायक ने पिछले साल 24 अप्रैल को दोनों आरोपियों के खिलाफ नामजद लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज कराई थी, लेकिन अब तक उस पर कोई ठोस प्रशासनिक कदम नहीं उठाया गया।

## परिवार की सुरक्षा और निजता पर खड़े किए सवाल
सुमित हृदयेश ने अपनी पत्नी और 15 वर्षीय बेटी की व्यक्तिगत सुरक्षा पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि यह सिंडिकेट बिना किसी कानूनी डर के खुलेआम संचालित हो रहा है। अपने विरोध प्रदर्शन के निर्णय को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि वह केवल औपचारिकता या सांकेतिक प्रयास नहीं करेंगे, बल्कि सीधे आत्मदाह करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनका यह कदम किसी व्यक्तिगत स्वार्थ के लिए नहीं बल्कि लोकतांत्रिक मर्यादाओं और नागरिकों की निजता की रक्षा के लिए है, क्योंकि यदि नागरिकों और प्रतिनिधियों की निजता ही समाप्त हो जाए तो व्यवस्था में कुछ नहीं बचता।

## राज्य सरकार की संलिप्तता से इनकार और जान का जोखिम
प्रेस वार्ता के दौरान जब उनसे यह पूछा गया कि क्या इस जासूसी के पीछे राज्य सरकार का हाथ है, तो उन्होंने सरकार को सीधे जिम्मेदार मानने से इनकार किया। हृदयेश ने स्पष्ट किया कि वह ऐसा नहीं मानते कि राज्य प्रशासन इस प्रकार की गतिविधियों में शामिल है। उन्होंने यह भी साझा किया कि मुख्यमंत्री के साथ उनके निजी संबंध अच्छे हैं और वह उन्हें एक सज्जन व्यक्ति मानते हैं। उन्होंने इस मामले में शामिल व्यक्तियों के नामों को सार्वजनिक करने से बचते हुए कहा कि यह जांच का विषय है और पुलिस यदि निष्पक्ष जांच करेगी तो सब सच सामने आ जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने यह आशंका भी जताई कि इस संवेदनशील मुद्दे को खुले मंच पर उठाने के कारण उनके जीवन पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है।

## हरीश रावत ने दी संयम बरतने की सलाह
विधायक के इन गंभीर आरोपों के सामने आने के बाद पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ कांग्रेस नेता हरीश रावत ने भी सार्वजनिक रूप से चिंता व्यक्त की है। सोशल मीडिया पर एक बयान जारी करते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन में काम करने वाले व्यक्तियों के समक्ष संगठित नेटवर्क किस प्रकार के असहज हालात पैदा कर सकते हैं, यह मामला उसका स्पष्ट उदाहरण है। रावत ने विधायक को ढांढस बंधाते हुए विपरीत परिस्थितियों में धैर्य, अदम्य साहस और संयम बनाए रखने का आग्रह किया। साथ ही उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस कठिन परिस्थिति में पूरी पार्टी उनके साथ मजबूती से खड़ी है।

## इसका आप पर असर
यह घटना राजनीतिक शुचिता, चुनावी रणनीति और व्यक्तिगत गोपनीयता के संरक्षण से जुड़े गंभीर कानूनी और प्रशासनिक सवाल खड़े करती है।

- **भारत में:** जनप्रतिनिधियों के व्यक्तिगत डेटा और डिजिटल उपकरणों की सुरक्षा को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर साइबर सुरक्षा निगरानी सख्त करने की मांग बढ़ सकती है। इसका सीधा असर भविष्य में राजनीतिक दलों के संचार साधनों और चुनाव अभियानों में इस्तेमाल होने वाले सुरक्षा प्रोटोकॉल पर पड़ेगा।
- **उत्तराखंड में:** गैरसैंण में 27 अक्टूबर से आयोजित होने वाले विधानसभा सत्र के दौरान सुरक्षा व्यवस्था और राजनीतिक तनाव चरम पर रहने की संभावना है। राज्य की पुलिस और साइबर सेल पर लंबित शिकायतों की त्वरित जांच और नेताओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने का प्रशासनिक दबाव बढ़ेगा।
- **डिजिटल सुरक्षा के स्तर पर:** सार्वजनिक जीवन में सक्रिय व्यक्तियों और आम नागरिकों को अपने निजी उपकरणों की सर्विसिंग व जांच केवल प्रमाणित केंद्रों से कराने का सबक मिलता है। किसी भी अनधिकृत व्यक्ति को निजी डेटा और फोन सौंपने से साइबर धोखाधड़ी और निगरानी का जोखिम बढ़ जाता है।
- **कानूनी कार्रवाई के संदर्भ में:** पिछले साल दर्ज कराई गई नामजद शिकायत पर पुलिस की कार्यशैली को लेकर विपक्ष सरकार को घेरने की तैयारी करेगा। इससे गृह विभाग को साइबर अपराध शाखा की कार्यप्रणाली की समीक्षा करने और जवाबदेही तय करने पर विचार करना पड़ सकता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विवाद तब उत्पन्न हुआ जब विधायक को अपने निजी मोबाइल फोन की निगरानी किए जाने का संदेह हुआ और उन्होंने तकनीकी जांच के लिए फोन दो व्यक्तियों को दिया। जांच और पुलिस कार्रवाई में देरी के कारण यह मामला राजनीतिक स्तर पर गंभीर रूप ले चुका है।

- **तकनीकी विश्वासघात:** विधायक ने अपने फोन की जांच के लिए जिन दो लोगों पर भरोसा किया था, आरोप है कि वे दोनों स्वयं उसी अंतरराष्ट्रीय निगरानी और हैकिंग गिरोह के सहयोगी निकले। प्रारंभिक जांच में उन्होंने हैकिंग से इनकार करके विधायक को भ्रमित रखा था।
- **पुलिस कार्रवाई का अभाव:** पिछले वर्ष 24 अप्रैल को दोनों व्यक्तियों के खिलाफ नामजद लिखित शिकायत देने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लंबे समय तक प्रशासनिक निष्क्रियता के कारण विधायक में भारी निराशा और असंतोष उत्पन्न हुआ।
- **परिवार की सुरक्षा का तनाव:** सिंडिकेट द्वारा बिना किसी भय के काम करने और पत्नी व 15 वर्षीय बेटी की निजता प्रभावित होने के डर ने विधायक को आत्मदाह जैसा कठोर सार्वजनिक फैसला लेने पर मजबूर किया।
- **चुनावी रणनीतियों की जासूसी:** कथित तौर पर इस जासूसी का उद्देश्य बड़े राजनीतिक नेताओं के संपर्कों और वार्तालाप को ट्रैक करके आगामी चुनावों में गुप्त चालें चलने और रणनीतिक लाभ उठाने का प्रयास था।

## सवाल-जवाब

### 1. विधायक सुमित हृदयेश ने क्या गंभीर आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया है कि उत्तराखंड में अंतरराष्ट्रीय हैकरों की मदद से एक गिरोह राजनेताओं और उनके परिवारों के फोन हैक कर उनकी निजी बातचीत ट्रैक कर रहा है।

### 2. सुमित हृदयेश ने आत्मदाह की चेतावनी कब और कहां के लिए दी है?
उन्होंने 27 अक्टूबर से गैरसैंण में प्रस्तावित विधानसभा सत्र के दौरान आत्मदाह करने की घोषणा की है।

### 3. विधायक ने पुलिस में शिकायत कब दर्ज कराई थी?
उन्होंने पिछले साल 24 अप्रैल को दो नामजद व्यक्तियों के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई थी।

### 4. क्या विधायक ने इस मामले में राज्य सरकार पर आरोप लगाया है?
नहीं, उन्होंने स्पष्ट किया कि वह राज्य सरकार को इसमें संलिप्त नहीं मानते और मुख्यमंत्री के साथ उनके अच्छे संबंध हैं।

### 5. पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी?
हरीश रावत ने मामले को बेहद चिंताजनक बताते हुए सुमित हृदयेश को धैर्य और संयम बनाए रखने की सलाह दी और उनके साथ खड़े रहने की बात कही।

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