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  "type": "article",
  "title": "उत्तराखंड में नीट यूजी काउंसलिंग पर बड़ा एक्शन, आरक्षित कोटे के 778 मेडिकल दाखिलों की जांच शुरू",
  "summary": "उत्तराखंड के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में राज्य कोटे से आरक्षित वर्ग के तहत एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश पाने वाले 778 अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों की जिला स्तर पर विस्तृत जांच शुरू कर दी गई है।",
  "content": "उत्तराखंड के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में नीट यूजी 2026 की काउंसलिंग के जरिए हुए दाखिलों पर अब प्रशासनिक निगरानी बेहद कड़ी हो गई है। राज्य कोटे की आरक्षित सीटों के जरिए एमबीबीएस और बीडीएस पाठ्यक्रमों में सीट हासिल करने वाले 778 छात्र-छात्राओं के प्रमाण पत्रों का भौतिक सत्यापन कराने का फैसला लिया गया है। इस पड़ताल के दायरे में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग तथा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी से जुड़े सभी चयनित अभ्यर्थी शामिल किए गए हैं। फर्जी दस्तावेजों के सहारे मेडिकल कॉलेजों की आरक्षित सीटें हासिल करने की शिकायतों के बाद शासन स्तर से यह सख्त कदम उठाया गया है।\n\nप्रशासनिक स्तर पर मूल प्रमाण पत्रों का मिलान\nमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल के कड़े दिशा-निर्देशों के बाद शासन ने इन सभी 778 अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेज उनके गृह जनपदों के जिला प्रशासन को भेज दिए हैं। हेमवती नंदन बहुगुणा चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय द्वारा जारी की गई आधिकारिक सूची के अनुसार, पहले और दूसरे राउंड की काउंसलिंग में औपबंधिक प्रवेश लेने वाले तथा 'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले कुल 1112 विद्यार्थियों का विवरण दर्ज है। विश्वविद्यालय के परीक्षा नियंत्रक प्रो. विजय जुयाल ने पुष्टि की है कि इस पूरी सूची में से 778 अभ्यर्थियों ने राज्य कोटे की विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के तहत सीट हासिल की है।\n\nजिला प्रशासन की टीमें अब प्रत्येक अभ्यर्थी द्वारा जमा किए गए जाति, आय, निवास और विशेष श्रेणी के प्रमाण पत्रों की सत्यता की गहन जांच कर रही हैं। जांचकर्ता अधिकारी इस बात की पड़ताल करेंगे कि प्रमाण पत्र किस प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए हैं और क्या वे दाखिला नियमों की कसौटी पर पूरी तरह खरे उतरते हैं। फर्जीवाड़े की आशंका केवल एक वर्ग तक सीमित न रखते हुए राज्य सरकार ने सभी आरक्षित श्रेणियों के दस्तावेजों की पड़ताल समान गंभीरता से करने के आदेश जारी किए हैं।\n\nशिकायत और संदिग्ध अभ्यर्थियों की पड़ताल\nइस पूरे मामले की पृष्ठभूमि तब तैयार हुई जब सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल को लगभग 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की एक सूची सौंपी थी। इस प्रतिवेदन में अभ्यर्थियों के स्थायी निवास और श्रेणी प्रमाण पत्रों की प्रामाणिकता पर संदेह जताते हुए प्रशासनिक छानबीन की मांग की गई थी। बहुगुणा ने उपलब्ध प्रवेश आंकड़ों और दस्तावेजों का हवाला देते हुए स्पष्ट किया था कि पूरी चयन प्रक्रिया की शुचिता बनाए रखने के लिए इन प्रमाण पत्रों की आधिकारिक जांच कराया जाना जरूरी है।\n\nशिकायतकर्ता ने सीधे तौर पर सभी दस्तावेजों को जाली नहीं बताया था, बल्कि आंकड़ों में दिख रही विसंगतियों के आधार पर जांच की आवश्यकता रेखांकित की थी। इस शिकायत को संज्ञान में लेते हुए विभागीय स्तर पर जिलाधिकारियों को जांच के निर्देश जारी किए गए। शुरुआती जांच के दौरान स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के तहत प्रस्तुत कुछ प्रमाण पत्रों में अनियमितताएं सामने आईं और गड़बड़ी पाए जाने पर संबंधित अभ्यर्थियों के दाखिले तत्काल निरस्त भी कर दिए गए। इसी के बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए अन्य सभी आरक्षित वर्गों को भी इसमें शामिल कर लिया गया।\n\nएसआईटी ने संभाली कमान, मेडिकल कॉलेज में दस्तावेज सील\nस्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे में फर्जी दस्तावेजों के जरिए एमबीबीएस सीट हासिल करने का मामला उजागर होते ही पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी पूरी तरह सक्रिय हो गई है। देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम इस पूरे नेटवर्क की पड़ताल कर रही है, जिसमें यह पता लगाया जा रहा है कि फर्जी प्रमाण पत्र किस स्तर पर तैयार किए गए और उन्हें काउंसलिंग प्रक्रिया में किस तरह इस्तेमाल किया गया।\n\nइसी जांच के सिलसिले में पुलिस अधीक्षक जया बलोनी के नेतृत्व में एसआईटी की एक टीम देहरादून से हरिद्वार मेडिकल कॉलेज पहुंची। जांच दल ने मेरिट सूची के आधार पर दाखिला पाने वाली एक छात्रा के सभी शैक्षणिक और आरक्षण से जुड़े दस्तावेजों को अपनी कस्टडी में लेते हुए सील कर दिया। इसके अलावा जांच अधिकारियों ने मेडिकल कॉलेज के प्रशासनिक अधिकारियों से भी पूछताछ की और दाखिले के वक्त जमा कराए गए अभिलेखों के रिकॉर्ड की पड़ताल की। मामले में स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे से फर्जी दाखिले की पुष्टि होने के बाद एसआईटी अब उन सभी कड़ियों को जोड़ रही है जिनके आधार पर आगे कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।\n\nइसका आप पर असर\nउत्तराखंड के मेडिकल कॉलेजों में आरक्षित सीटों पर दाखिला लेने वाले सैकड़ों छात्रों के प्रमाण पत्रों की जांच से पूरी प्रवेश प्रक्रिया पर सीधा असर पड़ा है।\n\n• उत्तराखंड में: राज्य कोटे की आरक्षित सीटों पर प्रवेश पाने वाले 778 अभ्यर्थियों को अपने मूल प्रमाण पत्रों की सत्यता साबित करनी होगी। यदि किसी भी छात्र का प्रमाण पत्र फर्जी पाया जाता है, तो उसका एमबीबीएस या बीडीएस दाखिला रद्द कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।\n• योग्य अभ्यर्थियों पर असर: जाली दस्तावेजों से आरक्षित सीटों पर हुए दाखिले निरस्त होने की स्थिति में वास्तविक हकदार छात्रों के लिए खाली सीटों का रास्ता साफ हो सकता है। काउंसलिंग प्रक्रिया में सुधार से भविष्य के सत्रों में केवल प्रामाणिक आरक्षित वर्ग के मेधावियों को ही अवसर मिलेगा।\n• प्रशासनिक व्यवस्था में सख्ती: अब राज्य भर के जिला प्रशासनों द्वारा सभी श्रेणी प्रमाण पत्रों की बैक-एंड जांच अनिवार्य कर दी गई है। तहसील और ब्लॉक स्तर पर प्रमाण पत्र जारी करने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय होने से फर्जी दस्तावेज बनवाने पर रोक लगेगी।\n• मेडिकल कॉलेजों में सतर्कता: राज्य के सभी सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों को सत्यापन प्रक्रिया पूरी होने तक दस्तावेजों को सुरक्षित और सील रखने के निर्देश दिए गए हैं। प्रबंधन को छात्रों की काउंसलिंग फाइलों का दोबारा मिलान करने की प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह प्रशासनिक और पुलिस कार्रवाई मेडिकल काउंसलिंग में आरक्षित श्रेणियों के तहत कथित फर्जी प्रमाण पत्रों के इस्तेमाल की शिकायतें मिलने के बाद शुरू हुई है।\n\n• प्रारंभिक फर्जीवाड़े का खुलासा: स्वतंत्रता सेनानी आश्रित कोटे के कुछ प्रमाण पत्रों की जांच में फर्जीवाड़े की पुष्टि हुई थी, जिसके बाद संबंधित अभ्यर्थियों के दाखिले रद्द किए गए। इस खुलासे के बाद सरकार को अन्य सभी आरक्षित वर्गों के दस्तावेजों की भी गहन जांच कराने का आधार मिला।\n• संदिग्ध सूची की शिकायत: सामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा द्वारा स्वास्थ्य मंत्री को करीब 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची सौंपने के बाद मामले ने तूल पकड़ा। इस सूची में स्थायी निवास और श्रेणी प्रमाण पत्रों में विसंगतियों का उल्लेख करते हुए आधिकारिक जांच की मांग की गई थी।\n• एसआईटी जांच का गठन: फर्जी प्रमाण पत्र जारी करने और उनके इस्तेमाल की कड़ियां खंगालने के लिए देहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम गठित की गई। जांच एजेंसी को फर्जीवाड़े के संगठित सिंडिकेट का पता लगाने और कॉलेजों से मूल रिकॉर्ड जब्त करने की जिम्मेदारी दी गई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. उत्तराखंड में कुल कितने मेडिकल दाखिलों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है?\nराज्य कोटे के तहत आरक्षित श्रेणियों में एमबीबीएस और बीडीएस में प्रवेश पाने वाले कुल 778 अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की जांच की जा रही है।\n\n2. इस मामले की जांच कौन सी पुलिस टीम कर रही है?\nदेहरादून पुलिस की विशेष जांच टीम यानी एसआईटी, पुलिस अधीक्षक जया बलोनी के नेतृत्व में इस मामले की जांच कर रही है।\n\n3. स्वास्थ्य मंत्री को कितने संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची सौंपी गई थी?\nसामाजिक कार्यकर्ता प्रदीप बहुगुणा ने स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा मंत्री सुबोध उनियाल को लगभग 370 संदिग्ध अभ्यर्थियों की सूची सौंपी थी।\n\n4. किन आरक्षित वर्गों के प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है?\nअनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग और स्वतंत्रता सेनानी आश्रित श्रेणी के प्रमाण पत्रों की जांच की जा रही है।\n\n5. एसआईटी ने हाल ही में किस मेडिकल कॉलेज में जाकर दस्तावेज सील किए हैं?\nएसआईटी ने हरिद्वार मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मेरिट लिस्ट के आधार पर दाखिला लेने वाली एक छात्रा के शैक्षिक और आरक्षण से जुड़े दस्तावेज सील किए हैं।\n\n6. विश्वविद्यालय द्वारा जारी सूची में कुल कितने अभ्यर्थी शामिल थे?\nएचएनबी चिकित्सा शिक्षा विश्वविद्यालय की सूची में पहले और दूसरे चरण में प्रोविजनल प्रवेश पाने वाले और 'फ्लोट' विकल्प चुनने वाले कुल 1112 अभ्यर्थी शामिल थे।",
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  "category": "उत्तराखंड",
  "publishedAt": "2026-09-22",
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